Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

प्रश्न 1.
कविता पढ़कर भरें –
जैसे-बच्चा रो रहा है, फिर भी बिस्कुट कुतरता है।
i. युवक थका हुआ है, फिर भी…….
उत्तर:
अपने कुचले सपनों को सहला रहा है।

ii. बूढ़े ने अपनी आँखों को हाथों से ढाँप लिया है, फिर भी….
उत्तर:
भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के बारे में कवि क्यों आशंकित है?
उत्तर:
उसे उखाड़ ले जाया सकता है अथवा तोड़ भी जा सकता है।

प्रश्न 3.
चित्र-वाचन
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 1
उत्तर:
लड़के-लड़कियाँ अपने खेल-खूद, विश्राम आदि के लिए प्रयुक्त पार्क का विनाश देखकर चिंतित हैं। वे शायद यह सोचते होंगे कि ऐसा क्यों हो रहा है, यहाँ पर इसको रोकने के लिए कोई नहीं है आदि… आदि..। पार्क, समुद्र तट, प्रपात, पहाड़ आदि ऐसी सार्वजनिक स्थल हैं, जो आज घटते जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों के नष्ट होने से मानसिक उल्लास की सुविधा और अवसर कम हो जाते हैं। इससे मनुष्य संघर्ष में पड़ जाता है।

हम इनको यह सांत्वना दें कि ऐसे आगे न होने देंगे। संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत देकर इस जगह को संरक्षित रखेंगे। उनके खेल-खूद और मानसिक उल्लास केलिए उचित स्थान ढूँढ देंगे। पोस्टर, पत्र आदि द्वारा जनजागरण और जनमत जगायेंगे।

प्रश्न 4.
‘समाज-निर्माण में सार्वजनिक जगहों का योगदान’ पर लेख लिखें।
उत्तर:
सार्वजनिक जगहों का महत्व
सार्वजनिक जगह सामाजिकता का संगम-स्थान है। पार्क, समुद्र-तट, प्रपात की जगह, पहाड़ आदि इस प्रकार की हैं। हमें उसे संभालना चाहिए। सरकार की ओर से इन सार्वजनिक स्थानों को संभालने के लिए सदा ध्यान होना चाहिए। यदि दूसरों के सुख-दुख पर हमदर्दी है तो, इनका संरक्षण ज़रूर होगा। सार्वजनिक स्थानों का विनाश होते समय मनुष्य का पराजय होता है, स्वार्थ की विजय होती है। सार्वजनिक जगहों का संरक्षण करना आज अत्यंत प्रासंगिक है। यह इसलिए कि सार्वजनिक जगह आज घटती जा रही है।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।?
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि देखते हैं कि पार्क में वर्षों पुरानी एक पत्थर की बैंच पड़ी है। कवि उस बैंच के चार दृश्य हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। एक दृश्य में एक रोनेवाला बच्चा पत्थर की बैंच पर बैठ कर रोता है। लेकिन वह विस्कुट कुतरते हुए चुप हो जाता है। दूसरे दृश्य में एक थका हुआ युवक अपने कुचले हुए सपनों को सहलाकर बैंच पर बैठा है। तीसरे दृश्य में एक रिटायर्ड बुढ़ा भरी दोपहरी में हाथों से आँखें ढाँपकर सो रहा है। चौथा दृश्य एक प्रेम-जोड़ा का है जो बैंच पर बैठकर जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

Plus One Hindi पत्थर की बैंच Important Questions and Answers

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर रोता हुआ बच्चा
बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है
जिसपर एक थका युवक
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है
जिसपर हाथों से आँखें ढाँप
एक रिटायर्ड बूढ़ा भर दोपहरी सो रहा है
जिसपर वे दोनों
जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता का है?
उत्तर:
पत्थर की बैंच ।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच पर कौन-कौन बैठे हैं?
उत्तर:
बच्चा, चुवक, बूढ़ा, प्रेमी-प्रेमिका आदि बैठे हैं।

प्रश्न 3.
बच्चा क्या कर रहा है?
उत्तर:
रोता हुआ बच्चा बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है।

प्रश्न 4.
युवक क्या कर रहा है?
उत्तर:
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है।

प्रश्न 5.
रिटायर्ड बूढ़ा क्या कर रहा है?
उत्तर:
हाथों से आँखें ढाँप भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 6.
‘वे दोनों’ कौन-कौन हैं?
उत्तर:
वे दोनों प्रेमी-प्रेमिका हैं।

प्रश्न 7.
‘वे दोनों’ क्या कर रहे हैं?
उत्तर:
अशा जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 8.
सबों ने पत्थर की बैंच का सहारा लिया। क्यों?
उत्तर:
पत्थर की बैंच किसी की निजी सामग्री नहीं है। बैंच पार्क में उपस्थित है। कोई उस पर जाकर बैठ सकता है। बच्चा, युवक और बूढा तीनों अपने अपने विकट समय में है। विश्राम करने के लिए तीनों पार्क की बैंच का आश्रय लेते हैं।

प्रश्न 9.
पत्थर का बैंच किसका प्रतीक है?
उत्तर:
घटती सार्वजनिक जगह का प्रतीक है।

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर अंकित हैं आँसू, थकान
विश्राम और फ्रें की स्मृतियाँ
इस पत्थर की बैंच के लिए भी
शुरु हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इस उखाड़ कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बैंच पर!

प्रश्न 1.
इस पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के लिए क्या शुरु हो सकता हैं?
उत्तर:
हत्याओं का सिलसिला।

प्रश्न 3.
पत्थर की बैंच पर क्या-क्या अंकित हैं?
उत्तर:
कवि ने देखा, पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं।

प्रश्न 4.
कवि को किस बात का पता नहीं है?
उत्तर:
पता नही कि सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा उस पत्थर की बैंच पर।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि ने देखा कि पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं। लेकिन यह सब जाननेवाला कवि आशंकित हो जाता है। यह इसलिए है कि किसी दिन इस पत्थर की बैंच के लिए हत्याओं का सिलसिला शुरु हो सकता है। उसे उखाड़ कर ले जाया सकता है। अथवा तोड़ भी जा सकता है। कवि को यह नहीं मालूम है कि सबसे पहले इस पत्थर की बैंच पर कौन आसीन हुआ होगा? अर्थात कवि डरता है कि इस पत्थर की बैंच के बारे में अधिकार स्थापित करने केलिए कब लड़ाई शुरु हो जायेगी।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है। जाति, धर्म, राजनीति, स्वार्थता आदि के नाम पर और उनकी सस्ती प्रतिस्पर्धा के लिए सार्वजनिक स्थलों का शिकार बनकर उन्हें सत्यनाश न करना चाहिए।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

सूचना : निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

इस पत्थर की बेंच के लिए भी
शुरू हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इसे उखाड़कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बेंच पर।

प्रश्न 1.
यह कवितांश के कवि कौन है?
उत्तर:
चन्द्रकांत देवताले

प्रश्न 2.
कविता के ‘आसीन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए।
(खड़ा, बैठा, सुना)
उत्तर:
बैठा

प्रश्न 3.
कवि को किसका संदेह है?
उत्तर:
कवि का संदेह यह है कि इस पत्थर की बेंच पर सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले हिंदी का विख्यात कवि है। समकालीन कविता के क्षेत्र में वे अत्यंत ख्याति प्राप्त है। ‘पत्थर की बेंच’ समकालीन सामाजिक समस्याओं को सूचित करनेवाली एक कविता है।

सार्वजनिक जगहों के नाश पर कवि आशंकित है। कवि की आशंका यह है कि पत्थर की बेंच के लिए भी किसी दिन हत्याओं का सिलसिला शुरू हो सकता है। अपनी स्वार्थता के लिए कोई भी, किसी भी समय ऐसे सार्वजनिक जगहों का सर्वनाश कर सकता है। कवि का डर यह है कि इन जगहों के नाश होने पर साधारण जनता अपनी संवेदनाओं को कैसे शांत कर सकेगा।

‘पत्थर की बेंच’ एक समकालीन कविता है जिसमें सार्वजनिक जगहों के नाश पर आशंकित कवि को हम देख सकते हैं।

पत्थर की बैंच Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 3
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 7

पत्थर की बैंच शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

प्रश्न 1.
‘आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है’, चाँद क्यों ऐसा कह रहा है?
उत्तर:
आदमी स्वयं उलझनें बनाकर अपने आप को उसमें फँस देता है। फिर, बैचेन होकर वह न जगता है, न सोता है।

प्रश्न 2.
आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है- अपना मत प्रकट करे।
उत्तर:
कवि रामधारी सिंह दिनकर के अभिप्राय में आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है। वह आज बनता है और कल फूट जाता है। कभी कभी यह बात ठीक है। लेकिन सदा ऐसा नहीं होता। स्वप्न को आदमी यथार्थ में ले आकर महान कार्य करता है। हमें व्यर्थ में स्वप्न न देखना चाहिए। यथार्थ में फलनेवाले स्वप्न देखना चाहिए। अब्दुल कलाम जी ने कहा है: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 3.
कवि के बदले रागिनी क्यों बोल उठी?
उत्तर:
स्पप्न को ठीक रूप से समझने में असमर्थ होकर कवि मौन रहा। इसलिए रोगिनी बोल उठी।

प्रश्न 4.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?
उत्तर:
धारवाली।

प्रश्न 5.
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?
उत्तर:
व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कविता में प्रस्तुत किया गया है।

चाँद और कवि अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 6.
समान भाववाली पंक्ति चुनकर लिखें।
a. स्वप्नों को आग में गलाकर लोहा बनाता है।
b. मनु पुत्र के कल्पना भरे सपने तीखे होते हैं।
c. चाँद इतना पुराना है कि उसने मनु का जन्म और मरण देखा है।
d. आदमी स्वयं उलझनें बनाकर चैन खो बैठता है।
उत्तर:
a. आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
b. जिसकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है।
c. मैं कितना पूराना हूँ?, मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते।
d. उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता है और फिर वैचैन हो जगता न सोता है।

प्रश्न 7.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है।

प्रश्न 8.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

  • पंक्तियों का विश्लेषण किया है।
  • अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया है।
  • पंक्तियों के विचार से अपने विचार की तुलना की है।

प्रश्न 9.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है। कवि से चाँद कहता है कि मनुष्य विचित्र जीव है। यह इसलिए है कि आदमी जान-बूझकर उलझनें उत्पन्न करता है, उसीमें फंस रहता है, फिर बेचैन होकर उसको नींद तक दुस्सह होता है ।चाँद सृष्टि के पुराने पदार्थ होने पर अहं करता है। चाँद कहता है कि उसने आदि मानव मनु के जन्म और मरण देखा है। चाँदनी में पागल की तरह बैठ स्वप्नों को यथार्थ में परिवर्तन करने का परिश्रम करनेवाले कवि को चाँद तुच्छ मानता है। हमारे समाज में कई प्रकार की रूढ़ियाँ हैं। वे सदा परिवर्तन के विरुद्ध खड़ी रहती हैं। कवितांश में चाँद रूढ़ियों का प्रतिनिधि है। परिवर्तन एक क्षण में नहीं होता। उसके पीछे दशकों की कल्पनाएँ और स्वप्न समाहित हैं। परिवर्तन केलिए कल्पना करनेवालों और स्वप्न देखनेवालों का प्रतिनिधि हैं कवि। कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 1

प्रश्न 10.
निम्नांकित कथन पर अपना विचार प्रस्तुत करें
“महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।”
– डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम
उत्तर:
सपनों का महत्व
जीवन को आगे बढ़ाने के लिए स्वप्ने होना आवश्यक है। दिवास्वप्नों से कोई उपयोग नहीं। ये जल के बुलबुले समान है। यथार्थ से इनको कोई संबंध नहीं है। हमें सच्छे स्वप्न देखना चाहिए। महान व्यक्ति ही महान सपने देखते हैं। महान स्वप्नों से ही महान कार्य निकलते हैं। महान लोग व्यर्थ स्वप्नों को कभी प्रधानता नहीं देते। महान लोग अपने स्वप्नों को यथार्थ में बदल देने के लिए उत्सुक रहते हैं। अब्दुल कलामजी ने ठी कहा है कि: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है।
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,
और फिर बैचैन हो जगता न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?
मैं चुका हैं देख मनु को जनमते-मरते?
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी पर बैठ स्वपनों पर सही करते।

i) यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
रामधारी सिंह दिनकर की ‘चाँद और कवि’ से।

ii) यहाँ किन के बीच बातचीत हो रही है?
उत्तर:
चाँद और कवि के बीच।

iii) कविता के ‘अनोखा’ शब्द का समानार्थी शब्द लिखें?
उत्तर:
विचित्र।

iv) निम्नलिखित शब्दों के लिए कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें? आसमान, विचित्र, मानव
उत्तर:
गगन, अनोखा, आदमी

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है,
किंतु, तो भी धन्य; टहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु, मेरी रागिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तू?
स्वप्न मेरे बुलबुले हैं? हे यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!
मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
और उसपर नींव रखती हूँ नए घर की,
इस तरह, दीवार फ़ौलादी उठाती हूँ।

i) चाँद के अनुसार मनुष्य का स्वप्न किसके समान है?
उत्तर:
जल के बुलबुले के समान।

ii) बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
कवि।

iii) कवि केलिए कौन बोलने लगी?
उत्तर:
कवि की रागिनी। (कवि की काव्य चेतना, कविता)

iv) कवि आग में किसको गलाकर लोहा बनाता है?
उत्तर:
स्वप्न को।

v) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

आदमी के स्वप्न की तुलना जल के बुलबुलों से चाँद करता है। बुलबुलों से खेलकर कवि कविता बनाता है। क्षण में टूट जानेवाले बुलबुलों को सच मानकर कविता करनेवाले कवि पर चाँद यहाँ व्यंग्य करता है।

चाँद का व्यंग्य -परिहास सुनकर कवि चुप रहा। पर, परिवर्तन की आग मन में छिपाई हुई कवि की काव्य चेतना आर्थात कविता चुप नहीं रह सकी। वह चाँद को ललकारने लगी। अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई काव्य चेतना चाँद से सही पहचान करने को बताती है। काव्य चेतना की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ा करती है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, उन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

प्रश्न 14.
उलझनों में फँसकर कौन बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
आदमी।

प्रश्न 15.
कौन उलझनें बनाता है?
उत्तर:
प्रणा मानव।

प्रश्न 16.
आदमी किस में फँसकर बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
उलझनों में

प्रश्न 17.
किसने मनु को जनमते -मरते देखा है?
उत्तर:
चाँद ने।

प्रश्न 18.
‘पागल कहकर चाँद किसका उपहास करता है?
उत्तर:
स्वपनों को यथार्थ में परिवर्तित करने का परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि को।

प्रश्न 19.
बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
परिवर्तन के लिए परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि।

प्रश्न 20.
स्वप्न जल का बुलबुला है या नहीं, क्यों?
उत्तर:
स्वप्न केवल जल का बुलबुला नहीं। यह इसलिए कि परिवर्तन का तूफान सपनों में समावेश हुआ है।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 16

प्रश्न 21.
चाँद का उपहास सुनकर कौन चुप रहा?
उत्तर:
कवि।

प्रश्न 22.
रागिनी ने चाँद से क्या-क्या कहा?
उत्तर:
अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई चाँद से सही पहचान करने को रागिनी बताती है। रागिनी की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को अपने मनन की आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ी करती है।

प्रश्न 23.
स्वप्नो को गलाकर रागिनी (कविता) क्या बना देती है?
उत्तर:
लोहा बनाती है।

प्रश्न 24.
लोहे की नींव पर किसकी स्थापना होती है?
उत्तर:
नए घर की फौलादी दीवार की।

प्रश्न 25.
नए घर की दीवार कैसे होती है?
उत्तर:
फौलादी।

प्रश्न 26.
यहाँ दीवारों को फौलादी क्यों कहा गया है?
उत्तर:
मन में उठनेवाले विचार चाहे शुरु में अस्पष्ट दिखते हो, परंतु मन रूपी धौंकिनी में गल-गलाकर वे सुदृढ़ बनते जाते हैं। वे विचार समाज को सुदृढ़ बनाने में काम आते हैं।

प्रश्न 27.
मनु के स्थान पर आज कौन है?
उत्तर:
मानव।

प्रश्न 28.
मनु-पुत्र के हाथ में बाण और तलवार के रूप में क्या-क्या है?
उत्तर:
विचार और स्वप्न।

प्रश्न 29.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?

प्रश्न 30.
जिह्वा, तीर, खड़ग- आदि शब्दों के समानार्थी पद कविता से छाँटकर लिखें।
उत्तर:
जिह्वा = जीभ, तीर = बाण, खड़ग = तलवार

प्रश्न 31.
स्वर्ग के सम्राट को क्या खबर पहूँचाना है?
उत्तर:
जिस को स्वप्नजीव कहकर उपहास करता है, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

प्रश्न 32.
स्वर्ग के सम्राट से क्या ललकार किया जाता है?
उत्तर:
मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूकियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है।

प्रश्न 33
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?

Plus One Hindi चाँद और कवि Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आदमी का स्वप्न? वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है;
किंतु, तो भी धन्य; ठहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु मेरी रोगिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तूऊ
स्वप्न मेरे बुलबुले है? है यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
चाँद और कवि

प्रश्न 2
कविता के ‘रागिनी’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (उपन्यास, नाटक, कविता, कन्या)
उत्तर:
कविता

प्रश्न 3.
जल के बुलबुले की विशेषता क्या है?
उत्तर:
जल के बुलबुले आज बनते हैं और कल फिर टूट जाते हैं।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री रामदारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध कविता ‘चाँद और कवि’ से है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि हे दिनकर। उर्वशी, रेणुका, कुरुक्षेत्र आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। चाँद कवि को मानव के पागलपन के बारे में कहते हैं। कवि जवाब के रूप में कहते हैं कि आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला जैसा है – आज बनता हैं कल टूट जाते हैं। फिर भी वह धन्य है क्योंकि आदमी ऐसे स्वप्नों से खेलकर कविता बनाता है।

अर्थात् नये नये सृजन करते है। कवि के अंतर की रागिनी बोलती है कि चाँद तुम जो पानी और बुलबुले कहकर पुकारनेवाला मानव का स्वप्न असल में आग हैं। तुम इसे ठीक तरह से पहचानते नहीं। .. यहाँ कवि सरल भाषा में समाज को आह्वान कर रहे हैं कि हम मानव किसी भी बात में पीछे नहीं होना चाहिए। हम जिसे स्वप्न के रूप में देखते हैं कह कर भी डालते हैं। छात्रों को जागरित होकर प्रयत्न करने का प्रोत्साहन देनेवाले कविता है यह।

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, इन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

1. यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
2. कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (तलवार, तेज, बाण, रोज़)
3. मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
4. कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

चाँद और कवि Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 2

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चाँद और कवि Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

प्रश्न 1.
बीमारियाँ कैसे जन्म लेती हैं?
उत्तर:
बारिश के दिनों में बड़ी संख्या में मच्छर पैदा होना एक सामान्य बात है, जिसके परिणामस्वरूप मलेरिया व डेंगु जैसी बीमारियाँ जन्म लेती हैं।

प्रश्न 2.
बीमारियाँ कैसे फैलती हैं?
उत्तर:
स्थाई निवारण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। इसलिए बीमारियाँ फैलती हैं।

आपकी आवाज़ अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
चर्चा करें – संपादकीय लेखन कैसे?

चर्चा बिंदु :

  • विषय का चुनाव
  • विषय के ज़रूरी तथ्य
  • समस्या-प्रस्तुति का ढाँचा
  • समर्थन का तरीका
  • संपादकीय भाषा
  • शीर्षक

(सहायक संकेत-परिशिष्ट, पृष्ठ संख्या-110-111, संपादकीय)

प्रश्न 2.
‘बढ़ती बीमारियाँ’ में
a. किस विषय की चर्चा हुई है?
b. विषय-प्रस्तुति के लिए कौन-कौन से तथ्य जुटाए हैं?
c. समस्या का समर्थन करने के लिए क्या-क्या तर्क उठाए हैं?
d. समस्या प्रस्तुत करने के लिए कौन-सी भाषा-शैली का प्रयोग किया है?
e. संपादकीय का शीर्षक कैसे चुना है?
उत्तर:
a. राजधानी दिल्ली में बढ़ती बीमारियों की चर्चा हुई है।
b. विषय संबंधी आवश्यक जानकारी, सांख्यिकीय स्पष्टीकरण ज़रूरी प्रस्ताव आदि तथ्य जुटाए हैं।
c. स्थिति की गंभीरता, सरकार का उत्तरदायित्व आदि तर्क उठाये है।
d. सरल शब्दों में आकर्षक एवं प्रभावशाली भाषा शैली।
e. समकालीन समस्या संबन्धी।

यह रपट पढ़ें

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 1

प्रश्न 3.
रपट के लिए एक नया शीर्षक लिखें।
शीर्षक की परख, मेरी ओर से

  • पढ़ने को प्रेरित करता है।
  • केंद्र आशय को उद्दीप्त करता है।
  • भ्रमात्मकता से रहित है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से ‘बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ’ पर संपादकीय तैयार करें।

  • कच्ची-टूटी सड़कें
  • गाड़ियों की बढ़ती संख्या
  • ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन
  • नशीली चीज़ों का उपयोग
  • नियमों का सज़ पालन
  • जागरण-कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमकार 19 मार्च 2016
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ

केरल में सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती जाती हैं। कल कोल्लम जिले में एक मिनी बस के पलटने से 2 लोगों की मृत्यु हो गयी और 12 लोग घायल हो गये। सड़क कच्ची-टूटी अवस्था में है। गाड़ियों की संख्या रोज़ बढ़ती जाती है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता जाता है। सरकार की ओर से आवश्यक ध्यान इन बातों पर नहीं है। अनेक ड्राईवर लोग नशीली चीज़ों के उपयोग करके गाड़ियाँ चलाते हैं। इनको पकड़ने के लिए सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाता है। नियमों का सख्त पालन पर सरकार की ओर से ज़रूरी ध्यान होना चाहिए। जनजागरण-कार्यक्रम भी होना चाहिए। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सहयोग देना चाहिए।

प्रश्न 4.
संपादकीय की परख, मेरी ओर से

  • तथ्यों की सटीक प्रस्तुति हुई है।
  • समस्या के विभिन्न कारण प्रस्तुत किए हैं।
  • समस्या-समाधान के सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
  • अनावश्यक विस्तार नहीं है।
  • आकर्षक शीर्षक है।

उत्तर:
संपादकीय समाचार पत्र या अन्य पत्रिका का अभिमत प्रकट करनेवाला एक लेख है। जनहित और जनमत संपादकीय का विषय होना चाहिए। सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक या अन्य समस्याओं पर अपना मंतव्य प्रकट करना संपादकीय के विषय का जरूरी तथ्य होता है। आवश्यक जानकारी और तथ्यों का समाहर करना संपादकीय लिखने के पहले ज़रूरी है। मर्म छूटे बिना विषय को संक्षिप्त रूप में प्रकट करना चाहिए। विषयानुकूल तथ्यों का समर्थन और विरोधी विचारों का खंडन संपादकीय में होना चाहिए। भाषा प्रवाहमय और सरल शब्दों में होनी चारिए। विषयोचित आकर्षक शीर्षक होना चाहिए। संपादकीय का अंत अत्यंत प्रभावशाली होना चाहिए। संपादकीय रोचक एवं पठनीय होना भी है।

प्रश्न 5.
संपादकीय तैयार करें- जनसंख्या विस्फोडन पर दैनिक समाचार में छापने योग्य संपादकीय तैयार करें। जल की कमी और जल का दुरुपयोग जीव-जंतुओं के लिए खतरा उत्पन्न करता है।

  • जल जीवन का आधार
  • जल प्रदूषण और दुरुपयोग
  • जल की सुलभता में कमी
  • जल शोषण के प्रकार
  • जल स्रोतों का संरक्षण

उत्तर:

दैनिक सूरज –
सोमवार 19 मार्च 2016
बढ़ती जल-समस्या

केरल में अनेक नदियाँ हैं। वर्षा का भी कमी नहीं है। लेकिन शुद्ध जल का अभाव केरल की सबसे बड़ी समश्या हो रही है। जीवन का आधार है जल। यह जानकर भी केरल सरकार की ओर से पानी के संरक्षण केलिए उचित ध्यान नहीं होता। केरल की नदियों के और जलाशयों का जल निरंतर प्रदूषण है खतरे में है। जल का दुरुपयोग भी खूब होता रहता है। इसके प्रति सरकार और संबंधित अधिकारी लोग ध्यान क्यों नहीं देते? जल की सुलभता में कमी से केरल जनता की कठिनाईयाँ निरंतर बढ़ती रहती है। विभिन्न प्रकार से जल का शोषण हो रहा है। अक्सर अधिकारी लोग इसके लिए साथ देते रहते हैं। जल स्रोतों का संरक्षण करना अनिवार्य है। सरकार के जल-विभाग की ओर से तुरंत इस दिशा में उचित कर्मपरिपाटियों की आयोजना होनी चाहिए। नहीं तो, सरकार सतर्क रहिए! सरकार से पेयजल और शुद्ध जल मिलने केलिए हड़ताल करने के लिए जनता मज़बूर हो जायेगी।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 2

प्रश्न 6.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’

बच्चे ओस की बूंदों की तरह एक दम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं। लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों के विरुद्ध अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। अधिकांश बच्छे सुरक्षाहीन वातावरण में रहते हैं। बच्चों के विरुद्ध बढ़नेवाले अत्याचारों को नियंत्रण में रखने के लिए कोई रास्ता है? मार्ग तो है, लेकिन मन नहीं है। निषकलंक बच्चों को अत्याचार के कारण अनावश्यक रूप से कष्ट सहने के अवसर होना बिलकुल पैशाचिक है, राक्षसीय है। अत्याचार बढ़ने का मुख्य कारण मानविकता का अभाव ही है। बड़ों के मन में मानविकुजा के भावों को जागरूक रखना चाहिए। सरकार की ओर से सख्त, नियमों के पालन के लिए सतर्कता होनी चाहिए। अपराधियों की मनोवृत्ति में बदलाव लाने के लिए सरकारी और अन्य संस्थाएँ सदा परिश्रम करते रहना चाहिए। अपराधियों को कठिन दंड दिलाने में विलंब न होना चाहिए। बच्चे देवदूत जैसे हैं। बच्चों से ही राष्ट्र की प्रगति हो सकती है। बच्चों के विरुद्ध कोई अत्याचार न होना चाहिए। हमारे बच्चे अत्याचारों से सदा सुरक्षित रहें।

