Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी

प्रश्न 1.
मिलान करके लिखें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 1
उत्तर:
Resource = संसाधन
Trash = कूड़ेदान
Computer = संगणक
Search = खोज
Editing = ईक्षण
Keyboard = कुंजी पटल
Save = सहजें
Public = सार्वजनिक

Plus One Hindi समय के साथ हम भी Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही मिलान करके लिखें।
उत्तर:
Internet = बहिर्पात
Computer = अनचाहा
Spam = अंतर्जाल
Output = संगणक

प्रश्न 2.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(बातचीत, संचिका, मंडलिया, श्रेणियाँ, महत्वपूर्ण, अतंर्पात, ईक्षण)
i. Important
ii. Chats
iii. Categories
iv. File
v. Input
vi. Editing
उत्तर:
i. Important = महत्वपूर्ण
ii. Chats = बातचीत
iii. Categories = श्रेणियाँ
iv. File = संचिका
v. Input = अतंर्पात
vi. Editing = ईक्षण

प्रश्न 3.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(संसाधन, बर्हिपात, विषयहीन, गोपनीयता, अगला चरण, अधिक जानें, कुडेदान, खोज)
उत्तर:
i. Trash = कुडेदान
ii. Next Step = अगला चरण
iii. Search = खोज
iv. Output = बर्हिपात
v. Privacy = गोपनीयता
vi. Resource = संसाधन

प्रश्न 4.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(संसाधन, अंतर्जाल, प्रारूप, सार्वजनिक, प्रस्थान, खोज़, सचिका)
उत्तर:
i. Public = सार्वजनिक
i. Format = प्रारूप
iii. Sign out = प्रस्थान
iv. Internet = अंतर्जाल
v. File = सचिका
vi. Resource = संसाधन

प्रश्न 5.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(कूड़ेदान, संसाधन, संकेत, प्रक्रम, बातचीत, प्रस्थान, ख़ोज़, महत्वपूर्ण, सचिका)
उत्तर:
i. Symbol = संकेत
ii. Important = महत्वपूर्ण
iii. Resource = संसाधन
iv. Chats = बातचीत
v. Programme = प्रक्रम
vi. Trash = कूड़ेदान

प्रश्न 6.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(अगला चरण, सार्वजनिक, साझा करें, प्रारूप, कूड़ेदान, संकेत, बातचीत, प्रस्थान)
उत्तर:
i. Chats = बातचीत
ii. Public = सार्वजनिक
iii. Trash = कूड़ेदान
iv. Next Step = अगला चरण
v. Share = साझा करें
vi.Format = प्रारूप

प्रश्न 7.
सही मिलान करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 2
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 3

प्रश्न 8.
सही मिलान करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 4
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 6

समय के साथ हम भी Previous Years Questions and Answers

प्रश्न 1.
सूचनाःनिम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित .. हिंदी शब्द कोष्ठक से चुनकर मिलान कीजिए।
(खोज, रद्द करें, प्रस्थान, ईक्षण, गोपनीयता, संचिका, कूड़ेदान)
1. Cancel
2. Editing
3. File
4. Trash
5. Privacy
6. Search
उत्तर:
1. Cancel – रद्द करें
2. Editing – ईक्षण
3. File – संचिका
4. Trash – कूड़ेदान
5. Privacy – गोपनीयता
6. Search – खोज

प्रश्न 2.
सूचनाःनिम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित हिंदी शब्द कोष्ठक से चुनकर मिलान कीजिए।
(संचिका, गोपनीयता, खोज, बातचीत, ईक्षण, संकेत, साझा करे)
1. Chats
2. Editing
3. File
4. Search
5. Symbol
6. Privacy
उत्तर:
1. Chats – बातचीत
2. Editing – ईक्षण
3. File – संचिका
4. Search – खोज
5. Symbol – संकेत
6. Privacy – गोपनीयता

प्रश्न 3.
सूचनाः निम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित हिन्दी शब्द चुनकर मिलान कीजिए।
(अगला चरण, सार्वजनिक, साझा करें, बातचीत, प्रारूप, कूड़ेदान, संकेत)
1. Chats
2. Public
3. Trash
4. Next Step
5. Share
6. Format
उत्तर:
1. Chats = बातचीत
2. Public = सार्वजनिक
3. Trash = कूड़ेदान
4. Next Step = अगला चरण
5. Share = साझा करें
6. Format = प्रारूप

प्रश्न 4.
सुचना: निम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित हिंदी शब्द कोष्ठक से चुनकर मिलान कीजिए।
(गोपनीयता, रद्द करें, अंतर्जाल, प्रक्रिया, खोज, खाता जोड़ें, बाचचीत)
1. Cancel
2. Chats
3. Internet
4. Privacy
5. Process
6. Sign in
उत्तर:
1. Cancel : रद्द करें
2. Chats : बातचीत
3. Internet : अंतर्जाल
4. Privacy : गोपनीयता
5. Process : प्रक्रिया
6. Sign in : खाता जोड़ें

प्रश्न 5.
कोष्ठक से उचित हिंदी शब्द चुनकर मिलान कीजिए।
(संसाधन, तारांकित, ईक्षण, प्रक्रम, बहिपति, गोपनीयता, सहेजें)
Editing :
Output :
Save :
Resource :
Programme :
Privacy :
उत्तर:
Editing : ईक्षण
Output : बहिर्पात
Save : सहेजें
Resource : संसाधन
Programme : प्रक्रम
Privacy : गोपनीयता

समय के साथ हम भी Summary in Malayalam

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समय के साथ हम भी Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध

प्रश्न 1.
छोटे भाई के प्रति बड़े भाई का लगाव सूचित करनेवाले वाक्य चुनें।
जैसेः खेल में अकेला होने पर भाई आकर मेरी मदद करता है।
उत्तर:
अकसर भाई मेरी वजह से ही हारते। फिर भी वे मुझसे कभी कुछ नहीं कहते थे।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर तालिका भरें।

  • पश्चातापग्रस्त
  • दोस्ताना
  • ईर्ष्यालु
  • झूठा
  • सहानुभूतिवाला

उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 1

प्रश्न 3.
‘वे मुझसे प्यार करते थे और मेरे प्रति उनका रुख एक संरक्षक की ज़िम्मेदारी जैसा था’ – ‘अपराध’ कहानी के आधार पर बड़े भाई की चरित्रगत विशेषताओं को विस्तार दें।
उत्तर:

सच्चा भाई

उदय प्रकाश की ‘अपराध’ कहानी के दो मुख्य कथापात्रों में से एक है बड़ा भाई। एक पैर को बचपन में पोलियो हो जाने से बड़ा भाई अपाहिज था। अपाहिज होने पर भी, खेल-खूदों में वह बड़ा तत्परता रखता था। बड़ा भाई अच्छा तैराक था। हाथ के पंजों की लड़ाई में वह बहुत निपुण था। खड़ब्बल जैसे खेलों में वह डूबा जाता था। खेल में विजय होते समय अतिप्रसन्न होना उसका स्वभाव था। छोटे भाई की ओर बड़े भाई के दिल में बड़ी हमदर्दी और वत्सलता थीं। बड़े भाई के चरित्र पर भाईचारे का गुण प्रकट करते हुए उदय प्रकाश जी लिखते हैं, छोटे भाई के प्रति उसका ‘रूख एक संरक्षक की जिम्मेदारी जैसा था”।

बड़े भाई के चरित्र पर दया, उदारता, सहायकस्वभाव आदि भी हम देखते हैं। वह बड़ा क्षमाशील था। भाईचारे में वह बड़ा ईमानदार था। शत्रुता मनोभाव उसके चरित्र में कभी भी हम नहीं देखते।

‘बहुत सुंदर थे, देवताओं की तरह…..’। उसकी सुन्दरता शरीर में ही नहीं, मन में भी था। त्याग, क्षमा, संयम, मौन-सहन आदि विशिष्ट गुणों से बड़े भाई का चरित्र अलंकृत है। दोस्ताना, सहानुभूति आदि चारित्रिक विशिष्टताओं से भी बड़ा भाई हमें आकर्षित करता है।

संक्षिप्त में हम इस प्रकार कहें बड़े भाई का चरित्र दूसरों में ईर्ष्या और आत्महीनता जगाने तक उदात्त और उत्कृष्ट था। छोटे भाई ने बड़े भाई के सामने अपनी अवस्था के बारे में खुद कहा है: “मैं ईर्ष्या, आत्महीनता, …… की आँच में झुलस रहा था।”

प्रश्न 4.
विवश छोटा भाई सालों बाद क्षमा माँगते हुए अपने बड़े भाई को पत्र लिखता है। वह पत्र लिखें।
(अथवा)
‘भाई ही मुझे क्षमा कर सकते हैं, जिन्हें मेरे झूठ का दंड भोगना पड़ा’। इस प्रसंग को लेकर लेखक, भाई को पत्र लिखता है। पत्र तैयार करें।
(अथवा)
‘तो इस अपराध के लिए मुझे क्षमा कौन कर सकता है’ – पश्चाताप से विवश छोटा भाई सालों बाद क्षमा माँगते हुए अपने बड़ा भाई को पत्र लिखता है। वह पत्र लिखें।
उत्तर:

शहडोल,
15.03.2016

प्रिय भाई,
आप कैसे हैं? कुशल में हैं न? आप जैसे एक भाई होना मेरा बड़ा सौभाग्य है।
भाई, मैं आप से एक बात साफ बताना चाहता हूँ। उस दिन मेरा खड़ब्बल चट्टान से टकराकर उछला और सीधे मेरे माथे पर आकर लगा। माथा फूट गया और खून बहने लगे। मैंने रोते हुए माँ को बताया कि मुझे आपने खडब्बल से मारा है। भाई! मुझे अच्छी याद है, इस पर आपको पिताजी से बहुत मार खाना पड़ा।

आज मैं पश्चाताप से विवश हूँ। आप के पैर पकड़कर क्षमा माँगता हूँ। मुझे क्षमा देंगे न? आप तो पहले ही बहुत अच्छे चरित्र के थे। आप शरीर और दिल दोनों में सुन्दर थे। मेरा अपराध क्षमा कीजिए….. कृपया क्षमा कीजिए…. आपको भागवान सदा संतुष्ट रखें……

(हस्ताक्षर)
आपका छोटा भाई

सेवा में,
जोन के.के.
सुन्दर घर,
बड़ा गाँव पी.ओ.

प्रश्न 5.
स्मृति में जब भी वे आँखें जाग उठती हैं, मेरी पूरी चेतना, ग्लानि, बेचैनी और अपराध-बोध से भर उठती है। छोटे भाई की प्रायश्चित भरी वाणी है। आवश्य ही आपको या आपके …….. को ऐसा कोई अनुभव हुआ होगा। उस अनुभव का वर्णन करें।
उत्तर:
जब मैं पाँचवीं कक्षा में पढ़ रहा था, तब मेरी जिंदगी में एक घटना हुई। उदय प्रकाश की ‘अपराध’ कहानी में वर्णित घटना के समान था वह घटना। ‘अपराध’ के कथापात्रों के समान माँ-बाप के लिए हम दो ही संतान थीं तब घर में। मैं और मेरा छोटा भाई। मैं स्वभाव से तेज़ था। कोपशील और स्वार्थ भी था। लालच भी था।

माँ ने एक दिन घर में बिरियाणी बनायी थी। खाने के समय के लिए बिरियाणी को माँ ने सुरक्षित रखा था। माँबाप खेत गये। इस अवसर का लाभ उठाकर मैंने बिरियाणी चोरी की। जब माँ वापस आयी, तब माँ को मालूम हुई कि बिरियाणी कम हो गयी है। माँ ने मुझे बुलाकर पूछा। लेकिन मैंने माँ से झूठ बोला कि छोटा भाई ने चोरी की है। बड़ी निपुणता से मैं ने माँ को समझाया कि मैं ने यह चोरी देखी है। मेरी बात को माँ ने विस्वास किया। छोटे भाई को पकड़कर माँ ने खूब मारा। छोटा भाई बड़ी आवाज में रोता था।

आज वर्ष अनेक बीत गये। छोटे भाई के विवाह का शुभदिन आ रहा है। मैंने यह निश्चय किया है कि शादी के पहले मैं अपने अपराध को छोटे भाई के सामने बताकर माफी माँगूगा।

Plus One Hindi अपराध Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
मैं सबसे छोटा था और अकेला था। क्यों?
उत्तर:
उसका भाई और पूरे गाँव के सभी लड़के उससे छह वर्ष बड़े थे।

प्रश्न 2.
मुझे अपने भाई से ईर्ष्या होती थी, क्यों?
उत्तर:
भाई को बहुत सारे दोस्त थे।

प्रश्न 3.
भाई आकर मेरी मदद करते । कब?
उत्तर:
सब खेलते समय छोटा होने के कारण अकेला पड़ जाता तो, भाई आकर मदद करते थे।

प्रश्न 4.
दूसरे लड़के छोटे भाई को अपने पाली में शामिल क्यों नहीं करते थे?
उत्तर:
पाली में उसे शामिल करके हार का खतरा नहीं उठाना चाहते थे।

प्रश्न 5.
जोड़ी और पालीवाले खेलों में बड़े भाई क्या करते थे?
उत्तर:
बड़े भाई अपनी पाली में छोटे भाई को शामिल कर लेते थे।

प्रश्न 6.
“अकसर भाई मेरी वजह से ही हारते। फिर भी वे मुझसे कभी कुछ नहीं कहते थे.” क्यों?
उत्तर:
भाई के लिए लेखक एक उत्तरदायित्व की तरह था। लेखक को भाई बहुत प्यार करते थे और लेखक के प्रति भाई का रुख एक संरक्षक की जिम्मेदारी जैसा था। भाई यह जिम्मेदारी सदा निभाना चाहते थे।

प्रश्न 7.
शाम की धूप की विशेषता क्या है?
उत्तर:
शाम की धूप शरीर में उल्लास भरा करती है।

प्रश्न 8.
खडब्बल कैसे खेलता था?
उत्तर:
लकड़ी की छोटी-छोटी डंडियाँ हर लड़के के पास थीं। पूरी ताकत से खडब्बल को जमीन पर, आगे की ओर गति देते हुए, सीधे मारा जा रहा था।

प्रश्न 9.
छोटे भाई में किसकी ताकत न थी?
उत्तर:
छोटे भाई में इतनी ताकत न थी कि वह खड़बल को उतनी दूर तक पहुँचाता, जबकि वहाँ एक होड़, एक प्रतिद्वंद्धिता शुरु हो जाये।

प्रश्न 10.
गुस्से और तनाव में और ज्यादा ताकत से वे खड़ब्बल फेंक रहे थे-कौन?
उत्तर:
बड़ा भाई।

प्रश्न 11.
‘मुझे पहली बार यह लगा कि मैं वहाँ कहीं नहीं – क्यों?
उत्तर:
खड़ब्बल खेल में जीतते समय बड़ा भाई एक बार भी छोटे भाई की ओर नहीं देखता था। इतना ही नहीं, छोटे भाई को बड़ा भाई पूरी तरह उस समय भूलता था।

प्रश्न 12.
बड़े भाई के प्रति छोटे भाई के मन में कौन-सा भाव पैदा हुआ था?
उत्तर:
एक बहुत जबरदस्त प्रतिकार पैदा हो रहा था।

प्रश्न 13.
छोटा भाई किसकी आँच में झुलस रहा था?
उत्तर:
ईर्ष्या, आत्महीनता, उपेक्षा और नगण्याता की आँच में झुलस रहा था।

प्रश्न 14.
छोटे भाई के माथे पर कैसे चोट लगी?
उत्तर:
अचानक छोटे भाई का खड़ब्बल चट्टान से टकराकर उछला और सीधे उसके माथे पर आकर लगा। माथा फूट गया और खून बहने लगा।

प्रश्न 15.
बड़े भाई तेज़ी से दौड़ नहीं पा रहा था, क्यों?
उत्तर:
बड़े भाई का दायाँ पैर पोलियो का शिकार था।

प्रश्न 16.
घर पहुँचकर छोटे भाई ने माँ से क्या कहा?
उत्तर:
छोटे भाई ने माँ से यह कहा कि उसे बड़े भाई ने खड़ब्बल से मारा है।

प्रश्न 17.
बड़े भाई के प्रति छोटे भाई के मन में प्रतिकार की भावना क्यों उत्पन्न हुई?
उत्तर:
छोटे भाई के मन में ऐसा लग रहा था कि बड़े भाई के सामने वह कहीं नहीं है। बड़े भाई से इस प्रकार की उपेक्षा का अनुभव महसूस करने के कारण उसके दिल में बड़े भाई के प्रति प्रतिकार की भावना उत्पन्न हुई।

प्रश्न 18.
बड़े भाई की आँखों में करुणा और कातरता थीं- क्यों?
उत्तर:
बड़े भाई के विरुद्ध छोटा भाई झूठ बोल देने पर बड़े भाई को पिताजी से पीट सहना पड़ा। इसलिए बड़े भाई की आँखों में करुणा और कातरता थीं।

प्रश्न 19.
छोटे भाई के मन में जब बचपन की उस घटना की स्मृतियाँ आती हैं तब उसे कैसा अनुभव होने लगता है?
उत्तर:
छोटे भाई की पूरी चेतना ग्लानि, बेचैनी और अपराध बोध से भर आती है।

प्रश्न 20.
वे इस घटना को पूरी तरह भूल चुके हैं – कौन?
उत्तर:
बडा भाई।

प्रश्न 21.
छोटे भाई ने अपने अपराध के लिए क्षमा माँगनी चाही, लेकिन असफल रहा – क्यों?
उत्तर:
माँ-बाप मर गये थे। बातों की सत्यावस्था ठीक-ठीक उन्हें समझाने के लिए अब अवसर नहीं। इतना ही नहीं बड़ा भाई इन पूरी बातों को भूल गया है।

प्रश्न 22.
अब यह निर्णय बदला नहीं जा सकता -क्यों?
उत्तर:
छोटे भाई के झूठ का दंड बड़े भाई को भोगना पड़ा। लेकिन बड़ा भाई यह घटना बिलकुल भूल चुके थे। उस समय झूठ बोलने का जो निर्णय लिया था वह गलत और अन्यायपूर्ण था। लेकिन वह निर्णय बदलना अब संभव नहीं।

प्रश्न 23.
बड़े भाई के विरुद्ध छोटे भाई से हुए अपराध के बारे में बताकर अपने मित्र के नाम पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:

स्थान,
तारीख,

प्रिय मित्र,
मेरी बात जानकर तुम असंतुष्ट हो जाओगे कि यह कितनी पुरानी बात है! लेकिन मेरे मन में यह अब भी एक काँटा जैसी है वह बात।

बात यह है कि बचपन में एक दिन मेरा भाई मुझे भूलकर खड़ब्बल खेल रहा था। छोटा होने के कारण अपनी पाली में उस दिन उन्होंने मुझे शामिल नहीं किया था। जीतने की खुशी में भाई ने मेरी और देखा तक नहीं। इससे में रो पड़ा। मैं अकेले खड़ब्बल को पत्थर पर फेंककर खेलते वक्त अचानक वह मेरे माथे पर लगा। भाई मेरे पास दौडकर आये। लेकिन मैं ने उसको रोका | माँ से मैंने झूठ कह दिया कि भाई ने मुझे मारा है। पिताजी ने उन्हें इस पर खूब पीटा। यह सज़ा मिलते समय भाई ने मुझपर करुणा भरी दृष्टि से देखा। भाई का वह कारुणिक अवस्था मेरी स्मृति में अब भी है। मैं उस गलती केलिए क्षमा माँगना चाहता हूँ। लेकिन कैसे? माँ-बाप मर गये। भाई यह बात भूल गया है। मेरा मन अशांत है। मित्र, तुम इसकेलिए एक परिहार बता दो।

मेरा विश्वास है कि तुम जवाब ज़रूर दोगे।

प्यार से,
(हस्ताक्षर)
नाम

प्रश्न 24.
कहानी का अंश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मैंने भाई का चेहरा देखा। वे मेरी ओर देख रहे थे। उनकी आँखें लाल थीं और उनमें करुणा और कातरता थीं, जैसे वे मुझसे याचना कर रहे हों कि में सच बोल दूं। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उन्हें सज़ा मिल चुकी थी। फिर इतनी जल्द बात को बिलकुल बदलना मुझे संभव भी नहीं लग रहा था। क्या पता, पिताजी फिर मुझे ही मारने लगते। में डर रहा था।

i. यह किस कहानी का अंश है?
उत्तर:
उदय प्रकाश की ‘अपराध’ कहानी का।

ii. बड़े भई की आँखों में कौन-सा भाव था?
उत्तर:
करुणा और कातरता थीं।

iii. छोटा भाई क्यों डर रहा था?
उत्तर:
छोटे भाई ने जो बात बताई थी उसे जल्द बिलकुल बदलना उसे संभव नहीं लग रहा था। इसलिए पिताजी सच जानते समय छोटे भाई को भी पिताजी से मार मिलने की संभावना थी। इन बातों से छोटा भाई डर रहा था।

iv. उस दिन के छोटे भाई की डायरी लिखें।
उत्तर:

25 मार्च 2016

शहडोल :
आज मेरे लिए बिलकुल बुरा दिन था। मैंने झूठ बोलकर बड़े भाई को पिताजी के सामने अपराधी बनाया। बेचारा भाई! उनकी आँखें उस समय लाल हो गयी थीं। उनमें करुणा और कातरता थीं। वे मुझसे मौन याचना कर रे थे कि मैं पिताजी से सच बोल दूं। लेकिन मुझसे वह नहीं कर पाया। बड़े भाई को पिताजी से मेरे झूठ से सजा मिल गया। मैं विवश हो गया था। जल्द बात को बिलकुल बदलना मुझे संभव भी नहीं लग रहा था। मुझे यह डर भी था कि पिताजी मुझे सच जानते समय बुरी तरह मारेंगे।

हे भगवान! मुझसे बड़ा अपराध हो गया। मुझे क्षमा कर । भाई को अनुग्रह दे। मुझे नींद नहीं आती। मेरा मन बहुत व्याकुल है।

प्रश्न 25.
वह एक धीर, निडर एवं साहसी सैनिक था। अपने देश की सेना का नेतृत्व करनेवाला सेनानायक। उन दिनों दुश्मन सेना के साथ उनका युद्ध चल रहा था। दोनों सेनाओं में काफी विनाश हो चुका था। फिर भी सेनानायक निडर होकर अपनी सेना का नेतृत्व कर रहा था। हर दिन युद्ध समाप्त होने के बाद सब अपने-अपने डेरे में जाया करते थे। सेनानायक का निर्देश था कि कोई उसे तंग न करे क्योंकि शाम को वह भगवान की पूजा करेगा। रात को सैनिकों ने देखा कि सेनानायक कहीं जा रहा है। मैनिकों ने चुपचाप उनका पीछा किया। उन्होंने देखा कि सेनानायक युद्ध के मैदान में घायल पड़े सैनिकों की सेवा कर रहा है।, घावों में पट्टी बाँध रहा है और दवा लगा रहा है। आश्चर्य की बात यह थी कि उनमें शत्रु पक्ष के घायल सैनिक भी थे। सैनिकों के पूछने पर सेनानायक ने कहा कि घायलों की सेवा करते समय शत्रु और मित्र का भेद-भाव न दिखाएँ। इनकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है।

i. सेनानायक रोज़ शाम को कहाँ जा रहा था?
उत्तर:
सेनानायक युद्ध के मैदान में घायल पड़े सैनिकों की सेवा कर रहा था, घावों में पट्टी बाँध रहा था और दवा लगा रहा था। आश्चर्य की बात यह थी कि उनमें शत्रु पक्ष के घायल सैनिक भी थे।

ii. सेनानायक की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
उत्तर:

साहसी सैनिक

सैनिक में बड़ा नेतृत्व गुण था। इसलिए वे सेनानायक बन गये। वे बड़े बुद्धिमान थे। शत्रुओं को पराजित करने के लिए उन्होंने बुद्धि से काम किया। निर्भयत्व उसके चरित्र का एक विशिष्ट गुण था। सेनानायक वीर-शूर होने पर भी बड़ी सेवा मनोभाव से जीनेवाले भी थे। वे आदर्श सैनिक थे। एक आदर्श सैनिक शत्रुसेना के सामने भी मर्यादा और सेवाभाव से व्यवहार करता है। सेनानायक की रोगी – शुश्रूषा से हमें ज्ञात होते हैं कि उनका चरित्र आदर्श और मर्यादा से अलंकृत था।

प्रश्न 26.
यह घटना पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
शादी में कार मिली। पत्नी ने अपने पति से कहाः सुनो, हम भी एक ड्राइवर रख लें? तुम्हारे घर में कई कारें थीं, तुमने कार चलाना क्यों नहीं सीखा? कई कारें थीं तो कई ड्राइवर भी थे….. कार चलाना सीखने की कभी ज़रूरत भी महसूस नहीं हुई….फिर भी मैंने सीखनी चाही थी, पर पापा-मम्मी ने नहीं सीखने दी। क्यों? भाई ने सीखी थी। एक बार उसका एक्सीडेंट हो गया… यह समझो कि वह मरते मरते बचा था, तब से उसकी ड्राइविंग पर पाबंदी लगा दी गई थी और मुझे भी सीखने से मना कर दिया। एक्सीडेंट क्या ड्राइवर से नहीं हो सकता? हो सकता है किंतु खतरा अक्सर आगे बैठनेवाले का ही होता है, हाध-पैर टूटेंगे या मरेगा तो ड्राइवर मरेगा।

i. शादी में क्या मिली?
उत्तर:
शादी में कार मिली।

ii. एक्सीडेंट में खतरा अक्सर किसका होता है?
उत्तर:
आगे बैठनेवाले का ही होता है।

iii. पत्नी ने कार चलाना क्यों नहीं सीखा?
उत्तर:
कार चलाते समय पत्नी के भाई को बुरी तरह एक्सीडेंट हो गयी थी। वह मरते – मरते बचा था। तब से पापामम्मी ने भाई की ड्राइविंग पर पाबंदी लगा दी गयी और पत्नी को भी सीखने से मना कर दिया।

iv. उपर्युक्त घटना का संक्षेपण करें।
उत्तर:
शादी में मिली कार एक्सीडेंट की डर से पत्नी नहीं चलाती है। पति से पत्नी ड्राइवर को रखने का आग्रह प्रकट करती है। लेकिन पत्नी को पति समझाता है कि ड्राइवर को भी एक्सीडेंट हो सकता है।

v. संक्षेपण के लिए शीर्षक लिखें।
उत्तर:
ड्राइविंग और एक्सीडेंट।

vi. मान लें, शादी में पत्नी को नई मॉडल कार मिली है। उस पॉडल कार की बिक्री बढ़ाने केलिए अखबार में छपे कंपनी का विज्ञापन तैयार करें।
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 2

अपराध Previous Years Questions & Answers

प्रश्न 1.
‘अपराध’ कहानी का ये वाक्य पढ़िए।
“मैं अपने इस अपराध के लिए क्षमा माँगना चाहता हूँ।
इस अपराध की सज़ा पाना चाहता हूँ।”
अपने अपाहिज भाई का पिताजी से सज़ा दिलाते हुए उस दिन की छोटे भाई की डायरी तैयार कीजिए।

  • भाई का प्यार
  • खडब्बल के खेल में भाई की जीत
  • उपेक्षा की तीव्र वेदना
  • माँ बाप से झूठ बोलना

उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 3

अपराध Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 13
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 14

अपराध शब्दार्थ

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 18
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 19
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 20

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख

प्रश्न 1.
‘इस ठंडी रात में भी हमी दो व्यक्ति बाहर हैं। दोनों के बाहर रहने का विशेष कारण अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर:
यहाँ के दो व्यक्ति ‘दुःख’ कहानी का नायक दिलीप और दूसरा खोमचे बेचनेवाला लड़का है। दिलीप की पत्नी हेमा व्यर्थ रूठकर माँ के घर चली गयी है। इससे दुःखित होकर दिलीप मिंटो पार्क में मन बहलाने को गया था। इसलिए दिलीप अपने घर से बाहर था। खोमचे बेचनेवाला लड़का रोजी रोटी के लिए पकौड़े बेचने के लिए उसकी झोंपड़ी से बाहर था।

प्रश्न 2.
‘मैं इस जीवन में दुख ही देखने को पैदा हुई हूँ….. दिलीप ने आगे न पढ़ा, पत्र फाड़कर फेंक दिया’। हेमा का दिलीप के नाम का वह पत्र कल्पना करके लिखें।
उत्तर:

आमरा,
15.3.2015

प्रिय दिलीप,
आप कैसे हैं? माँ के घर मैं दुःख सहती सहती जीती हूँ। मैं इस जीवन में दुःख देखने को पैदा हुई हूँ। आप को मुझ से कोई प्यार नहीं है। मैं सदा आप को प्यार करती रहती हूँ। आप मुझे समझते क्यों नहीं? आप जैसे एक पति से क्या मुझे संतोष मिलेगा कभी? मेरी प्रतीक्षा है आप यहाँ पर जल्दी आ जायें और मुझे ले जायें। लगता हूँ मैं वापस आने के बाद आप मुझे दुःख फिर नहीं देंगे। दाम्पत्य जीवन के बारे में मुझमें कितनी आशाभिलाषाएँ थीं? सब निष्फल हो गयीं। आप के यहाँ आने की प्रतीक्षा में,

(हस्ताक्षर)
हेमा, आप की पत्नी

सेवा में,
दिलीप के.के.
मिंटो पार्क पि.ओ.
आरती नगर

प्रश्न 3.
‘मिट्टी ते तेल की ढिबरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य उनकी आँखों के सामने से न हटता था’। उस दिन की दिलीप की डायरी लिखें।
उत्तर:

मार्च 15, 2014

मिंटो नगरः
आज मेरे लिए बड़े मानसिक संघर्ष का दिन था। हेमा रूठकर माँ के घर चली गयी। मन बहलाने के लिए मैं मिंटो पार्क गया। पार्क से वापस आते समय खोमचे बेचनेवाले एक छोटे-से लड़के से मेरी भेंट हुई। कितना गरीब लड़का है वह!! मैंने उससे खोमचे खरीदे। दाम देने पर वापस देने के लिए उसके पास छुट्टे भी नहीं थे। उसकी माँ कितनी बेचारी औरत है? लेकिन, माँबेटे के बीच का प्यार देखकर मुझे आश्चर्य हो गया। उस लड़के के घर से मुझे उसली दुःख की पहचान हुई। मैंने वहाँ के दुःख को हेमा के दुःख से तुलना की। हेमा का दुःख बनावटी है। हेमा का दुःख अमीरी-प्रदत्त नकली दुःख है। वह रसीला दुःख है। लड़के और उसकी माँ का दुःख अभाव-प्रदत्त असली दुःख है।

हे भगवान! हम अमीरों को क्षमा कर। हेमा को मनपरिवर्तन दे। नींद आ रही है। गहरी तो नहीं…….