प्रश्न 7.
सड़कों की बुरी हालत पर एक संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
हमारी सडकों की हालत

हमारी सडकें आजकल सुगम यात्रा के पथ नहीं हैं। सभी जगह गड्ढे हैं। उन गड्ढों से बचाकर गाडी चलाना आसान नहीं। बारिश के समय सड़कों की हालत और बुरी हो जाती है। बारिश के मौसम में सड़कें लोगों को इस भ्रम में डालती है कि वे सडक है या तालाब? इस स्थिति के बारे में हमेशा सूचित करते हुए भी सड़क परिवहन विभाग का ध्यान इस बात पर नहीं आया है। वह विभाग ज़रूरत के अवसर पर कुछ न कुछ करता है पर यह पर्याप्त नहीं है। हमारी सड़कों की रक्षा और लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार को इस विषय पर ज़रूर ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से वृक्षारोपण: हमारा दायित्व पर एक संपादकीय तैयार करें।

  • पेड़ों की बरबादी – मौसम पर बुरा असर
  • जीव -जंतुओं पर असर
  • प्राकृतिक -संतुलन पर बुरा असर
  • मानव की स्वार्थता
  • वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2015
वृक्षारोपण: हमारा दायिच्च

पेड़-पौधों के बिना हमें जीना असंभव है। पुराने ज़माने से मनुष्य और पेड़ के बीच अटूट संबंध रहा है। शुद्धवायु मिलने के लिए, भोजन मिलने के लिए, छाया मिलने के लिए ऐसे अनेक लाभ के लिए पेड़ लगाकर संरक्षण करना जरूरी है। लेकिन आज पेड़ों की बड़ी बरबादी हो रही है। सरकार की ओर से इसको रोकने के लिए उचित कर्मपरिपाटी न होती। अक्सर यह भी होता है कि भ्रष्टाचारवाले सरकारी अधिकारी लोग पेड़ों की बरबादी के लिए साथ देते भी है। इसकी ओर सरकार जागरूक रहना चाहिए।

पेड़ -नशीकरण से मौसम पर बुरा असर होता है। जीवजंतुओं का उत्तरजीवन में बाधा होती है। प्राकृतिकसंतुलन पर भी बुरा असर होता है। मानव की स्वार्थता, संबंधित अधिकारी वर्ग के भ्रष्टाचार और लापरवाही आदि से पेड़ों की बरबादी न होनी चाहिए। वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व है। वृक्षारोपण प्रत्येक नागरिक का और सरकारी संस्था का दायित्व है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायें और हमारे पर्यावरण का संरक्षण करें। राज्य सरकार इस दिशा में नेतृत्व, मातृका और प्रोत्साहन सदा देते रहे।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 7

प्रश्न 9.
बाज़ार में रिंग-टोन कंपनी की ओर से नया मोबाईल फोन आया है। उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
नया मोबाईल आया है!!!
रिंग-टोन कंपनी की ओर से!
बहुरंगी है!
डेढ़ साल की वारंटी है।
2 जीबी मेमरी मुफ्त!
अदला-बदला की सुविधायें भी हैं।
जल्दी खरीद लीजिए।
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: रिंग-टोन कंपनी, आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 10.
मान लें, अनंतपुरम के शांतिनगर में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनाया है। दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस मकान के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

Plus One Hindi आपकी आवाज़ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
‘जनसंचार माध्यम का प्रभाव – छात्रों में लाभ और हानि’ इस विषय पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदुः

  • मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट – आधुनिक युग का वरदान
  • बटन दबाने पर दुनिया भर की खबरें
  • दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क
  • युवा पीढ़ी का आकर्षण
  • विपत्तियाँ – माध्यमों का दुरुपयोग

उत्तर:

संपादकीय
दैनिक भास्कर 28.08.2016
जनसंचार माध्यम का प्रभाव
छात्रों में लाभ और हानि

आज हम तकनीकी विकास को सबसे ज़्यादा प्रमुखता देते हैं। मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट आदि तकनीकी विकास के कारण हमें वरदान के रूप में मिले हैं। समय, दूरी आदि का मतलब ही आज बदल गया है। एक बटन दबाने से दुनिया भर की खबरें हमें मिलते है। कितने भी दूर के लोगों से हमें आसानी से बात कर सकते हैं। पहले चिट्टी के माध्यम से दिनों या हफ्तों के बाद मिलते थे वह आज निमिष मात्रा में मिल जाते है। मोबैल और इन्टरनेट से दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क करना इतना आसान हो गया है कि दूरी आज मिट गया है। इसप्रकार के माध्यमों का प्रभाव युवा पीढ़ी में सबसे ज़्यादा हैं। आज इसका प्रभाव इतना है कि वह बाकी सब को छोडने लगे हैं। इसमें कुछ सामाजिक विपत्तियाँ भी है। बड़े लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। समय माध्यमों में ……………… रहने से नष्ट हो जाते है। कई लोग देखे में भी पड़ जाते हैं। समाज में आवश्यक आदान-प्रदान भी युवा पीढ़ी में कम हो रहे हैं।

हमें सतर्कता से काम करना चाहिए कि सामाजिक माध्यम हमारा विकास केलिए है – हम माध्य केलिए नहीं।

प्रश्न 2.
आज हम देख रहे हैं कि व्यक्ति अपना घर साफ करता है और वह गंदगी सड़क या बाहर फेंकता है। इस प्रसंग में ‘स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज के लिए अनिवार्य है’ – इस विषय पर निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार से संपादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदु:

  • सफाई का महत्व
  • गंदगी से हानियाँ
  • वातावरण को साफ रखना नागरिक का कर्तव्य
  • सख्त नियमों का पालन
  • स्वच्छता की शुरुआत घर से
  • अनेक प्रकार की बीमारियाँ
  • जागरण कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार 15 अगस्त 2016
स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज केलिए
अनीवार्य

आधुनिक समाज में सब लोग सफाई का महत्व जानते हैं। सफाई केवल दिखाने केलिए नहीं बल्कि हमारे सुरक्षा केलिए है। गंदगी से कई प्रकार के बीमारियाँ फैलते है। आज कई प्रकार के बुखार फैल रहे हैं। मच्छर और मक्खी के कारण ही इसी प्रकार के बीमारियाँ ज्यादा फैल रहे हैं। ये दोनों जीव गंदगी में ही तेज़ी से बड़ते है। इसलिए हमें जल्द ही गंदगी को रोकना ही चाहिए।

स्वच्छता की शुरुवात घर से ही शुरू होता है। घर का और आसपास के वातावरण के साफ रखना नागरिक रा कर्तव्य है। लेकिन आजकल हम नागरिक ही गंदगी फैलने का कारण हो जाते हैं। कभी कभी घर की गंदगी को सड़क पर ही फेंकते हैं।

सरकारी तौर पर कई जानकारी योजनायें सफाई केलिए हो रहे हैं। कई संस्थायें और व्यक्तियों द्वारा भी सफाई के प्रोत्साहन केलिए कार्यक्रम हो रहे हैं। फिर भी कई लोग यह अपना कर्तव्य न मानकर समाज के विनाशक हो जाते हैं। हमें जानकारी के साथ सख्त नियमों का भी आवश्यकता है। नियमों का पालन हमारा कर्तव्य है। हमें प्रतिज्ञा करना है कि हम सब मिलकर हमारा ही रक्षा केलिए काम करने केलिए तैयार होंगे।

प्रश्न 3.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 4
निम्नलिखित विषय पर सहायक बिंदु के आधार से सम्पादकीय तैयार कीजिए। विषयः ‘प्रदूषण – जैव मण्डल का अस्तित्व संकट में’
सहायक बिंदु:

  • प्रदूषण – जल, वायू और मिट्टी
  • प्रदूषणजन्य रोग
  • कूड़े-कचरे से बायोगैस
  • जैव कृषि का महत्व

उत्तर:

दैनिक भास्कर
10/5/2017
प्रदूषणः जैव मण्डल
का अस्तित्व संकट में

आज सब लोग जानते हैं प्रदूषण माने क्या है। सम्पूर्ण धरती प्रदूषण से विषलिप्त हो गया है। प्रकृति की स्वाभाविक हालत में आनेवाले हानिकारक परिवर्तन को ही प्रदूषण कहते हैं। जल, वायु और मिट्टी में प्रदूषण हो रहा है। रासायनिक पदार्थों, प्लास्टिक, विविध तरह के कचरे- यह सब हमारे पर्यावरण पर बुरा असर कर रहा है। यह हम जानते हैं लेकिन इसे रोकने के लिए कुछ नहीं करते हैं। जनता कहते हैं इसके ज़िम्मेदार सरकार हैं। सरकार कहते हैं नागरिक अपना दायित्व ठीक तरह से न निभाने से प्रदूषण बड़ते हैं। एक दूसरे को दोषी कहने से इस समस्या का समाधान नहीं मिलेगा। सरकार, नागरिक, संस्थायें – सब एकत्रित होकर प्रदूषण से प्रकृति को बचाने का प्रयत्न शुरू करता है।

पहले हमारे मन में यह सोच ठीक तरह से भरना होगा कि यह हमारा ही भलाई के लिए है। हम ही नहीं आनेवाली पीढ़ी के लिए भी हमें इस प्रकृति को बचाते रहना चाहिए। कई प्रकार के प्रदूषणजन्य रोग होते हैं तो इससे बचाव भी हमारे पास है। कूड़े-कचरे के सही रूप में उपयोग करके – बयोग्यास, कम्पोस्ट आदि का निर्माण करनी है। रासायनिक पदार्थों का उपयोग बंद करना हैं। कीटनाशकों से बचने के लिए जैवकृषि का महत्व का प्रोत्साहन करना है। प्लास्टिक का उपयोग कम करना हैं। सरकार द्वारा जानकारी योजनायें करवाना हैं और जनता यह अपना दायित्व समझने है। आनेवाले कल के लिए हमें इस पर्यावरण को बचाने का प्रण लेना हैं।

प्रश्न 5.
सापदकीय तैयार कीजिए। विषयः हिंदी का प्रचार
सहायक बिंदुः

  • भारतीय भाषाओं में हिंदी का स्थान
  • हिंदी दिवस का महत्व
  • जनसाधारण का विचारविनिमय
  • भारतीयता का विकास

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार, 20 अप्रैल 2017
हिंदी हमारी पहचान

भारतीय भाषाओं में हिंदी सबसे श्रेष्ठ और महान है। भारत के अलावा अनेक देशों में हिंदी लेखक, हिंदी प्राध्यापक, हिंदी प्रचारक, हिंदी सेवी आदि लोग काम कर रहे हैं। आज हिंदी शासकों, राष्ट्राध्यक्षों की भी भाषा बन गई है जो संसार के एक सौ बीस देशों में किसी-न-किसी रूप में प्रचलित भी है। प्रचीन भारत और संस्कृति के बारे में जानने का सशक्त माध्यम है हिंदी भाषा और इसका सशक्त साहित्य। आज विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी उभर आ रही है। विश्व हिंदी सम्मेलन इसका सशक्त प्रमाण है। इसके अलावा पूरे भारत भर में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में आज हिंदी का प्रचार इतना बढ़ गया है कि जो व्यक्ति हिंदी जानता है वह पूरे भारत के किसी भी कोने में जाकर आसानी से बात कर सकता है और जीवन बिता सकता है। क्योंकि आज हिंदी जनसाधारण के विचारविनिमय का माध्यम बन गई है। एक सच्चे भारतीय होने के नाते हम सब को मिलकर हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए काम करना है। भारतीयता का विकास भी इसमें निहित है। राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का विकास प्रत्येक भारतीयों के हाथ में निहित है। जिसके पास राष्ट्रभाषा नहीं है उसका कोई राष्ट्र भी नहीं है।

||जय हिंद, जय हिंदी||

आपकी आवाज़ Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 6

आपकी आवाज़ Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 10

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

प्रश्न 1.
ब्लैक फिल्म देखें। (फिल्म देखते वक्त इन मुद्दों पर बारीकी से ध्यान दें)

  • पात्रों का अभिनय
  • संवादों की प्रासंगिकता
  • दृश्यों की विविधता
  • कथा का प्रवाह

प्रश्न 2.
फिल्म के आधार पर लिखें।

  • सबसे आकर्षक दृश्य
  • सबसे श्रेष्ठ अभिनेता
  • सबसे हृदयस्पर्शी संवाद
  • सबसे दर्दनाक दृश्य

प्रश्न 3.
फिल्म के निम्नांकित अंगों के लिए गुणवत्ता के अनुसार दें (अधिकांश)

  • कथा
  • पटकथा
  • अभिनय
  • छायांकन
  • साज-सज्जा
  • ध्वन्यांकन
  • संपादन
  • निदेशन

फिल्म से समीक्षा की ओर…

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समीक्षा में किन-किन बिंदुओं की चर्चा की गई है?
उत्तर:
पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, संपादन-कार्य, छायांकन, ध्वन्यांकन, अभिनय, गीत, प्रार्श्व संगीत आदि की चर्चा की गयी है।

प्रश्न 2.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

प्रश्न 3.
फिल्म समीक्षा की परख, मेरी ओर से

  • फिल्म का संक्षिप्त परिचय दिया है।
  • अभिनय की खूबियाँ/कमियाँ बताई हैं।
  • निदेशक की क्षमता को अंकित किया है।
  • फिल्म के अन्य बिंदुओं की (पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, ध्वन्यांकन, संपादन, गीत आदि) चर्चा की है।
  • अपने विचारों का समर्थन किया है।

प्रश्न 4.
मान लें, ब्लैक फिल्म थियटर में 100 दिन पूरी करते वक्त पोस्टर में यह अनुशीर्षक (Caption) निकलता है।

संजय लीला भंसाली के निदेशन में अमिताभ बच्चन और राणी मुखर्जी के अभिनय-जीवन की अनमोल प्रस्तुति
‘ब्लैक’
101 वें दिन की ओर…

पोस्टर में छपने के लिए इसी प्रकार के विभिन्न अनुशीर्षक लिखें।
उत्तर:
i) सौ दिन के बाद भी ब्लैक भीड़ भरी।
ii) 101 वें दिन ……… 350 शो……. गजब! गजब!!
iii) सारा शहर ‘ब्लैक’ के पीछे

प्रश्न 5.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
i) तारे ज़मीं पर – फिल्मी समीक्षा
बच्चे ओस की बूंदों की तरह एकदम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं, लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों को अनुशासन के नाम पर तमाम बंदिशों में रहना पड़ता है। आठ वर्षीय ईशान अवस्थी (दर्शील सफ़ारी) का मन पढ़ाई के बजाय कुत्तों, मछलियों और पेटिंग में लगता है। उसके मातापिता चाहते हैं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता। ईशान घर पर माता-पिता की डाँट खाता है और स्कूल में शिक्षकों की। कोई भी यह जानने की कोशिश नहीं करता कि ईशान पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। इसके बजाय वे ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं।

खिलखिलाता ईशान वहाँ जाकर मुरझा जाता है। वह हमेशा सहमा और उदास रहने लगता है। उस पर निगाह जाती है आर्ट टीचर रामशंकर निकुंभ (आमिर खान)की। निकुंभ उसकी उदासी का पता लगाते हैं और उन्हें पता चलता है कि ईशान बहुत प्रतिभाशाली, लेकिन डिसलेक्सिया की बीमारी से पीड़ित है। उसे अक्षरों को पढ़ने में तकलीफ़ होती है। अपने प्यार और दुलार से निकुंभ ईशान के अंदर छिपी प्रतिभा को सबके सामने लाते हैं।

कहानी सरल है, जिसे आमिर खान ने बेहद प्रतिभाशाली तरीके से परदे पर उतारा है। पटकथा की बुनावट एकदम चुस्त है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं, जो सीधे दिल को छू जाते हैं। ईशान का स्कूल से भागकर सड़कों पर घूमना, ताज़ा हवा में साँस लेना, बिल्डिंग के कलर होते देखना, फुटपाथ पर रहनेवाले बच्चों को आज़ादी से खेलते देखकर उदास होना, बरफ़ का लड्डू खाना जैसे दृश्यों को देख कई लोगों को बचपन की याद ताज़ा हो जाएगी।

सभी बच्चों का दिमाग और सीखने की क्षमता एक-सी-नहीं होती। फ़िल्म देखते समय हर दर्शक इस बात को महसूस करता है। ईशान की भूमिका में दर्शील सफ़ारी इस फ़िल्प की जान है। अमीर खान मध्यांतर में आते हैं और छा जाते हैं। टिस्का चोपड़ा (ईशान की मम्मी) ने एक में की बेचैनी को उम्दा तरीके से पेश किया है। विपिन शर्मा (ईशान के पापा), सचेत इंजीनियर और सारे अध्यापकों का अभिमय भी अच्छा है। प्रसून जोशी द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। शंकर-अहसान-लॉय का संगीत भी अच्छा है। फ़िलम की फोटोग्राफी बहुत ही प्रभावशाली हैं।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 1Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 3

ii) पूस की रात – फिल्मी समीक्षा
किसान का जीवन कितना करुणापूर्ण है! खेती से उसको कोई सुख नहीं मिला। पूरा जीवन गरीबी में गुज़रता है। इन बातों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करनेवाली एक सुंदर फिल्म है ‘पूस की रात’। प्रेमचंद की एक छोटी कहानी गुलजार के निदेशन में फिल्म के रूप में पर्दे पर आयी है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है।

एक गरीब किसान हल्कू अपनी पत्नी के साथ रहता है। खेत में फसल पकने लगी है। रात के समय खेत में नीलगायों के आने की संभावना है। इसलिए हल्कू रात में खेत का पहरावा करता है। हड्डियाँ भी तोडनेवाली ठंड में वह अपने कुत्ते का साथ गीत गाकर या बातें करके ठंड से बचने की कोशिश करता है। गर्मी के लिए वह चिलम फूंकता भी है।

खेती के लिए महाजनों से लिए पैसे वापस देने में भी वह असमर्थ है। हल्कू की पत्नी के मत में खेती की अपेक्षा मज़दूरी करना ही अच्छा है। एक ठंडी रात में हल्कू ठंड सह न सका। वह कुछ सूखे पत्ते लाकर आग जलाकर उसके साथ नाच गाकर सर्दी से बचकर लेटा। आग की गर्मी के कारण उसको गहरी नींद मिली। पर उस रात में आग फैलकर सारी फसल जल गयी। सबेरे पत्नी आकर हल्कू को उठाते वक्त ही उसने देखा कि सारा खेत जल चुका है। रोती हुई पत्नी से हल्कू ने कहा कि ‘अच्छा हुआ…. आज से रात में ठंड सहने की ज़रूरत नहीं है।’

हल्कू की ये बातें उसकी निराशा से उत्पन्न हैं। खेत में कठिन काम करने पर भी या सभी कठिनाइयाँ सहने पर भी किसान को कोई फायदा नहीं मिलता है। इन बातों को स्पष्ट रूप में गुलज़ार ने अपनी फिल्म ‘पूस की रात’ में व्यक्त किया है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। कुत्ते का साथ हल्कू का वार्तालाप, चंद्रमा की सुविधा का वर्णन, नीलगायों को भगाने की आवाज़ आदि के प्रसंगानुकूल दृश्य दर्शकों को मज़ा देनेवाले ही हैं।

किसान के दैन्य दिखाने के लिए फटे हुए कंबल को दिखाते वक्त उसकी गरीबी हमारे मन पर चोट लगाती है। प्रेमचंद किसानी जीवन की दर्दनाक कहानी लिखनेवाला कहानीकार है। उनकी एक कहानी को गुलजार ने ज्यादा चमकदार बनाकर फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया है। रघुवीर करण और मानसी उपध्याय ने अपने अपने पात्रों को उज्वल बनाए। दोनों का अभिनय देखकर हम विस्मित हो जाते हैं। फिल्म की शुरुआत में रूपकुमार का एक अच्छा गीत है। दिन और रात के समय के दृश्यों की फोटोग्राफी भी अव्वल दर्जे की है। संपादन अच्छा हुआ है। पटकथा भी बहुत अच्छा हुई है। साज-सज्जा अनुकूल ही है। ध्वन्यांकन उत्तम कोटि की है।

Plus One Hindi ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखिए। सहायक बिंदुः

  • फिल्म का कथासार
  • पात्रों का अभिनय
  • निदेशक की भूमिका
  • पटकथा, संवाद, छायांकन, गीत आदि
  • फिल्म की समग्रता पर अपना दृष्टिकोण

उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Summary in Malayalam

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ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे

प्रश्न 1.
जो दिल खोजौं आपना मुझ-सा बुरा न कोय- कबीर ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
मनुष्य में भलाई और बुराई का मिश्रण होता है। परंतु, मनुष्य अपनी बुराई को छिपाकर दूसरों की बुराई बताते फिरता है। अपने आपको सुधारने को हमें ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दूसरों की बुराई खोज देखने के लिए हमें इच्छुक न रहना चाहिए। संक्षेप में कबीर का मत है अपने को पहचानना सच्चे ज्ञानी का लक्षण है।

प्रश्न 2.
प्रभुता का महत्व समझाने के लिए कबीर ने किसका सहारा लिया है?
उत्तर:
चींटी का।

प्रश्न 3.
दुख काहे होयइससे क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सुख और दुख जीवन के सत्य हैं। दुख में सब लोग आश्रय की याद करते हैं। तब दुःख कम हो जाता है। लेकिन सुख आने पर लोग उसी आश्रय को भूल जाते हैं। कबीर के अभिप्राय में यह कृतघ्नता और अज्ञता से होता है।

प्रश्न 4.
सच्चा शूर कैसे बनता है?
उत्तर:
जिसे जाति, वर्ण, कुल आदि के भेदभाव की चिंता नहीं, वही सच्चा शूर है। दूसरे शब्तों में समभाव की भावना रखनेवाला सच्चा शूर बनता है।

दोहे अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढ़ लें।
कोई, शूर, संभाला, ढूँढ़ना, धूलि, वर्ण, स्मरण, क्यों, मिला
उत्तर:
कोई = कोय
शुर = सूरमा
संभाला = समाय
ढूँढना = खोजौं
धूली = धूरि
वर्ण = बरन
स्मरण = सुमिरन
क्यों = काहे
मिला = मिलिया

प्रश्न 6.
समान आशयवाला चरण दोहे से चुन लें।
a. दूसरा कोई भूखा न रहे।
b. सुख में कोई स्मरण नहीं करता।
c. मैं बुरे लोगों को ढूँढ़ने निकला।
d. हाथी के सिर पर धूलि है।
e. काम, क्रोध और लालच से भक्ति नहीं होती।
उत्तर:
a. साधु न भूखा जाय।
b. सुख में करे न कोय
c. बुरा जो देखन मैं चला
d. हाथी के सिर धूरि
e. कामी, क्रोधी, लालची, इनते भक्ति न कोय

प्रश्न 7.
व्याख्या करें-
साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।
उत्तर:
यह दोहा निर्गुण भक्त कवि कबीरदास का है। कवि भगवान से केवल यह प्रार्थना करते हैं कि अपने कुटुंब को संभालने के धन मिल जाये। कवि की प्रार्थना है कि संवयं कभी भी भूखा न रहे और संसार में कोई भी भूखा न रहे। मनुष्य में सदा धन और संपत्ति का लालच रहता है। वह संपत्ति के पीछे दोड़ता रहता है। घन के प्रति मनुष्य में जो लालच है, उसे सीमित और नियंत्रित रखने का उपदेश कवि यहाँ देते हैं।

प्रश्न 8.
ये तत्व किन-किन दोहों से संबंधित हैं?
a. अहं दूर होने से महत्व बढ़ता है।
b. सुख और दुख में स्मरण करना है।
c. अपने को पहचाननेवाला सच्चा ज्ञानी है।
d. जीवन की शांति सादगी में है।
e. समभाव शूर का लक्षण है।
उत्तर:
a. प्रभुता से प्रभु दूरि
b. जो सुख में सुमिरन करै, तो दुःख काहे होय
c. जो दिल खोजौं आपना, मुझ-सा बुरा न कोय
d. लघुता से प्रभुता मिले
e. भक्ति करै कोई सूरमा।, जाति, बरन कुल खोय।।

प्रश्न 9.
‘जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय’- अपना विचार प्रकट करें।
उत्तर:
यह दोहा संत कवि कबीरदास का है। निर्गुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि कबीरदास कहते हैं कि हमें सुख और दुःख दोनों में ईश्वर का स्मरण समभाव से करना चाहिए। मनुष्य साधारणतः केवल दुःख आते समय ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। सुख में ईश्वर से भक्ति रखनेवाला दुर्लभ होता है। कबीर के अभिप्राय में सुख में ईश्वर का स्मरण करनेवाले को दुःख कभी भी नहीं होता। अंधविश्वास को दूर करके सच्छी भक्ति की ओर मन रखने को कबीर इस दोहा द्वारा उपदेश देते हैं।

प्रश्न 10.
‘कबीरदास की रचनाएँ कालजयी एवं प्रासंगिक हैं’- इस विचार से जुड़े दोहों का संकलन करके प्रस्तुत करें। कबीर के दोहों का आलाप करें।
उत्तर:
काल्हि करै सो आज कर, आज करै सो अब
पल में परलय होयगा, बहुरि करैगा कब।।
पाहन पूजै हरि मिलै, तो मैं पूनँ पहार
ताते या चाकि भलि, पीस खाय संसार।।
मुंड़ मुड़ाए हरि मिलै, सब कोई लेय मुड़ाय।
बार-बार के मुँड़ते, भेड़ न बैकुंड जाय।।
तेरा साई तुझ में, ज्यों पुहुपन में बास।
कस्तूरी का मिरग ज्यों, फिरि फिरि ढूँदै घास।।
माखी गुड़ में गड़ि रही, पंख रह्यो लिपटाय।
हाथ मलै और सिर धुने, लालच बुरी बलाय।
माया मुई न मन मुआ, मरि मरि गया सरीर
आसा त्रिष्णा न मुई, यौँ कहि गया कबीर।।
पानी बाढ़े नाव में, घर में बाढ़े दाम।
दोऊ हाथ उलीचिए,यही सयानो माक।।

प्रश्न 11.
कबीरदास किसे ढूंढने चला?
उत्तर:
बुरा देखने को चला।

प्रश्न 12.
अपना दिल खोजने पर कबीर को क्या पता चला?
उत्तर:
कबीर को पता चला कि अपने समान बुरा दूसरा कोई नहीं।

प्रश्न 13.
कौन दुनिया में सबसे बुरा है?
उत्तर:
अपने आपको न सुधारनेवाला।

प्रश्न 14.
चींटी के सिर पर क्या है?
उत्तर:
शक्कर।

प्रश्न 15.
हाथी के सिर पर क्या है?
उत्तर:
धूली।

प्रश्न 16.
लोग कब आश्रय का स्मरण करते हैं?
उत्तर:
दुःख में।

प्रश्न 17.
लोग कब आश्रय का स्मरण नहीं करते हैं?
उत्तर:
सुख में।

प्रश्न 18.
दुख काहे होय – इससे क्या तात्पर्य है?

प्रश्न 19.
‘स्मरण’ शब्द का समानार्थी पद क्या है?
उत्तर:
सुमिरन।

प्रश्न 20.
कौन-कौन भक्त नहीं बनता?
उत्तर:
कामी, क्रोधी और लालची।

प्रश्न 21.
कौन भक्ति कर सकता है?
उत्तर:
जाति, वर्ण, कुल आदि को महत्व न देनेवाला सच्चा शूर अर्थात, समभाव की भावना में जीनेवाला भक्ति कर सकता है।

प्रश्न 22.
‘साई’ शब्द का समानार्थी पद लिखें।
उत्तर:
स्वामी।

प्रश्न 23.
कबीरदास ‘साई’ से क्या चाहते हैं?
उत्तर:
चाहते हैं कि उनको साई से इतना मिले जिससे उनका कुटुंब चला सकें। वे यह भी चाहते हैं कि कोई भी भूखा न रहे। दूसरे शब्दों में वह जीवन में शांती देनेवाली उदार मनोभावना साई से चाहते हैं।

Kerala Plus One दोहे Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और प्रश्न 1 एवं 2 का उत्तर लिखिए।

लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि।।

प्रश्न 1
‘धूली’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (चींटी, हाथी, धूरि, दूरि)
उत्तर:
धूरि

प्रश्न 2.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास निर्गुण भक्तिशाखा के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रसिद्ध कवि है। मानव-प्रेम, सामाजिक बोध आदि को वह प्रमुखता देते थे।

कबीरदास प्रस्तुत दोहे में कहते हैं कि लघुता से ही हमें प्रभुता मिलेंगे और जहाँ प्रभुता है वहाँ से अहं का भाव दूर होता है। अर्थात सादगी से ही जीवन सफल होगा। उदाहरण केलिए कबीरदास कहते हैं कि चींटी छोटे होने पर भी शक्कर लेकर चलते हैं। बड़े हाथी के सिर में अक्सर धूल ही होते हैं। शक्ति, बड़प्पन, कायबल आदि से नहीं बल्की व्यवहार के कारण ही एक व्यक्ति में उन्नति और अवनति होते हैं।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और 3 एवं 4 के उत्तर लिखिए।
कामी क्रोधी लालची, इनते भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई सुरमा, जाति बरन कुल होय।।

प्रश्न 3.
‘वर्ण’ शब्द का समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
बरन

प्रश्न 4.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास प्रस्तुत दोहे से भेद-भावों को छोड़ने केलिए आह्वान करते हैं। भक्तकाल के निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के सर्वश्रेष्ट कवि है कबीरदास। उन्होंने अपने समय समाज में प्रचलित सभी धर्मी की बुराइओं का खंडण किया। काम, क्रोध, लालच आदि से भक्ति नहीं होते हैं। भक्ति होने केलिए वीरों को जाति, वर्ण, कुल आदि विचार छोड़ना चाहिए। जाति, वर्ण, कुल आदि में सोचनेवाले लोगों में काम, क्रोध, लालच आदि पैदा होते हैं। इसलिए असली वीरों को यह बातों को छोड़कर खुले मन से व्यवहार करना चाहिए।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िए और 5 एवं 6 तक के उत्तर लिखिए।
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय।

प्रश्न 5.
‘स्मरण’ शब्द का समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
सुमिरन

प्रश्न 6.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
भावार्थ:
कबीरदास ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! आप हमें इतना धन दीजिए कि जिससे अपने कुटुंब को हम संरक्षण कर सकें। कबीरदास यह प्रार्थना भी करते हैं कि हे भगवान! आपका आशीर्वाद हो कि साधु लोग भी भूखा न रह जायें और मैं भी भूखा न रहूँ। दूसरों की कष्टताओं पर ध्यान रखने के बारे में कवि यहाँ बताते हैं। धनार्जन के पीछे दौड़नेवालों की आलोचना कवि यहाँ पर करते हैं।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और प्रश्न 7 से 8 के उत्तर लिखिए।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजौं आपना, मुझसा बुरा न कोय।।

प्रश्न 7.
‘कोई’ शब्द के लिए दोहे में प्रयुक्त शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (खोजौं, देखन, आपना, कोय)
उत्तर:
कोय

प्रश्न 8.
दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास भक्तिकाल के निर्गुण भक्तिधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि है। कबीरदास के एक प्रसिद्ध दोहा है। आपकी रचनायें साखी, सबद और रमैनी के नाम से तीन भागों में विभक्त है।

प्रस्तुत दोहे में कबीरदास सामाजिक जीवन में देखनेवाली सच्चाई को दिखाया है। हम दूसरों के बुराई सोचते रहते हैं। लेकिन हम अपने आप पर खोजते ही नहीं। अगर ऐसे करते हैं तो पता चलेगा कि असली बुराई हम में ही है। दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने आपको देखों। समाज में अच्छे और सच्चे जीवन बिताने की आवश्यकता कबीर बताते हैं।

सुचना :

निम्नलिखित दोहा पढ़कर 9 और 10 का उत्तर लिखिए।
साई इतना दीजिए, जामें कुटुम्ब समय।
मैं भी भूखा न रहूँ. साधू न भूखा जाय।।

प्रश्न 9.
‘संभालना’ शब्द का आशय दोहे के किस शब्द से मिलता है?
उत्तर:
समाय

प्रश्न 10.
दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास हिन्दी के विख्यात रहस्यवादी कवि है। उन्होंने नीति संबंधी अनेक दोहे लिखा है।

कबीर का परिवार साधु-संतों का है। वे कहते हैं, हे भकवान! मुझे इतना ही दीजिए जिससे मेरा परिवार चल सकें। वे चाहते हैं कि कोई भी भूखा नहीं रह जाए। कबीर की राय में जीवन की शांति सादगी में है।

Plus One Hindi दोहे भावार्थ:

1. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजौं आपना, मुझ सा बुरा न कोय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 5

भावार्थ:
कवि कहते हैं कि बुरे लोगों को ढूँढते ढूढते वे चले। लेकिन कोई बुरा आदमी नहीं मिला। अंत में उन्होंने अपने दिल में खोज़ा। अर्थात्, अपने बारे में सोचा। तब समझ लिया कि अपने समान बुरा दूसरा कोई नहीं हैं। कवि का मतलब यह है कि दूसरों की बुराईयों पर ध्यान देने के पहले अपने आप को सुधारना ज़रूरी है।

2. लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 7

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 8

भावार्थ:
कवि कहते हैं कि हम विनम्रता दिखाएँ तो हमें ईश्वरीयत्व मिलेगा। लेकिन हम अहंकार दिखाएँ तो ईश्वर हमसे दूर होगा। उदाहरण के रूप में कवि कहते हैं कि छोटी चींटी उससे बड़ा शक्कर लेकर चलती है। लेकिन बड़ी शरीरवाले हाथी के सिर पर मलिन धूल है। कवि का मतलब हैं कि हम दुसरों से विनय के साथ व्यवहार करें तो ईश्वर सदा हमारे साथ रहेंगे। अहंकार से जियें तो ईश्वर हमें छोड़ देंगे। मूल्यहीन अध्यात्मिकता पर आलोचना करके यहाँ कवि विनम्रता के महत्व के बारे में हमें ज्ञान देते हैं।

3. दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 9

भावार्थ:
कबीरदास कहते की दुख में हम सब ईश्वर का स्मरण करते हैं। लेकिन सुख के अवसर पर कोई भी ईश्वर का स्समरण नहीं करता। कवि पूछते हैं कि जो लोग सुख में ईश्वर का स्मरण करते हैं तो उनको दुख कैसे होगा? अर्थात् हमेशा ईश्वरस्मरण में रहनेवालों को दुख कभी नहीं होता। यहाँ जीवन में ईश्वर स्मरण की ज़रूरत कवि हमें सिखाते हैं। सच्ची आध्यात्मिकता के मूल्य पर कवि यहाँ पर बल देते हैं।

4. कामी क्रोधी लालची, इनते भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई सूरमा, जाति बरन कुल खोय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 10

भावार्थ:
कामी, क्रोधी, लालची लोगों में भक्ति नहीं होती। लेकिन, जाति, वर्ण और कुल के परे सभी लोगों से समभाव से व्यवहार करनेवाले शूर के मन में सच्ची भक्ति होती है। भक्ति में हृदय की पवित्रता और समभावना जगानेवाली ये पंक्तियाँ द्वारा कवि मूल्यहीन और कपट धार्मिकता पर यहाँ पर आलोचना करते हैं। (धार्मिकता = മതജീവിതം, आलोचना = വിമർശനം)

5. साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 11

भावार्थ:
कबीरदास ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! आप हमें इतना धन दीजिए कि जिससे अपने कुटुंब को हम संरक्षण कर सकें। कबीरदास यह प्रार्थना भी करते हैं कि हे भगवान! आपका आशीर्वाद हो कि साधु लोग भी भूखा न रह जायें और मैं भी भूखा न रहूँ। दूसरों की कष्टताओं पर ध्यान रखने के बारे में कवि यहाँ बताते हैं। धनार्जन के पीछे दौड़नेवालों की आलोचना कवि यहाँ पर करते हैं।

दोहे Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 1

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 2

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 4

दोहे Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 13

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस

जुलूस अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समानार्थी शब्द नाटक में ढूँढ़ें
दृश्य – 1 जनयात्रा, विरुद्ध, विक्रय, शासक, चिंता, निर्दय
दृश्य – 2 आज्ञा, वाणी, प्रकार, लक्ष्य, पालन, इच्छा, केवल, देश, हानि, विषाद, सहन
दृश्य – 3 घायल, अंत
दृश्य – 4 पास, धीरे, कुशल, ओजपूर्ण
उत्तर:
जनयात्रा = जुलूस
विरुद्ध = के खिलाफ
विक्रय = बिक्री
शासक = दारोगा
चिता = परवाह
निर्दय = दल्लाद
आज्ञा = हुक्म
वाणी = जुबान
प्रकार = किस्म
लक्ष्य = मक्सद
पालन = तामिल
इच्छा = मंशा
केवल = महज़
देश = कौम
हानि = नुक्सान
विषाद = मलाल
सहन = बरदाश्त
घायल = जख्मी
अंत = आखिर
पास = नज़दीक
धीरे = आहिस्ता
कुशल = खैसियत
ओजपूर्ण = जोशीला

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथन किस पात्र का है ?
a. हमारा हुक्म क्या आपको सुनाई नहीं पड़ा?
b. जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कबका मिल गया होता।
c. हमारा बड़ा आदमी तो वही है जो लंगोटी बाँधे नंगे पाँव घूमता है।
d. एक दिन तो मरना ही है, जो कुछ होना है हो।
e. मर तो हम लोग रहे जिनकी रोटियों का ठिकाना नहीं।
f. हमारा मक़सद इससे कहीं ऊँचा है।
उत्तर:
a. दारोगा बीरबल सिंह का।
b. दीनदयाल का।
c. मैकू का।
d. शंभुनाथ का।
e. मैकू का।
f. इब्राहिम अली का।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथन इब्राहिम अली के चरित्र की किन-किन विशेषताओं को उजागर करता है?
a. हम दुकानें लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं।
b. आप अपने सवारों, संगीनों और बंदूकों के ज़ोर से हमें रोकना चाहते हैं-रोक लीजिए! मगर आप हमें लौटा नहीं सकते।
c. हमारे भाईबंद ऐसे हुक़्मों की तामील करने से साफ़ इनकार कर देंगे।
d. जिस दिन हम इस लक्ष्य पर पहुँच जाएँगे, उसी दिन स्वराज्य सूर्य का उदय होगा।
उत्तर:
a. अहिंसावाद, ईमानदारी।
b. वीरता, साहसिकता, दृढनिश्यच।
c. पत्र देशप्रेम, दृढनिश्चय।
d. प्रतीक्षा, प्रत्याशा।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर इब्राहिम अली के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
जुलूस’ नाट्यरूपांतर का मुख्य कथापात्र है इब्राहिम अली। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है। नाटक में इब्राहिम अली स्वतंत्रता सेनानियों का नेता है। इब्राहिम अली के नेतृत्व में स्वराजियों का जुलूस जा रहा है। महात्माजी के अहिंसावाद का अनुयायी है इब्राहिम अली। बड़ी ईमानदारी से इब्राहिम अली अहिंसा का पालन करता है। इसलिए दारोगा बीरबल सिंह से अलीजी कहते है: “हम दूकानों लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं।” इब्राहिमजी में बड़ी वीरता और साहसिकता है। उनके दिल में बड़ी प्रतीक्षा और प्रत्याशा है।

वे कहते हैं: “स्वराज्य सूर्य का उदय होगा” वे बड़े दृढ़ निश्चयवाले नेता भी हैं। फिर भी, इब्राहिम अली के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उनका देशप्रेम ही है। भारतमाता के लिए अपनी जान बलिदान करने के लिए वे तैयार हो जाते हैं। देशप्रेम से वे कभी भी पीछे नहीं होते हैं। उनका देशप्रेम दृढनिश्चय से अलंकृत है। इब्राहिमजी कहते है: “रोक लीजिए! मगर आप हमें लौटा नहीं सकते।” इस प्रकार हम देखते हैं कि इब्राहिम अली का चरित्र देशप्रेम, अहिंसावाद, प्रत्याशा, वीरता, आत्मविश्वास, दृढनिश्चय, ईमानदारी आदि से शोभित है।

टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

चरित्र पर प्रकाश डालनेवाले संवादों का विश्लेषण किया है।
चरित्र की विशेषता समझी है।
विशेषताओं के आधार पर टिप्पणी लिखी है।
चरित्र की विशेषताओं का समर्थन अपने दृष्टिकोण से किया है।

नाटक का मंचन करें।

मंचन की गतिविधियाँ

नाटक-वाचन

  • यह वैयक्तिक/दलीय हो सकता है। वाचन के द्वारा पूरे नाट्यदल कथा से तादात्म्य स्थापित करता है।

मंचन पूर्व चर्चा

  • नाटक की पृष्ठभूमि, तकनीकी क्षेत्र, पात्र आदि में सही अवधारणा उत्पन्न करने में यह चर्चा काम आती है। इससे कथापात्र के अनुरूप अभिनेता के चयन में ठीक दिशा मिल जाती है।

मंच की अवधारणा

  • प्रकाश, शब्द-विन्यास, मेक-अप, मंच-निर्माण आदि मंच के अनिवार्य अंग हैं, हालांकि कक्षा-प्रस्तुति के समय स्कूल में उपलब्ध सामग्रियों से काम चला सकते हैं।

सृजनपरता

  • नाटक की पटकथा, मंचन के लिए एक रूपरेखा मात्र है। निदेशक तथा अभिनेता कल्पना और क्षमता के अनुरूप मंचन को सृजनात्मक बनाएँ।

प्रश्न 5.
हमें किसीसे लड़ाई करने की ज़रूरत नहीं।
उत्तर:
दीनदयाल का।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों के अर्थ को सूचित करनेवाले मुहावरे कोष्ठक से चुनकर लिखें। (धाक बैठ जाना, जान हथेली पर लेना, दुम दबाकर भागना)
i. सरकार पर बड़े आदिमियों का बोलबाला है।
ii. गाँधीजी देश के लिए मरने तक को तैयार होते थे।
iii. पुलीस को देखने पर स्वराजी डरकर भागेंगे।
उत्तर:
i. सरकार पर बड़े आदिमियों का धाक बैठ जाता है।
ii. गाँधीजी देश के लिए जान हथेली पर लेने के लिए तैयार होते थे।
iii. पुलीस को देखने पर स्वराजी दुम दबाकर भागेंगे।

प्रश्न 7.
पहले दीनदयाल दूकान बंद कर जुलूस में भाग लेने का निश्चय नहीं करता है, क्यों?
उत्तर:
शहर के कोई बड़ा आदमी जुलूस में नहीं था। दीनदयाल में देशप्रेम की कमी तब थी।

प्रश्न 8.
मैकू क्यों हंस रहा है?
उत्तर:
शंभुनाथ और दीनदयाल की बातें सुनकर मैकू हंस रहा है।

प्रश्न 9.
मैकू की नज़र में बड़ा आदमी कौन है? क्यों?
उत्तर:
मैकू की नज़र में बड़ा आदमी महात्मा गाँधी है। वे देश की स्वतंत्रता के लिए जान हथेली पर लेने के लिए तैयार होते थे।

प्रश्न 10.
स्वराजियों का मकसद क्या है?
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति है।

प्रश्न 11.
भाईबंद किसके हुक्म को साफ इनकार करेंगे? क्यों?
उत्तर:
अंग्रेजों के हुक्म को भाईबंद साफ इनकार करेंगे। यह – इसलिए कि भाईबंद स्वतंत्रता चाहते हैं।

प्रश्न 12.
स्वराजी क्यों दारोगा को अंग्रोज़ों का पिट्ठ कहते हैं?
उत्तर:
अंग्रोजों का आज्ञानुवर्ती है दारोगा। दारोगा के मन में देशप्रेम न होने के कारण स्वराजी ऐसा कहते हैं।’

प्रश्न 13.
‘मैं कैसे अपनी दुकान खुली रख सकता हूँ?’ यहाँ लोगों की मनोवृत्ति में कौन-सा परिवर्तन आया है?
उत्तर:
देशप्रेम की भावनाएँ उदित हो गयी हैं।

प्रश्न 14.
मैकू के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपांतर का एक कथापात्र है मैकू। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है। नाटक में मैकू सड़क से लगे बाज़ार का एक दुकानदार है। वह चप्पल बेचनेवाला है। वह बड़ा हँसमुख आदमी है। मैकू अंग्रेज़ों और देशप्रेमहीन लोगों का बड़ा आलोचक है। मैकू कहता है : “जो हमारी दशा सुधारने के लिए अपनी जान हथेली पर लिए फिरता है, वह है महात्मा गाँधी। उसके आगे हमें किसी बड़े आदमी की परवाह नहीं।”

उसके दिल में बड़ा देशप्रेम है। भारत की स्वतंत्रता की प्रतीक्षा उसके दिल में दृढ़ रहती है। वह एक बार कहता है: “अब तो भाई, रुका नही जाता… मैं भी जुलूस में शामिल होऊँगा…..”

इस प्रकार हम देखते हैं कि इब्राहिम अली का चरित्र देशप्रेम, अहिंसावाद, प्रत्याशा, वीरता, आत्मविश्वास, दृढनिश्चय, ईमानदारी आदि से शोभित है।

प्रश्न 15.
शंभूनाथ के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपांतर का एक कथापात्र है शंभूनाथ। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है।

नाटक में शंभुनाथ सड़क से लगे बाजार का एक दूकानदार है। शंभुनाथ घटनाओं को नकारात्मक दृष्टि से देखनेवाला आदमी है। स्वतंत्रता सेनानियों का जुलूस देखकर शंभुनाथ अपनी नकारात्मक दृष्टि से कहता है: “सब के सब काल के मुँह में जा रहे हैं।” वह एक भीरु आदमी भी है। जुलूसवालों को देखकर वह कहता है: पुलिस …… मार-मार कर भगा देगी। शंभुनाथ हँसी-मज़ाक आदमी भी है। मैकु को चिढ़ाकर शंभुनाथ कहता है: “ठिठया काहे रहा? लगता है आज बिक्री अच्छी हो गयी है?” फिर भी, शंभुनाथ के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका देशप्रेम ही है। वह एक साहसी देशप्रेमी है। देश के लिए अपना जीवन बलि देने के लिए वह तैयार हो जाता है। इस दिशा में शंभुनाथ का यह कथन समर्थक है: “मैं कैसे अपनी दुकान खुली रख सकता हूँ? एक दिन तो मरना ही है, जो कुछ होना है हो….”

इस प्रकार हम देखते हैं कि शंभुनाथ का चरित्र देशप्रेम, प्रत्याशा, वीरता, दृढनिश्चय आदि से शोभित है।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 1

प्रश्न 16.
बीरबल सिंह के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपान्तर में प्रस्तुत पाठभाग में बीरबल सिंह का चरित्र खलनायक (aleyod) का है। बीरबल सिंह दारोगा है। जुलूस में निकले स्वतंत्रता सानानियों को रोकने के लिए वह प्रयत्न करता है। अंग्रेज़ों का आज्ञानुवर्ती बनकर स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी क्रूरता से वह मारता है। वह एक निर्दय दारोगा है। जुलूस का नेता इब्राहिम अली के ऊपर बीरबल सिंह घोड़े को चढ़ाता है। स्वराजियों के अभिप्राय में बीरबल सिंह “जल्लाद दारोगा! अंग्रेज़ों का पिठू है।” बीरबल सिंह का चरित्र इतना नीच होने पर भी, यह वास्तव है कि अंत में वह अपने देशद्रोही कर्मों पर पछताता है और सच्चा देशभक्त बन जाता है।

Plus One Hindi जुलूस Important Questions and Answers

सूचनाः
जूलूस नाट्यरूपान्तर के बीरबलसिह के निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न 1 का उत्तर लिखिए।

बीरबलसिंह

  • तुम लोगों को आगे जाने का हुक्म नहीं है।
  • फिर से सोच ले। बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा।
  • अभी तो वक्त है, इब्राहिम अली साहब….. आप मेरे सामने से हट जाएँ।

प्रश्न 1.
इस कथन के आधार पर बीरबलसिंह के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:

चरित्र चित्रण – बीरबल सिंह

बीरबल सिंह अंग्रेज़ सरकार के दारोगा है। वह एक भारतीय है फिर भी अंग्रेज़ों केलिए काम करते हैं। एक अधिकारी का भाव उस में है। वह सरकार के वफादार हैं। इसीलिए सरकारी हुक्म के बारे में कहते हैं। वह अपने शक्ति पर भरोसे रखते हैं। उसमें उत्साह की कमी भी नहीं हैं। वह इब्राहिम अली को आदर भी करते हैं। गुण और दोष से मिश्रित है बीरबल सिंह।

सूचनाः
जुलूस नाट्यारुपांतर के दीनदयाल का निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न 2 का उत्तर लिखिए।

दीनदयाल

  • जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कब का मिल गया होता।
  • जुलूस के चौरास्ते पर पहुँचते ही हंटर लेकर बिल पड़ेगा।
  • दुकान बंद कर मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मैकू!

प्रश्न 2.
इस कथन के आधार पर दीनदयाल के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
दीनदयाल एक दूकानदार है। वह नाटक के आरंभ में केवल अपना काम करनेवाला दिखता है। लेकिन परिवर्तनशील पात्र हैं। पहले वह स्वराजियों के विरोध करता था। लेकिन अंत में वह भी स्वराजियों के साथ हो जाते हैं। वह एक साधारण व्यक्ति है। उसे अंग्रेज़ों से डर है। फिर भी वह जुलूस में भाग लेना चाहते हैं। एक अच्छा इनसान है वह। देश-प्रेम भी उनके मन में है।

सूचनाः
जुलूस नाट्यरूपांतर के बीरबलसिंह का निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न का उत्तर लिखिए।

बीरबल सिंह

  • हमारा हुक्म क्या आपको सुनाई नहीं पड़ा?
  • फिर से सोच ले! बहुत नुक्सान उठाना पड़ेगा!
  • सिपाहियो! लाठी चार्ज करो!