प्रश्न 4.
बच्चे की माँ और दिलीप, दोनों के मुँह से निकलते हैं – भूख नहीं है।
दोनों के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में इस कथन की विवेचना करके टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
दिलीप एक धनी आदमी है। उसकी पत्नी हेमा रूठकर माँ के घर चली गयी। इस पर दिलीप बड़ी निराशा में है। निराशा और मानसिक संघर्ष के कारण उसे भूख नहीं लगती। लेकिन, बच्चे की माँ दरिद्रता में है। अवश्य भोजन के लिए उसके पास सुविधा नहीं है। उसके पास केवल दो सूखी रोटयाँ हैं। उनको माँ बच्चे को खिलाना चाहती थी। स्वयं भूखी रहकर बेटे को रोटियाँ खिलाने के प्रयत्न में माँ झूठ बोलती है: ‘भूख नहीं है’। बेटे के प्रति बड़ी वत्सलता होने के कारण भी माँ कहती है: ‘भूख नहीं’। दिलीप के बिना भूख की अवस्था मानसिक संघर्ष के कारण से है, लेकिन माँ के बिना भूख का कारण दरिद्रता है।

प्रश्न 5.
स्कूलवालों ने लड़कियों को घर से लाने के लिए मोटर रख ली है और उसे निकाल दिया है।
मशीनीकरण ने एक ओर सुविधाएँ पैदा की हैं तो दूसरी ओर उसने बेरोज़गारी को बढ़ावा दिया है। मशीनीकरणः सकारात्मक बनाम नकारात्मक ।
‘मशीनीकरण के गुण-दोष’ – पर एक आलेख तैयार करें।
उत्तर:
मशीनीकरण ने एक ओर सुविधायें पैदा की हैं तो, दूसरी ओर उसने बेरोज़गारी को बढ़ावा दिया है। आज साधारण जीवन के सभी क्षेत्रों में मशीनीकरण तीव्र गति पकड़ रही है। घर में, दफ्तर में, स्कूल में, कारखानों में – सभी जगहों पर मशीनीकरण बहुत साधारण हो गया है। अनेक स्कूलवालों ने छात्रों के लिए गाड़ी का प्रबन्ध किया है। लेकिन अनेक स्कूल अधिकारियों ने आजकल इस सुविधा को रोक दिया है। मशीनीकरण एक बड़े पैमाने तक अच्छा है। इससे समय का लाभ होता है। नये नये आविष्कारों से विज्ञान और प्रौद्योगिकि का विकास होता है।

ऐसे गुण होने पर भी मशीनीकरण से अनेक बुराइयाँ भी होती हैं। मशीनीकरण की सबसे बड़ी बुराई इससे वातावरण का प्रदूषण होता है। इससे मानव अनेक प्रकार की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। आपसी संबन्ध कम हो जाता है। मशीनीकरण के आगमन के पहले लोगा हिलमिलकर काम करते थे। इससे सामाजिकता बढ़ती थी। लेकिन मशीनीकरण ने अणुपरिवार को बढ़ावा दिया है।

उदाहरण के लिए पहले छात्रगण शिक्षाकेन्द्रों की ओर पैदल जाते थे। इससे स्वास्थ्य, मेल-मिलाप आदि संरक्षित रहते थे। लेकिन शिक्षा केन्द्रवाले मोटरों की सुविधा देने से मेल-मिलाप कम हो गया। अनेक छात्रों का स्वास्थ्य भी कम कसरत से बिगड़ जाने लगा।

मशीनीकरण से गुण है, साथ-साथ दोष भी है। अतिमशीनिकरण न हो जाये। कम मशीनीकरण भी न हो जाये।

Plus One Hindi दुःख Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
मन वितृष्णा से कब भर जाता है?
उत्तर:
जिसे मनुष्य सर्वापेक्षा अपना समझ भरोसा रखता है, जब उसीसे अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो तो, मन वितृष्णा से भर जाता है।

प्रश्न 2.
बहुत से लोग उसे ‘अति’ कहेंगे। किसे?
उत्तर:
दिलीप द्वारा हेमा को दिये गये स्वतंत्रता, आदर, आतंरिकता और अनुरक्त भरे प्यार को ।

प्रश्न 3.
हेमा माँ के घर क्यों चली गई?
उत्तर:
उसकी सहेली के साथ दिलीप सिनेमा देख आने के कारण रात भर हेमा रूठी रहकर सुबह उठते ही वह माँ के घर चली गई।

प्रश्न 4.
दिलीप को किसपर भय हुआ?
उत्तर:
समय को बीतता न देखने पर दिलीप को भय हुआ।

प्रश्न 5.
अपने निकटतम व्यक्ति से अपमान और तिरस्कार होने पर मनुष्य की दशा क्या हो जाती है?
उत्तर:
मन वितृष्णा से भर जाता है।

प्रश्न 6.
जिंदगी में कभी-कभी एक-एक मिनट गुज़ारना भी मुश्किल हो जाता है- कब?
उत्तर:
वितृष्णा और ग्लानि में स्वयं यातना बन जाते समय ।

प्रश्न 7.
दिलीप क्यों व्याकुल था?
उत्तर:
दिलीप अपनी पत्नी हेमा को बड़ी आंतरिकता से प्रेम करता था। उसको पूर्ण स्वतंत्रता देता था। उसे बहुत आदर करता था। उसके प्रति बहुत अनुरक्त भी था। लेकिन, हेमा दिलीप के प्रति अविश्वास प्रकट करके अपने घर चली गई। इससे दिलीप व्याकुल था।

प्रश्न 8.
दिलीप के मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई। कब?
उत्तर:
मिंटो पार्क के एकांत में एक बेंच में बैठे समय सिर में ठंड लगने से।

प्रश्न 9.
दिलीप ने संतोष का एक दीर्घ निश्वास लिया। क्यों?
उत्तर:
अपनी आकस्मिक मृत्यु द्वारा पत्नी हेमा से बदला लेने का निश्चय करने पर दिलीप ने संतोष का एक दीर्घ निश्वास लिया।

प्रश्न 10.
दिलीप का मन कुछ हल्का हो गया था – कब?
उत्तर:
स्वयं सह अन्याय के प्रतिकार की एक संभावना देख दिलीप का मन कुछ हल्का हो गया।

प्रश्न 11.
बिजली के लैंप किस प्रकार अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहा था?
उत्तर:
बिजली के लैंप निष्काम और निर्विकार भाव से अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहा था।

प्रश्न 12.
स्वयं सह अन्याय के प्रतिकार की एक संभावना देख उसका मन कुछ हल्का हो गया था यहाँ प्रतिकार की संभावना क्या थी?
उत्तर:
दिलीप की मृत्यु । (मिंटो पार्क में बेंच पर एकांत बैठने से सिर में ठंड लग जायेगा, बीमार हो जाएगा, मर जाएगा, दिलीप के शवशरीर के पास पछताकर हेमा बैठेगी।)

प्रश्न 13.
‘सौर जगत के यह अद्भुत नमूने थे’। यहाँ अद्भुत नमूने क्या है?
उत्तर:
मनुष्यों के अभाव की कुछ भी परवाह न कर, लाखों पतंगे गोल बाँध-बाँध कर सड़क के लैंपों के चारों ओर नृत्य कर रहे थे।

प्रश्न 14.
मनुष्य के बिना भी संसार कितना व्यस्त और रोचक है। कैसे?
उत्तर:
प्रकृति के सुंदर दृश्यों से। (सड़क किनारे स्तब्ध खड़े बिजली के लैंप निष्काम और निर्विकार भाव से अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहे थे। लाखों पतंगे गोले बाँघबाँध कर, इन लैंपों के चारों ओर नृत्य कर रहे थे। वृक्षों के भीगे पत्ते बिजली के प्रकाश में चमचमा रहे थे। पदछाईयाँ सुन्दर दृश्य बना रही थीं। सड़क पर पड़ा प्रत्येक भीगे पत्ते और लैंपों की किरणों के बीच संवाद हो रहा था। ये सब देखकर दिलीप सोचता है कि मनुष्य के बिना भी संसार कितना व्यस्त और रोचक है।)

प्रश्न 15.
कोई श्वेत-सी चीज़ दिखाई दी। वह कौन थी?
उत्तरः
एक छोटा-सा लड़का सफेद कुर्ता- पायजामा पहने, एक थाली सामने रखे कुछ बेच रहा है।

प्रश्न 16.
खोमचे बेचनेवाले छोटे लड़के की हालत का वर्णन कैसे किया गया है?
उत्तर:
लड़का सफेद कुर्ता- पायजामा पहने, एक थाली सामने रखे कुछ बेच रहा है। बहुत छोटा उम्रवाला था। क्षुद्र शरीर था। सर्द हवा में बालक सिकुड़ कर बैठा था। रात में सौदा बेचनेवाला सौदागर लड़के के पास मिट्टी के तेल की ढिबरी तक नहीं थी।

प्रश्न 17.
उसने आशा की एक निगाह उसकी ओर डाली, और फिर आँखें झुका लीं। यहाँ बालक की कौन-सी चरित्रगत विशेषता प्रकट होती है?
उत्तर:
बिक्री की प्रतीक्षा में बालक ने आशा की एक निगाह दिलीप पर डाली। गरीब होने पर भी वह स्वाभिमानी है, बिक्री के लिए हाथ फैलाना या याचना करना वह नहीं चाहता। इसलिए उसने आँखें झुका लीं।

प्रश्न 18.
‘लड़के के मुख पर खोमचा बेचनेवालों की-सी चतुरता नहीं थी, बल्कि उसकी जगह थी एक कातरता’ – यहाँ ‘चतुरता’ एवं ‘कातरता’ शब्दों का तात्पर्य क्या है?
उत्तर:
चतुरता = निपुणता, कातरता = दीनता

प्रश्न 19.
ठंडी रात में कौन-कौन बाहर हैं?
उत्तर:
दिलीप और खोमचेवाला बालक।

प्रश्न 20.
कौन-सी चीज़ मनुष्य-मनुष्य में भेद की सब दीवारों को लाँघ जाती है?
उत्तर:
मनुष्यत्व।

प्रश्न 21.
बालक की प्रफुल्लता दिलीप के किस प्रश्न से उड़ गई?
उत्तर:
‘कुछ कम नहीं लेगा’ प्रश्न से।

प्रश्न 22.
दिलीप क्यों लड़के के घर चला?
उत्तर:
लड़के का घर देखने का कौतूहल जाग उठने से।

प्रश्न 23.
‘आठ पैसे का खोमचा बेचने जो इस सर्दी में निकला है उसके घर की क्या अवस्था होगी, यह सोचकर दिलीप सिहर उठा’- क्या आप सोच सकते हैं कि बालक के घर की अवस्था क्या होगी?
उत्तर:
बहुत दरिद्र अवस्था।

प्रश्न 24.
बच्चे ने घबराकर कहा- ‘पैसे तो घर पर भी न होंगे’। दिलीप सिहर उठा। दिलीप के सिहर उठने का कारण क्या होगा?
उत्तर:
बच्चे के जीवन की दरिद्र अवस्था के बारे में जानकर ।

प्रश्न 25.
लड़के की माँ को नौकरी से हटा दिया। क्यों?
उत्तर:
लड़के की माँ बाबू के घर में अढ़ाई रूपया महीना लेकर चौका-बर्तन करती थी। लेकिन जगतू की माँ ने दो रूपये पर यह काम करने को तैयार हो गई। इसलिए लड़के की माँ को नौकरी से हटा दिया।

प्रश्न 26.
बाबू की घरवाली ने माँ को हटाकर जगतू की माँ को रख लिया है। यहाँ समाज की कौन-सी मनोवृत्ति प्रकट है?
उत्तर:
धनी लोग गरीबों को गरीबीपन का शोषण करते हैं। यहाँ नौकरी के क्षेत्र में होनेवाले आर्थिक शोषण का दृश्य है।

प्रश्न 27.
जगतू की माँ को नौकरी से क्यों निकाल दिया?
उत्तर:
जब स्कूलवालों ने लड़कियों को घर से लाने के लिए मोटर रख ली, तब जगतू की माँ को नौकरी से निकाल दिया।

प्रश्न 28.
स्कूलवालों ने लड़कियों को घर से लाने के लिए मोटर रख ली है और उसे निकाल दिया है। यहाँ कहानीकार किस सामाजिक समस्या की ओर इशार करते है?
उत्तर:
मशीनीकरण के कारण गरीब लोगों की नौकरी नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 29.
‘एक बड़ी खिड़की के आकार का दरवाज़ा’ – के प्रयोग से कहानीकार क्या बताना चाहते हैं?
उत्तर:
खोमचे बेचनेवाले लड़के के घर की शोचनीय अवस्था ।

प्रश्न 30.
कोठरी के भीतर दिलीप ने क्या-क्या देखा?
उत्तर:
धुआँ उगलती मिट्टी के तेल की एक ढिबरी, एक छोटी चारपाई , दो-एक मैले कपड़े और आधी उमर की एक स्त्री मैली -सी धोती में शरीर लपेटे बैठी थी।

प्रश्न 31.
‘बेटा, रुपया बाबुजी को लौटाकर घर का पता पूछ लें, पैसे कल ले आना’। यहाँ माँ की कौन-सी चरित्रगत विशेषता प्रकट होती है?
उत्तर:
ईमानदारी, दूसरों पर विश्वास, दूसरों को मानना और स्वाभिमान।

प्रश्न 32.
दिलीप ने शरमाते हुए कहा। क्यों?
उत्तर:
माँ की सच्चाई और ईमानदारी से प्रमावित होकर।

प्रश्न 33.
स्त्री क्यों ‘नहीं-नहीं’ करती रह गयी?
उत्तर:
छुट्टे वापस देने केलिए न होने पर भी स्त्री के मन में बड़ा स्वाभिमान और ईमानदारी होने के कारण ।

प्रश्न 34.
स्त्री के चेहरे पर कृतज्ञता और प्रसन्नता की झलक कब छा गयी?
उत्तर:
दिलीप ने बाकी पैसे न लेने पर स्त्री के चेहरे पर कृतज्ञता और प्रसन्नता की झलक छा गयी।

प्रश्न 35.
बेटा कब रीझ गया?
उत्तर:
उसे सुबह रोटी के साथ दाल भी खिलाने की बात माँ से सुनकर बेटा रीझ गया।

प्रश्न 36.
लड़का पुलकित हो रहा था। क्यों?
उत्तर:
अपनी मेहनत की कमाई से रोटी खाने की प्रतीक्षा में लड़का पुलकित हो रहा था। हम जानते हैं कि मेहनत की रोटी मीठी होती है।

प्रश्न 37.
बेटा बचपन के कारण रूठा था। मगर घर की हालत से परिचित भी था। इस कथन का तात्पर्य क्या है?
उत्तर:
बेटा बचपन की चपलता के कारण रूखी-सूखी रोटी पर रूठ जाता है। मगर अपने अनुभव से घर की परेशानी परचानता है। तब बचपन की चपलता परिपक्वता में बदल जाती है। बचपन में ही बालक माँ के साथ परिवार का भार अपने कंधे पर उठाता था। परंतु अच्छा भोजन खाने के लिए वह दिन-दिन ललचा रहा था। इसलिए थोड़े समय के लिए वह रूठ गया था।

प्रश्न 38.
मुझे अभी भूख नहीं, तू खा’ – माँ ऐसा क्यों कह रही है?
उत्तर:
माँ को खाने के लिए आवश्यक रोटी नहीं थी। जितना भोजन घर में था. उसे माँ बेटे को खिलाना चाहती थी। माँ की ममता और बेटे के भविष्य की सोच में माँ ऐसा कह रही है।

प्रश्न 39.
सौदा बेचनेवाले बच्चे के घर आए दिलीप ने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? वह डायरी तैयार करें।
उत्तर:

तारीक

मिंटोपार्क नगर :
आज मैंने समझा कि सच्चा दुःख क्या है। सबेरे से हेमा के बारे में सोचकर मन चिंता से भरा था। फिर टहलने गया। बारिश का मौसम बीत गया था। फिर भी, शाम को सड़क और पार्क सुनसान था। मैं धीरे चलते वक्त सड़क पर एक बालक को देखा। वह सौदा बेच रहा था। उससे बातें करते समय मैंने समझ लिया कि उसका बाप मर गया था और माँ बीमार है। घर की परेशानी उसे इस ठंडी रात में सौदा बेचने के लिए मजबूर करती है। मैंने उससे पूरा सौदा खरीदा और एक रूपया दिया। बाकी पैसे देने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। उसके साथ दिलीप उसके घर चला। कितनी दयनीय थी वहाँ की अवस्था! रूखी रोटी पर गुस्सा उतारनेवाला बच्चा अब भी मेरे मन में है। घर में पैसा नहीं था। फिर भी मुफ्त के पैसे वे नहीं चाहते थे। उनके दुःख के सामने मेरा दुःख कितना छोटा है? उसे और भी मैं जरूर मिलूँगा।

प्रश्न 40.
सौदा बेचनेवाले बच्चे को दिलीप ने फिर देखा । तब दोनों के बीच का वार्तालाप तैयार करें।
उत्तर:
दिलीप : हाँ बेटा, कैसे हो?
बच्चा : ठीक हूँ जी। आपको मैंने कई बार देखा था।
दिलीप : फिर क्यों पास न आया?
बच्चा : मैं आपके पास आने लगा तो आप कहीं निकल जाते हैं।
दिलीप : अच्छा। तो, आज मुझे कैसे मिला?
बच्चा : आप मेरे सामने से निकलते समय ही मैंने आपको बुलाया।
दिलीप : घर में माँ सकुशल हैं?
बच्चा : माँ की बीमारी कुछ कम हुई है।
दिलीप : क्या ये दो पकौड़े मुझे दोगे?
बच्चा : ठीक है, लेकिन पैसा न देना।
दिलीप : पैसा नहीं, रूपया हूँ और यह लूँ।
बच्चा : बाकी देने के लिए घर में पैसे नहीं हैं ….
दिलीप : बाकी तुम्हारे पास रखो। बड़ा होकर वापस देना।
बच्चा : ठीक है। धन्यवाद।

प्रश्न 41.
मिट्टी के तेल की ढिबरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य उनकी आँखों के सामने से न हटता था। उस दिन की दिलीप की डायरी लिखें।
उत्तर:

तारीक

मिंटोपार्क नगर :
आज के दिन के बारे में क्या लिखू? कैसा दृश्य था वह? अपने बेटे की प्रतीक्षा में ठंडी रात में चादर ओढ़कर बैठी उस गरीब और बीमार माँ की आँखों में क्या क्या भाव थे? अपने बेटे को देखकर उसका चेहरा खिल उठा। सौदा बेचने की बात कहते समय उसके मुख पर खुशी आयी। बाकी पैसे की बात सुनकर उसने रूपए वापस देने की बात कही। गरीबी में भी उसे मुफ्त के पैसे की चाह नहीं! फिर उस माँ ने अपनी भूख भूलकर बेटे को भोजन खिलाया। दोनों का प्यार देख कर मेरा मन द्रवित हो गया। अभाव के इस दुःख के सामने मेरा दुःख कितना छोटा है ? कल ज़रूर उस बच्चे से मिलूँगा।

प्रश्न 42.
नौ कर विस्मित खड़ा रहा । क्यों?
उत्तर:
दिलीप की ‘भूख नहीं’ है बात सुनकर नौकर विस्मित खड़ा रहा।

प्रश्न 43.
दिलीप को भूख नहीं लगी। क्यों?
उत्तर:
खोमचे बेचनेवाले लड़के की माँ का ‘भूख नहीं’ कहना याद आने पर।

प्रश्न 44.
हेमा ने पत्र की पहली लाइन में क्या लिखा था?
उत्तर:
“मैं इस जीवन में दुःख ही देखने को पैदा हुई हूँ।”

प्रश्न 45.
‘रसीला दुख’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यशपालजी की दुःख कहानी से यह समझते हैं कि जीवन का यथार्थ दुःख गरीबी है। इसको न समझनेवाले दिलीप की पत्नी हेमा जैसे धनी लोगों का दुःख अमीरीप्रदत्त नकली दुःख है। सब कुछ होने पर भी, इस प्रकार दुःख करनेवाले लोगों का दुःख केवल तमाशा केलिए है, रस -विनोद के लिए है, सस्ती बातों पर है। अभाव – प्रदत्त असली दुःख की तुलना में यह एक प्रकार का सुखदायक दुःख है। इस दुःख में असलियत नहीं है और यह अनावश्यक दुःख है।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 1

प्रश्न 46.
‘काश तुम जानती दुःख किसे कहते है। तुम्हारा यह रसीला दुःख तुम्हें न मिले तो जिंदंगी दूभर हो जाए।’ प्रस्तुत घटना को दिलीप अपनी आत्मकथा में लिखता है। आत्मकथांश तैयार करें।
उत्तर:

यह दुःख नहीं

हेमा की सहेली के साथ मैं सिनेमा देख आने के कारण, रात भर वह रूठी रही। अगले दिन सुबह उठते ही हेमा अपनी माँ के घर चली गयी। तब मेरे मन में क्षोभ का अंत न रहा। मेरी पत्नी की इस व्यवहार से मेरा मन वितृष्णा और ग्लानि से भर गया। मन बहलाने के लिए मैं मिंटो पार्क गया। सिर में ठंड लगने से मेरे मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई।

मिंटो पार्क से लौटते समय एक गरीब बच्चे से मेरी भेंट हुई। वह सड़क के किनारे नींबू के वृक्षों की छाया में बैठकर पकौड़े बेच रहा था। मैंने उससे पूरे पकौड़े खरीदे। मैंने उसे एक रूपया दिया। लेकिन बाकी पैसे वापस करने के लिए उसके पास छुट्टे नहीं थे। उसकी माँ से छुट्टे लेने के नाम पर मैं उसका घर गया। वहँ मैं ने उसकी माँ को देखा।

कितनी गरीब थी वह! बाकी पैसे देने के लिए माँ के पास पैसे नहीं थे। बेचारी औरत! माँ की परेशानी देखकर मेरा मन उत्कंठित हो गया। माँ के पास अच्छे कपड़े नहीं थे। खाने के लिए आवश्यक भोजन नहीं था। घर भी बहुत दयनीय अवस्था में थी।

मैंने वहाँ पर असली दुःख देखा। मुझे उस कोठरी में असली दुःख की पहचान हुई। मैंने पहचाना कि जीवन का यथार्थ दुःख गरीबी है। हेमा का दुःख अमीरी -प्रदत्त नकली दुःख है। वह एक प्रकार का रसीली दुःख है। हेमा का दुःख सही में दुःख नहीं है।

प्रश्न 47.
‘वन-संरक्षण सबका दायित्व’ विषय पर संगोष्ठी में प्रस्तुत करने के लिए आलेख तैयार करें।
उत्तर:

वन-संरक्षण : सबका दायित्व

पेड़-पौधे प्रकृति के वरदान हैं। धरती की हरियाली जीवन के लिए अत्यावश्क है। पेड़ – पौधे धरती की हरियाली सदा संरक्षित रखते हैं। पेड़-पौधों के अभाव में धरती में गर्मी बढ़ जाती है। गर्मि से धरती का बचाव पेड़-पौधों से ही होता है। भूक्षरण की रोक भी पेड़-पौधों से होती है। पेड़-पौधे मनुष्य को और भी विविध प्रकार लाभदायक होते हैं। मनुष्य को खाने के लिए अनेक प्रकार के भक्ष्य-पदार्थ पेड़-पौधों से मिलते हैं। वन के पेड़-पौधों से मनुष्य के उपयोग के लिए अनेक प्रकार की औषधी भी मिलती है।

पक्षी, जीव-जन्तु भी वनसंरक्षण से जीवित रहते हैं। अनेक प्रकार के पक्षी और जीव-जतु वंश-नाश के खतरे में है। इनके बचाव भी वन को संरक्षित रखने से संभव होता है।

वन-संरक्षण सामाजिक दायित्व है। प्रत्येक साल वन-संरक्षण केलिए वन-महोत्सव की आयोजना होती है। वन महोत्सव को हर प्रकार प्रोत्साहन करना हमारा कर्तव्य है।

वन संरक्षण सब का दायित्व है। इसलिए वन-संरक्षण संबंधित सभी आयोजनाओं को हमें प्रोत्साहन करते रहना चाहिए।

दुःख Previous Years Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘मिट्टी के तेल की ढिबरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य उनकी आँखों के सामने से न हटता था’ उस दिन की दिलीप की डायरी निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार से लिखिए।
सहायक बिंदु:

  • बच्चे से भेंट
  • माँ की परेशानी
  • माँ-बेटे का प्यार
  • असली दुःख की पहचान और तुलना

उत्तर:

डायरी

25/7/2016,
सोमवार.