प्रश्न 3.
इस कथन के आधार पर बीरबलसिंह से चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपान्तर में प्रस्तुत पाठभाग में बीरबल सिंह का चरित्र खलनायक (aleyod) का है। बीरबल सिंह दारोगा है। जुलूस में निकले स्वतंत्रता सानानियों को रोकने के लिए वह प्रयत्न करता है। अंग्रेज़ों का आज्ञानुवर्ती बनकर स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी क्रूरता से वह मारता है। वह एक निर्दय दारोगा है। जुलूस का नेता इब्राहिम अली के ऊपर बीरबल सिंह घोड़े को चढ़ाता है। स्वराजियों के अभिप्राय में बीरबल सिंह “जल्लाद दारोगा! अंग्रेज़ों का पिठू है।” बीरबल सिंह का चरित्र इतना नीच होने पर भी, यह वास्तव है कि अंत में वह अपने देशद्रोही कर्मों पर पछताता है और सच्चा देशभक्त बन जाता है।

सूचना :
जुलूस नाट्यारुपान्त्र के इब्राहिम अली का निम्नलिखित कथन पकिए और प्रश्न 4 का उत्तर लिखिए। –

इब्राहिम अली

  • दारोगा साहब। मैं आपको अतमीनान दिलाता हूँ कि किसी किस्म का दंगा-फसाद न होगा।
  • वापस तो हम न जाएँगे। आपको या किसी को हमें रोकने का हक नहीं।
  • आप बेटन चलाएँ दारोगाजी।

प्रश्न 4.
इस कथन के आधार पर इब्राहिम अली के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इब्राहिम अली
इब्राहिम अली जुलूस नाटक से एक प्रमुख पात्र है। वह स्वतंत्रता सेनानियों के नेता है। एक नेता के लिए सभी आवश्यक गुण उसमें हैं। वह अपने आप पर भरोसा रखते हैं और अपने पास रहनेवाले लोगों के बारे में भी सोचते हैं। वह अपने वचन निभाने के लिए तैयार है। वह अहिंसावादी है। इसलिए दंगा-फसाद करना नहीं चाहता। वह अपने हक को पूरी तरह समझते है और निडर भी है। दारोगा के बेटन से नहीं डरते हैं। एक सच्चा नेता, मानवतावादी, अहिंसावादी और परोपकारी है इब्राहिम अली।

सूचनाः
‘जुलूस’ के दीनदयाल के ये कथन पढ़िये और प्रश्न 5 का उत्तर लिखिए।

  • जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कब का मिल गया होता।
  • नया दरोगा बीरबल सिंह बड़ा जल्लाद है मैकू।
  • दुकान बंद कर, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मैकू।

प्रश्न 5.
कथनों के आधार पर दीनदयाल का चरित्रचित्रण कीजिए।
उत्तर:
दीनदयाल जुलूस का एक पात्र है। वह बाज़ार में एक दूकान चलाता है। स्वराजियों के प्रति पहले उसके मन में घृणा थी। लेकिन जब उसे यह पहचान हुआ कि ये स्वराजी लोग भारत के लिए ही जुलूस चला रहे हैं और अंग्रेज़ों के विरुद्ध आंदोलन चला रहे हैं, तब उसकी चिंताओं में बदलाव भी आ जाता है। अंत में वह भी जुलूस में भाग लेता है। वह सच्चा देशप्रेमी एवं ईमानदार है।

जुलूस Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 4
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 6

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 10

जुलूस Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है

कोलाज देखें
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 1
प्रश्न 1.
इस दृश्य ने आपके दिल में कौन-सी प्रतिक्रिया जगाई?
उत्तरः
हमारे देश में बालश्रम करनेवाले कई बच्चे हैं। कठिन काम करके जीते समय भी उनके मन में कई प्रतीक्षाएँ रहती हैं। बालश्रम रूपी बाज. निरीह बचपनों को उठाते वक्त भी वे अपना भविष्य सुंदर आशावरी आँखों से देखने को उत्सुक रहते हैं।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 12

प्रश्न 2.
पादटिप्पणी की परख, मेरी ओर से
उत्तरः
बालश्रमः घातक गीध

प्रश्न 3.
लक्ष्यार्थ पर केंद्रित है।

प्रश्न 4.
समूचे भाव को आत्मसात किया है।

प्रश्न 5.
प्रभावशाली है।

प्रश्न 6.
सार्वजनिक सूचना अधिकारी के नाम पत्र..
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

1. आवेदक का नामहरिता एम
2. डाक का पूरा पताहरितम, शांति नगर, तिरुवनंतपुरम22
3. सूचना का विषयबालश्रम को रोकने के लिए रोज़गार मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबंधित।
4. माँगी गई सूचना का विवरण1. क्या भारत में बालश्रम पर कानूनी रोक है? तो बालश्रम रोकने और उसके खिलाफ़ समाज को सचेत करने के कौन कौन से प्रावधान हैं?
2. मंत्रालय द्वारा रोज़गार जगहों में सूचना पट लगवाने की कौन कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. बालश्रम के बारे में पता चलने पर किस कार्यालय में सूचना देनी है? कार्यालय का दूरभाषा उपलब्ध करा सकते हैं? बालश्रम के लिए प्रेरित करनेवालों को मिलनेवाला अधिकतम दंड क्या है?
5. सूचना डाक या दस्ती में।डाक द्वारा।

तिरुवनंतपुरम
10-07-2014

(हस्ताक्षर)
हरिता एम
उत्तरः

दस रूपए

प्रेषक,
हरिता. एम
हरितम, शांति नगर
तिरुवनंतपुरम

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार,
नई दिल्ली

महोदय,
विषय: बालश्रम को रोकने की कार्रवाइयों से संबंधित।
संदर्भ: सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005

1. क्या भारत में बालश्रम पर कानूनी रोक है? समाज को सचेत करने के लिए कौन-कौन से प्राविधान हैं?
2. रोजगार जगहों में सूचना पट लगवाने की कौन-कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. बालश्रम के बारे में पता चलने पर किस कार्यालय में सूचना देनी है? उस कार्यालय का दूरभाष उपलब्ध करा सकते हैं? बालश्रम को प्रेरित करनेवालों को मिलनेवाला अधिकतम दंड क्या है?

भवदीय,
(हस्ताक्षर)
हरिता. एम.

तिरुवनंतपुरम,
10-07-2014

यह हमारा अधिकार है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 7.
पत्र के आधार पर लिखें।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 2

उत्तरः
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 3

पाठकनामा पढ़ें

सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल
को बड़ी परेशानी होती है।
चिट्टारिपरंब में लगभग तीन
अधिकारियों के सामने कई
हज़ार छात्र अध्ययन कर रहे
बार यह समस्या लाई गई. पर
है। वे शहर की विभिन्न जगहों
काई फायदा नहीं हआ। जल्द
से आते हैं। अधिकांश छात्र
ही-जल्द इसपर कार्रवाई करने
बस का सहारा लेते हैं। बस
की ज़रूरत है।
कम होने की वजह से छात्रों

– राजेश कुमार
सदस्य, अध्यापक-अभिभावक संघ

प्रश्न 8.
पाठकनामा के विषय पर क्या कार्रवाई की गई, उसकी जानकारी पाने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, जिला परिवहन कार्यालय, कण्णूर के नाम एक सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तरः
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
सड़क परिवहन कार्यालय,
कण्णूर।

1. आवेदक का नामराजेश कुमार
2. डाक का पूरा पताराजेश भवन, चिट्टारिपरंब, कण्णूर 12.
3. सूचना का विषयबस्सों की कमी के बारे में सडक परिवहन कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबंधित
4. माँगी गयी सूचना1. नगरों से गाँव की ओर का विवरण ज्यादा बसें चलाने केलिए कौन कौन से प्राविधान हैं?
2. विद्यार्थियों की यात्रा संबंधी परेशानियाँ दूर करने केलिए क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती मेंडाक द्वारा

कण्णूर
15.03.2016

आवेदक,
(हस्ताक्षर)
राजेश कुमार (सदस्य अध्यापक अभिभावक संघ)
जी.ऐच्य.एस.एस.
चिट्टारिपरंय, कण्णूर 12.

प्रश्न 9.
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 13
उत्तरः
प्रेषक,
के, राजेशकुमार
सदस्य, अध्यापक अभिभावक संध
सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल
चिट्टारिपरंब, कण्णूर

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
सड़क परिवहन कार्यालय
कण्णूर 12

महोदय,
विषय: सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, चिट्टारिपरंब के छात्रों की परिवहन की कार्रवाइयों की सूचना प्राप्त करने से संबंधित
संदर्भ: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

1. स्कूली छात्रों के परिवहन संबंधी कानूनी अधिकार क्या क्या है?
2. छात्रों के परिवहन अधिकार को लगू करने के लिए परिवहन-मंत्रालय द्वारा कौन-कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. चिट्टारिपरंब में छात्रों को समस्या दूर करने के लिए कौन-कौन से कार्य किए गए हैं?

कण्णूर
10.8.2014

भवदीय
(हस्ताक्षर)
के. राजेशकुमार

पाठकनामक पढ़ें

विजयनगर में पानी बहुत कम मात्रा में आता है और वह भी अशुद्ध होता है। इस सन्दर्भ में हम समय-समय पर अधिकारियों का ध्यान इस और अकृष्ट कराते आए हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया तथा अभी तक कोई कार्यवाही भी नहीं हुई।…..

अजय शर्मा
75/496 जयपूर

प्रश्न 10.
पाठनामा के विषय पर क्या कारवाई की गई, जानकारी पाने केलिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, लोक कर्म विभाग, जयपूर के नाम एक सूचना आधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
लोक कर्म विभाग,
जयपूर।

1. आवेदक का नामअजय शर्मा
2. डाक का पूरा पताविजय नगर, 75/496 जयपूर
3. सूचना का विषयविजयनगर की पानी समस्या के संबंधित में की गयी कार्रवाइयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना का विवरण1. विजयनगर में पानी कम मात्रा में और वह भी अशुद्ध आने के संबंध में क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी है?
2. स्थल अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराने केलिए की गयी बातों पर क्या क्या प्राविधान लिए गये हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती मेंडाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

विजय नगर
15.03.2016

अजय शर्मा,
विजय नगर, 75/496 जयपूर

सब्जियों में विषैले वरत्तुओं का प्रयोग

अशोक नगर: रामपुरा से केरल में आ रही सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं। केरल के अधिकांश लोग इस बात से वाकिफ नही है। खाद्य पर जितने भी रासायनिक वस्तुओं का प्रयोग हो रहा है, वे स्वास्थ्य केलिए हानिकारक है। कैंसर जैसे बीमारियाँ बढ़ाती है।

प्रश्न 11.
श्रीमती सरलादेवी, 8/375, अशोकनगर, कोट्टयम, रासायनिक प्रयोगों को रोकने केलिए सरकार की ओर से की गयी कारवाइयों की सूचना पाने केलिए राज्य खाद्य सुरक्षा कम्मीशनर, (State Food Safety Commissioner) तैय्क्काड़, तिरुवनन्दपुरम के नाम एक सूचना आधिकार पत्र लिखती है। वह सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए

सेवा में,
राज्य खाद्य सुरक्षा कम्मीशनर,
तैयक्काड़,
तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नामश्रीमती सरलादेवी
2. डाक का पूरा पता8/375, अशोक नगर, कोट्टयम
3. सूचना का विषयस्वास्थ्य के लिए हानिकारक रूप में सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं के प्रयोग से संबंधित।
4. माँगी गयी सूचना का विवरण1. रामपुरा से केरल में आ रही सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं के प्रयोगों को रोकने के लिए क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी हैं?
2. खाध्य पदार्थों में विषैले रासायनिक वस्तुओं की उपस्थिति को रोकने केलिए सरकार की ओर से क्या क्या प्राविधान लिए गये हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

कोट्टयम
15.03.2016

श्रीमती सरलादेवी,
8/375 अशोक नगर, कोट्टयम

यह रपट पढ़ें।

वर्षकालीन बीमारियाँः स्थाई रोकधाम की माँग ज़ोर आलप्पुषा: केरल में वर्षाकालीन बीमारियां फैल रही हैं। बीमारियों की स्थाई रोकधाम की माँग ज़ोर पकड़ रही है। इस दिशा में सरकार हर साल लाखों रुपए व्यय कर रही है। मलेरिया, डेंगु और अन्य जलजन्य रोगों पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएँ बनाई हैं।….

प्रश्न 12.
वर्षकालीन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों की सूचना पाने के लिए गिरीश कुमार, अशोक विहार, आलप्पुषा की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, केरल सरकार के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
स्वास्थ्य विभाग,
केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नामगिरीश कुमार
2. डाक का पूरा पताअशोक विहार, आलप्पुषा
3. सूचना का विषयवर्षकालीन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबन्धित।
4. माँगी गयी सूचना का विवरण1. वर्षकालीन रोगों की रोकधाम के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गई?
2. नगरपालिका द्वारा विविध प्रकार के जलजन्य रोगों के सूचनापट लगवाने का प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

आलप्पुषा
15.03.2016

गिरीश कुमार,
अशोक विहार, आलप्पुषा

निम्न सुर्खियाँ पढ़िए।

स्कूल में गंदगी:
संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा
1000 छात्रों के लिए तीन शौचालय
स्वच्छता की सीख स्कूली जीवन से होनी चाहिए: मंत्री

प्रश्न 13.
स्कूल और आसपास को स्वच्छ रखने के लिए सरकार द्वारा किए जानेवाले कारवाईयों की जानकारी पाने के लिए सुमन, सदस्य, अध्यापक अभिभावक संघ, सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, पालक्काड़ की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, शिक्षा विभाग, केरल सरकार, तिरुवनंतपुरम् के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
शिक्षा विभाग, केरल सरकार,
तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नामसुमन
2, डाक का पूरा पताजी. एच. एस. एस. पालक्काड
3. सूचना का विषयस्कूल और आसपास को स्वच्छ रखने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा किए जानेवाले कारवाईयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना का विवरण1. स्वच्छता की सीख स्कूली जीवन से होनी चाहिए: मंत्री के इस आज्ञा को प्रायोगिक बनाने के लिए क्या क्या कारवाईयाँ की गयी?
2 स्कूल में गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने के खतरे के बारे में प्रधान अध्यापकों को सूचना देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

पालक्काड
15.03.2016

सुमन,
जी. एच. एस. एस. पालक्काड

निम्न सुर्खियाँ पढ़िए।

दहेज कम होने पर दुल्हें ने शादी से इनकार कर दिया।
दहेज माँगा: युवक की गिरफ्तारी
दहेज के विरोध में महिलाओं का जुलूस

प्रश्न 14.
सार्वजनिक सूचना अधिकारी, समाज कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम दहेजप्रथा पर कानूनी रोक के संबंध में सूचना पाने के लिए मनीषा परवीण, रागविहार, तिरुवनंतपुरम सूचना का अधिकार पत्र तैयार करती है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
समाज कल्याण मंत्रालय,
नई दिल्ली।

1. आवेदक का नाममनीषा परवीण
2 डाक का पूरा पतारागविहार, तिरुवनंतपुरम
3. सूचना का विषयदहेजप्रथा पर कानूनी रोक के संबंध में समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा की गयी कारवाईयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना1. दवेदप्रथा की रोकधाम का विवरण के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गयी हैं?
2. समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा दहेजप्रथा की रोकधाम के संबंध में आमजनता को जानकारी देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा डाक द्वारा

आवेदक.
(हस्ताक्षर)

तिरुवनंतपुरम
15.03.2016

मनीषा परवीण,
रागविहार, तिरुवनंतपुरम

निम्न सुर्खियाँ पकिए।

देश में नारी-उत्पीडन पर रोक की जरूरत
नारी-उत्पीडन रोकने के लिए सरकार कटिबद्ध
नारी-उत्पीडन: कानूनी दंड अपर्याप्त

प्रश्न 15.
कुमारी अंजली, 13 सी / कण्णूर, नारी-उत्पीडन रोकने की दिशा में सरकार की ओर से की गई कार्रवाइयों की सूचना पाने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, गृह विभाग, केरल सरकार के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार करती है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
गृह विभाग,
केरल सरकार

1. आवेदक का नामकुमारी अंजली
2. डाक का पूरा पता13 सी / कण्णूर।
3. सूचना का विषयनारी उत्पीडन रोकने के लिए सरकार द्वारा की गयी कारवाईयों से संबंधित
4. माँगी गयी सूचना का विवरण1. नारी उत्पीडन की रोकधाम के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गयी हैं?
2. गृह विभाग, केरल सरकार द्वारा नारीउत्पीडन की रोकधाम के संबंध में आमजनता को जानकारी देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

कण्णूर
15.03.2016

कुमारी अंजली,
13 सी / कण्णूर

Plus One Hindi यह हमारा अधिकार है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न सुखियाँ पढ़िए।
सुरक्षा की कमी: रेल-गाड़ी में स्त्री पर आक्रमण
रेल-यात्रा में स्त्रियों की सुरक्षा पर अधिक जोर देना है: सुप्रीम कोर्ट
स्त्रियों की सुरक्षा के लिए रेलगाड़ी में ज्यादा पुलीस की नियुक्ति की जाएगीः रेल मंत्री

आजकल रेल-गाड़ी में स्त्रियों पर आक्रमण बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा की जानेवाली कारवाईयों की जानकारी पाने के लिए राकेश कुमार, मयूर विहार, नई दिल्ली की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, रेल मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रेल मंत्रालय, नई दिल्ली।

1. आवेदक का नामराकेश कुमार
2. आवेदक का पतामयूर विहार, नई दिल्ली
3. सूचना का विषयरेलगाड़ी में स्त्रियों पर होनेवाले आक्रमण को रोकने केलिए की गई कार्यवाइयों से संबंधित
4. मांगी गई सूचना का विवरण1. इस साल रेलगाड़ी में स्त्रियों पर कितना आक्रमण अभी तक हुआ है?
2. रेलगाड़ी में स्त्री सुरक्षा केलिए कौन कौन से प्रावधान है?
3. इसी मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किये हैं और कितने लोगों को सजा मिला है?
4. तकनीकी विकास से रेलगाड़ी के सुरक्षा में कोई नया सुविधा इस्तेमाल किया है या नहीं।
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

नई दिल्ली,
20.06.2016

आवेदक,
राकेश कुमार
मयूर विहार,
नई दिल्ली

यह हमारा अधिकार है Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 8

यह हमारा अधिकार है Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 11

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु

प्रश्न 1.
सूखे तिनको’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
निराशा।

प्रश्न 2.
उषा शब्द किन-किन की ओर इशारा करता?
उत्तर:
प्राची में आनेवाली उषा प्रकाश-किरण के रूप में लालिमा लेकर आती है। कवि की रागात्मक दुनिया में आनेवाली उषा, प्रेमिका के रूप में जीवन में सौंदर्य की लालिमा लेकर आती है। संक्षेप में उषा प्रणयातुर दिलों में उपस्थित प्रतीक्षा,संतोष, तीव्रानुभूति आदि की ओर इशारा करता है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
छायावाद में कवि कोमल पदावलियों का प्रयोग करते थे। निम्नलिखित शब्दों के स्थान पर कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें।
वसंत, मौसम, भूमि, आकाश, जंगल, शिशिर, कलि, किसलय, मलयसमीर, आँख, कमल, प्रभात, पूरब, समुद्र, चाँद, रात
उत्तर:
वसंत = मधुऋतु
मौसम = दो दिन
भूमि = वसुधा
आकाश = नभ
जंगल = झाड़खंड
शिशिर = पतझड़
कलि = कुसुम
किसलय = पल्लव
मलयसमीर = मलयानिल
आँख = नयन
कमल = नलिन
प्रभात = उषा
पूरब = लघुप्राची
समुद्र = जलधि
चाँद = शशि
रात = निशि

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय व्यक्त करें।
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।
उत्तर:
प्रेम के ऐकांत सृजन कार्य में कोई बाधा उपस्थित नहीं करनी है। अपने में जो कुछ सुन्दर हैं, उसे प्रेम-युग्मों को देना है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित छायावादी प्रवृत्तियों को सूचित करनेवाली पंक्तियाँ लिखें।
प्रकृति चित्रण
मानवीकरण
सौंदर्यवर्णन
प्रेमानुभूति
उत्तर:
प्रकृति चित्रण – ‘जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी मेरी लघुप्राची में
मानवीकरण – ‘आ गई है भूली-सी यह मधुऋतु दो दिन को
सौंदर्यवर्णन – ‘हँसी भरे उस अरुण अधर का राग रंगेगा दिन को
प्रेमानुभूति – ‘चुंबन लेकर और जगाकर मानस नयल नलिन को

प्रश्न 4.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की कविता है ‘मधुऋतु। यह एक सुंदर कविता है। ‘मधुऋतु’ छायावादी कविता है। कविता में वसंतऋतु का सुंदर वर्णन हुआ है। वसंतऋतु आ गया है। वह भूली-सी है। कवि उसे एक व्यथा – साथिन के समान देखते हैं। कवि अपने मन में उसके लिए छोटी कुटिया बना देते हैं। कवि कहते हैं कि प्रेमी रहता है भूमि और आकाश के बीच में। प्रेमविहीन लोग यहीं पर नहीं रहते। कवि का प्रेम वसंतऋतु रूपी प्रेमिका से हुआ है। इससे कवि के हृदय प्रेममय हो गया है। इस प्रेममय वातावरण में आशा के नये अंकुर झूलते हैं। इस प्रेममय वातावरण में मलयानिल बहकर आता है। उसकी लहरें सिहर मर देती है। मलयानिल कवि के मानस नयन नलिन को चुंबन करके जगाता है।

वसंतऋतु में प्रभात लालिमा से भरा-हुआ रहता है। संसार में हमेशा रोशनी भी रहती है। वसंतऋतु में चाँदनी फैल जाती है और प्रकृति डिम की बूंदों की वर्षा करती है। वसंतऋतु में प्रेम का एकांत सृजन कार्य होता है। कवि निवेदन करते हैं कि इस में किसी को बाधा उपस्थित नहीं करनी है। कवि का उपदेश है अपने में जो कुछ सुन्दर है उसे प्रेम-युग्मों को दे देना है। ‘मधुऋतु’ में प्रकृति चित्रण, मानवीकरण, सौंदर्यवर्णन, प्रेमानुभूति आदि छायावादी प्रवृत्तियों का सुन्दर समावेश हुआ है। पदावली अत्यंत कोमल है। पंक्तियों का आशय आसानी से समझ सकते हैं। शीर्षक सार्थक और संगत है।

प्रश्न 5.
आस्वादन-टिप्पणी की परख, मेरी ओर से कवि का परिचय है।
उत्तरः
ये पंक्तियाँ ‘मधुऋतु’ कविता से प्रस्तुत हैं। ‘मधुऋतु’ एक सुंदर छायावादी कविता है। ‘मधुऋतु’ की रचना की है कवि जयशंकर प्रसाद ने। हिंदी के सुप्रसिद्ध छायावादी कवि हैं जयशंकर प्रसाद। वसंतऋतु आ गया है। वह एक साथिन के समान है। उसका मन व्यथा से भरपूर है। मैं उसके लिए एक सुंदर कुटिया बना दूंगा। प्रणयहीन दिलवाले लोगों को यहाँ पर प्रवेश निषेध है। वसंतऋतु के आगमन के कारण मेरे मन में नयी नयी आशाएँ एवं प्रतीक्षाएँ भर रही हैं। अब मेरा जीवन किसलयों से निर्मित लघुभव-सा हो गया है। मेरा यह सुंदर जीवन किसी को कोई कष्ट न देनेवाला है। छायावादी कविता से युक्त प्रेम, प्रकृति वर्णन, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रमयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि गुणों से संपन्न है प्रस्तुत कवितांश। हमें दूसरों की जिंदगी में कोई बाधा न डालनी है-यह संदेश कवितांश द्वारा कवि हमें देते हैं। साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्यार रखने का संदेश भी हमें मिलता है।

प्रश्न 6.
कविता की काव्यधारा और रचनाकाल की सूचना है।
उत्तर:
* प्रकृति वर्णन
अंतरिक्ष छिड़केगा कन-कन
निशि में मधुर तुहिन को

* प्रेम
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूँ,
नई व्यथा साथिन को!

* सौंदर्य
जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी
मेरी लघुप्राची में

* मानवीकरण
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को

* लाक्षणिकता
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,

* चित्रमयता
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूं.
नई व्यथा साथिन को!