आज एक अजीब दिन था। हेमा मुझसे रूठकर अपनी माँ के घर चली गई। मैं कुछ समय तक उदास होकर रहे। श्याम होते होते बाहर कुछ देर घूमने केलिए निकला। रास्ते में एक बालक से मिला। वह कुछ पकोडों बेचने केलिए ठंडी रात में बैठे थे। उनके पास ठीक तरह से कपड़े तक नहीं था। मैं उनके पास जो पकोडे थे – पूरा खरीद लिया और बाकी पैसे न होने के कारण उनके साथ उनके घर चला। घर की हालत देखकर मैं स्तब्ध रह गया। उनकी माँ एक गरीब निस्सहाय औरत थी। फिर भी वह कितने प्यार से अपने बेटे के खयाल रखते हैं। मैं वहाँ से निकला तो मुझे समझ में आया असली दुःख क्या है। हम तो फालतू बातों को दुःख समझकर जी रहे हैं। हमें ज़रूर बाहरी दुनिया के बारे में सोचना चाहिए।

शुभरात्री

प्रश्न 2.
मान लीजिए ‘दुःख’ कहानी का पात्र दिलीप अपनी आत्मकथा लिखता है। आत्मकथा में गरीब माँ-बेटे का उल्लेख है। निम्नलिखित सहायत बिन्दुओं के आधार पर वह आत्मकथांश तैयार कीजिए।
सहायक बिंदु:

  • बच्चे से भेंट
  • माँ की परेशानी
  • माँ-बेटे का प्यार
  • हेमा का दुःख और खोमचेवाले लड़के का दुःखतुलना

उत्तर:

यह दुःख नहीं

हेमा की सहेली के साथ मैं सिनेमा देख आने के कारण, रात भर वह रूठी रही। अगले दिन सुबह उठते ही हेमा अपनी माँ के घर चली गयी। तब मेरे मन में क्षोभ का अंत न रहा। मेरी पत्नी की इस व्यवहार से मेरा मन वितृष्णा और ग्लानि से भर गया। मन बहलाने के लिए मैं मिंटो पार्क गया। सिर में ठंड लगने से मेरे मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई। मिंटो पार्क से लौटते समय एक गरीब बच्चे से मेरी भेट हुई। वह सड़क के किनारे नींबू के वृक्षों की छाया में बैठकर पकौड़े बेच रहा था। मैंने उससे पूरे पकौड़े खरीदे। मैंने उसे एक रूपया दिया। लेकिन बाकी पैसे वापस करने के लिए उसके पास छुट्टे नहीं थे। उसकी माँ से छुटटे लेने के नाम पर मैं उसका घर गया। वहँ मैं ने उसकी माँ को देखा। कितनी गरीब थी वह! बाकी पैसे देने के लिए माँ के पास पैसे नहीं थे। बेचारी औरत! माँ की परेशानी देखकर मेरा मन उत्कंठित हो गया। माँ के पास अच्छे कपड़े नहीं थे। खाने के लिए आवश्यक भोजन नहीं था। घर भी बहुत दयनीय अवस्था में थी।

मैंने वहाँ पर असली दुःख देखा। मुझे उस कोठरी में असली दुःख की पहचान हुई। मैंने पहचाना कि जीवन का यथार्थ दुःख गरीबी है। हेमा का दुःख अमीरी -प्रदत्त नकली दुःख है। वह एक प्रकार का रसीली दुःख है। हेमा का दुःख सही में दुःख नहीं है।

प्रश्न 3.
‘दुख’ कहानी के आधार पर असली दुख तथा नकली दुख के संबंध में संगोष्ठी में प्रस्तुत करने योग्य एक आलेख तैयार कीजिए।

  • गरीब तथा अमीर लोगों के दुख
  • दुख को हल करने का उपाय
  • मानवता का उदय

उत्तर:
दुःख एक ऐसी समस्या है जिसके कारण सभी लोग आज चिंतित है। गरीब और अमीर सभी लोग दुःखी है। सब के सब अपने दुःखों के लिए दूसरों को ही दोषी ठहराते हैं।

पहले हमें यह जानना चाहिए कि दुःख क्यों होता है और क्या होता है। जब तक हम अपने आप पर खुश नहीं है, अपने विजय पर खुश नहीं है, हमें दुःख ही दुःख मिलेगा। जो कुछ हमने पाया है या जो कुछ हमें है इस पर हमें खुश होना चाहिए। लेकिन मानव कभी भी ऐसा नहीं है। वह दूसरों की सुख-सुविधा और ऐश्वर्य देखता है और जो कुछ उसके पास नहीं है उसके बारे में सोचकर दुखी बन जाता है।

अपने दुःखों को हल करने का उपाय भी हमें खुद निकालना चाहिए। गरीबों के दुःख और अमीरों के दुःख में बहुत बड़ा अंतर है। जब अमीर बड़ी बड़ी सुखसुविधाओं के बारे में सोचकर दुःखी होते हैं तब गरीब रोज़ी-रोटी के बारे में सोचकर दुःखी हो जाते हैं। एक प्रकार से देखने पर अमीरों का दुःख कुछ रसीला है जब गरीबों का दुःख असली है।

जब तक पूरे समाज में मानव-मानव के बीच प्रेम और भाईचारे का संबंध नहीं पनपेगा, तब तक, दुःखी लोगों की संख्या कम नहीं होगा।

दुःख लेखक परिचय

यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रगतिशील कहानीकारों में श्रेष्ठ माने जाते हैं। वे क्रांतिकारी साहित्यकार थे। कहानियाँ, उपन्यास, निबंध आदि अनेक विधाओं में साहित्य रचना कर यशपाल हिन्दी के शीर्षस्थ कथाकार बने। सामाजिक कुरीतियाँ, शोषण और अंधविश्वास के खिलाफ समाज को सचेत करना यशपाल का लक्ष्य था। ‘झुठा-सच’, ‘दिव्या’, ‘देशद्रोही’, ‘मनुष्य के रूप’, ‘अमिता’, ‘पिंजरे का उडान’, ‘सच बोलने की भूल’आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। निम्नवर्ग के दुःख और निराशा भरी ज़िन्दगी का चित्रण दुःख कहानी में हुआ है।

दुःख Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 6
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 9
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 18
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 19

दुःख शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 20
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 21
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 22
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 23
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 24
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 25
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 26
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 27
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 28
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 29

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर

प्रश्न 1.
पाठकनामा पढ़ें और लिखें –
i. पाठक संपादक को बधाइयाँ दे रहा है, क्यों?
उत्तर:
संपादकीय समकालीन समस्या से संबंधित होने के कारण संपादक को पाठक बधाइयाँ दे रहा है।

ii. हमारा घमंड किस पर है?
उत्तर:
विज्ञान और प्रोद्योगिकी की उपलब्धियों पर।

iii. हमारी कमी क्या है?
उत्तर:
संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रहे हैं।

iv. संचार माध्यमों की कौन-सी भूमिका है?
उत्तर:
सराहनीय भूमिका निभा सकता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रक्रियाओं से गुज़रते हुए पाठकनामा के अनुवाद का संशोधन करें।

  • वैयक्तिक संशोधन
  • ग्रूप में प्रस्तुति एवं चर्चा
  • ग्रूप में परिमार्जन
  • ग्रूपों की प्रस्तुति

उत्तर:
अध्यापिका की ओर से तैयार की गई सामग्री की प्रस्तुति। इस भीषण परिस्थिति में, जहाँ संक्रामक बीमारियाँ तेज़ रफ़्तार से फैलते जा रहे हैं, बढ़ती बीमारियाँ संपादकीय विशेष प्रशंसनीय है। इस क़हर पर हम तभी लगाम डाल सकता है जबकि सरकार और जनता हमदिल से प्रयास करेंगे। खेद की बात है, एक ओर हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर घमंड करती जाती है दूसरी ओर ऐसी संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रह रहा है। इसपर पैबंद डालने के लिए समाज को सतर्क करने में संचार माध्यम सराहनीय भूमिका निभा सकती हैं।

प्रश्न 3.
संकेतों का अनुवाद हिंन्दी में करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 1
i. Clean the water storage containers and cover it
उत्तर:
पानी की टंकी साफ रखें और ढक रखें।

ii. Keep the surroundings clean and improve basic sanitation facilities
उत्तर:
परिवेश स्वच्छ रखें और बुनियादी सफाई सुविधाएँ सुधारके संभालें।

iii. Create an awareness about dengue chikungunya etc.
उत्तर:
डेंगू, मलेरिया इत्यादि के बारे में जनजागरण वनाये रखें।

iv. Seek the co-operation for the removal of breeding places
उत्तर:
मच्छरों के प्रजनन रोकने के लिए सहयोग का प्रबंध बनाये रखें।

Plus One Hindi सृजन की ओर Important Questions and Answers

अनुवादः

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 3

इस भीषण परिस्थिति में, जहाँ संक्रामक बीमारियाँ तेज़ रफ्तार से फैलते जा रहे हैं। बढ़ती बीमारियाँ संपादकीय विशेष प्रशंसनीय है। इस क़हर पर हम तभी लगाम डाल सकता है जबकि सरकार और जनता हमदिल से प्रयास करेंगे। खेद की बात है, एक ओर हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर घमंड करती जाती है दुसरी ओर ऐसी संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रह रहा है। इसपर पैबंद डालने के लिए समाज को सतर्क करने में संचार माध्यम सराहनीय भूमिका निभा सकती हैं

प्रश्न 1.
ऊपर के अनुवाद की व्याकरणिक त्रुटियों को सुधारें।
उत्तर:
इस भीषण परिस्थिति में, जहाँ संक्रामक बीमारियाँ तेज़ रफ्तार से फैलती जा रही हैं। बढ़ती बीमारियाँ संपादकीय विशेष प्रशंसनीय है। इस क़हर पर हम तभी लगाम डाल सकते हैं जबकि सरकार और जनता हमदिल से प्रयास करेंगी। खेद की बात है, एक ओर हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर घमंड करते जाते हैं दूसरी ओर ऐसी संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रह रहे हैं। इसपर पैबंद डालने के लिए समाज को सतर्क करने में संचार माध्यम सराहनीय भूमिका निभा सकता हैं

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 2a

प्रश्न 2.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Aravind : I send the mail to chandrakanth Devthale?
Razia : Yes, I sent Yesterday
Aravind : Did you get the reply?
Razia : Yes, he described a lot of things about his poem
Aravind : Can you send his message to me?
Razia : Ofcourse
उत्तर:
अरविंद : क्या आपने चंद्रकांत देवताले को डाक भेजा?
रज़िया : जी हाँ, मैंने कल भेजा।
अरविंद : क्या आपको जवाब मिला?
रज़िया : जी हाँ, उन्होंने उनकी कविता के बारे में बहुत सारी बातों का विवरण दिया।
अरविंद : क्या उनका सदेश मेरे लिए आप भेज सकती हैं?
रज़िया : जरूर।

प्रश्न 3.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Athul : Why didn’t you come yesterday?
Sam : I was not well
Athul : What happend?
Sam : It was raining heavily yesterday, I had no umbrella
Athul : Don’t forget to take umbrella during this season
Sam : Ok, my mother also told me.
उत्तर:
अतुल : तुम कल क्यों न आये?
शाम : मैं ठीक नहीं था।
अतुल : क्या हुआ?
शाम : कल भारी बरसात हो रही थी। मेरे पास छतरी नहीं थी।
अतुल : इस मौसम में छतरी ले जाने के लिए मत भूलो।
शाम : जी हाँ, मेरी माँ ने भी मुझे यह कहा था।

प्रश्न 4.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Mahesh : Where are you going Ram?
Ram : I am going to the railway station.
Mahesh : Why do you go there?
Ram : To take my uncle and aunty from the station.
Mahesh : Where are they coming from?
Ram : From Delhi, Sorry Mahesh, I am getting late, Bye Bye.
उत्तर:
महेश : राम, तुम कहाँ जा रहे हो?
राम : मैं रेल्वे-स्टेशन जा रहा हूँ।
महेश : तुम वहाँ क्यों जा रहे हो?
राम : मेरे मामा और मामी को स्टेशन से लेने के लिए।
महेश : वे कहाँ से आ रहे हैं?
राम : दिल्ली से, मॉफ करना महेश, मैं देर हो रहा हूँ… बाई…..बाई….

प्रश्न 5.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Mili : Daddy, Can you get me a toy?
Father : Of course dear, What kind?
Mili : I would to like to get a doll
Father : In the evening we will go together to the shop and you can buy one.
Mili : Today itself?
Father : Definitely, we will have it.
उत्तर:
मिली : पापा, आप मेरे लिए एक खिलौना देंगे?
पापा : बिल्कुल मिली, किस तरह की?
मिली : मैं एक गुड़िया मिलना चाहती हूँ।
पापा : शाम हम एक साथ दूकान जायेंगे और तुम गुड़िया खरीद सकती हो।
मिली : आज ही?
पापा : निश्चय, हम उसे खरीद लेंगे।

प्रश्न 6.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Arun : May I come in Teacher?
Teacher : Yes, why didn’t you come yesterday?
Arun : Sorry Teacher, my mother was ill. I was looking after her.
Teacher: Oh! How is she now?
Arun : Now she is all right.
Teacher : Okay, go to your seat.
उत्तर:
अरुण : मैं अंदर आँऊ टीचरजी?
टीचर : जी हाँ, तुम कल क्यों नहीं आये?
अरुण : मॉफ कीजिए, मेरी माँ बीमार थी। मैं उसकी देखभाल कर रहा था।
टीचर : अरे बापरे! अब वे कैसी हैं?
अरुण : अब ठीक है।
टीचर : ठीक, तुम आपनी जागह पर जाओ।

प्रश्न 7.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Student : Could you please give me the audio CD of Juloose drama?
Teacher : Sure, what for?
Student : We wish to present this drama on Hindi Day.
Teacher : Very good. Have you started rehersal?
Student : Yes. we started it yesterday.
Teacher : All the best.
Student : Thank you.
उत्तर :
छात्र : आप मेरे लिए ‘जुलूस’ नाटक की एक सि. डी. दे सकती हैं?
टीचर : बिल्कुल, क्या के लिए?
छात्र : हिंदी दिवस पर हम एक नाटक प्रस्तुत करना चाहते हैं।
टीचर : बहुत अच्छा, क्या तुम लोग पूर्वाभिनय (रिहर्सल) शुरु किया?
छात्र : जी हाँ, हमने कल शुरु किया।
टीचर : शुभ कामनाएँ…
छात्र : धन्यवाद टीचरजी।

प्रश्न 8.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Teacher : Why are you late Puneeth?
Puneeth : Sorry Teacher, I saw a tragic incident on the road.
Teacher : Oh! What happened?
Puneeth : A person was lying on the road. He was severely injured.
Teacher : What did you do then?
Puneeth : I took him to the hospital.
उत्तर:
टीचर : पुनीत, तुम क्यों देर हो गये?
पुनीत : मॉफ कीजिए, मैंने सड़क पर एक दुखात्मक घटना देखी।
टीचर : अरे बापरे! क्या हुआ ?
पुनीत : एक आदमी सड़क पर लेट रहा था। वह बुरी तरह घायल था।
टीचर : तुमने उस समय क्या किया ?
पुनीत : मैं उसे अस्पताल ले गया।

सृजन की ओर Previous Years Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Hema : Hello, Sreekala! Where are you going?
Sreekala : I am going to Ernakulam
Hema : For what?
Sreekala : Thave an interview for a teacher’s post at Navodaya Vidyalaya.
Hema : Which subject you have taken for your M.A.?
Sreekala : Hindi. It is my favourate subject
(interview – साक्षात्कार, favourable -पसंदीदा)
उत्तर:
हेमा : अरे श्रीकला, तुम कहाँ जा रही हो?
श्रीकला : मैं एरनाकुलम जा रही हूँ।
हेमा : क्या बात है?
श्रीकला : मुझे नवोदया विद्यालय में अध्यापक पद का साक्षात्कार हैं।
हेमा : आप एक.ए. के लिए कौनसा विषय चुना छा।
श्रीकला : हिंदी ही मेरा पसंदीदा विषय हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Vineeth : Hello Suresh, How are you?
Suresh : I am fine.
Vineeth : Yesterday, I say your brother at hospital. What was the matter?
Suresh : My father was admitted there.
Vineeth : What happened to him?
Suresh : He had severe fever, now he is okay.
(was admitted – प्रवेश किया गया, Severe fever-कठिन बुखार)
उत्तर:
विनीत : अरे सुरेष, कैसे हो?
सुरेष : मैं ठीक हूँ।
विनीत : कल मैं तुम्हारे भाई को अस्पताल में देखा। क्या बात है?
सुरेष : मेरा पिताजी को वहाँ प्रवेश किया गया है।
विनीत : उसे क्या हुआ?
सुरुष : उसे कठिन बुखार था, अब वह ठीक है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Teacher : Why are you late Puneeth?
Puneeth : Sorry Teacher, I saw a tragic incident on the road.
Teacher : Oh! What happened?
Puneeth: A person was lying on the road. He was severely injured.
Teacher : What did you do then?
Puneeth : I took him to the hospital.
(Tragic incident – दुखात्मक घटना, severely – बुरी तरह, injured – घायल हुआ)
उत्तर:
टीचर : पुनीत, तुम क्यों देर हो गये?
पुनीत : मॉफ कीजिए, मैंने सड़क पर एक दुखात्मक घटना देखी।
टीचर : अरे बापरे! क्या हुआ ?
पुनीत : एक आदमी सड़क पर लेट रहा था। वह बुरी तरह घायल था।
टीचर : तुमने उस समय क्या किया ?
पुनीत : मैं उसे अस्पताल ले गया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए:
Kiran : Sooraj, do you have a pet?
Sooraj : Yes. I have a parrot, I call her ‘sweety’
Kiran : What do you feed him with?
Sooraj : Some fruits and bread.
Kiran : Do you feel happy, taking care of your pet?
Sooraj : Yes, I feel good.
(Pet – पालतू जीव, Parrot – तोता, feed with – खिलाना, bread – रोटी)
उत्तर:
किरण : सूरज, क्या तुम्हारे पास कोई पालतू जीव है?
सूरज : हाँ, मेरे पास एक तोता है। मैं उसे स्वीटी कहता हूँ।
किरण : तुम उसे क्या खिलाया करते है।
सूरज : फल और रोटी।
सूरज किरण
किरण : तुम्हारे पालतू जीव की देखबाल करने पर क्या आप खुश है।
सूरज : हाँ, मैं बहुत अच्छा महसूस करता हूँ।

प्रश्न 5.
सूचनाः निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Mridula : Hello Veena, How are you?
Veena : Hai Mridula, I am fine. Where are you going now?
Mridula : I am going to a dance class. I wish to compose a new performance.
Veena : Very good. I am also waiting for your excellent performance. All the best.
Mridula : Thank you.
Veena : Ok, Bye Mridula
(Performance – प्रस्तुति, Compose – तैयार करना, Dance class – नाट्यशाला, Excellent – समर्थ)
उत्तर:
मृदुला : हलो वीणा, कैसी हो?
वीणा : हाय मृदुला, मैं ठीक हूँ। तुम कहाँ जा रही हो?
मृदुला : मैं नृत्य के एक क्लास में जा रही हूँ। एक नया नृत्य प्रस्तुत करने की तैयारी में हूँ।
वीणा : बहुत अच्छा। मैं भी तुम्हारी समर्थ प्रस्तुति की प्रतीक्षा कर रही हूँ। शुभ कामनाएँ।
मृदुला : धन्यवाद।
वीणा : अच्छा, चलती हूँ।

सृजन की ओर Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 6

Letter to the Editor

In this fearful situation of increasing epidemics, an editorial like ‘Badti Beem ariyam’ of current relevance deserves special appreciation. The malody can be put to an end only of the government and public work single mindedly. Even in this age where we boast off great scientific and technological advancement, it is an utter disgrace that we cannot prevent such epidemics. Media has a great role in creating social awareness to prevent such epidemic.

Abhinav. S.
New Delhi

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

प्रश्न 1.
कविता पढ़कर भरें –
जैसे-बच्चा रो रहा है, फिर भी बिस्कुट कुतरता है।
i. युवक थका हुआ है, फिर भी…….
उत्तर:
अपने कुचले सपनों को सहला रहा है।

ii. बूढ़े ने अपनी आँखों को हाथों से ढाँप लिया है, फिर भी….
उत्तर:
भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के बारे में कवि क्यों आशंकित है?
उत्तर:
उसे उखाड़ ले जाया सकता है अथवा तोड़ भी जा सकता है।

प्रश्न 3.
चित्र-वाचन
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 1
उत्तर:
लड़के-लड़कियाँ अपने खेल-खूद, विश्राम आदि के लिए प्रयुक्त पार्क का विनाश देखकर चिंतित हैं। वे शायद यह सोचते होंगे कि ऐसा क्यों हो रहा है, यहाँ पर इसको रोकने के लिए कोई नहीं है आदि… आदि..। पार्क, समुद्र तट, प्रपात, पहाड़ आदि ऐसी सार्वजनिक स्थल हैं, जो आज घटते जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों के नष्ट होने से मानसिक उल्लास की सुविधा और अवसर कम हो जाते हैं। इससे मनुष्य संघर्ष में पड़ जाता है।

हम इनको यह सांत्वना दें कि ऐसे आगे न होने देंगे। संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत देकर इस जगह को संरक्षित रखेंगे। उनके खेल-खूद और मानसिक उल्लास केलिए उचित स्थान ढूँढ देंगे। पोस्टर, पत्र आदि द्वारा जनजागरण और जनमत जगायेंगे।

प्रश्न 4.
‘समाज-निर्माण में सार्वजनिक जगहों का योगदान’ पर लेख लिखें।
उत्तर:
सार्वजनिक जगहों का महत्व
सार्वजनिक जगह सामाजिकता का संगम-स्थान है। पार्क, समुद्र-तट, प्रपात की जगह, पहाड़ आदि इस प्रकार की हैं। हमें उसे संभालना चाहिए। सरकार की ओर से इन सार्वजनिक स्थानों को संभालने के लिए सदा ध्यान होना चाहिए। यदि दूसरों के सुख-दुख पर हमदर्दी है तो, इनका संरक्षण ज़रूर होगा। सार्वजनिक स्थानों का विनाश होते समय मनुष्य का पराजय होता है, स्वार्थ की विजय होती है। सार्वजनिक जगहों का संरक्षण करना आज अत्यंत प्रासंगिक है। यह इसलिए कि सार्वजनिक जगह आज घटती जा रही है।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।?
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि देखते हैं कि पार्क में वर्षों पुरानी एक पत्थर की बैंच पड़ी है। कवि उस बैंच के चार दृश्य हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। एक दृश्य में एक रोनेवाला बच्चा पत्थर की बैंच पर बैठ कर रोता है। लेकिन वह विस्कुट कुतरते हुए चुप हो जाता है। दूसरे दृश्य में एक थका हुआ युवक अपने कुचले हुए सपनों को सहलाकर बैंच पर बैठा है। तीसरे दृश्य में एक रिटायर्ड बुढ़ा भरी दोपहरी में हाथों से आँखें ढाँपकर सो रहा है। चौथा दृश्य एक प्रेम-जोड़ा का है जो बैंच पर बैठकर जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

Plus One Hindi पत्थर की बैंच Important Questions and Answers

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर रोता हुआ बच्चा
बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है
जिसपर एक थका युवक
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है
जिसपर हाथों से आँखें ढाँप
एक रिटायर्ड बूढ़ा भर दोपहरी सो रहा है
जिसपर वे दोनों
जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता का है?
उत्तर:
पत्थर की बैंच ।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच पर कौन-कौन बैठे हैं?
उत्तर:
बच्चा, चुवक, बूढ़ा, प्रेमी-प्रेमिका आदि बैठे हैं।

प्रश्न 3.
बच्चा क्या कर रहा है?
उत्तर:
रोता हुआ बच्चा बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है।

प्रश्न 4.
युवक क्या कर रहा है?
उत्तर:
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है।

प्रश्न 5.
रिटायर्ड बूढ़ा क्या कर रहा है?
उत्तर:
हाथों से आँखें ढाँप भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 6.
‘वे दोनों’ कौन-कौन हैं?
उत्तर:
वे दोनों प्रेमी-प्रेमिका हैं।

प्रश्न 7.
‘वे दोनों’ क्या कर रहे हैं?
उत्तर:
अशा जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 8.
सबों ने पत्थर की बैंच का सहारा लिया। क्यों?
उत्तर:
पत्थर की बैंच किसी की निजी सामग्री नहीं है। बैंच पार्क में उपस्थित है। कोई उस पर जाकर बैठ सकता है। बच्चा, युवक और बूढा तीनों अपने अपने विकट समय में है। विश्राम करने के लिए तीनों पार्क की बैंच का आश्रय लेते हैं।

प्रश्न 9.
पत्थर का बैंच किसका प्रतीक है?
उत्तर:
घटती सार्वजनिक जगह का प्रतीक है।

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर अंकित हैं आँसू, थकान
विश्राम और फ्रें की स्मृतियाँ
इस पत्थर की बैंच के लिए भी
शुरु हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इस उखाड़ कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बैंच पर!

प्रश्न 1.
इस पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के लिए क्या शुरु हो सकता हैं?
उत्तर:
हत्याओं का सिलसिला।

प्रश्न 3.
पत्थर की बैंच पर क्या-क्या अंकित हैं?
उत्तर:
कवि ने देखा, पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं।

प्रश्न 4.
कवि को किस बात का पता नहीं है?
उत्तर:
पता नही कि सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा उस पत्थर की बैंच पर।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि ने देखा कि पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं। लेकिन यह सब जाननेवाला कवि आशंकित हो जाता है। यह इसलिए है कि किसी दिन इस पत्थर की बैंच के लिए हत्याओं का सिलसिला शुरु हो सकता है। उसे उखाड़ कर ले जाया सकता है। अथवा तोड़ भी जा सकता है। कवि को यह नहीं मालूम है कि सबसे पहले इस पत्थर की बैंच पर कौन आसीन हुआ होगा? अर्थात कवि डरता है कि इस पत्थर की बैंच के बारे में अधिकार स्थापित करने केलिए कब लड़ाई शुरु हो जायेगी।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है। जाति, धर्म, राजनीति, स्वार्थता आदि के नाम पर और उनकी सस्ती प्रतिस्पर्धा के लिए सार्वजनिक स्थलों का शिकार बनकर उन्हें सत्यनाश न करना चाहिए।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

सूचना : निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

इस पत्थर की बेंच के लिए भी
शुरू हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इसे उखाड़कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बेंच पर।

प्रश्न 1.
यह कवितांश के कवि कौन है?
उत्तर:
चन्द्रकांत देवताले

प्रश्न 2.
कविता के ‘आसीन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए।
(खड़ा, बैठा, सुना)
उत्तर:
बैठा

प्रश्न 3.
कवि को किसका संदेह है?
उत्तर:
कवि का संदेह यह है कि इस पत्थर की बेंच पर सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले हिंदी का विख्यात कवि है। समकालीन कविता के क्षेत्र में वे अत्यंत ख्याति प्राप्त है। ‘पत्थर की बेंच’ समकालीन सामाजिक समस्याओं को सूचित करनेवाली एक कविता है।

सार्वजनिक जगहों के नाश पर कवि आशंकित है। कवि की आशंका यह है कि पत्थर की बेंच के लिए भी किसी दिन हत्याओं का सिलसिला शुरू हो सकता है। अपनी स्वार्थता के लिए कोई भी, किसी भी समय ऐसे सार्वजनिक जगहों का सर्वनाश कर सकता है। कवि का डर यह है कि इन जगहों के नाश होने पर साधारण जनता अपनी संवेदनाओं को कैसे शांत कर सकेगा।

‘पत्थर की बेंच’ एक समकालीन कविता है जिसमें सार्वजनिक जगहों के नाश पर आशंकित कवि को हम देख सकते हैं।

पत्थर की बैंच Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 7

पत्थर की बैंच शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

प्रश्न 1.
‘आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है’, चाँद क्यों ऐसा कह रहा है?
उत्तर:
आदमी स्वयं उलझनें बनाकर अपने आप को उसमें फँस देता है। फिर, बैचेन होकर वह न जगता है, न सोता है।

प्रश्न 2.
आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है- अपना मत प्रकट करे।
उत्तर:
कवि रामधारी सिंह दिनकर के अभिप्राय में आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है। वह आज बनता है और कल फूट जाता है। कभी कभी यह बात ठीक है। लेकिन सदा ऐसा नहीं होता। स्वप्न को आदमी यथार्थ में ले आकर महान कार्य करता है। हमें व्यर्थ में स्वप्न न देखना चाहिए। यथार्थ में फलनेवाले स्वप्न देखना चाहिए। अब्दुल कलाम जी ने कहा है: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 3.
कवि के बदले रागिनी क्यों बोल उठी?
उत्तर:
स्पप्न को ठीक रूप से समझने में असमर्थ होकर कवि मौन रहा। इसलिए रोगिनी बोल उठी।

प्रश्न 4.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?
उत्तर:
धारवाली।

प्रश्न 5.
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?
उत्तर:
व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कविता में प्रस्तुत किया गया है।

चाँद और कवि अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 6.
समान भाववाली पंक्ति चुनकर लिखें।
a. स्वप्नों को आग में गलाकर लोहा बनाता है।
b. मनु पुत्र के कल्पना भरे सपने तीखे होते हैं।
c. चाँद इतना पुराना है कि उसने मनु का जन्म और मरण देखा है।
d. आदमी स्वयं उलझनें बनाकर चैन खो बैठता है।
उत्तर:
a. आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
b. जिसकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है।
c. मैं कितना पूराना हूँ?, मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते।
d. उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता है और फिर वैचैन हो जगता न सोता है।

प्रश्न 7.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है।

प्रश्न 8.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

  • पंक्तियों का विश्लेषण किया है।
  • अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया है।
  • पंक्तियों के विचार से अपने विचार की तुलना की है।

प्रश्न 9.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है। कवि से चाँद कहता है कि मनुष्य विचित्र जीव है। यह इसलिए है कि आदमी जान-बूझकर उलझनें उत्पन्न करता है, उसीमें फंस रहता है, फिर बेचैन होकर उसको नींद तक दुस्सह होता है ।चाँद सृष्टि के पुराने पदार्थ होने पर अहं करता है। चाँद कहता है कि उसने आदि मानव मनु के जन्म और मरण देखा है। चाँदनी में पागल की तरह बैठ स्वप्नों को यथार्थ में परिवर्तन करने का परिश्रम करनेवाले कवि को चाँद तुच्छ मानता है। हमारे समाज में कई प्रकार की रूढ़ियाँ हैं। वे सदा परिवर्तन के विरुद्ध खड़ी रहती हैं। कवितांश में चाँद रूढ़ियों का प्रतिनिधि है। परिवर्तन एक क्षण में नहीं होता। उसके पीछे दशकों की कल्पनाएँ और स्वप्न समाहित हैं। परिवर्तन केलिए कल्पना करनेवालों और स्वप्न देखनेवालों का प्रतिनिधि हैं कवि। कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 1

प्रश्न 10.
निम्नांकित कथन पर अपना विचार प्रस्तुत करें
“महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।”
– डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम
उत्तर:
सपनों का महत्व
जीवन को आगे बढ़ाने के लिए स्वप्ने होना आवश्यक है। दिवास्वप्नों से कोई उपयोग नहीं। ये जल के बुलबुले समान है। यथार्थ से इनको कोई संबंध नहीं है। हमें सच्छे स्वप्न देखना चाहिए। महान व्यक्ति ही महान सपने देखते हैं। महान स्वप्नों से ही महान कार्य निकलते हैं। महान लोग व्यर्थ स्वप्नों को कभी प्रधानता नहीं देते। महान लोग अपने स्वप्नों को यथार्थ में बदल देने के लिए उत्सुक रहते हैं। अब्दुल कलामजी ने ठी कहा है कि: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है।
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,
और फिर बैचैन हो जगता न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?
मैं चुका हैं देख मनु को जनमते-मरते?
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी पर बैठ स्वपनों पर सही करते।

i) यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
रामधारी सिंह दिनकर की ‘चाँद और कवि’ से।

ii) यहाँ किन के बीच बातचीत हो रही है?
उत्तर:
चाँद और कवि के बीच।

iii) कविता के ‘अनोखा’ शब्द का समानार्थी शब्द लिखें?
उत्तर:
विचित्र।

iv) निम्नलिखित शब्दों के लिए कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें? आसमान, विचित्र, मानव
उत्तर:
गगन, अनोखा, आदमी

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है,
किंतु, तो भी धन्य; टहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु, मेरी रागिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तू?
स्वप्न मेरे बुलबुले हैं? हे यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!
मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
और उसपर नींव रखती हूँ नए घर की,
इस तरह, दीवार फ़ौलादी उठाती हूँ।

i) चाँद के अनुसार मनुष्य का स्वप्न किसके समान है?
उत्तर:
जल के बुलबुले के समान।

ii) बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
कवि।

iii) कवि केलिए कौन बोलने लगी?
उत्तर:
कवि की रागिनी। (कवि की काव्य चेतना, कविता)

iv) कवि आग में किसको गलाकर लोहा बनाता है?
उत्तर:
स्वप्न को।

v) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

आदमी के स्वप्न की तुलना जल के बुलबुलों से चाँद करता है। बुलबुलों से खेलकर कवि कविता बनाता है। क्षण में टूट जानेवाले बुलबुलों को सच मानकर कविता करनेवाले कवि पर चाँद यहाँ व्यंग्य करता है।

चाँद का व्यंग्य -परिहास सुनकर कवि चुप रहा। पर, परिवर्तन की आग मन में छिपाई हुई कवि की काव्य चेतना आर्थात कविता चुप नहीं रह सकी। वह चाँद को ललकारने लगी। अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई काव्य चेतना चाँद से सही पहचान करने को बताती है। काव्य चेतना की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ा करती है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, उन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

प्रश्न 14.
उलझनों में फँसकर कौन बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
आदमी।

प्रश्न 15.
कौन उलझनें बनाता है?
उत्तर:
प्रणा मानव।

प्रश्न 16.
आदमी किस में फँसकर बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
उलझनों में

प्रश्न 17.
किसने मनु को जनमते -मरते देखा है?
उत्तर:
चाँद ने।

प्रश्न 18.
‘पागल कहकर चाँद किसका उपहास करता है?
उत्तर:
स्वपनों को यथार्थ में परिवर्तित करने का परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि को।

प्रश्न 19.
बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
परिवर्तन के लिए परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि।

प्रश्न 20.
स्वप्न जल का बुलबुला है या नहीं, क्यों?
उत्तर:
स्वप्न केवल जल का बुलबुला नहीं। यह इसलिए कि परिवर्तन का तूफान सपनों में समावेश हुआ है।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 16

प्रश्न 21.
चाँद का उपहास सुनकर कौन चुप रहा?
उत्तर:
कवि।

प्रश्न 22.
रागिनी ने चाँद से क्या-क्या कहा?
उत्तर:
अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई चाँद से सही पहचान करने को रागिनी बताती है। रागिनी की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को अपने मनन की आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ी करती है।

प्रश्न 23.
स्वप्नो को गलाकर रागिनी (कविता) क्या बना देती है?
उत्तर:
लोहा बनाती है।

प्रश्न 24.
लोहे की नींव पर किसकी स्थापना होती है?
उत्तर:
नए घर की फौलादी दीवार की।

प्रश्न 25.
नए घर की दीवार कैसे होती है?
उत्तर:
फौलादी।

प्रश्न 26.
यहाँ दीवारों को फौलादी क्यों कहा गया है?
उत्तर:
मन में उठनेवाले विचार चाहे शुरु में अस्पष्ट दिखते हो, परंतु मन रूपी धौंकिनी में गल-गलाकर वे सुदृढ़ बनते जाते हैं। वे विचार समाज को सुदृढ़ बनाने में काम आते हैं।

प्रश्न 27.
मनु के स्थान पर आज कौन है?
उत्तर:
मानव।

प्रश्न 28.
मनु-पुत्र के हाथ में बाण और तलवार के रूप में क्या-क्या है?
उत्तर:
विचार और स्वप्न।

प्रश्न 29.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?

प्रश्न 30.
जिह्वा, तीर, खड़ग- आदि शब्दों के समानार्थी पद कविता से छाँटकर लिखें।
उत्तर:
जिह्वा = जीभ, तीर = बाण, खड़ग = तलवार

प्रश्न 31.
स्वर्ग के सम्राट को क्या खबर पहूँचाना है?
उत्तर:
जिस को स्वप्नजीव कहकर उपहास करता है, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

प्रश्न 32.
स्वर्ग के सम्राट से क्या ललकार किया जाता है?
उत्तर:
मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूकियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है।

प्रश्न 33
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?

Plus One Hindi चाँद और कवि Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आदमी का स्वप्न? वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है;
किंतु, तो भी धन्य; ठहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु मेरी रोगिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तूऊ
स्वप्न मेरे बुलबुले है? है यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
चाँद और कवि

प्रश्न 2
कविता के ‘रागिनी’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (उपन्यास, नाटक, कविता, कन्या)
उत्तर:
कविता

प्रश्न 3.
जल के बुलबुले की विशेषता क्या है?
उत्तर:
जल के बुलबुले आज बनते हैं और कल फिर टूट जाते हैं।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री रामदारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध कविता ‘चाँद और कवि’ से है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि हे दिनकर। उर्वशी, रेणुका, कुरुक्षेत्र आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। चाँद कवि को मानव के पागलपन के बारे में कहते हैं। कवि जवाब के रूप में कहते हैं कि आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला जैसा है – आज बनता हैं कल टूट जाते हैं। फिर भी वह धन्य है क्योंकि आदमी ऐसे स्वप्नों से खेलकर कविता बनाता है।

अर्थात् नये नये सृजन करते है। कवि के अंतर की रागिनी बोलती है कि चाँद तुम जो पानी और बुलबुले कहकर पुकारनेवाला मानव का स्वप्न असल में आग हैं। तुम इसे ठीक तरह से पहचानते नहीं। .. यहाँ कवि सरल भाषा में समाज को आह्वान कर रहे हैं कि हम मानव किसी भी बात में पीछे नहीं होना चाहिए। हम जिसे स्वप्न के रूप में देखते हैं कह कर भी डालते हैं। छात्रों को जागरित होकर प्रयत्न करने का प्रोत्साहन देनेवाले कविता है यह।

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, इन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

1. यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
2. कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (तलवार, तेज, बाण, रोज़)
3. मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
4. कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

चाँद और कवि Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 2

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 3

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 5

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 6

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 9

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 12

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 13

चाँद और कवि Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 14
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 15

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

प्रश्न 1.
बीमारियाँ कैसे जन्म लेती हैं?
उत्तर:
बारिश के दिनों में बड़ी संख्या में मच्छर पैदा होना एक सामान्य बात है, जिसके परिणामस्वरूप मलेरिया व डेंगु जैसी बीमारियाँ जन्म लेती हैं।

प्रश्न 2.
बीमारियाँ कैसे फैलती हैं?
उत्तर:
स्थाई निवारण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। इसलिए बीमारियाँ फैलती हैं।

आपकी आवाज़ अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
चर्चा करें – संपादकीय लेखन कैसे?

चर्चा बिंदु :

  • विषय का चुनाव
  • विषय के ज़रूरी तथ्य
  • समस्या-प्रस्तुति का ढाँचा
  • समर्थन का तरीका
  • संपादकीय भाषा
  • शीर्षक

(सहायक संकेत-परिशिष्ट, पृष्ठ संख्या-110-111, संपादकीय)

प्रश्न 2.
‘बढ़ती बीमारियाँ’ में
a. किस विषय की चर्चा हुई है?
b. विषय-प्रस्तुति के लिए कौन-कौन से तथ्य जुटाए हैं?
c. समस्या का समर्थन करने के लिए क्या-क्या तर्क उठाए हैं?
d. समस्या प्रस्तुत करने के लिए कौन-सी भाषा-शैली का प्रयोग किया है?
e. संपादकीय का शीर्षक कैसे चुना है?
उत्तर:
a. राजधानी दिल्ली में बढ़ती बीमारियों की चर्चा हुई है।
b. विषय संबंधी आवश्यक जानकारी, सांख्यिकीय स्पष्टीकरण ज़रूरी प्रस्ताव आदि तथ्य जुटाए हैं।
c. स्थिति की गंभीरता, सरकार का उत्तरदायित्व आदि तर्क उठाये है।
d. सरल शब्दों में आकर्षक एवं प्रभावशाली भाषा शैली।
e. समकालीन समस्या संबन्धी।

यह रपट पढ़ें

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 1

प्रश्न 3.
रपट के लिए एक नया शीर्षक लिखें।
शीर्षक की परख, मेरी ओर से

  • पढ़ने को प्रेरित करता है।
  • केंद्र आशय को उद्दीप्त करता है।
  • भ्रमात्मकता से रहित है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से ‘बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ’ पर संपादकीय तैयार करें।

  • कच्ची-टूटी सड़कें
  • गाड़ियों की बढ़ती संख्या
  • ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन
  • नशीली चीज़ों का उपयोग
  • नियमों का सज़ पालन
  • जागरण-कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमकार 19 मार्च 2016
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ

केरल में सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती जाती हैं। कल कोल्लम जिले में एक मिनी बस के पलटने से 2 लोगों की मृत्यु हो गयी और 12 लोग घायल हो गये। सड़क कच्ची-टूटी अवस्था में है। गाड़ियों की संख्या रोज़ बढ़ती जाती है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता जाता है। सरकार की ओर से आवश्यक ध्यान इन बातों पर नहीं है। अनेक ड्राईवर लोग नशीली चीज़ों के उपयोग करके गाड़ियाँ चलाते हैं। इनको पकड़ने के लिए सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाता है। नियमों का सख्त पालन पर सरकार की ओर से ज़रूरी ध्यान होना चाहिए। जनजागरण-कार्यक्रम भी होना चाहिए। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सहयोग देना चाहिए।

प्रश्न 4.
संपादकीय की परख, मेरी ओर से

  • तथ्यों की सटीक प्रस्तुति हुई है।
  • समस्या के विभिन्न कारण प्रस्तुत किए हैं।
  • समस्या-समाधान के सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
  • अनावश्यक विस्तार नहीं है।
  • आकर्षक शीर्षक है।

उत्तर:
संपादकीय समाचार पत्र या अन्य पत्रिका का अभिमत प्रकट करनेवाला एक लेख है। जनहित और जनमत संपादकीय का विषय होना चाहिए। सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक या अन्य समस्याओं पर अपना मंतव्य प्रकट करना संपादकीय के विषय का जरूरी तथ्य होता है। आवश्यक जानकारी और तथ्यों का समाहर करना संपादकीय लिखने के पहले ज़रूरी है। मर्म छूटे बिना विषय को संक्षिप्त रूप में प्रकट करना चाहिए। विषयानुकूल तथ्यों का समर्थन और विरोधी विचारों का खंडन संपादकीय में होना चाहिए। भाषा प्रवाहमय और सरल शब्दों में होनी चारिए। विषयोचित आकर्षक शीर्षक होना चाहिए। संपादकीय का अंत अत्यंत प्रभावशाली होना चाहिए। संपादकीय रोचक एवं पठनीय होना भी है।

प्रश्न 5.
संपादकीय तैयार करें- जनसंख्या विस्फोडन पर दैनिक समाचार में छापने योग्य संपादकीय तैयार करें। जल की कमी और जल का दुरुपयोग जीव-जंतुओं के लिए खतरा उत्पन्न करता है।

  • जल जीवन का आधार
  • जल प्रदूषण और दुरुपयोग
  • जल की सुलभता में कमी
  • जल शोषण के प्रकार
  • जल स्रोतों का संरक्षण

उत्तर:

दैनिक सूरज –
सोमवार 19 मार्च 2016
बढ़ती जल-समस्या

केरल में अनेक नदियाँ हैं। वर्षा का भी कमी नहीं है। लेकिन शुद्ध जल का अभाव केरल की सबसे बड़ी समश्या हो रही है। जीवन का आधार है जल। यह जानकर भी केरल सरकार की ओर से पानी के संरक्षण केलिए उचित ध्यान नहीं होता। केरल की नदियों के और जलाशयों का जल निरंतर प्रदूषण है खतरे में है। जल का दुरुपयोग भी खूब होता रहता है। इसके प्रति सरकार और संबंधित अधिकारी लोग ध्यान क्यों नहीं देते? जल की सुलभता में कमी से केरल जनता की कठिनाईयाँ निरंतर बढ़ती रहती है। विभिन्न प्रकार से जल का शोषण हो रहा है। अक्सर अधिकारी लोग इसके लिए साथ देते रहते हैं। जल स्रोतों का संरक्षण करना अनिवार्य है। सरकार के जल-विभाग की ओर से तुरंत इस दिशा में उचित कर्मपरिपाटियों की आयोजना होनी चाहिए। नहीं तो, सरकार सतर्क रहिए! सरकार से पेयजल और शुद्ध जल मिलने केलिए हड़ताल करने के लिए जनता मज़बूर हो जायेगी।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 2

प्रश्न 6.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’

बच्चे ओस की बूंदों की तरह एक दम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं। लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों के विरुद्ध अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। अधिकांश बच्छे सुरक्षाहीन वातावरण में रहते हैं। बच्चों के विरुद्ध बढ़नेवाले अत्याचारों को नियंत्रण में रखने के लिए कोई रास्ता है? मार्ग तो है, लेकिन मन नहीं है। निषकलंक बच्चों को अत्याचार के कारण अनावश्यक रूप से कष्ट सहने के अवसर होना बिलकुल पैशाचिक है, राक्षसीय है। अत्याचार बढ़ने का मुख्य कारण मानविकता का अभाव ही है। बड़ों के मन में मानविकुजा के भावों को जागरूक रखना चाहिए। सरकार की ओर से सख्त, नियमों के पालन के लिए सतर्कता होनी चाहिए। अपराधियों की मनोवृत्ति में बदलाव लाने के लिए सरकारी और अन्य संस्थाएँ सदा परिश्रम करते रहना चाहिए। अपराधियों को कठिन दंड दिलाने में विलंब न होना चाहिए। बच्चे देवदूत जैसे हैं। बच्चों से ही राष्ट्र की प्रगति हो सकती है। बच्चों के विरुद्ध कोई अत्याचार न होना चाहिए। हमारे बच्चे अत्याचारों से सदा सुरक्षित रहें।

प्रश्न 7.
सड़कों की बुरी हालत पर एक संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
हमारी सडकों की हालत

हमारी सडकें आजकल सुगम यात्रा के पथ नहीं हैं। सभी जगह गड्ढे हैं। उन गड्ढों से बचाकर गाडी चलाना आसान नहीं। बारिश के समय सड़कों की हालत और बुरी हो जाती है। बारिश के मौसम में सड़कें लोगों को इस भ्रम में डालती है कि वे सडक है या तालाब? इस स्थिति के बारे में हमेशा सूचित करते हुए भी सड़क परिवहन विभाग का ध्यान इस बात पर नहीं आया है। वह विभाग ज़रूरत के अवसर पर कुछ न कुछ करता है पर यह पर्याप्त नहीं है। हमारी सड़कों की रक्षा और लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार को इस विषय पर ज़रूर ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से वृक्षारोपण: हमारा दायित्व पर एक संपादकीय तैयार करें।

  • पेड़ों की बरबादी – मौसम पर बुरा असर
  • जीव -जंतुओं पर असर
  • प्राकृतिक -संतुलन पर बुरा असर
  • मानव की स्वार्थता
  • वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2015
वृक्षारोपण: हमारा दायिच्च

पेड़-पौधों के बिना हमें जीना असंभव है। पुराने ज़माने से मनुष्य और पेड़ के बीच अटूट संबंध रहा है। शुद्धवायु मिलने के लिए, भोजन मिलने के लिए, छाया मिलने के लिए ऐसे अनेक लाभ के लिए पेड़ लगाकर संरक्षण करना जरूरी है। लेकिन आज पेड़ों की बड़ी बरबादी हो रही है। सरकार की ओर से इसको रोकने के लिए उचित कर्मपरिपाटी न होती। अक्सर यह भी होता है कि भ्रष्टाचारवाले सरकारी अधिकारी लोग पेड़ों की बरबादी के लिए साथ देते भी है। इसकी ओर सरकार जागरूक रहना चाहिए।

पेड़ -नशीकरण से मौसम पर बुरा असर होता है। जीवजंतुओं का उत्तरजीवन में बाधा होती है। प्राकृतिकसंतुलन पर भी बुरा असर होता है। मानव की स्वार्थता, संबंधित अधिकारी वर्ग के भ्रष्टाचार और लापरवाही आदि से पेड़ों की बरबादी न होनी चाहिए। वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व है। वृक्षारोपण प्रत्येक नागरिक का और सरकारी संस्था का दायित्व है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायें और हमारे पर्यावरण का संरक्षण करें। राज्य सरकार इस दिशा में नेतृत्व, मातृका और प्रोत्साहन सदा देते रहे।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 7

प्रश्न 9.
बाज़ार में रिंग-टोन कंपनी की ओर से नया मोबाईल फोन आया है। उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
नया मोबाईल आया है!!!
रिंग-टोन कंपनी की ओर से!
बहुरंगी है!
डेढ़ साल की वारंटी है।
2 जीबी मेमरी मुफ्त!
अदला-बदला की सुविधायें भी हैं।
जल्दी खरीद लीजिए।
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: रिंग-टोन कंपनी, आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 10.
मान लें, अनंतपुरम के शांतिनगर में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनाया है। दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस मकान के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

Plus One Hindi आपकी आवाज़ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
‘जनसंचार माध्यम का प्रभाव – छात्रों में लाभ और हानि’ इस विषय पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदुः

  • मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट – आधुनिक युग का वरदान
  • बटन दबाने पर दुनिया भर की खबरें
  • दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क
  • युवा पीढ़ी का आकर्षण
  • विपत्तियाँ – माध्यमों का दुरुपयोग

उत्तर:

संपादकीय
दैनिक भास्कर 28.08.2016
जनसंचार माध्यम का प्रभाव
छात्रों में लाभ और हानि

आज हम तकनीकी विकास को सबसे ज़्यादा प्रमुखता देते हैं। मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट आदि तकनीकी विकास के कारण हमें वरदान के रूप में मिले हैं। समय, दूरी आदि का मतलब ही आज बदल गया है। एक बटन दबाने से दुनिया भर की खबरें हमें मिलते है। कितने भी दूर के लोगों से हमें आसानी से बात कर सकते हैं। पहले चिट्टी के माध्यम से दिनों या हफ्तों के बाद मिलते थे वह आज निमिष मात्रा में मिल जाते है। मोबैल और इन्टरनेट से दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क करना इतना आसान हो गया है कि दूरी आज मिट गया है। इसप्रकार के माध्यमों का प्रभाव युवा पीढ़ी में सबसे ज़्यादा हैं। आज इसका प्रभाव इतना है कि वह बाकी सब को छोडने लगे हैं। इसमें कुछ सामाजिक विपत्तियाँ भी है। बड़े लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। समय माध्यमों में ……………… रहने से नष्ट हो जाते है। कई लोग देखे में भी पड़ जाते हैं। समाज में आवश्यक आदान-प्रदान भी युवा पीढ़ी में कम हो रहे हैं।

हमें सतर्कता से काम करना चाहिए कि सामाजिक माध्यम हमारा विकास केलिए है – हम माध्य केलिए नहीं।

प्रश्न 2.
आज हम देख रहे हैं कि व्यक्ति अपना घर साफ करता है और वह गंदगी सड़क या बाहर फेंकता है। इस प्रसंग में ‘स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज के लिए अनिवार्य है’ – इस विषय पर निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार से संपादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदु:

  • सफाई का महत्व
  • गंदगी से हानियाँ
  • वातावरण को साफ रखना नागरिक का कर्तव्य
  • सख्त नियमों का पालन
  • स्वच्छता की शुरुआत घर से
  • अनेक प्रकार की बीमारियाँ
  • जागरण कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार 15 अगस्त 2016
स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज केलिए
अनीवार्य

आधुनिक समाज में सब लोग सफाई का महत्व जानते हैं। सफाई केवल दिखाने केलिए नहीं बल्कि हमारे सुरक्षा केलिए है। गंदगी से कई प्रकार के बीमारियाँ फैलते है। आज कई प्रकार के बुखार फैल रहे हैं। मच्छर और मक्खी के कारण ही इसी प्रकार के बीमारियाँ ज्यादा फैल रहे हैं। ये दोनों जीव गंदगी में ही तेज़ी से बड़ते है। इसलिए हमें जल्द ही गंदगी को रोकना ही चाहिए।