* काल्पनिकता
वसुधा नीचे उपर नभ हो,
नीड़ अलग सबसे हो

* कोमलकांत पदावली
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो

* मधुरता
अंधकार का जलधि लाँधकर
आवेंगी शशि-किरनें

* सरसता
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।

प्रश्न 7.
कविता का सार है।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश श्री जयशंकर प्रसाद के मधुऋतु कविता से है। प्रसाद छायावादी कविता के क्षेत्र के प्रमुख है। झरना, लहर, कामायनी आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। प्रेम, प्रकृति,सौंदर्य, मानवीकरण आदि छायावादी कविताओं की सभी विशेषतायें आपके कविता में देख सकते हैं। वसंद (मधुऋतु) आने पर प्रकृति में कई प्रकार के परिवर्तन आते हैं। इन परिवर्तनों को कवितांश में प्रकट किया है। आशा के नए-नए अंकुर झूलेंगे और पल्लव रोमांचित हो जाएँगे। मेरे किसलय का लघु मनोहर संसार किसको बुरा लगेगा यानि किसीको बुरा नहीं लगेगा। रोमांचित मलयानिल की लहरें काँपते हुए आएँगी और मन में नयनरूपी कमल को चूमकर जगाएँगी। यहाँ कवि सरल शब्दों में वसंद के आगमन के साथ आनेवाली परिवर्तनों को दिखाया है। परिवर्तनल के लिए हमारा मन परिवर्तन बहुत आवश्यक है। हमें अच्छे बातों को स्वीकार करना ज़रूरी है। यह प्रासंगिक कविता है।

प्रश्न 8.
अपने दृष्टिकोण में कविता का विश्लेषण किया है।
(काव्यधारा और रचनाकाल के अनुरूप भाषा, प्रतीक आदि।)
उत्तर:
प्रकृति वर्णन, प्रेम, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रसयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि हैं।

प्रश्न 9.
इन बिंदुओं पर ध्यान देते हुए कविता का आलाप करें।
भावानुकूल प्रस्तुति
उचित ताल-लय
सटीक शब्द-विन्यास

प्रश्न 10.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मधुऋतु
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को,
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूँ,
नई व्यथा साथिन को!
वसुधा नीचे उपर नभ हो,
नीड़ अलग सबसे हो,
झाड़खंड के चिर पतझड़ में।
भागो सूखे तिनको!
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा किनको?

i) इन पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

ii) ‘जंगल’ का समानार्थी शब्द कवितांश से ढूँढकर लिखें।
उत्तर:
झाड़खंड।

iii) ‘भागो सूखे-तिनको’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वसंत ऋतु में पतझड़ के सूखे तिनकों-पत्तों का कोई स्थान नहीं होता, ठीक उसी प्रकार प्रणयातुर दिल में दुख और निराशा का भी कोई स्थान नहीं। प्रणयहीन दिलों को प्रणय के दुनिया में कोई जगह नहीं है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
सिहर भरी कैंपती आवेंगी
मलयानिल की लहरें,
चुंबन लेकर और जगाकर
मानस नयन नलिन को।
जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी
मेरी लघुप्राची में,
हँसी भरे उस अरुण अधर का
राग रँगेगा दिन को।
अंधकार का जलधि लाँघकर
आवेंगी शशि-किरने
अंतरिक्ष छिड़केगा कन-कन
निशि में मधुर तुहिन को
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।

i) मलयानिल की लहरें कैसे आती हैं?
उत्तर:
सिहर भरके कॉपती।

ii) प्रेमिका के कमल-नयनों को कौन चूमता है?
उत्तर:
मलयानिल।

iii) रात में हिमकणों को कौन छिड़कता है?
उत्तर:
अंतरिक्ष।

iv) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
पंक्तियाँ ‘मधुऋतु’ कविता से प्रस्तुत हैं। ‘मधुऋतु’ एक सुंदर छायावादी कविता है। ‘मधुऋतु’ की रचना की है कवि जयशंकर प्रसाद ने। हिंदी के सुप्रसिद्ध छायावादी कवि हैं जयशंकर प्रसाद। प्रकृति सदा सक्रिय रहती है। वह अपने आपको सदा अलंकृत रहती है। हमें प्रकृति में कोई बाधा न डालनी चाहिए। हमें प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ाने में सदा तत्पर रहना चाहिए। हमसे प्रकृति का विनाश नहीं, बल्कि प्रकृति का संरक्षण होना चाहिए। छायावादी कविता से युक्त प्रेम, प्रकृति वर्णन, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रमयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि गुणों से संपन्न है प्रस्तुत कवितांश। हमें दूसरों की जिंदगी में कोई बाधा न डालनी है यह संदेश कवितांश द्वारा कवि हमें देते हैं। साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्यार रखने का संदेश भी हमें मिलता है। प्रकृति संरक्षण, पारस्परिक प्रेम समभाव, सक्रियात्मकता आदि का भी संदेश हमें इस कवितांश से मिलता है।

प्रश्न 12.
‘अरे आ गई है भूली सी यह’ – कौन आ गई है?
उत्तर:
मधुऋतु’।

प्रश्न 13.
‘मधुऋतु’ रूपी प्रेमिका क्यों भूली-भटकती-सी आई है?
उत्तर:
प्रेमिका के मन में प्रेमी के प्रति तीव्र अनुराग है। कोई भी प्रेमिका अपनी प्रणय भावना खुल्लम-खुल्ला प्रकट करना नहीं चाहती। दिल में प्रणय छिपाकर वह भूली-भटकी सी आ रही है।

प्रश्न 14.
प्रेमी नई व्यथा-साथिन के लिए क्या करना चाहता है?
उत्तर:
छोटी -सी कुटिया रच देना चाहती है।

प्रश्न 15.
प्रेम का नीड़ कहाँ स्थित है?
उत्तर:
नीचे की वसुधा और ऊपर के नभ-दोनों से अलग।

प्रश्न 16.
जंगल के पतझड़ में किसको भाग जाना है?
उत्तर:
सूखे तिनके को (प्रणयहीन दिलवाले लोगों को)।।

प्रश्न 17.
वसंत के आगमन पर कौन-सी ऋतु चली जाती है?
उत्तर:
शिशिर (पतझड़ की ऋतु)

प्रश्न 18.
‘पतझड़’ का समानार्थी शब्द क्या है?
उत्तर:
शिशिर।

प्रश्न 19.
पतझड़ (शिशिर) की क्या क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
झाड़खंड में पतझड़ होता है। तिनके, पत्ते आदि सूखकर नीरस और शुष्क बन जाता है।

प्रश्न 20.
वसंत की विशेषताएँ क्या क्या होती है?
उत्तर:
अंकुर झूलते हैं। पल्लव पुलकित हो जाते हैं। मलयानिल की लहरों से नलिन खिल जाते हैं। जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी। अंधकार का जलधि लाँघकर शशि-किरण आती हैं। निशि में अंतरिक्ष मधुर तुहिन छिड़केगा।

प्रश्न 21.
वसंत किन-किन का प्रतीक हो सकता है?
उत्तर:
प्रेम और आशा से प्रणयातुर दिल को मोहक और मादक बनानेवाली प्रेयसी का प्रतीक होता है।

प्रश्न 22.
अगर वसंत प्रेम और आशा का प्रतीक है तो पतझड़ किन-किन का प्रतीक हो सकता है?
उत्तर:
दुख और निराशा से भरे प्रणयहीन दिलों का प्रतीक होता है।

प्रश्न 23.
वसंत के आगमन से प्रेमी के मन में किसका अंकुर झूलने लगता है?
उत्तर:
आशा के अंकुर।

प्रश्न 24.
लाल कुसुम के समान उषा कहाँ खिलेगी?
उत्तर:
कवि के लघुप्राथी में।

प्रश्न 25.
उषा कहाँ उदित होती है?
उत्तर:
लघुप्राची में।

प्रश्न 26.
उदय के समय आसमान में कौन सा रंग फैल जाता है?
उत्तर:
लाल रंग।

प्रश्न 27.
उषा का आगमन कैसा है?
उत्तर:
जवा कुसुम-सी।

प्रश्न 28.
अंधकार के सागर को पारकर कौन आता है?
उत्तर:
शशि-किरने।

प्रश्न 29.
प्रेमयुग्मों को आपस में क्या दे देना है?
उत्तर:
जो कुछ अपने सुंदर से हैं-उनको दे देना है।

प्रश्न 30.
वसंत ऋतु में प्रकृति को मोहक बनानेवाले अंग कौनकौन से हैं?
उत्तर:
वसंत ऋतु में प्रकृति को खूबसूरती प्रदान करने में अंकुर, किसलय, कलियाँ, फूल, पत्ते, तित्तली, भ्रमर, कोयल, मंदपवन सबकी अपनी-अपनी भूमिका है।

प्रश्न 31.
‘मेरे किसलय का लघुभव’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी एक के बिना प्रकृति की सुंदरता अधूरी रह जाती है। उस सुंदरता में किसलय भी अपना एक छोटा संसार रचता है।

प्रश्न 32.
एकांत में कौन बैठे हैं?
उत्तर:
प्रेमयुग्म।

प्रश्न 33.
‘कुछ बाधा मत डालो’ कवि क्यों ऐसा कहता है?
उत्तर:
वसंतकाल अपनी संपूर्ण भंगिमा के साथ पूरे प्रकृति में छा रहा है। इस एकांत सृजन कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। वसंतकाल में वसंत और प्रकृति अपनी सुंदरतम चीज़ों को बिना माँगे आपस में समर्पित करते हैं। यही समर्पण सृजन सौंदर्य का रहस्य होता है। प्रेमिका अपने संपूर्ण रूप – सौंदर्य से युक्त होकर प्रेमी के जीवन में छा रही है। प्रेमी – प्रेमिका के मिलन और प्रणय-सृजन के अपूर्व एवं रहस्यमयी बेला में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 34.
सृजन का सौंदर्य कैसे पूर्ण होता है?
उत्तर:
प्रेम के चरमोत्कर्ष क्षणों में प्रेमी-प्रेमिका का दुवैतभाव समाप्त हो जाता है और दोनों एकाकार हो जाते हैं। सृजन के वे क्षण सृष्टि के सुंदरतम सौंदर्य की वेला भी है।

Plus One Hindi मधुऋतु Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को,
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूं.
नई व्यथा साथिन को!
वसुधा नीचे ऊपर नभ हो.
नीड़ अलग सबसे हो,
झाड़खंड के चिर पतझड़ में
भागो सूखे तिनको!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
मधुऋतु

प्रश्न 2.
कविता के ‘नम’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (आकाश, नीड़, भूमि, पतझड़)
उत्तर:
आकाश

प्रश्न 3.
वसंत के आगमन पर सूखे तिनकों को क्या करना है?
उत्तर:
कवि कहते हैं कि वसंत के आगमन पर सूखे तिनकों को भागना है क्योंकि वसंत नयी प्रतीक्षा का समय है।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश श्री जयशंकर प्रसाद के मधुऋतु नामक कविता से है। प्रसाद जी छायावादी कवियों में अग्रणी है। झरना, आँसू, कामायनी आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। कवि के साधारण जीवन में वसंत ऋतु अचानक आ गई है। वसंत काल केवल कुछ दिन केलिए आता है। इसलिए कवि अपनी छोटी सी कुटिया में प्रेम के नई व्यथा सहेली केलिए रचना चाहता है। कवि का कहना है कि वह अपना नीड़ यानी घर धरती और आकाश के बीच सृजन करना चाहता है। प्रेम साधारण जीवन से परे है। अपने जीवन रूपी जंगल से सूखे तिनकों को भागने केलिए कवि कहते है क्योंकि वसंत केलिए वह अपने आपको सजाना चाहता है।

यहाँ कवि तत्सम शब्दों से प्रेम और उसकी पीड़ा का वर्णन करते हैं। जीवन में कुछ खोने से ही कुछ प्राप्त करेगा। यह एक छात्रानुकूल कविता हैं। नयी पीढ़ी को आह्वान करते है कि त्याग से ही हमारे जीवन में तरक्की होगा।

सूचना :

निम्नलिखित कवितांश पदें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा. किनको?
सिहर भरी कैंपती आवेंगी
मलयानिल की लहरें,
चुंबन लेकर और जगाकर
मानस नयन नलिन को।

प्रश्न 5.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
मधुऋतु

प्रश्न 6.
कविता के ‘नयन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (कमल, आँख, हवा, लहर)
उत्तर:
आँख

प्रश्न 7.
मलयानिल की लहरें कैसे आती हैं?
उत्तर:
सिहर भरी कैंपती आवेंगी मलयानिल की लहरें।

मधुऋतु Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 1
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 12

मधुऋतु Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 13
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 14

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

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Kerala State Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

साहिर लुधियानवी साहिर लुधियानवी का जन्म 8 मार्च 1921 में लुधियाना में हुआ। आप प्रसिद्ध शायर तथा गीतकार थे। आपकी शिक्षा लुधियाना के खालसा हाइस्कूल में हुई। लाहौर तथा मुंबई आपकी कर्मभूमि रही। तल्खियाँ’ आपका पहला कविता संग्रह है। ‘आज़ादी की राह पर’ नामक फ़िल्म के लिए आपने पहली बार गीत लिखे। 25 अक्तूबर 1980 को दिल का दौरा पड़ने से आपका निधन हो गया।

वह सुबह कभी तो आएगी Summary in Hindi

‘वह सुबह कभी तो आएगी’ में गीतकार एक अच्छी सुबह की प्रतीक्षा करते हैं। गीतकार कहते हैं, कभी वह सुबह आएगी तो इन बीती हुई काली सदियों के सिर से रात का आँचल नीचे की ओर जाएगा। तब दुःख का काला बादल पिघल जाएगा। दुःख के बदले सुख का सागर उमडेगा। आकाश खुशी से नाचेगा और धरती मधुर गीत गाएगी।

यहाँ गीतकार स्वतंत्र भारत का सपना देखते हैं।
गीतकार कहते हैं – कभी वह सुबह आएगी तो ये भूख और बेकारी के दिन बीत जाएँगे। संपत्ति और ठेकेदारी के दिन टूटेंगे। उनके स्थान पर एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी।

संसार के सारे परिश्रमी लोग खेतों से उस दिन का वेतन लेकर आयेंगे। गरीबी के अंधेरे बिलों से वे बाहर आएँगे। तब वे मूल्यहीन या विवश नहीं होते। तब दुनिया शांति और खुशहाली से सजाएँगे।

वह सुबह कभी तो आएगी Summary in Malayalam and Translation

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

” ആ പ്രഭാതം എന്നെങ്കിലും വരികയാണെങ്കിൽ’ എന്ന കവിതയിൽ കവി ഒരു നല്ല പ്രഭാതത്തിന്റെ വരവും കാത്തിരിക്കുകയാണ്.

– കവി പറയുന്നു, “ആ നല്ല പ്രഭാതം എന്നെങ്കിലും വരികയാണെങ്കിൽ കഴിഞ്ഞു. പോയ ആ കറുത്ത നാളുകളുടെ ശിരസ്സിൽ നിന്നും വസ്ത്രാഗം താഴേയ്ക്കുവീഴും. അന്ന് ദുഃഖത്തിന്റെ കാർമേഘം അലിഞ്ഞ് ഇല്ലാതാകും. ദുഃഖത്തിന്റെ സ്ഥാനത്ത് സന്തോ ഷത്തിന്റെ സമുദ്രം നിറഞ്ഞൊഴുകും. ആകാശം സന്തോഷംകൊണ്ട് നൃത്തം ചെയ്യും. ഭൂമി മധുരഗീതം ആലപിക്കും.

ഇവിടെ കവി സ്വതന്ത്രഭാരതമാണ് സ്വപ്നം കാണുന്നത്. – കവി പറയുന്നു, എന്നെങ്കിലും ആ പ്രഭാതം വന്നാൽ വിശപ്പിന്റെയും തൊഴിലില്ലാ യ്മയുടെയും ഈ ദിനങ്ങൾ കടന്നുപോകും. സമ്പത്തിന്റെയും ഏകാധിപത്യത്തിന്റെയും കാലം അവസാനിക്കും. അതിന്റെ സ്ഥാനത്ത് സുന്ദരമായ ഒരു പുതുയുഗത്തിന്റെ അടി ത്തറ ഉയർന്നുവരും.

ലോകത്തിലെ എല്ലാ അധ്വാനികളും ജോലികഴിഞ്ഞ് കൂലിയുമായി വരുന്ന ഒരു കാലം ഉണ്ടാകും. ദാരിദ്ര്യത്തിന്റെ ഇരുട്ടു നിറഞ്ഞ മാളത്തിൽ നിന്നും അവർ പുറത്തു വരും. അന്ന് അവർ വിവശരോ വിലയില്ലാത്തവരോ ആയിരിക്കുകയില്ല. അങ്ങനെ ലോകം ശാന്തിയും സമൃദ്ധിയും കൊണ്ട് അലങ്കരിക്കപ്പെടും.

 

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

वह सुबह कभी तो आएगी शब्दार्थ Word meanings

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी 2

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता)

हाइकू (Text Book Page No. 78-81)

मेरी खोज

प्रश्न 1.
हाइकु हाइकू का मूलभाव क्या है?
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 1
उत्तर:

  1. माँ का प्यार सबसे महत्तर हैं। किसी भी हालत में माँ अपने बच्चे को नहीं छोड़ता।
  2. हमारा मन ही सुख और दुख देता है। सुख-सुविधाओं से नहीं मन की खुशी से आनंत मिलेगा।
  3. जीवन के हरएक अवस्थाओं को पहचानकर हमें जीना होगा। परिवर्तन प्रकृति का तत्व हैं।
  4. प्रकृति और मानव के बीच का संबंध अटूट हैं। जीवन प्रदान करना हर व्यक्ति या वस्तु के धर्म हैं।
  5. प्यार सबसे सुदृढ संबंध हैं। वह हमेशा कायम रहेगा।
  6. जीवन में सच्ची रस को प्राप्त करने के लिए विविध अनुभवों से गुसरना ही चाहिए। सुख-दुःख के मिश्रण है जीवन।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
प्रत्येक हाइकु की आस्वादन टिप्पणी तैयार करें।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 2
उत्तर:
1. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं।
आकाश में गूंज और आँधी होने से पक्षियों के । नीड़ नीछे गिरते हैं। शिशु पक्षि उड़ नहीं सकता। माँ बच्चों के पास ही रहती है – छोडकर जाते नहीं। जितने ही बड़ी विपत्ति पड़े, माँ अपने बच्चे को छोड़कर नहीं जाएगा। माँ का प्यार इतना बड़ा है और गहरा है। सामाजिक सच्चाई को यहाँ दिखाया गया है।

2. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। भाद्रपद महीना शोभा देने लगा। यानी बहुत अच्छा मौसम है। लेकिन विरहिणी का जीवन सूखा ही हैं। मौसम बदलने से उसके जीवन में किसी भी प्रकार के अंतर नहीं होता हैं। हमारे जीवन में प्रिय-जन न होते तो जीवन दुःखपूर्ण हो जाते हैं। मौसम कितने ही अच्छा हो, जितने ही सुखसुविधायें हो – लेकिन हम अकेले है तो सुख नहीं मिलेगा। विरह की व्यथा हमेशा दुःख ही देगा।

3. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह माने या माने मेहमान के रूप में बुढापा आयेगा। अर्थात बुढापे को निमन्त्रण (invite) करने की ज़रूरत नहीं हैं। परिवर्तन धरती की हकीकत हैं। शैशव से लेकर बुढापा तक परिवर्तन के साथ हम जीवन बिताते हैं। बुढापा किसी भी व्यक्ति को पसंद नहीं, लेकिन समय के अनुसार हर व्यक्ति बुढापे की ओर जाएगा, हमें जीवन के सभी अवस्थाओं को स्वीकार करना होगा।

4. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। वर्षा ऋतु धन्य हैं, क्योंकि पानी जीवनदायिनी हैं। खेतों में नये जीवन की कविताएँ बोनेवाले किसान के कारण वर्षा धन्य हो जाते हैं। कविता यानी भोजन हर व्यक्ति के जीवन केलिए अनिवार्य है। प्रकृति के कारण हमारा जीवन संपन्न हो रहा हैं। प्रकृति और मानव के बाच की रिश्ता इतना अटूट है। किसान लोग तन-तोड़ मेहनत करके दूसरों केलिए भोजन तैयार करते हैं। जीवन को कायम रखने केलिए पानी और भोजन अनिवार्य हैं।

5. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। बाग में फूल खिलने पर तुझे याद आती हैं। हर सुंदर वस्तु में प्रियतम की यात आती है। प्रेमी-प्रेमिका के दिल एक दूसरे की इंतज़ार में है। हर वस्तु में एक दूसरे की याद आती हैं। क्योंकि प्रेम कभी भी मुरझाता नहीं, एक-दूसरे से अलग होने पर भी वह एक दूसरे से अलग नहीं है। प्रेम की शक्ति को यहाँ दिखाते हैं।

6. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। जिनको दर्द का अहसास नहीं हुआ है, उसे आँसू का मूल्य नहीं मालूम, आँसू और ओस देखने में एक समान है। लेकिन दोनों के पीछे की यथार्थ अलग है। दुख जीवन की हकीकत है, वेदना ही हमें पवित्र बनाएगा। रोने के बाद हमें शांती मिलते हैं। सुख का आनंद को समझने के लिए दुःख महसूस करना चाहिए। अन्यथा जीवन व्यर्थ हो जाएगा।

प्रश्न 2.
हाइकू कविताओं का संकलन करें।
उत्तर:
1. यह जीवन
किस तरह बाँचूँ
कोरा कागज़।

2. मन कागज़
छोड़ा दूर गगन
बना पतंग।

3. जीवन-गाथा
लिखी आँसू की स्याही
न बाँची जाए।

4. है व्यर्थ कथा
उतरी कागज़ पे
टूटी कलम।

5. लिख दे मृत्यु
अंतिम सुनवाई
तोड़ कलम।

6. सहमे पेड़
तूफानों से कहते-
हमें छोड़ दो।

7. डालियाँ झुकीं
बहती धाराओं पे
पीने को पानी।

8. पीर पराई
बेदिल की आँख में
नही समाई।

9. नैनों का नीर
किसी को न दिखाना
पीते रहना।

10. दुःख समझे
वही जो दुःख पाए
और क्या जाने।

11. उलझे रहै
जीवन की रस्मों में
जी ही न पाए।

12. बाँधे पाश में
उलझन सर्पिणी
ईश पुकारूँ!

13. बढ़े इच्छाएँ
मन को उलझाएँ
राह न पाएँ।

14. जकड़े रहे
कर्तव्य का पिंजरा
मन बौराए।

15. क्यों उलझन
बाँधा है जब स्वयं
अपना मन।

16. कैसी ये पीर
उला- सा जीवन
बहे है नीर।

17. रोएँ-हँसाएँ
जीवन् संग खेलें
ये उलझने।

18. जब भी खोलूँ
उलझती ही जाएँ
जीवन-गाँठे।

19. हुई बेमानी
उलझनों से भरी
ये जिंदगानी।

20. जीवन-नैया
फँसी भँवर-जाल
तू दे निकाल।

21. सखियाँ बनी
शैतान. उलझनें
साथ ना छोड़ें।

22. रोएँ-रूलाएँ
चिढ़ाके बाग जाएँ
यूँ उलझाएँ।

23. बहुत हुई
अब कशमकश
छोड़ो भी बस।

24. कभी सुलझी
कभी उलझी रही
जीवन-डोर।

25. रस्मों के गाँव
उलझ गए मेरे
भावों के पाँव।

Plus Two Hindi हाइकू Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
सूचनाः निम्नलिखित हाईकू पढ़ें।
धन्य है वर्षा
खेतों में कविताएँ
बोते किसान।
हाईकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
श्री भगवतशरण अग्रवाल हिंदी के एक प्रमुख हाइकू कवि है। प्रस्तुत हाइकू में कवि प्रकृति और मानव के अटूट संबंध के बारे में कहते हैं। जीवन प्रदान करना हर व्यक्ति या वस्तु का धर्म है। वर्षा ऋतु धन्य है क्योंकि पानी जीवनदायिनि है, खेतों में नये जीवन की कविताएँ बानेवाले किसान के कारण वर्षा धन्य हो जाते है। कविता या भोजन हर व्यक्ति के जीवन केलिए आवश्यक है।

प्रश्न 2.
सूचनाः हाईकू पढ़ें।
जब भी कोई
फूल खिला बाग में
तूं याद आया।
हाइकू का भावार्थ लिखे।
उत्तर:
प्रसिद्ध हाइकू कवि श्री भगवतचरण अग्रवाल की एक प्रसिद्ध हाइकू है यह।
बाग में फूल खिलने पर तुझे याद आती है। हर सुंदर वस्तु में प्रियतम की याद आती है, यानि प्रेमी-प्रेमिका के दिल एक दूसरे की इंतज़ार में है, हर वस्तु में एक दूसरे की याद आती है क्योंकि प्रेम कभी भी मुरझाता नहीं, एक-दूसरे से अलग होने पर भी वह एक दूसरे से अलग – नहीं है। प्रेम की शक्ति असीम हैं।

प्रश्न 3.
यह हाइकू पढ़ें।
भादों सरर्स
पर विरहिणी का
सूखा आँगन।
हाइकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवतशरण अग्रवाल का काफी योगदान है। उनकी हाइकू संग्ह का नाम है ‘इन्द्रधनुष”। प्रस्तुत हाइकू इससे ली गयी है।

विरहिणी की पीड़ा का वर्णन करते हुए कवि कहते हैं सुख भरे भाद्रपद महीने में भी विरहिणी का मन अपने प्रिय की चिंता से रूखा-सूखा रहता है। सुख-सुविधाएँ जितनी भी हो, विरहिणी के लिए सब निरर्थक है। अपने प्रिय के बिना वह खुश नहीं रह सकती। प्रिय के बिना उसके लिए सब कुछ निरर्थक एवं अधूरा लगता है। कम शब्दों में बड़ी बातें कहने की क्षमता प्रत्येक हाइकू में है। हाइकू साहित्य की यही सबसे बड़ी विशेषता है। प्रस्तुत हाइकू इसका सशक्त उदाहरण है।

प्रश्न 4.
सूचनाः निम्नलिखित हाईकू पढ़ें।
मान न मान
मैं तेरा मेहमान
बने बूढापा
हाईकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हिन्दी साहित्य जगत में हाइकू को अगल पहचान दिलाने में श्रेष्ठ है श्री भगवत शरण अग्रवाल। प्रस्तुत हाइकू उनका काव्य संग्रह “इंद्रधनुष” से लिया गया है। हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता है। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हरेक को उसे स्वीकारना पडेगा। प्रत्येक हाइकू अपने में पूर्ण है। यही हाइकू की विशेषता है।

प्रश्न 5.
सूचना : निम्नलिखित हाइकू पढ़ें।
धन्य है वर्षा
खेतों में कवितायें
बोते किसान
हाइकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
श्री भगवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य जगत में हाइको को प्रमुख स्थान दिलानेवाला है। इन्द्रधनुष आपका हाइकू संग्रह है।

इस हाइकू में प्रकृति और मनुष्य का उपजाऊ रूप दिखाने का कोशिश किया है। वर्षा ऋतु धन्य है, क्योंकि पानी जीवनदायिनी है। खेतों में तनतोड़ मेहनत करके नये जीवन के लिए खेती करनेवाले किसान भी धन्य हैं। कविता यहाँ भोजन के पर्यायवादी शब्द बनते हैं। कवि कविता के ज़रिये नये नये विचार प्रकट करते हैं। किसान खेती करके वर्षा को भी धन्य बना देता है।

प्रश्न 6.
सूचनाः निम्नलिखित हाइकू पढ़ें।
मान न मान
मैं तेरा मेहमान
बने बुढ़ापा
हाइकू कविता का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हाइकू एक विशेष काव्य-शैली है। जापानी कविता से प्रेरणा पाकर ही हिन्दी में भी हाइकू का उदय हुआ। हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवत शरण अग्रवाल का विशेष योगदान रहा है। ‘इन्द्रधनुष’ उनका प्रसिद्ध हाइकू संग्रह है। बुढ़ापे के बारे में कवि कहते हैं – हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता है। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हर व्यक्ति को उसे मानना ही पड़ता है। अर्थात् एक न एक दिन हर व्यक्ति बूढ़ा हो जाएगा। बुढापे के बारे में कवि ने यहाँ कहा गया है। प्रत्येक हाइकू अपने आप में पूर्ण एवं गरिमामय है।

प्रश्न 7.
सूचनाः निम्नलिखित हाइकू पढ़ें।
जब भी कोई
फूल खिला बाग में
तू याद आया।
हाइकू कविता की विशेषताओं का परिचय देते हुए भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हाइकू एक विशेष काव्य-शैली है। जापानी कविता से। प्रेरणा पाकर ही हिन्दी में भी हाइकू का उदय हुआ। हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवत शरण अग्रवाल का विशेष योगदान रहा है। ‘इन्द्रधनुष’ उनका प्रसिद्ध हाइकू संग्रह है।

प्रेम की महिमा का गायन करते हुए कवि कहते हैं – प्रेम कभी नहीं मुरझाता है। प्रेमी-प्रेमिका के दिल में हमेशा यादें बनी रहती है। प्रत्येक फूल के खिलने में प्रेमी को प्रेमिका की याद आती है। प्रेम की गरिमा यहाँ व्यक्त की गयी है। प्रत्येक हाइकू अपने आप में पूर्ण एवं गारिमामय है।