स्वच्छता की शुरुवात घर से ही शुरू होता है। घर का और आसपास के वातावरण के साफ रखना नागरिक रा कर्तव्य है। लेकिन आजकल हम नागरिक ही गंदगी फैलने का कारण हो जाते हैं। कभी कभी घर की गंदगी को सड़क पर ही फेंकते हैं।

सरकारी तौर पर कई जानकारी योजनायें सफाई केलिए हो रहे हैं। कई संस्थायें और व्यक्तियों द्वारा भी सफाई के प्रोत्साहन केलिए कार्यक्रम हो रहे हैं। फिर भी कई लोग यह अपना कर्तव्य न मानकर समाज के विनाशक हो जाते हैं। हमें जानकारी के साथ सख्त नियमों का भी आवश्यकता है। नियमों का पालन हमारा कर्तव्य है। हमें प्रतिज्ञा करना है कि हम सब मिलकर हमारा ही रक्षा केलिए काम करने केलिए तैयार होंगे।

प्रश्न 3.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 4
निम्नलिखित विषय पर सहायक बिंदु के आधार से सम्पादकीय तैयार कीजिए। विषयः ‘प्रदूषण – जैव मण्डल का अस्तित्व संकट में’
सहायक बिंदु:

  • प्रदूषण – जल, वायू और मिट्टी
  • प्रदूषणजन्य रोग
  • कूड़े-कचरे से बायोगैस
  • जैव कृषि का महत्व

उत्तर:

दैनिक भास्कर
10/5/2017
प्रदूषणः जैव मण्डल
का अस्तित्व संकट में

आज सब लोग जानते हैं प्रदूषण माने क्या है। सम्पूर्ण धरती प्रदूषण से विषलिप्त हो गया है। प्रकृति की स्वाभाविक हालत में आनेवाले हानिकारक परिवर्तन को ही प्रदूषण कहते हैं। जल, वायु और मिट्टी में प्रदूषण हो रहा है। रासायनिक पदार्थों, प्लास्टिक, विविध तरह के कचरे- यह सब हमारे पर्यावरण पर बुरा असर कर रहा है। यह हम जानते हैं लेकिन इसे रोकने के लिए कुछ नहीं करते हैं। जनता कहते हैं इसके ज़िम्मेदार सरकार हैं। सरकार कहते हैं नागरिक अपना दायित्व ठीक तरह से न निभाने से प्रदूषण बड़ते हैं। एक दूसरे को दोषी कहने से इस समस्या का समाधान नहीं मिलेगा। सरकार, नागरिक, संस्थायें – सब एकत्रित होकर प्रदूषण से प्रकृति को बचाने का प्रयत्न शुरू करता है।

पहले हमारे मन में यह सोच ठीक तरह से भरना होगा कि यह हमारा ही भलाई के लिए है। हम ही नहीं आनेवाली पीढ़ी के लिए भी हमें इस प्रकृति को बचाते रहना चाहिए। कई प्रकार के प्रदूषणजन्य रोग होते हैं तो इससे बचाव भी हमारे पास है। कूड़े-कचरे के सही रूप में उपयोग करके – बयोग्यास, कम्पोस्ट आदि का निर्माण करनी है। रासायनिक पदार्थों का उपयोग बंद करना हैं। कीटनाशकों से बचने के लिए जैवकृषि का महत्व का प्रोत्साहन करना है। प्लास्टिक का उपयोग कम करना हैं। सरकार द्वारा जानकारी योजनायें करवाना हैं और जनता यह अपना दायित्व समझने है। आनेवाले कल के लिए हमें इस पर्यावरण को बचाने का प्रण लेना हैं।

प्रश्न 5.
सापदकीय तैयार कीजिए। विषयः हिंदी का प्रचार
सहायक बिंदुः

  • भारतीय भाषाओं में हिंदी का स्थान
  • हिंदी दिवस का महत्व
  • जनसाधारण का विचारविनिमय
  • भारतीयता का विकास

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार, 20 अप्रैल 2017
हिंदी हमारी पहचान

भारतीय भाषाओं में हिंदी सबसे श्रेष्ठ और महान है। भारत के अलावा अनेक देशों में हिंदी लेखक, हिंदी प्राध्यापक, हिंदी प्रचारक, हिंदी सेवी आदि लोग काम कर रहे हैं। आज हिंदी शासकों, राष्ट्राध्यक्षों की भी भाषा बन गई है जो संसार के एक सौ बीस देशों में किसी-न-किसी रूप में प्रचलित भी है। प्रचीन भारत और संस्कृति के बारे में जानने का सशक्त माध्यम है हिंदी भाषा और इसका सशक्त साहित्य। आज विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी उभर आ रही है। विश्व हिंदी सम्मेलन इसका सशक्त प्रमाण है। इसके अलावा पूरे भारत भर में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में आज हिंदी का प्रचार इतना बढ़ गया है कि जो व्यक्ति हिंदी जानता है वह पूरे भारत के किसी भी कोने में जाकर आसानी से बात कर सकता है और जीवन बिता सकता है। क्योंकि आज हिंदी जनसाधारण के विचारविनिमय का माध्यम बन गई है। एक सच्चे भारतीय होने के नाते हम सब को मिलकर हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए काम करना है। भारतीयता का विकास भी इसमें निहित है। राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का विकास प्रत्येक भारतीयों के हाथ में निहित है। जिसके पास राष्ट्रभाषा नहीं है उसका कोई राष्ट्र भी नहीं है।

||जय हिंद, जय हिंदी||

आपकी आवाज़ Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 6

आपकी आवाज़ Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 10

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

प्रश्न 1.
ब्लैक फिल्म देखें। (फिल्म देखते वक्त इन मुद्दों पर बारीकी से ध्यान दें)

  • पात्रों का अभिनय
  • संवादों की प्रासंगिकता
  • दृश्यों की विविधता
  • कथा का प्रवाह

प्रश्न 2.
फिल्म के आधार पर लिखें।

  • सबसे आकर्षक दृश्य
  • सबसे श्रेष्ठ अभिनेता
  • सबसे हृदयस्पर्शी संवाद
  • सबसे दर्दनाक दृश्य

प्रश्न 3.
फिल्म के निम्नांकित अंगों के लिए गुणवत्ता के अनुसार दें (अधिकांश)

  • कथा
  • पटकथा
  • अभिनय
  • छायांकन
  • साज-सज्जा
  • ध्वन्यांकन
  • संपादन
  • निदेशन

फिल्म से समीक्षा की ओर…

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समीक्षा में किन-किन बिंदुओं की चर्चा की गई है?
उत्तर:
पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, संपादन-कार्य, छायांकन, ध्वन्यांकन, अभिनय, गीत, प्रार्श्व संगीत आदि की चर्चा की गयी है।

प्रश्न 2.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

प्रश्न 3.
फिल्म समीक्षा की परख, मेरी ओर से

  • फिल्म का संक्षिप्त परिचय दिया है।
  • अभिनय की खूबियाँ/कमियाँ बताई हैं।
  • निदेशक की क्षमता को अंकित किया है।
  • फिल्म के अन्य बिंदुओं की (पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, ध्वन्यांकन, संपादन, गीत आदि) चर्चा की है।
  • अपने विचारों का समर्थन किया है।

प्रश्न 4.
मान लें, ब्लैक फिल्म थियटर में 100 दिन पूरी करते वक्त पोस्टर में यह अनुशीर्षक (Caption) निकलता है।

संजय लीला भंसाली के निदेशन में अमिताभ बच्चन और राणी मुखर्जी के अभिनय-जीवन की अनमोल प्रस्तुति
‘ब्लैक’
101 वें दिन की ओर…

पोस्टर में छपने के लिए इसी प्रकार के विभिन्न अनुशीर्षक लिखें।
उत्तर:
i) सौ दिन के बाद भी ब्लैक भीड़ भरी।
ii) 101 वें दिन ……… 350 शो……. गजब! गजब!!
iii) सारा शहर ‘ब्लैक’ के पीछे

प्रश्न 5.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
i) तारे ज़मीं पर – फिल्मी समीक्षा
बच्चे ओस की बूंदों की तरह एकदम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं, लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों को अनुशासन के नाम पर तमाम बंदिशों में रहना पड़ता है। आठ वर्षीय ईशान अवस्थी (दर्शील सफ़ारी) का मन पढ़ाई के बजाय कुत्तों, मछलियों और पेटिंग में लगता है। उसके मातापिता चाहते हैं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता। ईशान घर पर माता-पिता की डाँट खाता है और स्कूल में शिक्षकों की। कोई भी यह जानने की कोशिश नहीं करता कि ईशान पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। इसके बजाय वे ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं।

खिलखिलाता ईशान वहाँ जाकर मुरझा जाता है। वह हमेशा सहमा और उदास रहने लगता है। उस पर निगाह जाती है आर्ट टीचर रामशंकर निकुंभ (आमिर खान)की। निकुंभ उसकी उदासी का पता लगाते हैं और उन्हें पता चलता है कि ईशान बहुत प्रतिभाशाली, लेकिन डिसलेक्सिया की बीमारी से पीड़ित है। उसे अक्षरों को पढ़ने में तकलीफ़ होती है। अपने प्यार और दुलार से निकुंभ ईशान के अंदर छिपी प्रतिभा को सबके सामने लाते हैं।

कहानी सरल है, जिसे आमिर खान ने बेहद प्रतिभाशाली तरीके से परदे पर उतारा है। पटकथा की बुनावट एकदम चुस्त है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं, जो सीधे दिल को छू जाते हैं। ईशान का स्कूल से भागकर सड़कों पर घूमना, ताज़ा हवा में साँस लेना, बिल्डिंग के कलर होते देखना, फुटपाथ पर रहनेवाले बच्चों को आज़ादी से खेलते देखकर उदास होना, बरफ़ का लड्डू खाना जैसे दृश्यों को देख कई लोगों को बचपन की याद ताज़ा हो जाएगी।

सभी बच्चों का दिमाग और सीखने की क्षमता एक-सी-नहीं होती। फ़िल्म देखते समय हर दर्शक इस बात को महसूस करता है। ईशान की भूमिका में दर्शील सफ़ारी इस फ़िल्प की जान है। अमीर खान मध्यांतर में आते हैं और छा जाते हैं। टिस्का चोपड़ा (ईशान की मम्मी) ने एक में की बेचैनी को उम्दा तरीके से पेश किया है। विपिन शर्मा (ईशान के पापा), सचेत इंजीनियर और सारे अध्यापकों का अभिमय भी अच्छा है। प्रसून जोशी द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। शंकर-अहसान-लॉय का संगीत भी अच्छा है। फ़िलम की फोटोग्राफी बहुत ही प्रभावशाली हैं।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 1Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 3

ii) पूस की रात – फिल्मी समीक्षा
किसान का जीवन कितना करुणापूर्ण है! खेती से उसको कोई सुख नहीं मिला। पूरा जीवन गरीबी में गुज़रता है। इन बातों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करनेवाली एक सुंदर फिल्म है ‘पूस की रात’। प्रेमचंद की एक छोटी कहानी गुलजार के निदेशन में फिल्म के रूप में पर्दे पर आयी है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है।

एक गरीब किसान हल्कू अपनी पत्नी के साथ रहता है। खेत में फसल पकने लगी है। रात के समय खेत में नीलगायों के आने की संभावना है। इसलिए हल्कू रात में खेत का पहरावा करता है। हड्डियाँ भी तोडनेवाली ठंड में वह अपने कुत्ते का साथ गीत गाकर या बातें करके ठंड से बचने की कोशिश करता है। गर्मी के लिए वह चिलम फूंकता भी है।

खेती के लिए महाजनों से लिए पैसे वापस देने में भी वह असमर्थ है। हल्कू की पत्नी के मत में खेती की अपेक्षा मज़दूरी करना ही अच्छा है। एक ठंडी रात में हल्कू ठंड सह न सका। वह कुछ सूखे पत्ते लाकर आग जलाकर उसके साथ नाच गाकर सर्दी से बचकर लेटा। आग की गर्मी के कारण उसको गहरी नींद मिली। पर उस रात में आग फैलकर सारी फसल जल गयी। सबेरे पत्नी आकर हल्कू को उठाते वक्त ही उसने देखा कि सारा खेत जल चुका है। रोती हुई पत्नी से हल्कू ने कहा कि ‘अच्छा हुआ…. आज से रात में ठंड सहने की ज़रूरत नहीं है।’

हल्कू की ये बातें उसकी निराशा से उत्पन्न हैं। खेत में कठिन काम करने पर भी या सभी कठिनाइयाँ सहने पर भी किसान को कोई फायदा नहीं मिलता है। इन बातों को स्पष्ट रूप में गुलज़ार ने अपनी फिल्म ‘पूस की रात’ में व्यक्त किया है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। कुत्ते का साथ हल्कू का वार्तालाप, चंद्रमा की सुविधा का वर्णन, नीलगायों को भगाने की आवाज़ आदि के प्रसंगानुकूल दृश्य दर्शकों को मज़ा देनेवाले ही हैं।

किसान के दैन्य दिखाने के लिए फटे हुए कंबल को दिखाते वक्त उसकी गरीबी हमारे मन पर चोट लगाती है। प्रेमचंद किसानी जीवन की दर्दनाक कहानी लिखनेवाला कहानीकार है। उनकी एक कहानी को गुलजार ने ज्यादा चमकदार बनाकर फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया है। रघुवीर करण और मानसी उपध्याय ने अपने अपने पात्रों को उज्वल बनाए। दोनों का अभिनय देखकर हम विस्मित हो जाते हैं। फिल्म की शुरुआत में रूपकुमार का एक अच्छा गीत है। दिन और रात के समय के दृश्यों की फोटोग्राफी भी अव्वल दर्जे की है। संपादन अच्छा हुआ है। पटकथा भी बहुत अच्छा हुई है। साज-सज्जा अनुकूल ही है। ध्वन्यांकन उत्तम कोटि की है।

Plus One Hindi ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखिए। सहायक बिंदुः

  • फिल्म का कथासार
  • पात्रों का अभिनय
  • निदेशक की भूमिका
  • पटकथा, संवाद, छायांकन, गीत आदि
  • फिल्म की समग्रता पर अपना दृष्टिकोण

उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 4
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ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 10

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे

प्रश्न 1.
जो दिल खोजौं आपना मुझ-सा बुरा न कोय- कबीर ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
मनुष्य में भलाई और बुराई का मिश्रण होता है। परंतु, मनुष्य अपनी बुराई को छिपाकर दूसरों की बुराई बताते फिरता है। अपने आपको सुधारने को हमें ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दूसरों की बुराई खोज देखने के लिए हमें इच्छुक न रहना चाहिए। संक्षेप में कबीर का मत है अपने को पहचानना सच्चे ज्ञानी का लक्षण है।

प्रश्न 2.
प्रभुता का महत्व समझाने के लिए कबीर ने किसका सहारा लिया है?
उत्तर:
चींटी का।

प्रश्न 3.
दुख काहे होयइससे क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सुख और दुख जीवन के सत्य हैं। दुख में सब लोग आश्रय की याद करते हैं। तब दुःख कम हो जाता है। लेकिन सुख आने पर लोग उसी आश्रय को भूल जाते हैं। कबीर के अभिप्राय में यह कृतघ्नता और अज्ञता से होता है।

प्रश्न 4.
सच्चा शूर कैसे बनता है?
उत्तर:
जिसे जाति, वर्ण, कुल आदि के भेदभाव की चिंता नहीं, वही सच्चा शूर है। दूसरे शब्तों में समभाव की भावना रखनेवाला सच्चा शूर बनता है।

दोहे अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढ़ लें।
कोई, शूर, संभाला, ढूँढ़ना, धूलि, वर्ण, स्मरण, क्यों, मिला
उत्तर:
कोई = कोय
शुर = सूरमा
संभाला = समाय
ढूँढना = खोजौं
धूली = धूरि
वर्ण = बरन
स्मरण = सुमिरन
क्यों = काहे
मिला = मिलिया

प्रश्न 6.
समान आशयवाला चरण दोहे से चुन लें।
a. दूसरा कोई भूखा न रहे।
b. सुख में कोई स्मरण नहीं करता।
c. मैं बुरे लोगों को ढूँढ़ने निकला।
d. हाथी के सिर पर धूलि है।
e. काम, क्रोध और लालच से भक्ति नहीं होती।
उत्तर:
a. साधु न भूखा जाय।
b. सुख में करे न कोय
c. बुरा जो देखन मैं चला
d. हाथी के सिर धूरि
e. कामी, क्रोधी, लालची, इनते भक्ति न कोय

प्रश्न 7.
व्याख्या करें-
साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।
उत्तर:
यह दोहा निर्गुण भक्त कवि कबीरदास का है। कवि भगवान से केवल यह प्रार्थना करते हैं कि अपने कुटुंब को संभालने के धन मिल जाये। कवि की प्रार्थना है कि संवयं कभी भी भूखा न रहे और संसार में कोई भी भूखा न रहे। मनुष्य में सदा धन और संपत्ति का लालच रहता है। वह संपत्ति के पीछे दोड़ता रहता है। घन के प्रति मनुष्य में जो लालच है, उसे सीमित और नियंत्रित रखने का उपदेश कवि यहाँ देते हैं।

प्रश्न 8.
ये तत्व किन-किन दोहों से संबंधित हैं?
a. अहं दूर होने से महत्व बढ़ता है।
b. सुख और दुख में स्मरण करना है।
c. अपने को पहचाननेवाला सच्चा ज्ञानी है।
d. जीवन की शांति सादगी में है।
e. समभाव शूर का लक्षण है।
उत्तर:
a. प्रभुता से प्रभु दूरि
b. जो सुख में सुमिरन करै, तो दुःख काहे होय
c. जो दिल खोजौं आपना, मुझ-सा बुरा न कोय
d. लघुता से प्रभुता मिले
e. भक्ति करै कोई सूरमा।, जाति, बरन कुल खोय।।

प्रश्न 9.
‘जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय’- अपना विचार प्रकट करें।
उत्तर:
यह दोहा संत कवि कबीरदास का है। निर्गुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि कबीरदास कहते हैं कि हमें सुख और दुःख दोनों में ईश्वर का स्मरण समभाव से करना चाहिए। मनुष्य साधारणतः केवल दुःख आते समय ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। सुख में ईश्वर से भक्ति रखनेवाला दुर्लभ होता है। कबीर के अभिप्राय में सुख में ईश्वर का स्मरण करनेवाले को दुःख कभी भी नहीं होता। अंधविश्वास को दूर करके सच्छी भक्ति की ओर मन रखने को कबीर इस दोहा द्वारा उपदेश देते हैं।

प्रश्न 10.
‘कबीरदास की रचनाएँ कालजयी एवं प्रासंगिक हैं’- इस विचार से जुड़े दोहों का संकलन करके प्रस्तुत करें। कबीर के दोहों का आलाप करें।
उत्तर:
काल्हि करै सो आज कर, आज करै सो अब
पल में परलय होयगा, बहुरि करैगा कब।।
पाहन पूजै हरि मिलै, तो मैं पूनँ पहार
ताते या चाकि भलि, पीस खाय संसार।।
मुंड़ मुड़ाए हरि मिलै, सब कोई लेय मुड़ाय।
बार-बार के मुँड़ते, भेड़ न बैकुंड जाय।।
तेरा साई तुझ में, ज्यों पुहुपन में बास।
कस्तूरी का मिरग ज्यों, फिरि फिरि ढूँदै घास।।
माखी गुड़ में गड़ि रही, पंख रह्यो लिपटाय।
हाथ मलै और सिर धुने, लालच बुरी बलाय।
माया मुई न मन मुआ, मरि मरि गया सरीर
आसा त्रिष्णा न मुई, यौँ कहि गया कबीर।।
पानी बाढ़े नाव में, घर में बाढ़े दाम।
दोऊ हाथ उलीचिए,यही सयानो माक।।

प्रश्न 11.
कबीरदास किसे ढूंढने चला?
उत्तर:
बुरा देखने को चला।

प्रश्न 12.
अपना दिल खोजने पर कबीर को क्या पता चला?
उत्तर:
कबीर को पता चला कि अपने समान बुरा दूसरा कोई नहीं।

प्रश्न 13.
कौन दुनिया में सबसे बुरा है?
उत्तर:
अपने आपको न सुधारनेवाला।

प्रश्न 14.
चींटी के सिर पर क्या है?
उत्तर:
शक्कर।

प्रश्न 15.
हाथी के सिर पर क्या है?
उत्तर:
धूली।

प्रश्न 16.
लोग कब आश्रय का स्मरण करते हैं?
उत्तर:
दुःख में।

प्रश्न 17.
लोग कब आश्रय का स्मरण नहीं करते हैं?
उत्तर:
सुख में।

प्रश्न 18.
दुख काहे होय – इससे क्या तात्पर्य है?

प्रश्न 19.
‘स्मरण’ शब्द का समानार्थी पद क्या है?
उत्तर:
सुमिरन।

प्रश्न 20.
कौन-कौन भक्त नहीं बनता?
उत्तर:
कामी, क्रोधी और लालची।

प्रश्न 21.
कौन भक्ति कर सकता है?
उत्तर:
जाति, वर्ण, कुल आदि को महत्व न देनेवाला सच्चा शूर अर्थात, समभाव की भावना में जीनेवाला भक्ति कर सकता है।

प्रश्न 22.
‘साई’ शब्द का समानार्थी पद लिखें।
उत्तर:
स्वामी।

प्रश्न 23.
कबीरदास ‘साई’ से क्या चाहते हैं?
उत्तर:
चाहते हैं कि उनको साई से इतना मिले जिससे उनका कुटुंब चला सकें। वे यह भी चाहते हैं कि कोई भी भूखा न रहे। दूसरे शब्दों में वह जीवन में शांती देनेवाली उदार मनोभावना साई से चाहते हैं।

Kerala Plus One दोहे Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और प्रश्न 1 एवं 2 का उत्तर लिखिए।

लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि।।

प्रश्न 1
‘धूली’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (चींटी, हाथी, धूरि, दूरि)
उत्तर:
धूरि

प्रश्न 2.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास निर्गुण भक्तिशाखा के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रसिद्ध कवि है। मानव-प्रेम, सामाजिक बोध आदि को वह प्रमुखता देते थे।

कबीरदास प्रस्तुत दोहे में कहते हैं कि लघुता से ही हमें प्रभुता मिलेंगे और जहाँ प्रभुता है वहाँ से अहं का भाव दूर होता है। अर्थात सादगी से ही जीवन सफल होगा। उदाहरण केलिए कबीरदास कहते हैं कि चींटी छोटे होने पर भी शक्कर लेकर चलते हैं। बड़े हाथी के सिर में अक्सर धूल ही होते हैं। शक्ति, बड़प्पन, कायबल आदि से नहीं बल्की व्यवहार के कारण ही एक व्यक्ति में उन्नति और अवनति होते हैं।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और 3 एवं 4 के उत्तर लिखिए।
कामी क्रोधी लालची, इनते भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई सुरमा, जाति बरन कुल होय।।

प्रश्न 3.
‘वर्ण’ शब्द का समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
बरन

प्रश्न 4.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास प्रस्तुत दोहे से भेद-भावों को छोड़ने केलिए आह्वान करते हैं। भक्तकाल के निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के सर्वश्रेष्ट कवि है कबीरदास। उन्होंने अपने समय समाज में प्रचलित सभी धर्मी की बुराइओं का खंडण किया। काम, क्रोध, लालच आदि से भक्ति नहीं होते हैं। भक्ति होने केलिए वीरों को जाति, वर्ण, कुल आदि विचार छोड़ना चाहिए। जाति, वर्ण, कुल आदि में सोचनेवाले लोगों में काम, क्रोध, लालच आदि पैदा होते हैं। इसलिए असली वीरों को यह बातों को छोड़कर खुले मन से व्यवहार करना चाहिए।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िए और 5 एवं 6 तक के उत्तर लिखिए।
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय।

प्रश्न 5.
‘स्मरण’ शब्द का समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
सुमिरन

प्रश्न 6.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
भावार्थ:
कबीरदास ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! आप हमें इतना धन दीजिए कि जिससे अपने कुटुंब को हम संरक्षण कर सकें। कबीरदास यह प्रार्थना भी करते हैं कि हे भगवान! आपका आशीर्वाद हो कि साधु लोग भी भूखा न रह जायें और मैं भी भूखा न रहूँ। दूसरों की कष्टताओं पर ध्यान रखने के बारे में कवि यहाँ बताते हैं। धनार्जन के पीछे दौड़नेवालों की आलोचना कवि यहाँ पर करते हैं।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और प्रश्न 7 से 8 के उत्तर लिखिए।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजौं आपना, मुझसा बुरा न कोय।।

प्रश्न 7.
‘कोई’ शब्द के लिए दोहे में प्रयुक्त शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (खोजौं, देखन, आपना, कोय)
उत्तर:
कोय

प्रश्न 8.
दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास भक्तिकाल के निर्गुण भक्तिधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि है। कबीरदास के एक प्रसिद्ध दोहा है। आपकी रचनायें साखी, सबद और रमैनी के नाम से तीन भागों में विभक्त है।

प्रस्तुत दोहे में कबीरदास सामाजिक जीवन में देखनेवाली सच्चाई को दिखाया है। हम दूसरों के बुराई सोचते रहते हैं। लेकिन हम अपने आप पर खोजते ही नहीं। अगर ऐसे करते हैं तो पता चलेगा कि असली बुराई हम में ही है। दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने आपको देखों। समाज में अच्छे और सच्चे जीवन बिताने की आवश्यकता कबीर बताते हैं।

सुचना :

निम्नलिखित दोहा पढ़कर 9 और 10 का उत्तर लिखिए।
साई इतना दीजिए, जामें कुटुम्ब समय।
मैं भी भूखा न रहूँ. साधू न भूखा जाय।।

प्रश्न 9.
‘संभालना’ शब्द का आशय दोहे के किस शब्द से मिलता है?
उत्तर:
समाय

प्रश्न 10.
दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास हिन्दी के विख्यात रहस्यवादी कवि है। उन्होंने नीति संबंधी अनेक दोहे लिखा है।

कबीर का परिवार साधु-संतों का है। वे कहते हैं, हे भकवान! मुझे इतना ही दीजिए जिससे मेरा परिवार चल सकें। वे चाहते हैं कि कोई भी भूखा नहीं रह जाए। कबीर की राय में जीवन की शांति सादगी में है।

Plus One Hindi दोहे भावार्थ:

1. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजौं आपना, मुझ सा बुरा न कोय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 5

भावार्थ:
कवि कहते हैं कि बुरे लोगों को ढूँढते ढूढते वे चले। लेकिन कोई बुरा आदमी नहीं मिला। अंत में उन्होंने अपने दिल में खोज़ा। अर्थात्, अपने बारे में सोचा। तब समझ लिया कि अपने समान बुरा दूसरा कोई नहीं हैं। कवि का मतलब यह है कि दूसरों की बुराईयों पर ध्यान देने के पहले अपने आप को सुधारना ज़रूरी है।

2. लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 7

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 8

भावार्थ:
कवि कहते हैं कि हम विनम्रता दिखाएँ तो हमें ईश्वरीयत्व मिलेगा। लेकिन हम अहंकार दिखाएँ तो ईश्वर हमसे दूर होगा। उदाहरण के रूप में कवि कहते हैं कि छोटी चींटी उससे बड़ा शक्कर लेकर चलती है। लेकिन बड़ी शरीरवाले हाथी के सिर पर मलिन धूल है। कवि का मतलब हैं कि हम दुसरों से विनय के साथ व्यवहार करें तो ईश्वर सदा हमारे साथ रहेंगे। अहंकार से जियें तो ईश्वर हमें छोड़ देंगे। मूल्यहीन अध्यात्मिकता पर आलोचना करके यहाँ कवि विनम्रता के महत्व के बारे में हमें ज्ञान देते हैं।

3. दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 9

भावार्थ:
कबीरदास कहते की दुख में हम सब ईश्वर का स्मरण करते हैं। लेकिन सुख के अवसर पर कोई भी ईश्वर का स्समरण नहीं करता। कवि पूछते हैं कि जो लोग सुख में ईश्वर का स्मरण करते हैं तो उनको दुख कैसे होगा? अर्थात् हमेशा ईश्वरस्मरण में रहनेवालों को दुख कभी नहीं होता। यहाँ जीवन में ईश्वर स्मरण की ज़रूरत कवि हमें सिखाते हैं। सच्ची आध्यात्मिकता के मूल्य पर कवि यहाँ पर बल देते हैं।

4. कामी क्रोधी लालची, इनते भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई सूरमा, जाति बरन कुल खोय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 10

भावार्थ:
कामी, क्रोधी, लालची लोगों में भक्ति नहीं होती। लेकिन, जाति, वर्ण और कुल के परे सभी लोगों से समभाव से व्यवहार करनेवाले शूर के मन में सच्ची भक्ति होती है। भक्ति में हृदय की पवित्रता और समभावना जगानेवाली ये पंक्तियाँ द्वारा कवि मूल्यहीन और कपट धार्मिकता पर यहाँ पर आलोचना करते हैं। (धार्मिकता = മതജീവിതം, आलोचना = വിമർശനം)

5. साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 11

भावार्थ:
कबीरदास ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! आप हमें इतना धन दीजिए कि जिससे अपने कुटुंब को हम संरक्षण कर सकें। कबीरदास यह प्रार्थना भी करते हैं कि हे भगवान! आपका आशीर्वाद हो कि साधु लोग भी भूखा न रह जायें और मैं भी भूखा न रहूँ। दूसरों की कष्टताओं पर ध्यान रखने के बारे में कवि यहाँ बताते हैं। धनार्जन के पीछे दौड़नेवालों की आलोचना कवि यहाँ पर करते हैं।

दोहे Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 1

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 2

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 4

दोहे Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 13

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस

जुलूस अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समानार्थी शब्द नाटक में ढूँढ़ें
दृश्य – 1 जनयात्रा, विरुद्ध, विक्रय, शासक, चिंता, निर्दय
दृश्य – 2 आज्ञा, वाणी, प्रकार, लक्ष्य, पालन, इच्छा, केवल, देश, हानि, विषाद, सहन
दृश्य – 3 घायल, अंत
दृश्य – 4 पास, धीरे, कुशल, ओजपूर्ण
उत्तर:
जनयात्रा = जुलूस
विरुद्ध = के खिलाफ
विक्रय = बिक्री
शासक = दारोगा
चिता = परवाह
निर्दय = दल्लाद
आज्ञा = हुक्म
वाणी = जुबान
प्रकार = किस्म
लक्ष्य = मक्सद
पालन = तामिल
इच्छा = मंशा
केवल = महज़
देश = कौम
हानि = नुक्सान
विषाद = मलाल
सहन = बरदाश्त
घायल = जख्मी
अंत = आखिर
पास = नज़दीक
धीरे = आहिस्ता
कुशल = खैसियत
ओजपूर्ण = जोशीला

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथन किस पात्र का है ?
a. हमारा हुक्म क्या आपको सुनाई नहीं पड़ा?
b. जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कबका मिल गया होता।
c. हमारा बड़ा आदमी तो वही है जो लंगोटी बाँधे नंगे पाँव घूमता है।
d. एक दिन तो मरना ही है, जो कुछ होना है हो।
e. मर तो हम लोग रहे जिनकी रोटियों का ठिकाना नहीं।
f. हमारा मक़सद इससे कहीं ऊँचा है।
उत्तर:
a. दारोगा बीरबल सिंह का।
b. दीनदयाल का।
c. मैकू का।
d. शंभुनाथ का।
e. मैकू का।
f. इब्राहिम अली का।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथन इब्राहिम अली के चरित्र की किन-किन विशेषताओं को उजागर करता है?
a. हम दुकानें लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं।
b. आप अपने सवारों, संगीनों और बंदूकों के ज़ोर से हमें रोकना चाहते हैं-रोक लीजिए! मगर आप हमें लौटा नहीं सकते।
c. हमारे भाईबंद ऐसे हुक़्मों की तामील करने से साफ़ इनकार कर देंगे।
d. जिस दिन हम इस लक्ष्य पर पहुँच जाएँगे, उसी दिन स्वराज्य सूर्य का उदय होगा।
उत्तर:
a. अहिंसावाद, ईमानदारी।
b. वीरता, साहसिकता, दृढनिश्यच।
c. पत्र देशप्रेम, दृढनिश्चय।
d. प्रतीक्षा, प्रत्याशा।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर इब्राहिम अली के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
जुलूस’ नाट्यरूपांतर का मुख्य कथापात्र है इब्राहिम अली। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है। नाटक में इब्राहिम अली स्वतंत्रता सेनानियों का नेता है। इब्राहिम अली के नेतृत्व में स्वराजियों का जुलूस जा रहा है। महात्माजी के अहिंसावाद का अनुयायी है इब्राहिम अली। बड़ी ईमानदारी से इब्राहिम अली अहिंसा का पालन करता है। इसलिए दारोगा बीरबल सिंह से अलीजी कहते है: “हम दूकानों लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं।” इब्राहिमजी में बड़ी वीरता और साहसिकता है। उनके दिल में बड़ी प्रतीक्षा और प्रत्याशा है।

वे कहते हैं: “स्वराज्य सूर्य का उदय होगा” वे बड़े दृढ़ निश्चयवाले नेता भी हैं। फिर भी, इब्राहिम अली के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उनका देशप्रेम ही है। भारतमाता के लिए अपनी जान बलिदान करने के लिए वे तैयार हो जाते हैं। देशप्रेम से वे कभी भी पीछे नहीं होते हैं। उनका देशप्रेम दृढनिश्चय से अलंकृत है। इब्राहिमजी कहते है: “रोक लीजिए! मगर आप हमें लौटा नहीं सकते।” इस प्रकार हम देखते हैं कि इब्राहिम अली का चरित्र देशप्रेम, अहिंसावाद, प्रत्याशा, वीरता, आत्मविश्वास, दृढनिश्चय, ईमानदारी आदि से शोभित है।

टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

चरित्र पर प्रकाश डालनेवाले संवादों का विश्लेषण किया है।
चरित्र की विशेषता समझी है।
विशेषताओं के आधार पर टिप्पणी लिखी है।
चरित्र की विशेषताओं का समर्थन अपने दृष्टिकोण से किया है।

नाटक का मंचन करें।

मंचन की गतिविधियाँ

नाटक-वाचन

  • यह वैयक्तिक/दलीय हो सकता है। वाचन के द्वारा पूरे नाट्यदल कथा से तादात्म्य स्थापित करता है।

मंचन पूर्व चर्चा

  • नाटक की पृष्ठभूमि, तकनीकी क्षेत्र, पात्र आदि में सही अवधारणा उत्पन्न करने में यह चर्चा काम आती है। इससे कथापात्र के अनुरूप अभिनेता के चयन में ठीक दिशा मिल जाती है।

मंच की अवधारणा

  • प्रकाश, शब्द-विन्यास, मेक-अप, मंच-निर्माण आदि मंच के अनिवार्य अंग हैं, हालांकि कक्षा-प्रस्तुति के समय स्कूल में उपलब्ध सामग्रियों से काम चला सकते हैं।

सृजनपरता

  • नाटक की पटकथा, मंचन के लिए एक रूपरेखा मात्र है। निदेशक तथा अभिनेता कल्पना और क्षमता के अनुरूप मंचन को सृजनात्मक बनाएँ।

प्रश्न 5.
हमें किसीसे लड़ाई करने की ज़रूरत नहीं।
उत्तर:
दीनदयाल का।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों के अर्थ को सूचित करनेवाले मुहावरे कोष्ठक से चुनकर लिखें। (धाक बैठ जाना, जान हथेली पर लेना, दुम दबाकर भागना)
i. सरकार पर बड़े आदिमियों का बोलबाला है।
ii. गाँधीजी देश के लिए मरने तक को तैयार होते थे।
iii. पुलीस को देखने पर स्वराजी डरकर भागेंगे।
उत्तर:
i. सरकार पर बड़े आदिमियों का धाक बैठ जाता है।
ii. गाँधीजी देश के लिए जान हथेली पर लेने के लिए तैयार होते थे।
iii. पुलीस को देखने पर स्वराजी दुम दबाकर भागेंगे।

प्रश्न 7.
पहले दीनदयाल दूकान बंद कर जुलूस में भाग लेने का निश्चय नहीं करता है, क्यों?
उत्तर:
शहर के कोई बड़ा आदमी जुलूस में नहीं था। दीनदयाल में देशप्रेम की कमी तब थी।

प्रश्न 8.
मैकू क्यों हंस रहा है?
उत्तर:
शंभुनाथ और दीनदयाल की बातें सुनकर मैकू हंस रहा है।

प्रश्न 9.
मैकू की नज़र में बड़ा आदमी कौन है? क्यों?
उत्तर:
मैकू की नज़र में बड़ा आदमी महात्मा गाँधी है। वे देश की स्वतंत्रता के लिए जान हथेली पर लेने के लिए तैयार होते थे।

प्रश्न 10.
स्वराजियों का मकसद क्या है?
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति है।

प्रश्न 11.
भाईबंद किसके हुक्म को साफ इनकार करेंगे? क्यों?
उत्तर:
अंग्रेजों के हुक्म को भाईबंद साफ इनकार करेंगे। यह – इसलिए कि भाईबंद स्वतंत्रता चाहते हैं।

प्रश्न 12.
स्वराजी क्यों दारोगा को अंग्रोज़ों का पिट्ठ कहते हैं?
उत्तर:
अंग्रोजों का आज्ञानुवर्ती है दारोगा। दारोगा के मन में देशप्रेम न होने के कारण स्वराजी ऐसा कहते हैं।’

प्रश्न 13.
‘मैं कैसे अपनी दुकान खुली रख सकता हूँ?’ यहाँ लोगों की मनोवृत्ति में कौन-सा परिवर्तन आया है?
उत्तर:
देशप्रेम की भावनाएँ उदित हो गयी हैं।

प्रश्न 14.
मैकू के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपांतर का एक कथापात्र है मैकू। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है। नाटक में मैकू सड़क से लगे बाज़ार का एक दुकानदार है। वह चप्पल बेचनेवाला है। वह बड़ा हँसमुख आदमी है। मैकू अंग्रेज़ों और देशप्रेमहीन लोगों का बड़ा आलोचक है। मैकू कहता है : “जो हमारी दशा सुधारने के लिए अपनी जान हथेली पर लिए फिरता है, वह है महात्मा गाँधी। उसके आगे हमें किसी बड़े आदमी की परवाह नहीं।”

उसके दिल में बड़ा देशप्रेम है। भारत की स्वतंत्रता की प्रतीक्षा उसके दिल में दृढ़ रहती है। वह एक बार कहता है: “अब तो भाई, रुका नही जाता… मैं भी जुलूस में शामिल होऊँगा…..”

इस प्रकार हम देखते हैं कि इब्राहिम अली का चरित्र देशप्रेम, अहिंसावाद, प्रत्याशा, वीरता, आत्मविश्वास, दृढनिश्चय, ईमानदारी आदि से शोभित है।

प्रश्न 15.
शंभूनाथ के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपांतर का एक कथापात्र है शंभूनाथ। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है।

नाटक में शंभुनाथ सड़क से लगे बाजार का एक दूकानदार है। शंभुनाथ घटनाओं को नकारात्मक दृष्टि से देखनेवाला आदमी है। स्वतंत्रता सेनानियों का जुलूस देखकर शंभुनाथ अपनी नकारात्मक दृष्टि से कहता है: “सब के सब काल के मुँह में जा रहे हैं।” वह एक भीरु आदमी भी है। जुलूसवालों को देखकर वह कहता है: पुलिस …… मार-मार कर भगा देगी। शंभुनाथ हँसी-मज़ाक आदमी भी है। मैकु को चिढ़ाकर शंभुनाथ कहता है: “ठिठया काहे रहा? लगता है आज बिक्री अच्छी हो गयी है?” फिर भी, शंभुनाथ के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका देशप्रेम ही है। वह एक साहसी देशप्रेमी है। देश के लिए अपना जीवन बलि देने के लिए वह तैयार हो जाता है। इस दिशा में शंभुनाथ का यह कथन समर्थक है: “मैं कैसे अपनी दुकान खुली रख सकता हूँ? एक दिन तो मरना ही है, जो कुछ होना है हो….”

इस प्रकार हम देखते हैं कि शंभुनाथ का चरित्र देशप्रेम, प्रत्याशा, वीरता, दृढनिश्चय आदि से शोभित है।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 1

प्रश्न 16.
बीरबल सिंह के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपान्तर में प्रस्तुत पाठभाग में बीरबल सिंह का चरित्र खलनायक (aleyod) का है। बीरबल सिंह दारोगा है। जुलूस में निकले स्वतंत्रता सानानियों को रोकने के लिए वह प्रयत्न करता है। अंग्रेज़ों का आज्ञानुवर्ती बनकर स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी क्रूरता से वह मारता है। वह एक निर्दय दारोगा है। जुलूस का नेता इब्राहिम अली के ऊपर बीरबल सिंह घोड़े को चढ़ाता है। स्वराजियों के अभिप्राय में बीरबल सिंह “जल्लाद दारोगा! अंग्रेज़ों का पिठू है।” बीरबल सिंह का चरित्र इतना नीच होने पर भी, यह वास्तव है कि अंत में वह अपने देशद्रोही कर्मों पर पछताता है और सच्चा देशभक्त बन जाता है।

Plus One Hindi जुलूस Important Questions and Answers

सूचनाः
जूलूस नाट्यरूपान्तर के बीरबलसिह के निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न 1 का उत्तर लिखिए।

बीरबलसिंह

  • तुम लोगों को आगे जाने का हुक्म नहीं है।
  • फिर से सोच ले। बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा।
  • अभी तो वक्त है, इब्राहिम अली साहब….. आप मेरे सामने से हट जाएँ।

प्रश्न 1.
इस कथन के आधार पर बीरबलसिंह के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:

चरित्र चित्रण – बीरबल सिंह

बीरबल सिंह अंग्रेज़ सरकार के दारोगा है। वह एक भारतीय है फिर भी अंग्रेज़ों केलिए काम करते हैं। एक अधिकारी का भाव उस में है। वह सरकार के वफादार हैं। इसीलिए सरकारी हुक्म के बारे में कहते हैं। वह अपने शक्ति पर भरोसे रखते हैं। उसमें उत्साह की कमी भी नहीं हैं। वह इब्राहिम अली को आदर भी करते हैं। गुण और दोष से मिश्रित है बीरबल सिंह।

सूचनाः
जुलूस नाट्यारुपांतर के दीनदयाल का निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न 2 का उत्तर लिखिए।

दीनदयाल

  • जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कब का मिल गया होता।
  • जुलूस के चौरास्ते पर पहुँचते ही हंटर लेकर बिल पड़ेगा।
  • दुकान बंद कर मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मैकू!

प्रश्न 2.
इस कथन के आधार पर दीनदयाल के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
दीनदयाल एक दूकानदार है। वह नाटक के आरंभ में केवल अपना काम करनेवाला दिखता है। लेकिन परिवर्तनशील पात्र हैं। पहले वह स्वराजियों के विरोध करता था। लेकिन अंत में वह भी स्वराजियों के साथ हो जाते हैं। वह एक साधारण व्यक्ति है। उसे अंग्रेज़ों से डर है। फिर भी वह जुलूस में भाग लेना चाहते हैं। एक अच्छा इनसान है वह। देश-प्रेम भी उनके मन में है।

सूचनाः
जुलूस नाट्यरूपांतर के बीरबलसिंह का निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न का उत्तर लिखिए।

बीरबल सिंह

  • हमारा हुक्म क्या आपको सुनाई नहीं पड़ा?
  • फिर से सोच ले! बहुत नुक्सान उठाना पड़ेगा!
  • सिपाहियो! लाठी चार्ज करो!

प्रश्न 3.
इस कथन के आधार पर बीरबलसिंह से चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपान्तर में प्रस्तुत पाठभाग में बीरबल सिंह का चरित्र खलनायक (aleyod) का है। बीरबल सिंह दारोगा है। जुलूस में निकले स्वतंत्रता सानानियों को रोकने के लिए वह प्रयत्न करता है। अंग्रेज़ों का आज्ञानुवर्ती बनकर स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी क्रूरता से वह मारता है। वह एक निर्दय दारोगा है। जुलूस का नेता इब्राहिम अली के ऊपर बीरबल सिंह घोड़े को चढ़ाता है। स्वराजियों के अभिप्राय में बीरबल सिंह “जल्लाद दारोगा! अंग्रेज़ों का पिठू है।” बीरबल सिंह का चरित्र इतना नीच होने पर भी, यह वास्तव है कि अंत में वह अपने देशद्रोही कर्मों पर पछताता है और सच्चा देशभक्त बन जाता है।

सूचना :
जुलूस नाट्यारुपान्त्र के इब्राहिम अली का निम्नलिखित कथन पकिए और प्रश्न 4 का उत्तर लिखिए। –

इब्राहिम अली

  • दारोगा साहब। मैं आपको अतमीनान दिलाता हूँ कि किसी किस्म का दंगा-फसाद न होगा।
  • वापस तो हम न जाएँगे। आपको या किसी को हमें रोकने का हक नहीं।
  • आप बेटन चलाएँ दारोगाजी।

प्रश्न 4.
इस कथन के आधार पर इब्राहिम अली के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इब्राहिम अली
इब्राहिम अली जुलूस नाटक से एक प्रमुख पात्र है। वह स्वतंत्रता सेनानियों के नेता है। एक नेता के लिए सभी आवश्यक गुण उसमें हैं। वह अपने आप पर भरोसा रखते हैं और अपने पास रहनेवाले लोगों के बारे में भी सोचते हैं। वह अपने वचन निभाने के लिए तैयार है। वह अहिंसावादी है। इसलिए दंगा-फसाद करना नहीं चाहता। वह अपने हक को पूरी तरह समझते है और निडर भी है। दारोगा के बेटन से नहीं डरते हैं। एक सच्चा नेता, मानवतावादी, अहिंसावादी और परोपकारी है इब्राहिम अली।

सूचनाः
‘जुलूस’ के दीनदयाल के ये कथन पढ़िये और प्रश्न 5 का उत्तर लिखिए।

  • जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कब का मिल गया होता।
  • नया दरोगा बीरबल सिंह बड़ा जल्लाद है मैकू।
  • दुकान बंद कर, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मैकू।

प्रश्न 5.
कथनों के आधार पर दीनदयाल का चरित्रचित्रण कीजिए।
उत्तर:
दीनदयाल जुलूस का एक पात्र है। वह बाज़ार में एक दूकान चलाता है। स्वराजियों के प्रति पहले उसके मन में घृणा थी। लेकिन जब उसे यह पहचान हुआ कि ये स्वराजी लोग भारत के लिए ही जुलूस चला रहे हैं और अंग्रेज़ों के विरुद्ध आंदोलन चला रहे हैं, तब उसकी चिंताओं में बदलाव भी आ जाता है। अंत में वह भी जुलूस में भाग लेता है। वह सच्चा देशप्रेमी एवं ईमानदार है।

जुलूस Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 4
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 6

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 10

जुलूस Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 11
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 1
प्रश्न 1.
इस दृश्य ने आपके दिल में कौन-सी प्रतिक्रिया जगाई?
उत्तरः
हमारे देश में बालश्रम करनेवाले कई बच्चे हैं। कठिन काम करके जीते समय भी उनके मन में कई प्रतीक्षाएँ रहती हैं। बालश्रम रूपी बाज. निरीह बचपनों को उठाते वक्त भी वे अपना भविष्य सुंदर आशावरी आँखों से देखने को उत्सुक रहते हैं।

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प्रश्न 2.
पादटिप्पणी की परख, मेरी ओर से
उत्तरः
बालश्रमः घातक गीध

प्रश्न 3.
लक्ष्यार्थ पर केंद्रित है।

प्रश्न 4.
समूचे भाव को आत्मसात किया है।

प्रश्न 5.
प्रभावशाली है।

प्रश्न 6.
सार्वजनिक सूचना अधिकारी के नाम पत्र..
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

1. आवेदक का नामहरिता एम
2. डाक का पूरा पताहरितम, शांति नगर, तिरुवनंतपुरम22
3. सूचना का विषयबालश्रम को रोकने के लिए रोज़गार मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबंधित।
4. माँगी गई सूचना का विवरण1. क्या भारत में बालश्रम पर कानूनी रोक है? तो बालश्रम रोकने और उसके खिलाफ़ समाज को सचेत करने के कौन कौन से प्रावधान हैं?
2. मंत्रालय द्वारा रोज़गार जगहों में सूचना पट लगवाने की कौन कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. बालश्रम के बारे में पता चलने पर किस कार्यालय में सूचना देनी है? कार्यालय का दूरभाषा उपलब्ध करा सकते हैं? बालश्रम के लिए प्रेरित करनेवालों को मिलनेवाला अधिकतम दंड क्या है?
5. सूचना डाक या दस्ती में।डाक द्वारा।

तिरुवनंतपुरम
10-07-2014

(हस्ताक्षर)
हरिता एम
उत्तरः

दस रूपए

प्रेषक,
हरिता. एम
हरितम, शांति नगर
तिरुवनंतपुरम

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार,
नई दिल्ली

महोदय,
विषय: बालश्रम को रोकने की कार्रवाइयों से संबंधित।
संदर्भ: सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005

1. क्या भारत में बालश्रम पर कानूनी रोक है? समाज को सचेत करने के लिए कौन-कौन से प्राविधान हैं?
2. रोजगार जगहों में सूचना पट लगवाने की कौन-कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. बालश्रम के बारे में पता चलने पर किस कार्यालय में सूचना देनी है? उस कार्यालय का दूरभाष उपलब्ध करा सकते हैं? बालश्रम को प्रेरित करनेवालों को मिलनेवाला अधिकतम दंड क्या है?

भवदीय,
(हस्ताक्षर)
हरिता. एम.

तिरुवनंतपुरम,
10-07-2014

यह हमारा अधिकार है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 7.
पत्र के आधार पर लिखें।

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उत्तरः
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 3

पाठकनामा पढ़ें

सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल
को बड़ी परेशानी होती है।
चिट्टारिपरंब में लगभग तीन
अधिकारियों के सामने कई
हज़ार छात्र अध्ययन कर रहे
बार यह समस्या लाई गई. पर
है। वे शहर की विभिन्न जगहों
काई फायदा नहीं हआ। जल्द
से आते हैं। अधिकांश छात्र
ही-जल्द इसपर कार्रवाई करने
बस का सहारा लेते हैं। बस
की ज़रूरत है।
कम होने की वजह से छात्रों

– राजेश कुमार
सदस्य, अध्यापक-अभिभावक संघ

प्रश्न 8.
पाठकनामा के विषय पर क्या कार्रवाई की गई, उसकी जानकारी पाने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, जिला परिवहन कार्यालय, कण्णूर के नाम एक सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तरः
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
सड़क परिवहन कार्यालय,
कण्णूर।

1. आवेदक का नामराजेश कुमार
2. डाक का पूरा पताराजेश भवन, चिट्टारिपरंब, कण्णूर 12.
3. सूचना का विषयबस्सों की कमी के बारे में सडक परिवहन कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबंधित
4. माँगी गयी सूचना1. नगरों से गाँव की ओर का विवरण ज्यादा बसें चलाने केलिए कौन कौन से प्राविधान हैं?
2. विद्यार्थियों की यात्रा संबंधी परेशानियाँ दूर करने केलिए क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती मेंडाक द्वारा

कण्णूर
15.03.2016

आवेदक,
(हस्ताक्षर)
राजेश कुमार (सदस्य अध्यापक अभिभावक संघ)
जी.ऐच्य.एस.एस.
चिट्टारिपरंय, कण्णूर 12.

प्रश्न 9.
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 13
उत्तरः
प्रेषक,
के, राजेशकुमार
सदस्य, अध्यापक अभिभावक संध
सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल
चिट्टारिपरंब, कण्णूर

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
सड़क परिवहन कार्यालय
कण्णूर 12

महोदय,
विषय: सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, चिट्टारिपरंब के छात्रों की परिवहन की कार्रवाइयों की सूचना प्राप्त करने से संबंधित
संदर्भ: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

1. स्कूली छात्रों के परिवहन संबंधी कानूनी अधिकार क्या क्या है?
2. छात्रों के परिवहन अधिकार को लगू करने के लिए परिवहन-मंत्रालय द्वारा कौन-कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. चिट्टारिपरंब में छात्रों को समस्या दूर करने के लिए कौन-कौन से कार्य किए गए हैं?

कण्णूर
10.8.2014

भवदीय
(हस्ताक्षर)
के. राजेशकुमार

पाठकनामक पढ़ें

विजयनगर में पानी बहुत कम मात्रा में आता है और वह भी अशुद्ध होता है। इस सन्दर्भ में हम समय-समय पर अधिकारियों का ध्यान इस और अकृष्ट कराते आए हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया तथा अभी तक कोई कार्यवाही भी नहीं हुई।…..