हाइकू Profile

भगवतशरण अग्रवाल का जन्म 1930 को उत्तरप्रदेश के बरेली में हुआ। वे गुजरात विश्वविद्यालय के निदेशक थे। हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में उनका काफी योगदान रहा। अपनी साहित्य सेवा के लिए वे अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। इंद्रधनुष’ उनका प्रमुख हाइकू संग्रह है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 3
– भगवतशरण अग्रवाल
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 4

हाइकू Summary in Malayalam

हाइकू Summary in Malayalam 1

हाइकू Glossary

हाइकू – 1

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 5
प्रकृति के प्रकोपों के कारण कभी पेडों से नीड़ नीचे गिरते हैं, परंतु नीचे गिरे बच्चों को छोड़कर उनकी माँ भाग नहीं जाती। माँ की ममता अतुलनीय है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 6

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 7

हाइकू – 2

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 8
विरहिणी की जीवनगाथा आहों और पीड़ाओं की है। पति के दूर होने से सूख भरे मौसमों में भी उसका मन हमेशा सूखा – सूखा रहता है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 9

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 10

हाइकू – 3

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 11
हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता हैं। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हरेक को उसे स्वीकारना पड़ेगा।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 12

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 13

हाइकू – 4

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 14
वर्षा जीवनदाता है, तन-तोड़ मेहनत करके खेतों में नये जीवन की कविताएँ खिलाने या बोनेवाले किसान के कारण वह धन्य हो जाती है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 15

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 16

हाइकू – 5

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 17
प्रेम कभी नहीं मुरझाता है। प्रेमी-प्रेमिका के दिल में हमेशा यादें हरा रहती हैं।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 18

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 19

हाइकू – 6

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 20
वेदना मन को पवित्र बनाती है, वेदना के कारण खुशी और प्यार का महत्व बनता है, जो इसे पहचानते नहीं, उसके सामने आँसू का कोई मूल्य नहीं होता ।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 21

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 22

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं (कविता)

सपने का भी हक नहीं (Text Book Page No. 65-67)

मेरी खोज

प्रश्न 1.
मगर नींद के टूटने के पूर्व ही नोटीस बैंक की आ धमकी सपने में। कवि यहाँ किस सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं?
उत्तर:
गरीब लोग बैंक से कर्ज लेते हैं और उसका भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। अंत में बैंक से आनेवाली नोटीस की भीषणता में जीने के लिए वे विवश हो जाते हैं। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
हिंदीतर प्रदेशों के लेखकों में डॉ.जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ है ‘मुक्तधारा’, ‘उलझन आदि। “सपने का भी हक नहीं’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें साधारण से साधारण एक मज़दूरिन की अवस्था का चित्रण है।

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन सपने में लीन हो जाती है। सपने में अब वह एक विशाल घर में सो रही है। दो मंज़िलवाली अपने घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक, रसोई और पूजा के लिए भी अलग-अलग कमरे हैं। नये घर की छत काँक्रीट की है, दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है। ग्राइन्टर, फ्रिड्ज और मैक्रोवेव सभी से युक्त रसोई अत्यंत शानदार लग रहा है। मगर अचानक सपने में ही एक डरावनी सच्चाई उसके आगे बैंक के नोटीस के रूप में आ धमती है। इसके साथ साथ असकी सारे सपने छिन्न-भिन्न हो जाती है और जाग जाती है।

प्रस्तुत कविता में डॉ.जे बाबू ने एक कड़वी सच्चाई को , यहाँ प्रस्तुत किया है। कवि कह रहे हैं आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सने का भी हक नहीं है, सपने में भी जीवन की भीषणता और उसके ऊपर लादे कर्ज से वे मुक्त नहीं है। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

Plus Two Hindi सपने का भी हक नहीं (कविता) Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
“मगर नींद के खुलने के पूर्व ही नोटिस बैंक की आ धमकी सपने में।” – इस सपने के बारे में युवती.अपनी सहेली को एक पत्र लिखती है। वह पत्र तैयार करें।

  • झोंपड़ी में रहकर महल का सपना देखने वाली मज़दूरिन ।
  • सामाजिक सच्चाई का कठोर यथार्थ।
  • सपना देखना भी डरावना बन जाना।

उत्तर:

इलाहाबाद
18.03.2016

प्यारी सीमा,
ईश्वर की असीम अनुकंपा से मैं यहां खुश हूँ। मेरा विश्वास है तुम भी वहाँ खूश होगी। तुम्हें एक पत्र लिखने के बारे में कई दिनों से मैं सोच रहा हूँ। लेकिन अभी समय मिला है।

एक खास बात बताने के लिए ही मैं यह पग लिख रहा हूँ। हम गरीबों की हालत कभी भी युधारेगी नहीं। कितनी सालों से यह झोंपड़ी में रह रही हूँ। कई महलों में मज़दूरिन बनकर काम कर रही भी हूँ। शायद इसीलिए ही आज मैं ने ऐसा एक सपना देखा जिसमें मैं नया घर बनवा रही हूँ। लेकिन क्या करूँ मित्र, मकान तो पूरा नहीं हो गया और सपने में ही बैंक से नोटिस आ गयी। हम गरीबों का हाल सुधरेगा ही नहीं। हमें सपने देखने का भी हक नहीं है।

मित्र, अपनी लाचारी के कारण ही मैं यह पत्र लिख रही हूँ। इतना लिखकर मैं यह पत्र समाप्त कर रही हूँ। घरवालों से मेरा प्यार और प्रणाम कहना। जवाबी पत्र की प्रतीक्षा में……..

तुम्हारी मित्र,
राधा
(हस्ताक्षर)

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“इक कमरेवाली झोपड़ी में
बच्चों के सो जाने पर
मैं अपनी मन-दीवार पर
अपना विस्तृत घर खींचने लगी।
खाने-पीने-सोने के
अलग-अलग कमरे,
रसोई यदि बूठक के
निकट रखती तो
पूजा का कमरा कहाँ होगा?”

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता का अंश है?
(मातृभूमि, सपने का भी हक नहीं, आदमी का चेहरा)
उत्तरः
सपने का भी हक नहीं।

प्रश्न 2.
स्त्री अपना विस्तृत घर कहाँ खींचने लगी?
उत्तरः
स्त्री के मन दीवार पर |

प्रश्न 3.
स्त्री अपने घर में कौन-कौन से कमरे बनवाना चाहती है?
उत्तरः
स्त्री अपने घर में खाने-पीने-सोने के कमरे, रसोई और पूजा का कमरा बनवाना चाहती है।

प्रश्न 4.
हिंदीतर भाषी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवितांश की असावादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिंदीतर भाषी कवियों में डॉ जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘सपने का भी हक नही’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें एक साधारण मजदूरिन की अवस्था का सच्चा चित्रण है।

एक करमेवाली झोंपडी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन नए घर की सपने में लीन हो जाती है। दो मंजिलेंवाली उसकी घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक, रसोई और पूजा के लिए भी अलग-अलग कमरे हैं। गरीब मजदूरिन की सपने के माध्यम से एक कड़वी सामाजिक सच्चाई की प्रस्तुति यहाँ हुई है। कवि यह बताना चाहते हैं कि आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सपने का भी हक नहीं है। जीवन की भीषणता सपने में भी उसके आगे साकार होकर उठी है। वे चैन से सो भी नहीं सकते और सपना भी नहीं देख सकते हैं। यही सामाजिक सच्चाई की ओर यह कविता इशारा करती है।

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
काँक्रीट की छत के
नीचे पीले रंग की
दीवारों के मध्य में
खिड़की-दरवाज़े सब रख दिए।
संगमरमर की चमक
ज़मीन पर; उस चमक पर
चमकती मेज़-कुरसियाँ
टी.वी, होम थियेटर बैठक में भाते।

प्रश्न 5.
यह कविता किसकी है?
(कुँवर नारायण, डॉ.जे.बाबु, मैथिलीशरण गुप्त)
उत्तरः
डॉ.जे.बाबु

प्रश्न 6.
खिड़की-दरवाज़े कहाँ है?
उत्तरः
खिड़की-दरवाज़े दीवारों के मध्य में है।

प्रश्न 7.
दीवारों का रंग क्या है?
उत्तरः
दीवारों का रंग पीला है।

प्रश्न 8.
ज़मीन पर किसकी चमक है?
उत्तरः
ज़मीन पर संगमरमर की चमक है।

प्रश्न 9.
बैठक की शोभा बढ़ानेवाली चीजें क्या-क्या हैं?
उत्तरः
मेज़-कुरसी, टी.वी, होम थियेटर आदि बैठक की शोभा बढ़ानेवाली चीजें हैं।

प्रश्न 10.
कवितांश की अस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिंदीतर भाषी कवियों में डॉ जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘सपने का भी हक नही’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें एक साधारण मज़दूरिन की अवस्था का सच्चा चित्रण है।

सपने में बनाई घर की छत काँक्रीट की है। घर के दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है। चमकती संगमरमर से बनी ज़मीन के ऊपर घर की शोभा और शान बढ़ाने के लिए मेज़, कुरसी, होम थियेटर आदि सब कुछ है। आधुनिक सभी सुविधाओं से युक्त घर की सपना वह देखती है।

गरीब मज़दूरिन की सपने के माध्यम से एक कड़वी सामाजिक सच्चाई की प्रस्तुति यहाँ हुई है। कवि यह बताना चाहते हैं कि आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सपने का भी हक नहीं है। जीवन की भीषणता सपने में भी उसके आगे साकार हो उठे हैं। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते हैं। यही सामाजिक सच्चाई की ओर यह कविता इशारा करती है।

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
क्रांति के लिए उठे कदम
क्रांति के लिए जले मशाल।
भूख के विरुद्ध भात के लिए
रात के विरुद्ध प्रात के लिए
जुल्म के खिलाफ जीत के लिए
हम लड़ेंगे हमने ली कसम।

प्रश्न 11.
कवि ने किसके के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है?
उत्तरः
क्रांति के लिए

प्रश्न 12.
‘शपथ’ शब्द का समानार्थी शब्द कविता से ढूँढें ।
उत्तरः
कसम

प्रश्न 13.
‘हम लड़ेंगे, हमने ली कसम’ – कसम क्या है?
उत्तरः
जुल्म के खिलाफ जीत केलिए लड़ने का कसम हमने लिया है।

प्रश्न 14.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
यह हिंदी की एक विख्यात कविता है। इसमें गरीब लोगों की दीन अवस्था का सुन्दर चित्रण हुआ है। कवि कहते हैं – क्रांति के लिए हमें कदम उठाना चाहिए। दूसरों की भूख मिटाने के लिए हमें कर्मनिरत रहना है। जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए हमें ज़रूर शक्तिशाली बनना है। यह एक सुंदर समकालीन कविता है। समकालीन कविताओं में कवि का दृष्टिकोण अत्यंत सुन्दर मात्रा में झलकती है। कविता की भाषा सरल, सरस और जोशीली है।

सपने का भी हक नहीं Profile

हिंदीतर प्रदेश के हिंदी साहित्यकारों में प्रमुख है डॉ जे बाबू । उनका जन्म केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में 1952 को हुआ। मुक्तधारा, उलझन और उलाहना उनकी कविताओं का संकलन है। बिपाशा अखिल भारतीय कहानी पुरस्कार और हिंदीतर भाषी लेखक पुरस्कार से वे सम्मानित हैं।
सपने का भी हक नहीं Profile 1
– डॉ जे बाबू
सपने का भी हक नहीं Profile 2

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Hindi

हिंदीतर प्रदेशों के लेखकों में डॉ.जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। “सपने का भी हक नहीं’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें साधारण से साधारण एक मज़दूरिन की अवस्था का चित्रण है।

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहकर बडी महत्व की सपना देखनेवाली मज़दूरिन का चित्र अत्यंत मार्मिक है। सपने में भी उसके आगे बैंक की नोटीस दिखाई दे रही है। कवि कह रहे हैं…..

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन अपने बच्चों के सो जाने के बाद नींद में पड़ जाती है और सपने में लीन हो जाती है। सपने में अब वह एक विशाल घर में सो रही है। दो मंज़िलवाली अपने घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक और रसोई के लिए भी अलगअलग कमरे हैं। वह सोच रही है कि पूजा की कमरा कहाँ रखना है?

पूजा के लिए भगवान को बिठाने की कमया ऊपर की मंजिल में रखना वह चाहती है ताकि उसकी सारी समस्याएँ दूर हो सके। नये घर की छत काँक्रीट की है, दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है।

ज़मीन तो चमकती संगमरमर का है और पूरा घर मेज़, कुरसी, टी.वी, होम-थियेटर जैसे सभी आधुनिक सुविधाओं से भरा है। रसोई तो अत्यंत नवीन है। ग्रानाइटर, फ्रिड्ज और मैक्रोवेव सभी से युक्त रसोई अत्यंत शानदार लग रहा है। सपने के दुमज़िले घर में रहनेवाली मज़दूरिन धूप के फैलने तक सो रही है। मगर अचानक सपने में ही एक डरावनी सच्चाई उसके आगे बैंक के नोटीस के रूप

में आ धमती है। इसके साथ साथ असकी सारे सपने छित्र-भित्र हो जाती है और जाग जाती है।

प्रस्तुत कविता में डॉ.जे बाबू ने एक कड़वी सच्चाई को यहाँ प्रस्तुत किया है। कवि कह रहे हैं आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सने का भी हक नहीं है, सपने में भी जीवन की भीषणता और उसके ऊपर लादे कर्ज से वे मुक्त नहीं है। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते।

गरीब लोग बैंक से कर्ज लेते हैं और उसका भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। अंत में बैंक से आनेवाली नोटीस की भीषणता में जीने के लिए वे विवश हो जाते हैं। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam 1

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam 2

सपने का भी हक नहीं Glossary

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Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य)

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दवा (Text Book Page No. 98-102)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन किन-किन पत्रों के हैं?
i. “कुछ एसी दे दें, जिससे ये 5 – 6 घंटे जीवित रह सकें।”
उत्तरः अनंगजी की पत्नी ने कहा।

ii. “मैं इन्हें मज़े में कई घंटे जीवित रख सकता हूँ”।
उत्तरः
अनंगजी के मित्र ने कहा।

iii. “जाते जाते कुछ सुना जाइए।”
उत्तरः
अनंगजी के मित्र ने कहा।

iv. “आपकी प्रार्थना टाली भी नहीं जा सकती।”
उत्तरः
अनंगजी ने कहा।

प्रश्न 2.
मित्र की बात सुनते ही अनंगजी उठकर बैठ गए। इनमें कौन-सा व्यंग्य है?
उत्तरः
जीवन के अंतिम क्षण तर हर मनुष्य अपनी प्रशंसा के भूखे रहते हैं।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कवि अनंग के नये कविता-संग्रह का प्रकाशन हुआ है। कविता-संग्रह की बिक्री बढाने के लिए एक विज्ञापन तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q1

प्रश्न 2.
कहानी के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रसंगों के संवाद आगे बढाएँ।
उत्तरः
संवाद – 1
पत्नी : अरे डॉक्टर साहब! इनको एक्स्टेशन मिलेगा क्या?
डॉक्टर : नहीं, इनको बचाना मुश्किल है।
पत्नी : प्लीस डॉक्टर साहब, ऐस मत कहिएगा।
डॉक्टर : जी सुनिए, जो कुछ करना है, सब हमने कर डाला है।
पत्नी : डॉक्टरजी, मेरे परिवारवाले यह सह नहीं सकते। इनका और कोई दवा नहीं?
डॉक्टर : इसका कोई फायदा नहीं होगा।
पत्नी : जब मेरा बेटा आएगा, उससे मैं क्या कहूँगा। ये पूरे समाज से मैं क्या कहूँगा?
डॉक्टर : आप अपने बेटे से जल्दी ही आने को कहो। शाम तक इनका रहना असंभव है।

संवाद – 2

पात्र
मित्र, पत्नी और डॉक्टर

मित्र : कैसे हैं मेरे दोस्त?
पत्नी : डॉक्टर का कहना है, इनका बचना मुश्किल है।
डॉक्टर : मुश्किल नहीं, असंभव है।
पत्नी : डॉक्टर साहब! आप यह क्या कह रहे हैं?
मित्र : आप निश्चित रहिए। मेरे मित्र को मैं जीवित रह सकता हूँ। केवल शाम तक ही नहीं, अनेकों साल के लिए।
डॉक्टर : नहीं जी। आप कुछ भी नहिं कर सकते।
मित्र : डॉक्टरजी, आप देखिए मेरा कमाल |
पत्नी : क्षमा कीजिए डॉक्टर साहब। मुझे मेरे पतिदेव की जान बचाना है। कृपया आप इसे एक अवसर दीजिए।
डॉक्टर : अच्छा! तो अब हमारा कोई काम नहीं है! आप जो चाहे कर लो।
मित्र : आप निश्चित रहिए बहनजी, मेरि मित्र को बचाना मेरा कर्तव्य है।

संवाद – 3

पात्र
मित्र और कवि

मित्र : अरे यार! मैं पहूँच गया हूँ।
कवि : मित्र, मैं मर जाउँगा क्या?
मित्र : अरे अनग! तुम्हारा यह हाल मैं देख नहीं सकता।
कवि : डॉक्टर क्या कर रहा है, मित्र?
मित्र : उन्हें छोड़ दीजिए। तुम्हारा रक्षा मैं करूँगा।
कवि : मैं अब मरना नहीं चाहता है मित्र। कुछ कीजिएगा।
मित्र : आप निश्चित रहिए। आप के कंठ से एक सुंदर कविता सुनकर कितने दिन हुए?
कवि : अच्छा! अब भी आप तरस रहे हैं, मेरी कविता के लिए? ज़रा वह पुस्तक लीजिए।
मित्र : लो मित्र, सुनाइए। जाते-जाते कुछ सुनाकर ही जाइए।
कवि : अच्छा मित्र, लो, सुनो मेरी कविता।
मित्र : अरे वाह! वाह!! यदि आप न होते तो इस दुनिया का क्या होता?

‘दवा’ परसाईजी के एक व्यंग्य कहानी है। इसमें झूठी प्रशंसा चाहनेवालों पर कवि ने व्यंग्य किया है। कवि अनंगजी अपने अंतिम क्षण बिता रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनका बचना संभव नहीं है। परिवारवाले सब अत्यंत दुःखी है। शाम के समय उसके पुत्र के पहूँचने तक भी उनका जीवित रहना संभव नहीं है।

इसी समय अनंगजी का मित्र आकर कहता है वह अनंगजी की रक्षा करेगा। परिवारवालों को कमरे के बाहर बिठाकर मित्र और अनंगजी बात करने लगे। अनंगजी की झूठी प्रशंसा करके मित्र कहता है वह उनके कंठ से कुछ सुनना चाहता है। यह सुनते ही अनंगजी उसे कविता सुनाना शुरू कर डाला। कई घंटे बीत गए। अंत में जब परिवारवाले कमरे में घुसकर देखा तो अनंगजी कवितापाठ कर रहे हैं और मित्र, जो उन्हें बचाने आया था, मरे पड़े हैं।

इसमें बिना कवित्ववाले कवियों पर परसाईजी ने तीखा व्यंग्य किया है। झूठी प्रशंसा इतनी खतरनाक है कि वह ।। ज़िंदा को मुर्दा बना देता है।

Plus Two Hindi आदमी का चेहरा (कविता) Important Questions and Answers

सूचनाः
‘दवा’ कहानी का अंश पढ़ें।

मित्र ने कहा, “खैर, मुझे कोशिश तो कर लेने दीजिए। आप सब लोग बाहर हो जाइए।” सब बाहर चले गए। मित्र अनंग जी के पास बैठे और बोलो।

प्रश्न 1.
संकेतों के आधार पर मित्र और अनंग जी के बीच का वार्तालाप तैयार करें।

  • मित्र द्वारा अनंग जी की प्रशंसा करना।
  • मित्र को देखकर अनंग जी का खुश होना।
  • मित्र द्वारा कविता-पाठ करने की विनती करना।

उत्तरः
मित्र : अरे मित्र मैं पहूँच गया हूँ।
कवि : मित्र, मैं मर जाऊँगा क्या?
मित्र : अरे अनंग, तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम तो इतने मशहूर कवि हो। इतनी आसानी से मर नहीं सकता।
कवि : लेकिन. डॉक्टर कहते है….. कि…
मित्र : तुम यह सब बात छोडो। तुम्हारी कविता सुनकर कितने दिन हुए। मैं तुम्हारा कंठ से एक सुंदर कविता सुनना चाहता हूँ।
कवि : लेकिन क्या मैं कविता आलापन कर पाऊँ।
मित्र : तुम इतने प्रसिद्ध हो। तुमको कुछ नहीं होगा।
कवि : तुम इतने हठ करते हो तो मैं ज़रूर करूँगा। ज़रा वह कविता पुस्तक दीजिए।
मित्र : यह लो, अब शुरू करो।

सूचनाः
दवा कहानी का अंश पवें और 2 से 6 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

कवि अनंग जी का अंतिम क्षण आ पहुंचा था। डॉक्टरों ने कह दिया कि ये अधिक-से-अधिक घंटे-भर के मेहमान हैं। अनंग जी की पत्नी ने कहा कि कुछ ऐसी दवा दे दें, जिससे ये 5-6 घंटे जीवित रह सकें ताकि शाम की गाड़ी से आनेवाले बेटे से मिल लें। डॉक्टरों ने कहा कि कोई भी दवा इन्हें घटे-भर से अधिक जीवित नहीं रख सकती।

प्रश्न 2.
कहानी का रचनाकार कौन है?
उत्तरः
हरिशंकर परसाई

प्रश्न 3.
अनंग जी की पत्नी ने डॉक्टर से क्या कहा?
उत्तरः
अनंग जी की पत्नी ने कहा कि कुछ ऐसी दवा दीजिए जिससे ये 5-6 घंटे जीवित रह सकें, ताकि, शाम की गाडी से आनेवाले बेटे से मिल ले।

प्रश्न 4.
डॉक्टर ने क्या जवाह दिया?
उत्तरः
डॉक्टरों ने कहा कि कोई भी दवा इन्हें घंटे-भर से अधिक जीवित नहीं रख सकती।

प्रश्न 5.
खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
कवि अनंग जी का मृत्यु निकट आया। पत्नी बेटे के आने तक कवि को जीवित रखने के लिए दवा देने को कहते है। लेकिन डॉक्टर कहते है कि यह नमुमकिन है।

प्रश्न 6.
संक्षेपण केलिए शीर्षक दें।
उत्तरः
अजीब दवा।

सूचना :
‘दवा’ कहानी का अंश पढ़ें।

कवि ‘अनंग’ जी का अंतिम क्षण का पहुंचा था। डॉक्टरों ने कह दिया कि ये अधिक-से-अधिक घंटे भर के मेहमान हैं।

प्रश्न 7.
संकेतों के आधार पर डॉक्टर और अनंग जी की पत्नी के बीच का वार्तालाप तैयार करें।

  • डॉक्टर द्वारा अनंग जी की हालत के बारे में बताना।
  • अनंग जी की पत्नी की बिनती।
  • डॉक्टर का निष्कर्ष ।

उत्तरः
अनंग जी
की पत्नी : अनंग जी की हालत कैसा है डॉक्टर?
डॉक्टर : अनंग का हालत अच्छा नहीं है। वह बचना मुश्किल है।
पत्नी : यह आप क्या कह रहा है?
डॉक्टर : मैं कुछ भी नहीं कर सकता।
पत्नी : ऐसा मत कहिए। इसे कुछ ऐसा दवा दीजिए ताकि यह कुछ और समय जीवित रहूँ। इसे कुछ समय जीवित रहना ज़रूरी है।
डॉक्टर : आप क्या कह रहे हैं?
पत्नी : हमारा बेटा आज शाम को यहाँ पहुँचेगा। वह आने तक इसे जीवित रहना होगा।
डॉक्टर : लेकिन यह एक घडे के अंतर मर जायेगा।
पत्नी : आप कुछ भी कीजिए। पाँच छः घंडे आप इसे जीवित रखिए।
डॉक्टर : यह असंभव है।
पत्नी : हाय! मैं क्या करूँ।

प्रश्न 8.
अनंगजी के पुत्र ने आने पर देखा कि ‘पिताजी कविता पढ़ रहे हैं और उनके मित्र मरे पड़े हैं।’
इस घटना का वर्णन करते हुए पुत्र अपने मित्र को एक पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तरः

दिल्ली,
25.10.2017

मित्र राजेश,
ईश्वर की असीम कृपा से मैं यहाँ खुश हूँ। मेरा विश्वास है तुम भी वहाँ सपरिवार खुश होंगे। कई दिनों से एक पत्र तुम्हें लिखने के बारे में सोच रहा हूँ। लेकिन आज ही मुझे फुरसत मिला है।

आज तो एक विचित्र घटना हुई। अब मैं दिल्ली में पिताजी के साथ हूँ। पिताजी का तबियत सबेरे खराब हो गया था और वे अस्पताल में हैं । डाक्टरों ने उनका बचना मुशकिल बता दिया था और इसलिए ही शाम की गाड़ी में मैं लोहोर से दिल्ली पहूँचा। अंतिम बार उन्हें देखने के लिए ही यहाँ पहुँचा। लेकिन कमरे में जब मैं खुसा तो देखा कि उनका एक मित्र कमरे में मरा पड़ा है और पिताजी उन्हें कविता पाठ करके सुना रहा है। शायद उनकी कविताओं की विरसत ने ही मित्र को समाप्त कर दिया है। क्या कहूँ मित्र, समाज में मेरे पिताजी जैसे अनेकों कवि और साहित्यकार हैं जो अपनी रचनाओं को सबसे श्रेष्ठ मानते हैं।

इतना लिखकर यह पत्र मैं यहाँ समाप्त करता हूँ। घरवालों से और अम्माजी से मेरा प्यार और प्रणाम कहना । जवाबी पत्र की प्रतीक्षा में ………

राम कुमार अनंग,
(हस्ताक्षर)

प्रश्न 9.
अनंगजी अपनी कविता-संग्रह का प्रकाशन करना चाहते हैं। उसके लिए एक आकर्षक पोस्टर तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q9

प्रश्न 10.
मैं इन्हें मज़े में कई घंटे जीवित रख सकता हूँ।” अनंगजी को जिंदा रखने के लिए आए मित्र अंत में मर जाता है। अनंगजी के डॉक्टर अपने डॉक्टरी जीवन की इस विचित्र घटना को डायरी में लिखता है। वह डायरी तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q10