अजय शर्मा
75/496 जयपूर

प्रश्न 10.
पाठनामा के विषय पर क्या कारवाई की गई, जानकारी पाने केलिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, लोक कर्म विभाग, जयपूर के नाम एक सूचना आधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
लोक कर्म विभाग,
जयपूर।

1. आवेदक का नामअजय शर्मा
2. डाक का पूरा पताविजय नगर, 75/496 जयपूर
3. सूचना का विषयविजयनगर की पानी समस्या के संबंधित में की गयी कार्रवाइयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना का विवरण1. विजयनगर में पानी कम मात्रा में और वह भी अशुद्ध आने के संबंध में क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी है?
2. स्थल अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराने केलिए की गयी बातों पर क्या क्या प्राविधान लिए गये हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती मेंडाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

विजय नगर
15.03.2016

अजय शर्मा,
विजय नगर, 75/496 जयपूर

सब्जियों में विषैले वरत्तुओं का प्रयोग

अशोक नगर: रामपुरा से केरल में आ रही सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं। केरल के अधिकांश लोग इस बात से वाकिफ नही है। खाद्य पर जितने भी रासायनिक वस्तुओं का प्रयोग हो रहा है, वे स्वास्थ्य केलिए हानिकारक है। कैंसर जैसे बीमारियाँ बढ़ाती है।

प्रश्न 11.
श्रीमती सरलादेवी, 8/375, अशोकनगर, कोट्टयम, रासायनिक प्रयोगों को रोकने केलिए सरकार की ओर से की गयी कारवाइयों की सूचना पाने केलिए राज्य खाद्य सुरक्षा कम्मीशनर, (State Food Safety Commissioner) तैय्क्काड़, तिरुवनन्दपुरम के नाम एक सूचना आधिकार पत्र लिखती है। वह सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए

सेवा में,
राज्य खाद्य सुरक्षा कम्मीशनर,
तैयक्काड़,
तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नामश्रीमती सरलादेवी
2. डाक का पूरा पता8/375, अशोक नगर, कोट्टयम
3. सूचना का विषयस्वास्थ्य के लिए हानिकारक रूप में सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं के प्रयोग से संबंधित।
4. माँगी गयी सूचना का विवरण1. रामपुरा से केरल में आ रही सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं के प्रयोगों को रोकने के लिए क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी हैं?
2. खाध्य पदार्थों में विषैले रासायनिक वस्तुओं की उपस्थिति को रोकने केलिए सरकार की ओर से क्या क्या प्राविधान लिए गये हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

कोट्टयम
15.03.2016

श्रीमती सरलादेवी,
8/375 अशोक नगर, कोट्टयम

यह रपट पढ़ें।

वर्षकालीन बीमारियाँः स्थाई रोकधाम की माँग ज़ोर आलप्पुषा: केरल में वर्षाकालीन बीमारियां फैल रही हैं। बीमारियों की स्थाई रोकधाम की माँग ज़ोर पकड़ रही है। इस दिशा में सरकार हर साल लाखों रुपए व्यय कर रही है। मलेरिया, डेंगु और अन्य जलजन्य रोगों पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएँ बनाई हैं।….

प्रश्न 12.
वर्षकालीन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों की सूचना पाने के लिए गिरीश कुमार, अशोक विहार, आलप्पुषा की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, केरल सरकार के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
स्वास्थ्य विभाग,
केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नामगिरीश कुमार
2. डाक का पूरा पताअशोक विहार, आलप्पुषा
3. सूचना का विषयवर्षकालीन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबन्धित।
4. माँगी गयी सूचना का विवरण1. वर्षकालीन रोगों की रोकधाम के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गई?
2. नगरपालिका द्वारा विविध प्रकार के जलजन्य रोगों के सूचनापट लगवाने का प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

आलप्पुषा
15.03.2016

गिरीश कुमार,
अशोक विहार, आलप्पुषा

निम्न सुर्खियाँ पढ़िए।

स्कूल में गंदगी:
संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा
1000 छात्रों के लिए तीन शौचालय
स्वच्छता की सीख स्कूली जीवन से होनी चाहिए: मंत्री

प्रश्न 13.
स्कूल और आसपास को स्वच्छ रखने के लिए सरकार द्वारा किए जानेवाले कारवाईयों की जानकारी पाने के लिए सुमन, सदस्य, अध्यापक अभिभावक संघ, सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, पालक्काड़ की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, शिक्षा विभाग, केरल सरकार, तिरुवनंतपुरम् के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
शिक्षा विभाग, केरल सरकार,
तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नामसुमन
2, डाक का पूरा पताजी. एच. एस. एस. पालक्काड
3. सूचना का विषयस्कूल और आसपास को स्वच्छ रखने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा किए जानेवाले कारवाईयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना का विवरण1. स्वच्छता की सीख स्कूली जीवन से होनी चाहिए: मंत्री के इस आज्ञा को प्रायोगिक बनाने के लिए क्या क्या कारवाईयाँ की गयी?
2 स्कूल में गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने के खतरे के बारे में प्रधान अध्यापकों को सूचना देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

पालक्काड
15.03.2016

सुमन,
जी. एच. एस. एस. पालक्काड

निम्न सुर्खियाँ पढ़िए।

दहेज कम होने पर दुल्हें ने शादी से इनकार कर दिया।
दहेज माँगा: युवक की गिरफ्तारी
दहेज के विरोध में महिलाओं का जुलूस

प्रश्न 14.
सार्वजनिक सूचना अधिकारी, समाज कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम दहेजप्रथा पर कानूनी रोक के संबंध में सूचना पाने के लिए मनीषा परवीण, रागविहार, तिरुवनंतपुरम सूचना का अधिकार पत्र तैयार करती है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
समाज कल्याण मंत्रालय,
नई दिल्ली।

1. आवेदक का नाममनीषा परवीण
2 डाक का पूरा पतारागविहार, तिरुवनंतपुरम
3. सूचना का विषयदहेजप्रथा पर कानूनी रोक के संबंध में समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा की गयी कारवाईयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना1. दवेदप्रथा की रोकधाम का विवरण के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गयी हैं?
2. समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा दहेजप्रथा की रोकधाम के संबंध में आमजनता को जानकारी देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा डाक द्वारा

आवेदक.
(हस्ताक्षर)

तिरुवनंतपुरम
15.03.2016

मनीषा परवीण,
रागविहार, तिरुवनंतपुरम

निम्न सुर्खियाँ पकिए।

देश में नारी-उत्पीडन पर रोक की जरूरत
नारी-उत्पीडन रोकने के लिए सरकार कटिबद्ध
नारी-उत्पीडन: कानूनी दंड अपर्याप्त

प्रश्न 15.
कुमारी अंजली, 13 सी / कण्णूर, नारी-उत्पीडन रोकने की दिशा में सरकार की ओर से की गई कार्रवाइयों की सूचना पाने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, गृह विभाग, केरल सरकार के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार करती है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
गृह विभाग,
केरल सरकार

1. आवेदक का नामकुमारी अंजली
2. डाक का पूरा पता13 सी / कण्णूर।
3. सूचना का विषयनारी उत्पीडन रोकने के लिए सरकार द्वारा की गयी कारवाईयों से संबंधित
4. माँगी गयी सूचना का विवरण1. नारी उत्पीडन की रोकधाम के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गयी हैं?
2. गृह विभाग, केरल सरकार द्वारा नारीउत्पीडन की रोकधाम के संबंध में आमजनता को जानकारी देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

कण्णूर
15.03.2016

कुमारी अंजली,
13 सी / कण्णूर

Plus One Hindi यह हमारा अधिकार है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न सुखियाँ पढ़िए।
सुरक्षा की कमी: रेल-गाड़ी में स्त्री पर आक्रमण
रेल-यात्रा में स्त्रियों की सुरक्षा पर अधिक जोर देना है: सुप्रीम कोर्ट
स्त्रियों की सुरक्षा के लिए रेलगाड़ी में ज्यादा पुलीस की नियुक्ति की जाएगीः रेल मंत्री

आजकल रेल-गाड़ी में स्त्रियों पर आक्रमण बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा की जानेवाली कारवाईयों की जानकारी पाने के लिए राकेश कुमार, मयूर विहार, नई दिल्ली की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, रेल मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रेल मंत्रालय, नई दिल्ली।

1. आवेदक का नामराकेश कुमार
2. आवेदक का पतामयूर विहार, नई दिल्ली
3. सूचना का विषयरेलगाड़ी में स्त्रियों पर होनेवाले आक्रमण को रोकने केलिए की गई कार्यवाइयों से संबंधित
4. मांगी गई सूचना का विवरण1. इस साल रेलगाड़ी में स्त्रियों पर कितना आक्रमण अभी तक हुआ है?
2. रेलगाड़ी में स्त्री सुरक्षा केलिए कौन कौन से प्रावधान है?
3. इसी मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किये हैं और कितने लोगों को सजा मिला है?
4. तकनीकी विकास से रेलगाड़ी के सुरक्षा में कोई नया सुविधा इस्तेमाल किया है या नहीं।
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

नई दिल्ली,
20.06.2016

आवेदक,
राकेश कुमार
मयूर विहार,
नई दिल्ली

यह हमारा अधिकार है Summary in Malayalam

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु

प्रश्न 1.
सूखे तिनको’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
निराशा।

प्रश्न 2.
उषा शब्द किन-किन की ओर इशारा करता?
उत्तर:
प्राची में आनेवाली उषा प्रकाश-किरण के रूप में लालिमा लेकर आती है। कवि की रागात्मक दुनिया में आनेवाली उषा, प्रेमिका के रूप में जीवन में सौंदर्य की लालिमा लेकर आती है। संक्षेप में उषा प्रणयातुर दिलों में उपस्थित प्रतीक्षा,संतोष, तीव्रानुभूति आदि की ओर इशारा करता है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
छायावाद में कवि कोमल पदावलियों का प्रयोग करते थे। निम्नलिखित शब्दों के स्थान पर कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें।
वसंत, मौसम, भूमि, आकाश, जंगल, शिशिर, कलि, किसलय, मलयसमीर, आँख, कमल, प्रभात, पूरब, समुद्र, चाँद, रात
उत्तर:
वसंत = मधुऋतु
मौसम = दो दिन
भूमि = वसुधा
आकाश = नभ
जंगल = झाड़खंड
शिशिर = पतझड़
कलि = कुसुम
किसलय = पल्लव
मलयसमीर = मलयानिल
आँख = नयन
कमल = नलिन
प्रभात = उषा
पूरब = लघुप्राची
समुद्र = जलधि
चाँद = शशि
रात = निशि

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय व्यक्त करें।
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।
उत्तर:
प्रेम के ऐकांत सृजन कार्य में कोई बाधा उपस्थित नहीं करनी है। अपने में जो कुछ सुन्दर हैं, उसे प्रेम-युग्मों को देना है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित छायावादी प्रवृत्तियों को सूचित करनेवाली पंक्तियाँ लिखें।
प्रकृति चित्रण
मानवीकरण
सौंदर्यवर्णन
प्रेमानुभूति
उत्तर:
प्रकृति चित्रण – ‘जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी मेरी लघुप्राची में
मानवीकरण – ‘आ गई है भूली-सी यह मधुऋतु दो दिन को
सौंदर्यवर्णन – ‘हँसी भरे उस अरुण अधर का राग रंगेगा दिन को
प्रेमानुभूति – ‘चुंबन लेकर और जगाकर मानस नयल नलिन को

प्रश्न 4.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की कविता है ‘मधुऋतु। यह एक सुंदर कविता है। ‘मधुऋतु’ छायावादी कविता है। कविता में वसंतऋतु का सुंदर वर्णन हुआ है। वसंतऋतु आ गया है। वह भूली-सी है। कवि उसे एक व्यथा – साथिन के समान देखते हैं। कवि अपने मन में उसके लिए छोटी कुटिया बना देते हैं। कवि कहते हैं कि प्रेमी रहता है भूमि और आकाश के बीच में। प्रेमविहीन लोग यहीं पर नहीं रहते। कवि का प्रेम वसंतऋतु रूपी प्रेमिका से हुआ है। इससे कवि के हृदय प्रेममय हो गया है। इस प्रेममय वातावरण में आशा के नये अंकुर झूलते हैं। इस प्रेममय वातावरण में मलयानिल बहकर आता है। उसकी लहरें सिहर मर देती है। मलयानिल कवि के मानस नयन नलिन को चुंबन करके जगाता है।

वसंतऋतु में प्रभात लालिमा से भरा-हुआ रहता है। संसार में हमेशा रोशनी भी रहती है। वसंतऋतु में चाँदनी फैल जाती है और प्रकृति डिम की बूंदों की वर्षा करती है। वसंतऋतु में प्रेम का एकांत सृजन कार्य होता है। कवि निवेदन करते हैं कि इस में किसी को बाधा उपस्थित नहीं करनी है। कवि का उपदेश है अपने में जो कुछ सुन्दर है उसे प्रेम-युग्मों को दे देना है। ‘मधुऋतु’ में प्रकृति चित्रण, मानवीकरण, सौंदर्यवर्णन, प्रेमानुभूति आदि छायावादी प्रवृत्तियों का सुन्दर समावेश हुआ है। पदावली अत्यंत कोमल है। पंक्तियों का आशय आसानी से समझ सकते हैं। शीर्षक सार्थक और संगत है।

प्रश्न 5.
आस्वादन-टिप्पणी की परख, मेरी ओर से कवि का परिचय है।
उत्तरः
ये पंक्तियाँ ‘मधुऋतु’ कविता से प्रस्तुत हैं। ‘मधुऋतु’ एक सुंदर छायावादी कविता है। ‘मधुऋतु’ की रचना की है कवि जयशंकर प्रसाद ने। हिंदी के सुप्रसिद्ध छायावादी कवि हैं जयशंकर प्रसाद। वसंतऋतु आ गया है। वह एक साथिन के समान है। उसका मन व्यथा से भरपूर है। मैं उसके लिए एक सुंदर कुटिया बना दूंगा। प्रणयहीन दिलवाले लोगों को यहाँ पर प्रवेश निषेध है। वसंतऋतु के आगमन के कारण मेरे मन में नयी नयी आशाएँ एवं प्रतीक्षाएँ भर रही हैं। अब मेरा जीवन किसलयों से निर्मित लघुभव-सा हो गया है। मेरा यह सुंदर जीवन किसी को कोई कष्ट न देनेवाला है। छायावादी कविता से युक्त प्रेम, प्रकृति वर्णन, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रमयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि गुणों से संपन्न है प्रस्तुत कवितांश। हमें दूसरों की जिंदगी में कोई बाधा न डालनी है-यह संदेश कवितांश द्वारा कवि हमें देते हैं। साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्यार रखने का संदेश भी हमें मिलता है।

प्रश्न 6.
कविता की काव्यधारा और रचनाकाल की सूचना है।
उत्तर:
* प्रकृति वर्णन
अंतरिक्ष छिड़केगा कन-कन
निशि में मधुर तुहिन को

* प्रेम
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूँ,
नई व्यथा साथिन को!

* सौंदर्य
जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी
मेरी लघुप्राची में

* मानवीकरण
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को

* लाक्षणिकता
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,

* चित्रमयता
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूं.
नई व्यथा साथिन को!

* काल्पनिकता
वसुधा नीचे उपर नभ हो,
नीड़ अलग सबसे हो

* कोमलकांत पदावली
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो

* मधुरता
अंधकार का जलधि लाँधकर
आवेंगी शशि-किरनें

* सरसता
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।

प्रश्न 7.
कविता का सार है।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश श्री जयशंकर प्रसाद के मधुऋतु कविता से है। प्रसाद छायावादी कविता के क्षेत्र के प्रमुख है। झरना, लहर, कामायनी आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। प्रेम, प्रकृति,सौंदर्य, मानवीकरण आदि छायावादी कविताओं की सभी विशेषतायें आपके कविता में देख सकते हैं। वसंद (मधुऋतु) आने पर प्रकृति में कई प्रकार के परिवर्तन आते हैं। इन परिवर्तनों को कवितांश में प्रकट किया है। आशा के नए-नए अंकुर झूलेंगे और पल्लव रोमांचित हो जाएँगे। मेरे किसलय का लघु मनोहर संसार किसको बुरा लगेगा यानि किसीको बुरा नहीं लगेगा। रोमांचित मलयानिल की लहरें काँपते हुए आएँगी और मन में नयनरूपी कमल को चूमकर जगाएँगी। यहाँ कवि सरल शब्दों में वसंद के आगमन के साथ आनेवाली परिवर्तनों को दिखाया है। परिवर्तनल के लिए हमारा मन परिवर्तन बहुत आवश्यक है। हमें अच्छे बातों को स्वीकार करना ज़रूरी है। यह प्रासंगिक कविता है।

प्रश्न 8.
अपने दृष्टिकोण में कविता का विश्लेषण किया है।
(काव्यधारा और रचनाकाल के अनुरूप भाषा, प्रतीक आदि।)
उत्तर:
प्रकृति वर्णन, प्रेम, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रसयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि हैं।

प्रश्न 9.
इन बिंदुओं पर ध्यान देते हुए कविता का आलाप करें।
भावानुकूल प्रस्तुति
उचित ताल-लय
सटीक शब्द-विन्यास

प्रश्न 10.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मधुऋतु
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को,
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूँ,
नई व्यथा साथिन को!
वसुधा नीचे उपर नभ हो,
नीड़ अलग सबसे हो,
झाड़खंड के चिर पतझड़ में।
भागो सूखे तिनको!
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा किनको?

i) इन पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

ii) ‘जंगल’ का समानार्थी शब्द कवितांश से ढूँढकर लिखें।
उत्तर:
झाड़खंड।

iii) ‘भागो सूखे-तिनको’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वसंत ऋतु में पतझड़ के सूखे तिनकों-पत्तों का कोई स्थान नहीं होता, ठीक उसी प्रकार प्रणयातुर दिल में दुख और निराशा का भी कोई स्थान नहीं। प्रणयहीन दिलों को प्रणय के दुनिया में कोई जगह नहीं है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
सिहर भरी कैंपती आवेंगी
मलयानिल की लहरें,
चुंबन लेकर और जगाकर
मानस नयन नलिन को।
जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी
मेरी लघुप्राची में,
हँसी भरे उस अरुण अधर का
राग रँगेगा दिन को।
अंधकार का जलधि लाँघकर
आवेंगी शशि-किरने
अंतरिक्ष छिड़केगा कन-कन
निशि में मधुर तुहिन को
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।

i) मलयानिल की लहरें कैसे आती हैं?
उत्तर:
सिहर भरके कॉपती।

ii) प्रेमिका के कमल-नयनों को कौन चूमता है?
उत्तर:
मलयानिल।

iii) रात में हिमकणों को कौन छिड़कता है?
उत्तर:
अंतरिक्ष।

iv) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
पंक्तियाँ ‘मधुऋतु’ कविता से प्रस्तुत हैं। ‘मधुऋतु’ एक सुंदर छायावादी कविता है। ‘मधुऋतु’ की रचना की है कवि जयशंकर प्रसाद ने। हिंदी के सुप्रसिद्ध छायावादी कवि हैं जयशंकर प्रसाद। प्रकृति सदा सक्रिय रहती है। वह अपने आपको सदा अलंकृत रहती है। हमें प्रकृति में कोई बाधा न डालनी चाहिए। हमें प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ाने में सदा तत्पर रहना चाहिए। हमसे प्रकृति का विनाश नहीं, बल्कि प्रकृति का संरक्षण होना चाहिए। छायावादी कविता से युक्त प्रेम, प्रकृति वर्णन, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रमयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि गुणों से संपन्न है प्रस्तुत कवितांश। हमें दूसरों की जिंदगी में कोई बाधा न डालनी है यह संदेश कवितांश द्वारा कवि हमें देते हैं। साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्यार रखने का संदेश भी हमें मिलता है। प्रकृति संरक्षण, पारस्परिक प्रेम समभाव, सक्रियात्मकता आदि का भी संदेश हमें इस कवितांश से मिलता है।

प्रश्न 12.
‘अरे आ गई है भूली सी यह’ – कौन आ गई है?
उत्तर:
मधुऋतु’।

प्रश्न 13.
‘मधुऋतु’ रूपी प्रेमिका क्यों भूली-भटकती-सी आई है?
उत्तर:
प्रेमिका के मन में प्रेमी के प्रति तीव्र अनुराग है। कोई भी प्रेमिका अपनी प्रणय भावना खुल्लम-खुल्ला प्रकट करना नहीं चाहती। दिल में प्रणय छिपाकर वह भूली-भटकी सी आ रही है।

प्रश्न 14.
प्रेमी नई व्यथा-साथिन के लिए क्या करना चाहता है?
उत्तर:
छोटी -सी कुटिया रच देना चाहती है।

प्रश्न 15.
प्रेम का नीड़ कहाँ स्थित है?
उत्तर:
नीचे की वसुधा और ऊपर के नभ-दोनों से अलग।

प्रश्न 16.
जंगल के पतझड़ में किसको भाग जाना है?
उत्तर:
सूखे तिनके को (प्रणयहीन दिलवाले लोगों को)।।

प्रश्न 17.
वसंत के आगमन पर कौन-सी ऋतु चली जाती है?
उत्तर:
शिशिर (पतझड़ की ऋतु)

प्रश्न 18.
‘पतझड़’ का समानार्थी शब्द क्या है?
उत्तर:
शिशिर।

प्रश्न 19.
पतझड़ (शिशिर) की क्या क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
झाड़खंड में पतझड़ होता है। तिनके, पत्ते आदि सूखकर नीरस और शुष्क बन जाता है।

प्रश्न 20.
वसंत की विशेषताएँ क्या क्या होती है?
उत्तर:
अंकुर झूलते हैं। पल्लव पुलकित हो जाते हैं। मलयानिल की लहरों से नलिन खिल जाते हैं। जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी। अंधकार का जलधि लाँघकर शशि-किरण आती हैं। निशि में अंतरिक्ष मधुर तुहिन छिड़केगा।

प्रश्न 21.
वसंत किन-किन का प्रतीक हो सकता है?
उत्तर:
प्रेम और आशा से प्रणयातुर दिल को मोहक और मादक बनानेवाली प्रेयसी का प्रतीक होता है।

प्रश्न 22.
अगर वसंत प्रेम और आशा का प्रतीक है तो पतझड़ किन-किन का प्रतीक हो सकता है?
उत्तर:
दुख और निराशा से भरे प्रणयहीन दिलों का प्रतीक होता है।

प्रश्न 23.
वसंत के आगमन से प्रेमी के मन में किसका अंकुर झूलने लगता है?
उत्तर:
आशा के अंकुर।

प्रश्न 24.
लाल कुसुम के समान उषा कहाँ खिलेगी?
उत्तर:
कवि के लघुप्राथी में।

प्रश्न 25.
उषा कहाँ उदित होती है?
उत्तर:
लघुप्राची में।

प्रश्न 26.
उदय के समय आसमान में कौन सा रंग फैल जाता है?
उत्तर:
लाल रंग।

प्रश्न 27.
उषा का आगमन कैसा है?
उत्तर:
जवा कुसुम-सी।

प्रश्न 28.
अंधकार के सागर को पारकर कौन आता है?
उत्तर:
शशि-किरने।

प्रश्न 29.
प्रेमयुग्मों को आपस में क्या दे देना है?
उत्तर:
जो कुछ अपने सुंदर से हैं-उनको दे देना है।

प्रश्न 30.
वसंत ऋतु में प्रकृति को मोहक बनानेवाले अंग कौनकौन से हैं?
उत्तर:
वसंत ऋतु में प्रकृति को खूबसूरती प्रदान करने में अंकुर, किसलय, कलियाँ, फूल, पत्ते, तित्तली, भ्रमर, कोयल, मंदपवन सबकी अपनी-अपनी भूमिका है।

प्रश्न 31.
‘मेरे किसलय का लघुभव’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी एक के बिना प्रकृति की सुंदरता अधूरी रह जाती है। उस सुंदरता में किसलय भी अपना एक छोटा संसार रचता है।

प्रश्न 32.
एकांत में कौन बैठे हैं?
उत्तर:
प्रेमयुग्म।

प्रश्न 33.
‘कुछ बाधा मत डालो’ कवि क्यों ऐसा कहता है?
उत्तर:
वसंतकाल अपनी संपूर्ण भंगिमा के साथ पूरे प्रकृति में छा रहा है। इस एकांत सृजन कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। वसंतकाल में वसंत और प्रकृति अपनी सुंदरतम चीज़ों को बिना माँगे आपस में समर्पित करते हैं। यही समर्पण सृजन सौंदर्य का रहस्य होता है। प्रेमिका अपने संपूर्ण रूप – सौंदर्य से युक्त होकर प्रेमी के जीवन में छा रही है। प्रेमी – प्रेमिका के मिलन और प्रणय-सृजन के अपूर्व एवं रहस्यमयी बेला में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 34.
सृजन का सौंदर्य कैसे पूर्ण होता है?
उत्तर:
प्रेम के चरमोत्कर्ष क्षणों में प्रेमी-प्रेमिका का दुवैतभाव समाप्त हो जाता है और दोनों एकाकार हो जाते हैं। सृजन के वे क्षण सृष्टि के सुंदरतम सौंदर्य की वेला भी है।

Plus One Hindi मधुऋतु Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को,
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूं.
नई व्यथा साथिन को!
वसुधा नीचे ऊपर नभ हो.
नीड़ अलग सबसे हो,
झाड़खंड के चिर पतझड़ में
भागो सूखे तिनको!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
मधुऋतु

प्रश्न 2.
कविता के ‘नम’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (आकाश, नीड़, भूमि, पतझड़)
उत्तर:
आकाश

प्रश्न 3.
वसंत के आगमन पर सूखे तिनकों को क्या करना है?
उत्तर:
कवि कहते हैं कि वसंत के आगमन पर सूखे तिनकों को भागना है क्योंकि वसंत नयी प्रतीक्षा का समय है।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश श्री जयशंकर प्रसाद के मधुऋतु नामक कविता से है। प्रसाद जी छायावादी कवियों में अग्रणी है। झरना, आँसू, कामायनी आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। कवि के साधारण जीवन में वसंत ऋतु अचानक आ गई है। वसंत काल केवल कुछ दिन केलिए आता है। इसलिए कवि अपनी छोटी सी कुटिया में प्रेम के नई व्यथा सहेली केलिए रचना चाहता है। कवि का कहना है कि वह अपना नीड़ यानी घर धरती और आकाश के बीच सृजन करना चाहता है। प्रेम साधारण जीवन से परे है। अपने जीवन रूपी जंगल से सूखे तिनकों को भागने केलिए कवि कहते है क्योंकि वसंत केलिए वह अपने आपको सजाना चाहता है।

यहाँ कवि तत्सम शब्दों से प्रेम और उसकी पीड़ा का वर्णन करते हैं। जीवन में कुछ खोने से ही कुछ प्राप्त करेगा। यह एक छात्रानुकूल कविता हैं। नयी पीढ़ी को आह्वान करते है कि त्याग से ही हमारे जीवन में तरक्की होगा।

सूचना :

निम्नलिखित कवितांश पदें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा. किनको?
सिहर भरी कैंपती आवेंगी
मलयानिल की लहरें,
चुंबन लेकर और जगाकर
मानस नयन नलिन को।

प्रश्न 5.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
मधुऋतु

प्रश्न 6.
कविता के ‘नयन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (कमल, आँख, हवा, लहर)
उत्तर:
आँख

प्रश्न 7.
मलयानिल की लहरें कैसे आती हैं?
उत्तर:
सिहर भरी कैंपती आवेंगी मलयानिल की लहरें।

मधुऋतु Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 1
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 8

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 12

मधुऋतु Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 13
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 14

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

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Kerala State Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

साहिर लुधियानवी साहिर लुधियानवी का जन्म 8 मार्च 1921 में लुधियाना में हुआ। आप प्रसिद्ध शायर तथा गीतकार थे। आपकी शिक्षा लुधियाना के खालसा हाइस्कूल में हुई। लाहौर तथा मुंबई आपकी कर्मभूमि रही। तल्खियाँ’ आपका पहला कविता संग्रह है। ‘आज़ादी की राह पर’ नामक फ़िल्म के लिए आपने पहली बार गीत लिखे। 25 अक्तूबर 1980 को दिल का दौरा पड़ने से आपका निधन हो गया।

वह सुबह कभी तो आएगी Summary in Hindi

‘वह सुबह कभी तो आएगी’ में गीतकार एक अच्छी सुबह की प्रतीक्षा करते हैं। गीतकार कहते हैं, कभी वह सुबह आएगी तो इन बीती हुई काली सदियों के सिर से रात का आँचल नीचे की ओर जाएगा। तब दुःख का काला बादल पिघल जाएगा। दुःख के बदले सुख का सागर उमडेगा। आकाश खुशी से नाचेगा और धरती मधुर गीत गाएगी।

यहाँ गीतकार स्वतंत्र भारत का सपना देखते हैं।
गीतकार कहते हैं – कभी वह सुबह आएगी तो ये भूख और बेकारी के दिन बीत जाएँगे। संपत्ति और ठेकेदारी के दिन टूटेंगे। उनके स्थान पर एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी।

संसार के सारे परिश्रमी लोग खेतों से उस दिन का वेतन लेकर आयेंगे। गरीबी के अंधेरे बिलों से वे बाहर आएँगे। तब वे मूल्यहीन या विवश नहीं होते। तब दुनिया शांति और खुशहाली से सजाएँगे।

वह सुबह कभी तो आएगी Summary in Malayalam and Translation

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

” ആ പ്രഭാതം എന്നെങ്കിലും വരികയാണെങ്കിൽ’ എന്ന കവിതയിൽ കവി ഒരു നല്ല പ്രഭാതത്തിന്റെ വരവും കാത്തിരിക്കുകയാണ്.