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q10.1

प्रश्न 11.
अनंगजी की स्थिति बड़ी गंभीर है। बेटे के पहुंचने तक उसे जीवित रखने की बिनती पत्नी करती है। इस संबंध में पत्नी और डॉक्टर के बीच का संभावित वार्तालाप तैयार करें।
उत्तरः
पत्नी : डॉक्टर साहब, मेरे पति की रक्षा कीजिए।
डॉक्टर : बहिन जी, हम सब उनको बचाने की कोशिश में हैं।
पत्नी : मेरी बात तो सुनिए जी।
डॉक्टर : आप बताइए।
पत्नी : शाम की गाड़ी में मेरे बेटे आनेवाला है। कई महीने हुए उसके पिताजी से मिलकर।
डॉक्टर : आप बताइए, हमें क्या करना है?
पत्नी : कम से कम शाम की गाड़ी के आने तक आप उन्हें जिंदा रखने की कोशिश कीजिए।
डॉक्टर : अच्छा, उसकी गाड़ी कब तक आएगी।
पत्नी : शाम को पाँच बजे वह रेलवे स्टेशन पहूँचेगा। वहाँ से यहाँ पहुँचने के लिए आधा घंडा लगेगा।
डॉक्टर : लेकिन, यह कैसा संभव है जी?
पत्नी : डॉक्टर साहब, आप कुछ मत बताइए। मेरा बेटा अपने पिताजी को जीवन में अंतिम बार देखने के लिए ही आ रहा है।
डॉक्टर : आपकी वेदना मैं समझ रहा हूँ जी। हम लोग कोशिश तो ज़रूर करेंगे। आप भगवान पर उम्मीद रखिए।
पत्नी : अच्छा डॉक्टर साहब । आप ही अब हमारे लिए भगवान है। कृपया मेरी इच्छा पूर्ण कीजिए।

दवा Profile:

हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई का जन्म 1924 को मध्यप्रदेश में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यग्यकार थे। वे हिंदी के पहले रचनाकर हैं जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और हल्के पुल्के मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा। ‘हँसते है रोते हैं’, ‘जैसे उनके दिन फिरे’ आदि उनके श्रेष्ठ कहानी संग्रह हैं। उनकी मृत्यु 1995 को हुई। हिन्दी व्यंग्य लेखकों में सबसे श्रेष्ठ है श्री हरिशंकर परसाई। उनका व्यंग्य केवल हँसी-मज़ाक के लिए ही नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं पर तीखा प्रहार है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं ‘हँसते है रोते हैं जैसे उनके दिन फिरे” आदि।
दवा Summary in Malayalam 1

दवा Summary in Malayalam 2

दवा Summary in Malayalam

दवा Summary in Malayalam 3

दवा Summary in Malayalam 4

दवा Glossary

दवा Summary in Malayalam 5

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 3 आदमी का चेहरा (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 3 आदमी का चेहरा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 3 आदमी का चेहरा (कविता)

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आदमी का चेहरा (Text Book Page No. 95-97)

प्रश्न 1.
कूली को आदमी के रूप में पहचानने से पहले कुली के साथ कवि की यात्रा कैसी थी?
उत्तरः
कुली को आदमी के रूप में पहचानने से पहले हर समय कवि उसके दस कदम पीछे ही चलता था।

प्रश्न 2.
कुली को आदमी मानने के पहले कवि ने उसको किस रूप में पहचाना था?
उत्तरः
कवि ने उसको नंबर के रूप में ही पहचाना था।

प्रश्न 3.
सामान खुद उठाते वक्त कवि के दिमाग में कौन-सा विवेक पैदा हुआ?
उत्तरः
कुली भी एक आदमी है। कुली जो काम करता है, उसका भी अपना महत्व है।

प्रश्न 4.
कुली कहकर पुकारने पर कवि को क्यों लगता है कि कुली नहीं एक इनसान आकर उसके पास खड़ा हो गया है?
उत्तरः
खुद सामान उठाने पर ही कवि को सामान लादने की वेदना और काम का महत्व का पता चला। इसलिए उसे अब कुली भी एक मनुष्य लगता है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
श्री कुँवर नारायण बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कवि है। सप्तकीय परंपरा के कवियों में और प्रगतिवादी कवियों में उनका अलग पहचान है। कविता के अलावा कहानी, समीक्षा क्षेत्रों में भी उनकी प्रतिभा का चमक है। 2005 में उनको ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

देश की प्रगति निम्न-वर्ग के श्रमिक लोगों के बिना संभव नहीं है। लेकिन जाने-अनजाने ही हर ज़माने में निम्न-स्तर के लोगों का तिरस्कार ही होता है। वे हमेशा हाशिएकृत हो जाते हैं। समकालीन कविताओं में ऐसे हाशिएकृत लोगों का चित्रण होता है। ‘आदमी का चेहरा’ कुँवर नारायण की ऐसी एक कविता है जिसमें कठिन मेहनत करनेवाला एक कुली के प्रति कवि अपना विचार प्रकट किया हैं। कवि कह रहे हैं – ‘कुली’ शब्द सुनते ही मेरे दिल में कोई चौंक गया। एक आदमी मेरे सामने खडा हो गया। जब वह मेरा सामान उठाकर चलने लगा तो मैं उसके दस कदम पीछे चलना शुरू किया। मुझे लगा, वह मुझसे तुच्छ है और उसके साथ नहीं चलना चाहिए। अनेकों यात्राओं में जो कुली मेरा सामान लाद था उसे मैं पहचान नहीं सकता। उसका चेहरा मुझे याद नहीं है। केवल नंबर से ही मैं उसको पहचानता था।

लेकिन आज जब मुझे अपना सामान खुद लेना पड़ा, तभी मुझे सामान लादने की वेदना और साथ-साथ परिश्रम के महत्व का पता चला। इसलिए अब मुझे कुली, केवल एक कुली ही नहीं बल्कि मनुष्य ही लगता है। मैं ने पहचान लिया कि इसी निम्न वर्ग के लोगों के परिश्रम से ही देश की प्रगति होती है।

देश की प्रगति ऊँच पदवाले लोगों से ही नहीं बल्कि निम्नवर्ग के मज़दूर, कुली सभी से तन-तोड़ मेहनत से ही संभव है। श्राम का अपना महत्व है। अर्थात् हमें श्रमिकों का महत्व जानकर उनका आदर करना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए श्रमिक और सर्वहारा भी मनुष्य है। उनके मेहनत से ही देश की प्रगति संभव है।

संगोष्ठी
विषयः किसी काम-धंधे का महत्व केवल उस काम पर निर्भर नहीं होता बल्कि काम करनेवाले की ईमानदारी पर भी निर्भर होता हैं।
उत्तरः
संगोष्ठी आलेख
अंग्रेज़ी में एक कहावत है ‘Work is worship’ – यानि श्रम ही ईश्वर साधना हैं। संसार में कई प्रकार के काम धंधे हैं। चपरासी से लेकर मुख्य सचिव तक, मेहतर से लेकर डॉक्टर तक। समाज में कई लोग काम को देखकर दूसरों को मेलते हैं। किसी काम को निम्न मानते है और कुछ को उच्च।

हमें एक बात समझना चाहिए कि हर काम के अपने विशेषताएँ हैं। अगर मेहतर (sweeper) कुछ दिन काम न किया तो हमारे शरहों का हालत क्या होगा? अगर किसान खेती नहीं करें तो क्या होगा? यानि समाज में जो भी काम-धंधे हो वे सब आवश्यक है। लेकिन एक बात याद में रखना चाहिए कि हम यह काम कैसे कर रहा हैं। दिलचस्पी से या विवशता से। ईमानदारी से या बेइमानी से। तहे-दिल से या रूढकर। डॉक्टर हो या अध्यापक, वकील हो या नेता – वे सब ईमानदारी से, दिलचस्पी से और तहे-दिल से अपना काम करना चाहिए। अध्यापक दिलचस्पी से नहीं पढ़ाते है तो छात्रों का हालत क्या होगा। डॉक्टर ईमानदारी से नहीं करते हैं तो मरीज़ के हालत क्या होगा।

काम-धंधे नहीं ईमानदारी पर ज़्यादा बल देकर हमें काम करना हैं। श्रम की महत्ता पहचानकर दिलचस्पी से काम करना हैं।

Plus Two Hindi आदमी का चेहरा (कविता) Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“कुली!” पुकारते ही
कोई मेरे अंदर चौंका.। एक आदमी
आकर खड़ा हो गया मेरे पास।
सामान सिर पर लादे
मेरे स्वाभिमान से दस कदम आगे
बढ़ने लगा वह
जो कितनी ही यात्राओं में
ढो चुका था मेरा सामान।

प्रश्न 1.
यह किस कविता का अंश है?
(मातृभूमि, आदमी का चेहरा, सपने का भी हक नहीं, कुंमुद फूल बेचने वाली लड़की)
उत्तरः
आदमी का चेहरा।

प्रश्न 2.
कुली पुकारते समय कौन कवि के पास आकर खड़ा हो गया?
उत्तरः
एक आदमी (कुली) आकर खड़ा हो गया कवि के पास ।

प्रश्न 3.
वह सामान सिर पर लादे बढ़ने लगा – कैसे?
उत्तरः
कुली सामान सिर पर लादकर बढ़ने लगा, कवि के स्वाभिमान से दस कदम आगे वह बढ़ने लगा।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
श्री कुँवर नारायण समकालीन कवियों में प्रमुख है। आप ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित है। कविता, कहानी, समीक्षा और सिनेमा के क्षेत्र में वह मशहूर है। आप का एक प्रसिद्ध कविता है – आदमी का चेहरा।

आदमी का चेहरा कुँवर नारायण की ऐसी एक कविता है जिसमें मेहनत करनेवाला एक कुली के प्रति कवि अपना विचार प्रकट किया है। ‘कुली’ शब्द सुनते ही कवि के दिल में कोई चौंक गया। एक आदमी मेरे सामने खड़ा हो गया। जब वह मेरा सामान उठाकर चलने लगा तो मैं उसके दस कदम पीछे चलना शुरू किया। मैं अपने आप को उनसे भी महान समझता था। वह कई यात्राओं में मेरा सामान लादा था।

यहाँ कवि परिश्रम करने वाले साधारण लोगों का किसी भी प्रकार के महत्व न देनेवालों पर व्यंग्य करते हैं। जब कवि एक बार अपना सामान खुद उठाते है तो उसे पता चलता है कि कुली का प्रयत्न कितना महान है। परिश्रम की महत्व हमें पहचानना चाहिए। विशाल अर्थ में देखते है तो देश की प्रगति में साधारण श्रमिक लोगों के महत्वपूर्ण स्थान है। सरल भाषा में सहजीवियों से प्यार और सहानुभूति दिखाने के लिए कवि आह्वाल करते है। यह कविताँश छात्रानुकूल और प्रासंगिक है।

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों का उत्तर लिखें।
“कुली !” पुकारते ही
कोई मेरे अंदर चौंका। एक आदमी
आकर खड़ा हो गया मेरे पास।
सामान सिर पर लादे
मेरे स्वाभिमान से दस कदम आगे
बढ़ने लगा वह
जो कितनी ही यात्राओं में
ढो चुका था मेरा सामान ।

प्रश्न 1.
इस कविता के रचयिता कौन है?
उत्तरः
कुंवर नारायण

प्रश्न 2.
कवि के पास कौन आकर खड़ा हो गया?
उत्तरः
कुली/ एक आदमी

प्रश्न 3.
कुली किससे आगे बढ़ने लगा?
उत्तरः
कवि के स्वाभिमान से दस कदम् आगे बढ़ने लगा।

प्रश्न 4.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिन्दी के समकालीन कवियों में श्री कुंवर नाराय सबसे श्रेष्ठ है। समाज की हाशिएकृत लोगों की आवाज़ है समकालीन कविता। कुली ऐसी एक कविता है जिसमें श्रमिकों का महत्व बताया गया है। कवि कह रहे हैं – ‘कुली’ शब्द सुनते ही मेरे दिल में कोई चौंक गया। एक आदमी मेरे सामने आकर मेरा सामान उठाकर चलने लगा और मैं उसके दस कदम पीछे चलने लगा। वह मुझसे तुच्छा है और इसलिए साथ नहीं चलना है। अनेकों यात्राओं में चो मेरा सामान उठाया था, उसका चेहरा तक मुझे याद नहीं।

प्रस्तुत कवितांश द्वारा कवि हमें परिश्रम का महत्व बता रहै हैं। कविता की भाषा सरस और सरल है।

सूचना: निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“मैंने उसके चेहरे से उसे
कभी नहीं पहचाना,
केवल उस नंबस के जाना
जो उसकी लाल कमीज़ पर टॅका होता।
आज जब अपना सामान खुद उठाया
एक आदमी का चेहरा याद आया।”

प्रश्न 1.
यह किस कविता का अंश है?
(सपने का भी हक नहीं, आदमी का चेहरा, मातृभूमि, कुमुद, फूल बेचने वाली लड़की)
उत्तरः
आदमी का चेहरा

प्रश्न 2.
कमीज़ पर क्या टँका होता था?
उत्तरः
कुली का नंबर/ संख्या

प्रश्न 3.
कवि पहले कुली को कैसे पहचानता था? उसकी आदमी का चेहरा कब याद आया?
उत्तरः
कवि पहले कुली को उसकी लाल कमीज़ पर टॅका नंबर से पहचानता था। अपना सामान खुद उठाने पर कवि को एक आदमी का चेहरा याद आया।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
श्री कुँवर नारायण बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कवि है। कविता के अलावा कहानी, समीक्षा आदि क्षेत्रों में भी उनकी चमक हैं। 2005 को उनको ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। देश की प्रगति निम्नवर्ग के श्रमिक लोगों के बिना संभव नहीं है। लेकिन इन लोगों को समाज स्थान नहीं देते हैं। ऐसे हाशिएकृत लोगों को कविता के माध्यम से दिखाने का प्रयास प्रस्तुत कविता में किया है।

कवि जब भी कुली को देखते हैं केवल लाल कमीज़ पर टँका नंबर से पहचानते हैं। उसे नाम से नहीं कुली ही पुकारते हैं। वह एक मानव है ऐसे उसे देखते नहीं, लेकिन पहली बार जब अपना सामान खुद उठाया तो कवि को लगता है कि कुली भी आदमी है।

यहाँ कुछ ही शब्दों में सरल शैली में निम्नवर्ग के लोगों की ओर ध्यान दिया हैं। हम सब मानव है, जो भी काम करना पड़े। आज भी यह कविता प्रासंगिक है।

“निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।
“कुली! पुकारते ही
कोई मेरे अंद चौंका। एक आदमी
आकर खड़ा हो गया मेरे पास।
सामान सिर पर लादे
मेरे स्वाभिमान से दस क़दम आगे
बढ़ने लगा वह
जो कितनी ही यात्राओं में
ढो चुका था मेरा सामान।

प्रश्न 1.
यह किस काव्यधारा की कविता है?
(द्विवेदीयुगीन कविता, समकालीन कविता, छायावादी कविता)
उत्तरः
समकालीन कविता

प्रश्न 2.
कवि के पास कौन आकर खड़ा हो गया?
उत्तरः
एक आदमी आकर खड़ा हो गया।

प्रश्न 3.
कवि किससे आगे बढ़ने लगा?
उत्तरः
कवि अपने स्वाभिमान के ‘दस कदम आगे बढ़ने लगा।

प्रश्न 4.
समकालीन कविताओं की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी तैयार करें।
उत्तरः
प्र बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कवि श्री कुंवर नारायण की एक कविता है आदमी का चेहरा। वे ज्ञानपीठ से पुरस्कृत कवि है। प्रस्तुत कविता में श्रम के महत्व के बारे में कवि बता रहे हैं।

कुली शब्द सुनते ही कवि के अंदर कोई चौंक गया। कवि को लगा एक आदमी उसके आगे खड़ा हो गया है। जब वह मेरा सामान लेकर चलने लगा तो मैं उसके दस कदम पीछे चलने लगा। अपने स्वाभिमान के कारण कवि को ऐसा लगा कि कुली के साथ नहीं चलना चाहिए।

अनेकों यात्राओं में जो कुली हमारे सामान उठाते हैं हम उसे कभी नहीं पहचानते हैं। देश की प्रगति के लिए ही हर व्यकति काम करते हैं चाहे वह ऊँचे पदवाले हो या निम्न पदवाले। सभी. के काम का अपना महत्व है। आदमी को यह समझना चाहिए कि देश की प्रगति केवल ऊँचे पदवाले लोगों से ही नहीं, बल्कि निम्नवर्ग के मज़दूर, कुली आदि सभी के तन-तोड़ मेहनत से ही संभव है। हमें यह समझना चाहिए कि श्रमिक और सर्वहारा लोग भी मनुष्य है। और उनके भी मेहनत से देश की प्रगति संभव है।

“निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।
आईना हमारी शक्ल सूरत दिखाता है,
एकदम बराबर सब कुछ बताता है,
किसी को असली नकली में
फर्क समझ में नहीं आता,
इसलिए वो आइना है कहलाता।

प्रश्न 1.
आईना क्या दिखाता है?
उत्तरः
गा आईना हमारी शक्ल-सूरत दिखाता है।

प्रश्न 2.
‘असली’ शब्द का विपरीतार्थक शब्द कविता से ढूँढें
उत्तरः
नकली

प्रश्न 3.
आईना, आईना क्यों कहलाता है?
उत्तरः
मग आईने में देखने से किसी को असली और नकली में फर्क समझ में नहीं आता है। इसलिए आईना, आईना कहलाता है।

प्रश्न 4.
कविता की व्याख्या करते हुए आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
अ यह हिंदी के एक विख्यात कविता है। समकालीन कविताओं में छोटे-बड़े, निम्न-उच्च सभी स्तर के व्यवतियों और चीज़ों के बारे में कहते हैं। प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक सच्चाई को उजागर करने में समकालीन कविता की निजी विशेषता है।

आईना हमारी शक्ल और सूरत दिखाता है। आईने में देखने से सभी को अपना शक्ल बराबर ही दिखाई देता है। असली और नकली में किसी को कोई फर्क नहीं दिखाई देता है। इसलिए ही आईने को आईना कहलाता है। आईने के द्वारा कवि ने यह बताने की कोशिश की है कि दुनिया भी एक आईना जैसा है। यहाँ किसी का कोई फर्क नहीं है। जिस प्रकार आईने में व्यवति का शक्ल उसी प्रकार दिखाई देता है ठीक उसी प्रकार दुनिया में भी हर व्यक्त का शक्ल एक जैसा है। वहाँ उच्च-निम्न या छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं है।

आदमी का चेहरा Profile

कुंवर नारायण का जन्म उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद में 1927 को हुआ। अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक के प्रमुख कवि वर नारायण नई कविता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर हैं। कविता के अलावा कहानी, समीक्षा और सिनेमा में उन्होंने 7 लेखनी चलाई। ‘चक्रव्यूह’, ‘अपने साम..’, ‘कोई दूसरा नहीं’, ‘इन दिनों’ आदि उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं। देश के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार ज्ञानपीठ से 2005 में वे सम्मानित हुए।
आदमी का चेहरा Profile 1

आदमी का चेहरा Profile 2

आदमी का चेहरा Summary in Malayalam

आदमी का चेहरा Summary in Malayalam 1

आदमी का चेहरा Summary in Malayalam 2

आदमी का चेहरा Glossary

आदमी का चेहरा Glossary

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 2 वह भटका हुआ पीर (संस्मरण)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 2 वह भटका हुआ पीर Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 2 वह भटका हुआ पीर (संस्मरण)

प्रश्न 1.
चित्र और रहीम की पंक्तियों में कौन-सा संदेश मिलता हैं?
उत्तरः
चित्र में मदर तेरेसा बच्चों के देखपाल करने का दृश्य है तो रहीम की पंक्तियों में दूसरों को अपना सर्वस्व देनेवाले प्रकृति का चित्रण हैं। परोपकार हर जीव का फर्ज़ हैं।

मेरी खोज

प्रश्न 1.
लेखिका ने स्कूटरवाले की तुलना गुलमोहर से क्यों की है?
उत्तरः
जिसप्रकार स्कूटरवाला गर्मी में राहगीरों को पानी पिलाता है उसी प्रकार गर्मी के मौसम में गुलमोहर अपने फूलों से दूसरों को छाया और तृप्ति देते हैं, दोनों परोपकार की भावना रखनेवाले हैं।

प्रश्न 2.
स्कूटरवाला कैसे अपने मन का बादशाह बन गया?
उत्तरः
वह मिली नौकरी को भी छोडा और स्कूटर अपने मर्जी के अनुसार चलाता है। अपने दिल के विचार के अनुसार दूसरों की सहायता करके वह जीवन बिताते हैं। संपत्ति के पीछे न भागकर दिलं के अनुसार जीते हैं।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
विशेष समाचार – मशकवाला स्कूटर നെ ആധാരമാക്കി ഒരു കൗതുക വാർത്ത തയ്യാറാക്കുക. സഹായക സൂചനകൾ ഉപയോ ഗിക്കണം. ശീർഷകം, സ്ഥലം എന്നിവ ആവശ്യമാണ്.
उत्तरः
मशकवाला स्कूटर – दिल्ली में
दिल्लीः दिल्ली के साधारण लोगों को देवता के रूप में दिखाई देता है एक स्कूटरवाला, क्योंकि वह रास्ते पर चलनेवाले प्यासे लोगों को मुफ़्तं पानी पिलाता है। वह अपने माँ के, उपदेश के अनुसार अपने पैसे से मशक में पानी भरवाकर सहगीरों को पानी पिलाता है, वह अपने लिए केवल दो जून रोटी ही कमाता है, पैसे के पीछे न … दौड़कर लोगों के दिल से रिस्ते जोडते हैं, लोग उसे मशकवाला स्कूटर कहते हैं। वह केवल एक स्कूटरवाला न होकर एक पीर हो गया है। .

प्रश्न 2.
स्कूटरवाले के चरित्र पर टिप्पणी करते हुए वर्तमान समाज में ऐसे लोगों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तरः
एक साधारण स्कूटरवाला कैसे असाधारण व्यक्ति बनते हैं – इसका उदाहरण है मशकवाला स्कूटर, भौतिक जीवन में वह गरीब हैं। माँ के उपदेश के अनुसार वह दूसरों को मुफ़्त पानी देता हैं, पैसे के पीछे न जाकर लोगों से दिल के रिश्ते जोड़ते हैं। आज के समाज में इसीप्रकार के लोग बहुत विरल है, परोपकार की भावना. हर व्यक्ति के लिए आवश्यक गुण है। यहाँ इसी गुण को दिखाया गया है। केवल अपने बात ही सोचनेवाले इस समाज में एक अजीब चरित्र हैं मशकवाला स्कूटर।

प्रश्न 3.
स्कूटरवाला जैसे लोगों को आपने देखा है? वह अनुभव प्रस्तुत करें।
उत्तरः
जैसे – हमारे गाँव में एक ऐसे व्यक्ति है जो एक साधारण दूकानदार है जो एक छोटी सी दुकान चलाकर आजीविका कमाते है। कई लोगों के लिए वह ईश्वर समान है क्योंकि दुपहर के भोजन से मिलने का कारण है वह । हर दिन वह दुपहर के समय दूकान बंद करके बाहर निकलते है। एक थैली में तैयार किये भोजन लेकर रास्ते में आवश्यकता के अनुसार पड़े रहनेवाले लोगों को भोजन देते है। वह कई सालों से यह करते आ रहे हैं।

Plus Two Hindi वह भटका हुआ पीर (संस्मरण) Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘वह भटका हुआ पीर’ संस्मरण के स्कूटरवाले पात्र का आत्मकथांश तैयार करें।
* पितृविहीन बालक
* गरीब बचपन
स्कूटर चलाकर रोटी की कमाई
* माँ का उपदेश
* दूसरों की प्यास बुझाने की कोशिश
उत्तरः
आत्मकथांश
मैं एक स्कूटरवाला हूँ, लोग मुझे मशकवाला स्कूटर कहते हैं। मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। मेरा पिता मेरे बचनप में ही चल बसा | मेरी माँ कठिन परिश्रम करके मेरा पालन-पोषण किया। मैं स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई किया, मैं छोटे उम्र में ही छोटे-छोटे काम करने लगे थे, बड़े होकर मैं स्कूटर चलाने के साथ साथ पढ़ाई भी किया। ग्रेजुएट हो गया, मुझे दफ्तर में काम मिला था।

लेकिन मैं आज भी स्कूटर चलाता हूँ – मशकवाला स्कूटर | जब मैं शहर में स्कूटर चलाने लगे तब मैं देख कि कई लोग पानी के लिए गरस रहे हैं। मैं एक मशक में पानी भरकर रास्ते में मिलनेवाले प्यासे लोगों को पानी पिलाने लगे। पानी पिलाने में, जो पुण्य मिलते है वह पैसों से सौ गुना बेहत्तर है। मैं यह काम दम तोडने वक्त तक करूँगा। यही मेरा जीवन का मकसत है।

प्रश्न 2.
सूचनाः वार्तालाप तैयार करें।
संकेतों के अनुसार स्कूटरवाले और लेखिक का बीच का वार्तालाप कल्पना करके लिखें।
* स्कूटरवाले की कहानी
* पितृविहीन बालक
* गरीब माँ
* माँ का उपदेश
* मन का बादशाह
उत्तरः
स्कूटरवाला : आप यहाँ रहते है?
लेखिका : हाँ, आओ, बैठो।
स्कूटरवाला : नहीं, कई लोग पानी की प्रतीक्षा में होगा।
लेखिका : आप ऐसे क्यों करते है।
स्कूटरवाला : मुझे ऐसे करने में बहुत खूशी मिलती है।
लेखिका : आप के घर में कौन-कौन है?
स्कूटरवाला : पिताजी बचपन में चल बसा। माँ छोटे छोटे काम करके मेरा देखबाल किया है।
लेखिका : आप पढ़ाई नहीं किया?
स्कूटरवाला : हाँ। मैं स्ट्रीट लैइट में पढ़कर ग्राजुएट हो गया। मुझे नौकरी भी मिला था।
लेखिका : फिर भी आप स्कूटर चलाते हो?
स्कूटरवाला : मुझे इसमें खुशी है। अपने मन का बादशाह हूँ। जहाँ चाहे जाता हूँ, पानी पिलाता हूँ।
लेखिका : आप एक पीर हो।
स्कूटरवाला : शुक्रिया। अब मैं चलता हूँ।

प्रश्न 3.
दूसरों की सहायता करना सबसे महान कार्य है – इस विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता हो रही है।
‘वह भटका हुआ पीर’ पाठभाग के संकेतों के आधार पर एक भाषण तैयार करें।
संकेत : तू पानी पिलाया कर, पुण्य मिलता है।
वह पूजा के लिए कहीं भी न बैठकर लोगों के दिल में जगह बनाता है।
दिल के रिश्ते जोड़ता है।
उत्तरः
प्र प्यारे भाइयो, बहनो ……….
जीवन की विभिन्न पहलुओं की आज यहाँ चर्चा हो रही है। हम सब जानते हैं “मानव सेवा ही माधव सेवा है। इसका तात्पर्य है मनुष्य की सेवा ही भगवान की सेवा है, वही असली पूजा है।

मित्रो, पुराने जमाने से भारत की ऐसी एक परंपरा है। भारत के ऋषि-मुनि लोग यही करते आते हैं। जो दीन दुःखियों की सेवा करता है, बेसहारों को सहारा देता है, वही सबसे महान है। इससे बढ़कर पुण्य और कुछ भी नहीं है। दूसरों को तू पानी पिलाया कर, तुम्हें पुण्य मिलता है। दिल्ली के,ये जो स्कूटरवाला है, उससे हमें यह समझना चाहिए उसके दिखाए मार्ग हमें अपनाना चाहिए। पूरे मानव राशि के प्रति भाईचारा का संबन्ध ही महान है। तो मित्रों, हम भरोसा करेंगे कि आनेवाला कल एकता, भाईचारा और मानवता का रहेगा।
जय भारत।

सूचनाः
‘वह भटका हुआ पीर’ संस्मरण का अंश पढ़ें। वह पूजा के लिए कहीं भी न बैठकर लोगों के दिल में जगह बनाता है। दिल के रिश्ते जोड़ता है।

प्रश्न 4.
संकेतों के आधार पर लेखिका और अपनी बहन के बीच का वार्तालाप तैयार करें।

  • लेखिका का स्कूटर वाले से परिचय ।
  • स्कूटर वाले के सेवा मनोभाव से प्रभावी।
  • लेखिका की श्रद्धा-भावना।

उत्तरः
लेखिका : बहनजी, बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर।
बहन : मैं भी खुश हूँ, तुझे यहाँ देखकर। कहो, कैसे आना हुआ?
लेखिका : क्या कहूँ बहनजी। कई दिनों से सोच रहा हूँ। आज ही फुरसत मिली थी।
बहन : तुम्हारी यात्रा कैसी रही?
लेखिका : हाँ जी, बहुत अच्छी रही। एक विचित्र स्कूट्टरवाले से आज भेंट हुई।
बहन : विचित्र क्यों? ज़्यादा पैसा माँगा उनसे? ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो ज़्यादा पैसा माँगकर हमें तंग करते हैं।
लेखिका : नहीं, नहीं। यह जो है एकदम अलग है। वह बड़ा परोपकारी मालूम पड़ता है।
बहन : परोपकारी और स्कूट्टरवाले!
लेखिका : हाँ जी, सुनो तो। वह एक ऐसा स्कूट्टरवाला है जो अपनी यात्रियों को बीच बीच में पानी पिलाया करता है।
बहन : बाप रे! यह तो एकदम विचित्र निकला। दिल्ली की गरमी में वह ऐसा करता है।
लेखिका : वह अपनी गाड़ी में ही पानी रखता है और रास्ते में मिलनेवालों को पानी देता है। पानी के खतम होने पर वह खुद रास्ते से पानी भरता है और राहगिरों को पानी पिलाया करता है।
बहन : कितना अच्छा स्कूटरवाला है।
काश! अज के सभी लोग ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।

प्रश्न 5.
गर्मी की एक साँझ में स्कूटर वाला लेखिका के गेट के सामने आया। उसने लखिका से अपनी जीवन-गाथा बतायी।
संकेतों के आधार पर ‘वह भटका हुआ पीर’ पाठ के स्कूटर वाले का आत्मकथांश तैयार कीजिए।
* पितृविहीन बालक
* स्कूटर चलाकर माँ को संभालना
* माँ के उपदेश का पालन
* लोगों के दिल में जगह बनाना
उत्तरः
आत्मकथा
मेरा जीवन सफल है या नहीं यह मैं नहीं जानता पर मैं खुश हूँ इस जीवन से। मेरा बाप की मृत्यु मेरी छोटी उम्र में ही हुआ था। माँ कठिन परिश्रम करके मेरा देखपाल किया। छोटी उम्र में ही भूख और गरीबी की हालत समझ लिया। स्ट्रीट लइट के नीचे बैठकर पढ़ते थे। बड़े होने पर स्कूटर चलाना शुरू किया। माँ और मेरे लिए भूख मिटाने के लिए मैं काम करता था। साथ साथ पढ़ते थे और ग्राजुइट हो गया। रास्ते में प्यास के मारे तड़पते रहने लोगों को देखकर उन्हें पानी पिलाना शुरु किया। और काम मिला तो भी मैं यह स्कूटर चलाना और राहगीरों को पानी पिलाना पसंद करता हूँ।

एक मशक में पानी खरीदकर स्कूटर में रखता हूँ। रास्ते में जो भी प्यासा आये उन्हें पानी पिलाये घूमता हूँ। माँ कहते हैं पानी पिलाने से पुण्य मिलेगा। पैसे केलिए जीवन में दौड़नेवाले कई लोग होते हैं। मेरे पास पैसे नहीं बल्कि कई लोगों के पुण्य है। मैं बहुत खुश हूँ इस जीवन से क्योंकि मैं लोगों के दिल में जगह बनाता हूँ और वह मुझे प्यार से मशकवाला स्कूटर कहते हैं।

‘वह भटका हुआ पीर’ का अंश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।

जब घर के बड़े बुजुर्गों को कोई पानी नहीं पिलाता और पानी माँगने पर अँगारों जैसी जलती आँखें दिखाई जाती हों, तो यह स्कूटरवाला तो पीर जैसा लगेगा ही न । गर्मी की एक साँझ में वह मेरे गेट के सामने खड़ा होकर मुझसे पूछ रहा था, ‘पानी पिएँगी? अभी भरवा कर ला रहा हूँ।’ ‘हाँ-हाँ, क्यों नहीं।’ मैने उसे बरामदे में बिठाया और उससे कुशलक्षेम पूछने लगी। वह पितृविहीन बालक स्ट्रीट लाइट में बैठकर अखबार पढ़ता, स्कूटर चलाकर माँ और अपने लिए दो जून रोटी का जुगाड़ करता।”

प्रश्न 6.
‘वह भटका हुआ पीर’ संस्मरण किसकी रचना है?
उत्तरः
राज बुद्धिराजा

प्रश्न 7.
बड़े बुजुर्गों के पानी माँगने पर घर के लोग क्या करते हैं?
उत्तरः
बडे बुजुर्गों के पानी माँगने पर घर के लोग अंगारों जैसी जलती आँखों से उन्हें देखते हैं और पानी नहीं देते हैं।

प्रश्न 8.
स्कूटरवाले ने लेखिका से क्या पूछा?
उत्तरः
र स्कूटरवाले ने लेखिका से पूछा कि क्या वह पानी पिएगी?

प्रश्न 9.
पितृहीन बालक अपनी लोटी कैसी जुगाड़ता था?
उत्तरः
का पितृहीन बालक स्ट्रीट लाइट में बैठकर अखबार पढ़कर और स्कूटर चलाकर अपनी रोटी जुगाडता था।

प्रश्न 10.
खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
घर के बुजुर्गों को पानी पिलाना पुण्य माननेवाला है। एक दिन लेखिका के घर में आकर उसने बता दिया कि वह एक पितृहीन बालक है। स्ट्रीट लाइट में बैठकर वह अखबार पढ़ता था और स्कूटर चलाकर कमाता भी था।

प्रश्न 11.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक लिखें।
उत्तरः
परिश्रम का महत्व

प्रश्न 12.
“मुझे तो पुण्य मिल ही गया। लाखों लोगों की दुआओं से मैं ग्रेजुएट हो गया। घर बैठे नौकरी चलकर आई, लेकिन मुझे पानी पिलाने में जो सुख मिलता है, वह नौकरी में कहाँ! अपने मन के बादशाह !!
वह भटका हुआ पीर के इस अंश के आधार पर स्कूटरवाले के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तरः
स्कूटरवाला परोपकार को पुण्य माननेवाला है। अपने माँ-बाप एवं बुजुर्गों के प्रति उसके दिल में सच्चा प्यार एवं आदर है। अपने माँ की बातों को वह बहुत अधिक मानता है। उसका विश्वास है माँ की बातें सुनने से ही उसे पुण्य मिल गया है और वह ग्रेजुएट भी हो गया है। वह अपने इच्छा के अनुसार जीना चाहता है। इसलिए ही नौकरी छोड़कर वह स्कूटर चलाना शुरु करता है।

प्रश्न 13.
“मुझे लगा कि वह आम आदमी न होकर एक भटका हुआ पीर है, जो आपा-धापी की दुनिया में खुशी बाँटता फिर रहा है।” – ‘वह भटका हुआ पीर’ के स्कूटरवाले के जैसे हमारे समाज में भी ऐसे बहुत से पीर हैं और हुए थे। उनमें से किसी के विवरण के साथ वर्तमान समाज में ऐसे सच्चे पीर की आवश्यकताओं पर निबंध तैयार करें।
उत्तरः
मानव की सेवा ही असल में ईश्वर की सेवा है। हमें भगवान को खोजने मंदिर-मस्जिदों में नहीं जाना है। सच्चे दिल से जब हम समाज की सेवा करेंगे हम ईश्वर से पास पहुँच जाएँगे।

‘पीर’ शब्द का अर्थ ही सन्यासी है। भौतिक सुखों को छोड़कर जो समाज की कल्याण के लिए उतरते हैं उन्हें ही पीर या सन्यासी कह सकते हैं। पीर बनने के लिए किसी वेष-भूषा की ज़रूरत नहीं है। सच्चे दिल चाहिए। मानव को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। समाज के पीड़ितों, गरीबों, मजदूरों की पीड़ा समझ लेना चाहिए। जब हम दूसरों की पीड़ा समझ सकेंगे तभी हम एक इचित मानव बन पाएँगे। हमारे समाज में ऐसे बहुत ही .. इंसान है जो अपने सुखों को त्यागकर दूसरों की भलाई के लिए उतरे हैं। ऐसे लोगों से प्रेरणा पाकर प्रत्येक विद्यार्थी को समाज की भलाई के लिए कर्म निरत रहना चाहिए। विद्यार्थी जीवन का लक्ष्य केवल स्कूली शिक्षा नहीं बल्कि समाज एवं अपने वातावरण से उत्पन्न अनुभवों से जानकारी प्राप्त करना भी है। अपने समाज की भलाई के लिए कर्मनिरत रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। विद्यार्थी लोगों का इसमें खास योगदान है। एक अच्छे समाज एवं मानवराशी के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पीर बनना ही चाहिए।

‘सौ वर्ष का एकांत’ गेब्रियल गार्सिया मार्वेज़ का विख्यात उपन्यास है। इस उपन्यास के छपते ही मार्वेज़ का नाम विश्व के महान उपन्यासकारों में शामिल हो गया। इसकी लाखों प्रतियाँ प्रकाशित हुईं। संसार भर के साहित्य प्रेमी पाठकों ने इसे पूरी रुचि से पढ़ा। इसके संसार की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हुए। वे इतने अधिक प्रसिद्ध हो गए थे कि उनसे मिलने के लिए सालभर पहले समय लेना होता था। इस प्रसिद्धि के बाद भी वे हर दिन सुबह नौ बजे से दोपहर के तीन बजे तक लिखने का कार्य किया करते थे। उनकी यह दिनचर्या तीस-चालीस वर्षों तक चली। इतने कठिन परिश्रम से ही यह संभव हुआ कि उन्होंने एक के बाद दूसरा सुंदर उपन्यास लिखा। कई सुंदर कहानियाँ लिखीं।

प्रश्न 14.
मार्वेज़ का बहुचर्चित उपन्यास कौन सा है?
उत्तरः
सौ वर्ष का एकांत

प्रश्न 15.
मावेज़ के कठिन परिश्रम का क्या फायदा हुआ?
उत्तरः
अपने कठिन परिश्रम का फायदा यह हुआ कि उन्होंने एक के बाद दूसरा सुंदर उपन्यास लिखा।

प्रश्न 16.
‘सौ वर्ष का एकांत’ की क्या-क्या खूबियाँ थीं?
उत्तरः
इस उपन्यास के छपते ही मावेज़ का नाम विश्व के महान उपन्यासकारों में शामिल हो गया। इसकी लाखों प्रतियाँ प्रकाशित हुई। वे इतने प्रसिद्ध हो गए कि उनसे मिलने के लिए सालभर पहले समय लेना होता था।

प्रश्न 17.
उपर्युक्त खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
गब्रियेल गार्सिया मावेज़ का विख्यात उपन्यास ‘सौ वर्ष का एकांत’ के प्रकाशन से ही वह अत्यंत ख्यातिप्राप्त हो गया। इस प्रसिद्धि के बाद भी वे हर दिन कुछ समय अपना लेखन कार्य करते थे। तीस-चालीस वर्षा की इस दिनचर्या और कठिन परिश्रम के फलस्वरूप उन्होंने अनेक सुंदर उपन्यास और कहानियाँ लिखा।

प्रश्न 18.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक लिखें।
उत्तरः
गाब्रियल गार्सिया मावेज़

प्रश्न 19.
‘युवा पीढ़ी पर मोबाइल फोण का प्रभाव’ विषय पर संकेतों की मदद से स्कूल पत्रिका में प्रकाशित करने योग्य एक लेख तैयार करें।
उत्तरः
प्र युवा पीढ़ी पर मोबाइल फोण का प्रभाव
विज्ञान का एक नूतन आविष्कार है मोबाइल फोण | आधुनिक बदलते युग में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। दुनिया का हर बदलाव उसी क्षण में ही विभिन्न जगहों में पहुँचाने में मोबाइल फोण का महत्वपूर्ण योगदान है। हर वैज्ञानिक आविष्कारों का गुण और दोष है। मोबाइल फोण भी इससे अलग नहीं है। आगे हम इसके लाभ और हानियों के बारे में चर्चा करेंगे।

सुविधाजनकः मोबाइल फोण अत्यंत सुविधाजनक है। इसके माध्यम से खबरों को ही नहीं हर बात दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर हम समय समय पर जान सकते हैं।

बहुआयामीः आज मोबाइल फोण केवल एक फोण न होकर एक बहुआयामी चीज़ बन गया है। मोबाइल फोण आज तो सबसे बड़ा मनोरंजन के माध्यम बन गया है।

ज्ञानार्जन का साधनः ज्ञानार्जन के लिए भी आज मोबाइल फोण अत्यंत उपयोगी है। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र से संबंधित और दुनिया के हर परिवर्तन से संबंधित सभी प्रकार के खबरें इसके द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

अंतर्जाल का सदुपयोगः मोबाइल फोण के क्षेत्र में सबसे क्रांतिकारी परिवर्तन है अंतर्जाल का उपयोग। इसके माध्यम से क्षण-क्षण में होनोवाले परिवर्तन दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर हम जान सकते हैं। अंतर्जाल का सदुपयोग से किसी को हानी नहीं पहूँचेगा।

खर्चीलाः विज्ञान के नए आविष्कारों के अनुरूप आज मोबाइल फोण खर्चीला भी बन गया है। इसलिए साधारण जनता के लिए यह अत्यंत हानिकारक भी बन गया है।

तंदुरुस्ती के लिए हानिहारकः मोबाइल फोण से उत्पन्न रेडियेशन कैन्सर जेसे भयानक बीमारियों का कारण बन गया है। इसलिए मोबाइल फोण के उपयोग में आदमी को खुद नियंत्रण रखना है।

अंतर्जाल का दुरुपयोगः अंतर्जाल विज्ञान का सबसे बड़ा देन है। लेकिन इसका दुरुपयोग अत्यंत खतरनाक भी बन गया है। इसलिए अंतर्जाल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
विज्ञान का सबसे श्रेष्ठ चमत्कारों में एक है मोबाइल फोण का आविष्कार । हमें इसका सदुपयोग करना चाहिए।

वह भटका हुआ पीर Profile

डॉ. राज बुद्धिराजा ने हिन्दी की लगभग सभी विधाओं में अपनी क्षमता दिखाई। उनका जन्म लाहोर में 1937 को हुआ था। उन्होने लगभग तीन सौ संस्मरण लिखे है। ‘सफर की यादें’, ‘साकूरा के देश में’, ‘दिल्ली अतीत के झरोखे से’, ‘हाशिए पर दिल्ली’ आदि अपके संस्मरणों के संग्रह है। जापान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वे सम्मानित है।
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वह भटका हुआ पीर (संस्मरण) Summary in Malayalam

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वह भटका हुआ पीर (संस्मरण) Glossary

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Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 1 कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 1 कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 1 कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी (कविता)

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(Text Book Page No. 84-88)
प्रश्न 1.
कविता के निम्नलिखित वाक्यांश किससे संबंधित हैं? कुमुद फूल या लड़की से?
उत्तरः
1. ईश्वर का इष्ट नैवेद्य – कुमुद फूल
2. लंबे डंठलों के छोरों पर खिले – कुमुद फूल
3. मुरझाये फूल की डंठल-ज्यो – लड़की
4. दीन स्वर में प्रार्थना करती – लड़की

प्रश्न 2.
लटकते हुए लंबे डेठलों की तुलना किससे की गई हैं?
उत्तरः
मृत जल-साँप से किया गया हैं।

प्रश्न 3.
हाय! मुरझा रहे दो सुकोमल रूप’ – कौन-कौन-से हैं?
उत्तरः
कुमुद फूल और फूल बेचनेवाली लड़की – दोनों मुरझाया गया हैं।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
श्री ओ.एन.वी. कुरुप मलयालम् के लोकप्रिय कवि हैं। भूमिक्कोरु चरमगीत उनके प्रसिद्ध कविता-संग्रह हैं।
‘कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी कविता में फूल बेचनेवाली एक लड़की की बेबसी का चित्रण है, मंदिर में आराधना के लिए आनेवाला भक्त कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी को देखता है और लड़की की बुरी हालत देखता है। वह लड़की की फूल का पैसा देता हैं फूल नहीं लेते हैं। उसे लगता है कि फूल और लड़की मुरझाया गया है। भक्त को लगता है कि भगवान को फूल देने से अच्छा है एक गरीब लड़की की सहायता करना।

आज के समाज में प्रासंगिकता रखनेवाली कविता है यह। मानवता की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य हैं। सरल भाषा में गरीबों की हालत को सुधारने के कर्तव्य को कवि
व्यक्त किया है।

प्रश्न 2.
वर्तमान सामाजिक परिस्थिति में उपर्युक्त कविता की प्रासंगिकता पर चर्चा करके, टिप्पणी तैयार करें।
उत्तरः
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी’ श्री. ओ.एन.वी.कुरुप की प्रसिद्ध कविता हैं। वर्तमान सामाजिक जीवन के एक मार्मिक चित्र यहाँ पेश किया है। मंदिरों और मस्जितों में प्रार्थना के लिए कई लोग जाते हैं। कई गरीह लोग भी आजीविका के लिए ऐसी जगहों में आते हैं, भारत में गरीबों के संख्या कम नहीं है, लड़की होने के बाबजूद भी. पढने के लिए न जाकर फूल बेचने के लिए विवश लड़की का चित्रण यहाँ किया गया हैं। कविता में वर्णित व्यक्ति नैवेद्य फूल के दाम लड़की को देता है, यहाँ मनुष्यता प्रकट करने की आवश्यकता को दिखाया हैं, मानवता मनुष्य को अन्य जीवियों से अलगां करते हैं। दूसरों केलिए हमें कुछ न कुछ करना ही चाहिए। मानवता कम होते इस समाज में इसी प्रकार का विचार आवश्यक हैं।

Plus Two Hindi कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी (कविता) Important Questions and Answers

पुराना देवालय
उसके निकट है कुमुद-सरोवर
रास्ते में पूजा-द्रव्य
बेचनेवालों के कितने ही दल;

‘इधर इष्टदेव का
इष्ट नैवेद्य है कुमुद फूल
मार्गदर्शी ज्यों
यों कहकर किसी कोने में,
मृत जल-साँप ज्यों
लटके लंबे डंठलों के
छोरों पर खिले
श्वेत कुमुद फूल बेचनेवालियाँ,
‘मेरे हाथ से, मेरे हाथ से।’

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता’ का है?
(सपने का भी हक नहीं, कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की, आदमी का चेहरा)
उत्तरः
कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की।

प्रश्न 2.
कुमुद सरोवर कहाँ है? |
उत्तरः
प्र कुमुद सरोवर पुराना देवालय के निकट है।

प्रश्न 3.
इष्टदेव का इष्टनैवेद्य क्या है?
उत्तरः
प्रय इष्टदेव का इष्टनैवेद्य है कुमुद फूल ।

प्रश्न 4.
कवि ने लटके लंबे डंठलों की तुलना किससे की है?
उत्तरः
कवि ने लटके लंबे डंठलों की तुलना मृत जल-साँव से की है।

प्रश्न 5.
अनूदित कविताओं की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
ओ.एन.वी.कुरुप मलयालम् के लोकप्रिय कवि है। उनकी विख्यात कविता है “आंबलपूवु विलकुन्न पेणकुट्टी।” इस कविता का अनुवाद डॉ.एस.तंकमणी अम्मा द्वारा की गयी है जिसका नाम है कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की। इसमें कुमुद फूल बेचनेवाली एक लड़की की माध्यम से एक सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा की है।

पुराना देवालय के पास रास्ते में कुमुद फूल बेचनेवाली अनेक लड़कियाँ हैं। मंदिर में आनेवाले प्रत्येक लोगों के पास जाकर वे फूल बेचने की कोशिश कर रही हैं। अपनी गरीबी, बेबसी और भूख के कारण ही ये लोग ऐसा कर रही है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लड़कियों के माध्यम से कवि ने एक सामाजिक सच्चाई को यहाँ दिखाया है। आज के समाज में प्रासंगिकता रखनेवाली कविता है यह। इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताया है कि गरीबों की भूख मिटाने से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है।

“हे फूल, तू अन्न है इस छोटी बहन के लिए
इससे बढ़कर पुण्य भला क्या है!
तुझे चढ़ाकर भला अब
क्या पाऊँ मैं…..!’
खाली हाथ,
आगे बढ़ जाता हूँ मैं
‘मेरे हाथ से, मेरे हाथ से’
का दीन स्वर धीमा होता जाता है…..।

प्रश्न 6.
यह कैसा काव्य हैं?
(अनूदित काव्य, खंड काव्य, विलाप काव्य, महाकाव्य)
उत्तरः
अनूदित काव्य

प्रश्न 7.
‘तुझे चढ़ाकर भला आब
क्या पाऊँ मैं……!’ किसे चढ़ाकर?
उत्तरः
म कुमुद फूल को चढ़ाकर

प्रश्न 8.
‘हे फूल, तू अन्न है इस छोटी बहन के लिए…..’ कवि ऐसा क्यों कहता है?
उत्तरः
फूल के दाम के रूप में उसके साथ में जो सिक्का मिलता है, वही सिक्के से वह अन्न खरीदता है। इसलिए कवि ऐसा कहता है।

प्रश्न 9.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
ओ.एन.वी.कुरुप मलयालम के लोकप्रिय कवि है। उनकी विख्यात कविता है “आंबलपूवु विलकुन्न पेणकुट्टी।” इस कविता का अनुवाद डॉ. एस.तंकमणी अम्मा द्वारा की गयी है जिसका नाम है कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की। इसमें कुमुद फूल बेचनेवाली एक लड़की के माध्यम से एक सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा की है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की के लिए यह फूल उसका अन्न है। फूल के दाम के रूप में जो पैसा उसे मिलता है, वही पैसा इकट्ठा करके वह अपने लिए अन्न खरीदती है। कवि को लगता है इस छोटी लड़की को अन्न के लिए पैसा देने से बढ़कर पुण्य और कुछ भी नहीं है। इसलिए मंदिर में फूल चढ़ाए बिना कवि वापस चला जाता है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लड़कियों के माध्यम से कवि ने एक सामाजिक सच्चाई को यहाँ दिखाया है। आज के समाज में प्रासंगिकता रखनेवाली कविता है यह। इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताया है कि गरीबों की भूख मिटाने से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile

ओ. एन. वी कुरुप मलयालम के लोकप्रिय कवि है। उनका जन्म 1931 को केरल प्रांत के कोल्लम के चवरा नामक गाँव में हुआ। ‘ताहिक्कुन्न पानपात्रं, ‘माटुविन चट्टले’, ‘भूमिक्कु ओरु चरमगीत’ आदि उनके प्रसिद्ध कवितासंग्रह है। 2007 के ज्ञानपीठ पुरस्कार और 2011 के पद्मविभूषण पुरस्कार से वे सम्मानित है।
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 1
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 2

अनुवादिका – डॉ. एस. तंकमणि अम्मा

हिन्दी मौलिक लेखन तथा अनुवाद के क्षेत्र में डॉ. एस. तंकमणि अम्मा की अलग पहचान है। उनका जन्म 1950 को तिरुवनंतपुरम में हुआ था। ‘गोत्रयान’, ‘स्वयंवर’, ‘लीला’, ‘एक धरती एक आस्मान एक सूरज’ आदि उनकी अनूदित काव्य रचनाएँ हैं। राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार, सौहार्द पुरस्कार, द्विवागीश पुरस्कार आदि से वे सम्मानित है।
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 3
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 4

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam 1

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी शब्दार्थ

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam 2

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam 3