– കവി പറയുന്നു, “ആ നല്ല പ്രഭാതം എന്നെങ്കിലും വരികയാണെങ്കിൽ കഴിഞ്ഞു. പോയ ആ കറുത്ത നാളുകളുടെ ശിരസ്സിൽ നിന്നും വസ്ത്രാഗം താഴേയ്ക്കുവീഴും. അന്ന് ദുഃഖത്തിന്റെ കാർമേഘം അലിഞ്ഞ് ഇല്ലാതാകും. ദുഃഖത്തിന്റെ സ്ഥാനത്ത് സന്തോ ഷത്തിന്റെ സമുദ്രം നിറഞ്ഞൊഴുകും. ആകാശം സന്തോഷംകൊണ്ട് നൃത്തം ചെയ്യും. ഭൂമി മധുരഗീതം ആലപിക്കും.

ഇവിടെ കവി സ്വതന്ത്രഭാരതമാണ് സ്വപ്നം കാണുന്നത്. – കവി പറയുന്നു, എന്നെങ്കിലും ആ പ്രഭാതം വന്നാൽ വിശപ്പിന്റെയും തൊഴിലില്ലാ യ്മയുടെയും ഈ ദിനങ്ങൾ കടന്നുപോകും. സമ്പത്തിന്റെയും ഏകാധിപത്യത്തിന്റെയും കാലം അവസാനിക്കും. അതിന്റെ സ്ഥാനത്ത് സുന്ദരമായ ഒരു പുതുയുഗത്തിന്റെ അടി ത്തറ ഉയർന്നുവരും.

ലോകത്തിലെ എല്ലാ അധ്വാനികളും ജോലികഴിഞ്ഞ് കൂലിയുമായി വരുന്ന ഒരു കാലം ഉണ്ടാകും. ദാരിദ്ര്യത്തിന്റെ ഇരുട്ടു നിറഞ്ഞ മാളത്തിൽ നിന്നും അവർ പുറത്തു വരും. അന്ന് അവർ വിവശരോ വിലയില്ലാത്തവരോ ആയിരിക്കുകയില്ല. അങ്ങനെ ലോകം ശാന്തിയും സമൃദ്ധിയും കൊണ്ട് അലങ്കരിക്കപ്പെടും.

 

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी

वह सुबह कभी तो आएगी शब्दार्थ Word meanings

Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Solutions Unit 5 Chapter 3 वह सुबह कभी तो आएगी 2

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता)

हाइकू (Text Book Page No. 78-81)

मेरी खोज

प्रश्न 1.
हाइकु हाइकू का मूलभाव क्या है?
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 1
उत्तर:

  1. माँ का प्यार सबसे महत्तर हैं। किसी भी हालत में माँ अपने बच्चे को नहीं छोड़ता।
  2. हमारा मन ही सुख और दुख देता है। सुख-सुविधाओं से नहीं मन की खुशी से आनंत मिलेगा।
  3. जीवन के हरएक अवस्थाओं को पहचानकर हमें जीना होगा। परिवर्तन प्रकृति का तत्व हैं।
  4. प्रकृति और मानव के बीच का संबंध अटूट हैं। जीवन प्रदान करना हर व्यक्ति या वस्तु के धर्म हैं।
  5. प्यार सबसे सुदृढ संबंध हैं। वह हमेशा कायम रहेगा।
  6. जीवन में सच्ची रस को प्राप्त करने के लिए विविध अनुभवों से गुसरना ही चाहिए। सुख-दुःख के मिश्रण है जीवन।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
प्रत्येक हाइकु की आस्वादन टिप्पणी तैयार करें।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 2
उत्तर:
1. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं।
आकाश में गूंज और आँधी होने से पक्षियों के । नीड़ नीछे गिरते हैं। शिशु पक्षि उड़ नहीं सकता। माँ बच्चों के पास ही रहती है – छोडकर जाते नहीं। जितने ही बड़ी विपत्ति पड़े, माँ अपने बच्चे को छोड़कर नहीं जाएगा। माँ का प्यार इतना बड़ा है और गहरा है। सामाजिक सच्चाई को यहाँ दिखाया गया है।

2. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। भाद्रपद महीना शोभा देने लगा। यानी बहुत अच्छा मौसम है। लेकिन विरहिणी का जीवन सूखा ही हैं। मौसम बदलने से उसके जीवन में किसी भी प्रकार के अंतर नहीं होता हैं। हमारे जीवन में प्रिय-जन न होते तो जीवन दुःखपूर्ण हो जाते हैं। मौसम कितने ही अच्छा हो, जितने ही सुखसुविधायें हो – लेकिन हम अकेले है तो सुख नहीं मिलेगा। विरह की व्यथा हमेशा दुःख ही देगा।

3. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह माने या माने मेहमान के रूप में बुढापा आयेगा। अर्थात बुढापे को निमन्त्रण (invite) करने की ज़रूरत नहीं हैं। परिवर्तन धरती की हकीकत हैं। शैशव से लेकर बुढापा तक परिवर्तन के साथ हम जीवन बिताते हैं। बुढापा किसी भी व्यक्ति को पसंद नहीं, लेकिन समय के अनुसार हर व्यक्ति बुढापे की ओर जाएगा, हमें जीवन के सभी अवस्थाओं को स्वीकार करना होगा।

4. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। वर्षा ऋतु धन्य हैं, क्योंकि पानी जीवनदायिनी हैं। खेतों में नये जीवन की कविताएँ बोनेवाले किसान के कारण वर्षा धन्य हो जाते हैं। कविता यानी भोजन हर व्यक्ति के जीवन केलिए अनिवार्य है। प्रकृति के कारण हमारा जीवन संपन्न हो रहा हैं। प्रकृति और मानव के बाच की रिश्ता इतना अटूट है। किसान लोग तन-तोड़ मेहनत करके दूसरों केलिए भोजन तैयार करते हैं। जीवन को कायम रखने केलिए पानी और भोजन अनिवार्य हैं।

5. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। बाग में फूल खिलने पर तुझे याद आती हैं। हर सुंदर वस्तु में प्रियतम की यात आती है। प्रेमी-प्रेमिका के दिल एक दूसरे की इंतज़ार में है। हर वस्तु में एक दूसरे की याद आती हैं। क्योंकि प्रेम कभी भी मुरझाता नहीं, एक-दूसरे से अलग होने पर भी वह एक दूसरे से अलग नहीं है। प्रेम की शक्ति को यहाँ दिखाते हैं।

6. श्री भागवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को प्रमुख स्थान दिलानेवाला हैं। ‘इन्द्रधनुष’ आपका हाइकू संग्रह हैं। जिनको दर्द का अहसास नहीं हुआ है, उसे आँसू का मूल्य नहीं मालूम, आँसू और ओस देखने में एक समान है। लेकिन दोनों के पीछे की यथार्थ अलग है। दुख जीवन की हकीकत है, वेदना ही हमें पवित्र बनाएगा। रोने के बाद हमें शांती मिलते हैं। सुख का आनंद को समझने के लिए दुःख महसूस करना चाहिए। अन्यथा जीवन व्यर्थ हो जाएगा।

प्रश्न 2.
हाइकू कविताओं का संकलन करें।
उत्तर:
1. यह जीवन
किस तरह बाँचूँ
कोरा कागज़।

2. मन कागज़
छोड़ा दूर गगन
बना पतंग।

3. जीवन-गाथा
लिखी आँसू की स्याही
न बाँची जाए।

4. है व्यर्थ कथा
उतरी कागज़ पे
टूटी कलम।

5. लिख दे मृत्यु
अंतिम सुनवाई
तोड़ कलम।

6. सहमे पेड़
तूफानों से कहते-
हमें छोड़ दो।

7. डालियाँ झुकीं
बहती धाराओं पे
पीने को पानी।

8. पीर पराई
बेदिल की आँख में
नही समाई।

9. नैनों का नीर
किसी को न दिखाना
पीते रहना।

10. दुःख समझे
वही जो दुःख पाए
और क्या जाने।

11. उलझे रहै
जीवन की रस्मों में
जी ही न पाए।

12. बाँधे पाश में
उलझन सर्पिणी
ईश पुकारूँ!

13. बढ़े इच्छाएँ
मन को उलझाएँ
राह न पाएँ।

14. जकड़े रहे
कर्तव्य का पिंजरा
मन बौराए।

15. क्यों उलझन
बाँधा है जब स्वयं
अपना मन।

16. कैसी ये पीर
उला- सा जीवन
बहे है नीर।

17. रोएँ-हँसाएँ
जीवन् संग खेलें
ये उलझने।

18. जब भी खोलूँ
उलझती ही जाएँ
जीवन-गाँठे।

19. हुई बेमानी
उलझनों से भरी
ये जिंदगानी।

20. जीवन-नैया
फँसी भँवर-जाल
तू दे निकाल।

21. सखियाँ बनी
शैतान. उलझनें
साथ ना छोड़ें।

22. रोएँ-रूलाएँ
चिढ़ाके बाग जाएँ
यूँ उलझाएँ।

23. बहुत हुई
अब कशमकश
छोड़ो भी बस।

24. कभी सुलझी
कभी उलझी रही
जीवन-डोर।

25. रस्मों के गाँव
उलझ गए मेरे
भावों के पाँव।

Plus Two Hindi हाइकू Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
सूचनाः निम्नलिखित हाईकू पढ़ें।
धन्य है वर्षा
खेतों में कविताएँ
बोते किसान।
हाईकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
श्री भगवतशरण अग्रवाल हिंदी के एक प्रमुख हाइकू कवि है। प्रस्तुत हाइकू में कवि प्रकृति और मानव के अटूट संबंध के बारे में कहते हैं। जीवन प्रदान करना हर व्यक्ति या वस्तु का धर्म है। वर्षा ऋतु धन्य है क्योंकि पानी जीवनदायिनि है, खेतों में नये जीवन की कविताएँ बानेवाले किसान के कारण वर्षा धन्य हो जाते है। कविता या भोजन हर व्यक्ति के जीवन केलिए आवश्यक है।

प्रश्न 2.
सूचनाः हाईकू पढ़ें।
जब भी कोई
फूल खिला बाग में
तूं याद आया।
हाइकू का भावार्थ लिखे।
उत्तर:
प्रसिद्ध हाइकू कवि श्री भगवतचरण अग्रवाल की एक प्रसिद्ध हाइकू है यह।
बाग में फूल खिलने पर तुझे याद आती है। हर सुंदर वस्तु में प्रियतम की याद आती है, यानि प्रेमी-प्रेमिका के दिल एक दूसरे की इंतज़ार में है, हर वस्तु में एक दूसरे की याद आती है क्योंकि प्रेम कभी भी मुरझाता नहीं, एक-दूसरे से अलग होने पर भी वह एक दूसरे से अलग – नहीं है। प्रेम की शक्ति असीम हैं।

प्रश्न 3.
यह हाइकू पढ़ें।
भादों सरर्स
पर विरहिणी का
सूखा आँगन।
हाइकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवतशरण अग्रवाल का काफी योगदान है। उनकी हाइकू संग्ह का नाम है ‘इन्द्रधनुष”। प्रस्तुत हाइकू इससे ली गयी है।

विरहिणी की पीड़ा का वर्णन करते हुए कवि कहते हैं सुख भरे भाद्रपद महीने में भी विरहिणी का मन अपने प्रिय की चिंता से रूखा-सूखा रहता है। सुख-सुविधाएँ जितनी भी हो, विरहिणी के लिए सब निरर्थक है। अपने प्रिय के बिना वह खुश नहीं रह सकती। प्रिय के बिना उसके लिए सब कुछ निरर्थक एवं अधूरा लगता है। कम शब्दों में बड़ी बातें कहने की क्षमता प्रत्येक हाइकू में है। हाइकू साहित्य की यही सबसे बड़ी विशेषता है। प्रस्तुत हाइकू इसका सशक्त उदाहरण है।

प्रश्न 4.
सूचनाः निम्नलिखित हाईकू पढ़ें।
मान न मान
मैं तेरा मेहमान
बने बूढापा
हाईकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हिन्दी साहित्य जगत में हाइकू को अगल पहचान दिलाने में श्रेष्ठ है श्री भगवत शरण अग्रवाल। प्रस्तुत हाइकू उनका काव्य संग्रह “इंद्रधनुष” से लिया गया है। हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता है। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हरेक को उसे स्वीकारना पडेगा। प्रत्येक हाइकू अपने में पूर्ण है। यही हाइकू की विशेषता है।

प्रश्न 5.
सूचना : निम्नलिखित हाइकू पढ़ें।
धन्य है वर्षा
खेतों में कवितायें
बोते किसान
हाइकू का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
श्री भगवतशरण अग्रवाल हिंदी काव्य जगत में हाइको को प्रमुख स्थान दिलानेवाला है। इन्द्रधनुष आपका हाइकू संग्रह है।

इस हाइकू में प्रकृति और मनुष्य का उपजाऊ रूप दिखाने का कोशिश किया है। वर्षा ऋतु धन्य है, क्योंकि पानी जीवनदायिनी है। खेतों में तनतोड़ मेहनत करके नये जीवन के लिए खेती करनेवाले किसान भी धन्य हैं। कविता यहाँ भोजन के पर्यायवादी शब्द बनते हैं। कवि कविता के ज़रिये नये नये विचार प्रकट करते हैं। किसान खेती करके वर्षा को भी धन्य बना देता है।

प्रश्न 6.
सूचनाः निम्नलिखित हाइकू पढ़ें।
मान न मान
मैं तेरा मेहमान
बने बुढ़ापा
हाइकू कविता का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हाइकू एक विशेष काव्य-शैली है। जापानी कविता से प्रेरणा पाकर ही हिन्दी में भी हाइकू का उदय हुआ। हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवत शरण अग्रवाल का विशेष योगदान रहा है। ‘इन्द्रधनुष’ उनका प्रसिद्ध हाइकू संग्रह है। बुढ़ापे के बारे में कवि कहते हैं – हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता है। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हर व्यक्ति को उसे मानना ही पड़ता है। अर्थात् एक न एक दिन हर व्यक्ति बूढ़ा हो जाएगा। बुढापे के बारे में कवि ने यहाँ कहा गया है। प्रत्येक हाइकू अपने आप में पूर्ण एवं गरिमामय है।

प्रश्न 7.
सूचनाः निम्नलिखित हाइकू पढ़ें।
जब भी कोई
फूल खिला बाग में
तू याद आया।
हाइकू कविता की विशेषताओं का परिचय देते हुए भावार्थ लिखें।
उत्तर:
हाइकू एक विशेष काव्य-शैली है। जापानी कविता से। प्रेरणा पाकर ही हिन्दी में भी हाइकू का उदय हुआ। हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवत शरण अग्रवाल का विशेष योगदान रहा है। ‘इन्द्रधनुष’ उनका प्रसिद्ध हाइकू संग्रह है।

प्रेम की महिमा का गायन करते हुए कवि कहते हैं – प्रेम कभी नहीं मुरझाता है। प्रेमी-प्रेमिका के दिल में हमेशा यादें बनी रहती है। प्रत्येक फूल के खिलने में प्रेमी को प्रेमिका की याद आती है। प्रेम की गरिमा यहाँ व्यक्त की गयी है। प्रत्येक हाइकू अपने आप में पूर्ण एवं गारिमामय है।

हाइकू Profile

भगवतशरण अग्रवाल का जन्म 1930 को उत्तरप्रदेश के बरेली में हुआ। वे गुजरात विश्वविद्यालय के निदेशक थे। हिंदी काव्य-जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में उनका काफी योगदान रहा। अपनी साहित्य सेवा के लिए वे अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। इंद्रधनुष’ उनका प्रमुख हाइकू संग्रह है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 3
– भगवतशरण अग्रवाल
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 4

हाइकू Summary in Malayalam

हाइकू Summary in Malayalam 1

हाइकू Glossary

हाइकू – 1

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 5
प्रकृति के प्रकोपों के कारण कभी पेडों से नीड़ नीचे गिरते हैं, परंतु नीचे गिरे बच्चों को छोड़कर उनकी माँ भाग नहीं जाती। माँ की ममता अतुलनीय है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 6

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 7

हाइकू – 2

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 8
विरहिणी की जीवनगाथा आहों और पीड़ाओं की है। पति के दूर होने से सूख भरे मौसमों में भी उसका मन हमेशा सूखा – सूखा रहता है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 9

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 10

हाइकू – 3

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 11
हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता हैं। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हरेक को उसे स्वीकारना पड़ेगा।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 12

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 13

हाइकू – 4

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 14
वर्षा जीवनदाता है, तन-तोड़ मेहनत करके खेतों में नये जीवन की कविताएँ खिलाने या बोनेवाले किसान के कारण वह धन्य हो जाती है।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 15

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 16

हाइकू – 5

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 17
प्रेम कभी नहीं मुरझाता है। प्रेमी-प्रेमिका के दिल में हमेशा यादें हरा रहती हैं।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 18

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 19

हाइकू – 6

शब्दार्थ
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 20
वेदना मन को पवित्र बनाती है, वेदना के कारण खुशी और प्यार का महत्व बनता है, जो इसे पहचानते नहीं, उसके सामने आँसू का कोई मूल्य नहीं होता ।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 21

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 4 हाइकू (कविता) 22

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं (कविता)

सपने का भी हक नहीं (Text Book Page No. 65-67)

मेरी खोज

प्रश्न 1.
मगर नींद के टूटने के पूर्व ही नोटीस बैंक की आ धमकी सपने में। कवि यहाँ किस सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं?
उत्तर:
गरीब लोग बैंक से कर्ज लेते हैं और उसका भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। अंत में बैंक से आनेवाली नोटीस की भीषणता में जीने के लिए वे विवश हो जाते हैं। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
हिंदीतर प्रदेशों के लेखकों में डॉ.जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ है ‘मुक्तधारा’, ‘उलझन आदि। “सपने का भी हक नहीं’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें साधारण से साधारण एक मज़दूरिन की अवस्था का चित्रण है।

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन सपने में लीन हो जाती है। सपने में अब वह एक विशाल घर में सो रही है। दो मंज़िलवाली अपने घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक, रसोई और पूजा के लिए भी अलग-अलग कमरे हैं। नये घर की छत काँक्रीट की है, दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है। ग्राइन्टर, फ्रिड्ज और मैक्रोवेव सभी से युक्त रसोई अत्यंत शानदार लग रहा है। मगर अचानक सपने में ही एक डरावनी सच्चाई उसके आगे बैंक के नोटीस के रूप में आ धमती है। इसके साथ साथ असकी सारे सपने छिन्न-भिन्न हो जाती है और जाग जाती है।

प्रस्तुत कविता में डॉ.जे बाबू ने एक कड़वी सच्चाई को , यहाँ प्रस्तुत किया है। कवि कह रहे हैं आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सने का भी हक नहीं है, सपने में भी जीवन की भीषणता और उसके ऊपर लादे कर्ज से वे मुक्त नहीं है। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

Plus Two Hindi सपने का भी हक नहीं (कविता) Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
“मगर नींद के खुलने के पूर्व ही नोटिस बैंक की आ धमकी सपने में।” – इस सपने के बारे में युवती.अपनी सहेली को एक पत्र लिखती है। वह पत्र तैयार करें।

  • झोंपड़ी में रहकर महल का सपना देखने वाली मज़दूरिन ।
  • सामाजिक सच्चाई का कठोर यथार्थ।
  • सपना देखना भी डरावना बन जाना।

उत्तर:

इलाहाबाद
18.03.2016

प्यारी सीमा,
ईश्वर की असीम अनुकंपा से मैं यहां खुश हूँ। मेरा विश्वास है तुम भी वहाँ खूश होगी। तुम्हें एक पत्र लिखने के बारे में कई दिनों से मैं सोच रहा हूँ। लेकिन अभी समय मिला है।

एक खास बात बताने के लिए ही मैं यह पग लिख रहा हूँ। हम गरीबों की हालत कभी भी युधारेगी नहीं। कितनी सालों से यह झोंपड़ी में रह रही हूँ। कई महलों में मज़दूरिन बनकर काम कर रही भी हूँ। शायद इसीलिए ही आज मैं ने ऐसा एक सपना देखा जिसमें मैं नया घर बनवा रही हूँ। लेकिन क्या करूँ मित्र, मकान तो पूरा नहीं हो गया और सपने में ही बैंक से नोटिस आ गयी। हम गरीबों का हाल सुधरेगा ही नहीं। हमें सपने देखने का भी हक नहीं है।

मित्र, अपनी लाचारी के कारण ही मैं यह पत्र लिख रही हूँ। इतना लिखकर मैं यह पत्र समाप्त कर रही हूँ। घरवालों से मेरा प्यार और प्रणाम कहना। जवाबी पत्र की प्रतीक्षा में……..

तुम्हारी मित्र,
राधा
(हस्ताक्षर)

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“इक कमरेवाली झोपड़ी में
बच्चों के सो जाने पर
मैं अपनी मन-दीवार पर
अपना विस्तृत घर खींचने लगी।
खाने-पीने-सोने के
अलग-अलग कमरे,
रसोई यदि बूठक के
निकट रखती तो
पूजा का कमरा कहाँ होगा?”

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता का अंश है?
(मातृभूमि, सपने का भी हक नहीं, आदमी का चेहरा)
उत्तरः
सपने का भी हक नहीं।

प्रश्न 2.
स्त्री अपना विस्तृत घर कहाँ खींचने लगी?
उत्तरः
स्त्री के मन दीवार पर |

प्रश्न 3.
स्त्री अपने घर में कौन-कौन से कमरे बनवाना चाहती है?
उत्तरः
स्त्री अपने घर में खाने-पीने-सोने के कमरे, रसोई और पूजा का कमरा बनवाना चाहती है।

प्रश्न 4.
हिंदीतर भाषी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवितांश की असावादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिंदीतर भाषी कवियों में डॉ जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘सपने का भी हक नही’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें एक साधारण मजदूरिन की अवस्था का सच्चा चित्रण है।

एक करमेवाली झोंपडी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन नए घर की सपने में लीन हो जाती है। दो मंजिलेंवाली उसकी घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक, रसोई और पूजा के लिए भी अलग-अलग कमरे हैं। गरीब मजदूरिन की सपने के माध्यम से एक कड़वी सामाजिक सच्चाई की प्रस्तुति यहाँ हुई है। कवि यह बताना चाहते हैं कि आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सपने का भी हक नहीं है। जीवन की भीषणता सपने में भी उसके आगे साकार होकर उठी है। वे चैन से सो भी नहीं सकते और सपना भी नहीं देख सकते हैं। यही सामाजिक सच्चाई की ओर यह कविता इशारा करती है।

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
काँक्रीट की छत के
नीचे पीले रंग की
दीवारों के मध्य में
खिड़की-दरवाज़े सब रख दिए।
संगमरमर की चमक
ज़मीन पर; उस चमक पर
चमकती मेज़-कुरसियाँ
टी.वी, होम थियेटर बैठक में भाते।

प्रश्न 5.
यह कविता किसकी है?
(कुँवर नारायण, डॉ.जे.बाबु, मैथिलीशरण गुप्त)
उत्तरः
डॉ.जे.बाबु

प्रश्न 6.
खिड़की-दरवाज़े कहाँ है?
उत्तरः
खिड़की-दरवाज़े दीवारों के मध्य में है।

प्रश्न 7.
दीवारों का रंग क्या है?
उत्तरः
दीवारों का रंग पीला है।

प्रश्न 8.
ज़मीन पर किसकी चमक है?
उत्तरः
ज़मीन पर संगमरमर की चमक है।

प्रश्न 9.
बैठक की शोभा बढ़ानेवाली चीजें क्या-क्या हैं?
उत्तरः
मेज़-कुरसी, टी.वी, होम थियेटर आदि बैठक की शोभा बढ़ानेवाली चीजें हैं।

प्रश्न 10.
कवितांश की अस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिंदीतर भाषी कवियों में डॉ जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘सपने का भी हक नही’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें एक साधारण मज़दूरिन की अवस्था का सच्चा चित्रण है।

सपने में बनाई घर की छत काँक्रीट की है। घर के दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है। चमकती संगमरमर से बनी ज़मीन के ऊपर घर की शोभा और शान बढ़ाने के लिए मेज़, कुरसी, होम थियेटर आदि सब कुछ है। आधुनिक सभी सुविधाओं से युक्त घर की सपना वह देखती है।

गरीब मज़दूरिन की सपने के माध्यम से एक कड़वी सामाजिक सच्चाई की प्रस्तुति यहाँ हुई है। कवि यह बताना चाहते हैं कि आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सपने का भी हक नहीं है। जीवन की भीषणता सपने में भी उसके आगे साकार हो उठे हैं। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते हैं। यही सामाजिक सच्चाई की ओर यह कविता इशारा करती है।

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
क्रांति के लिए उठे कदम
क्रांति के लिए जले मशाल।
भूख के विरुद्ध भात के लिए
रात के विरुद्ध प्रात के लिए
जुल्म के खिलाफ जीत के लिए
हम लड़ेंगे हमने ली कसम।

प्रश्न 11.
कवि ने किसके के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है?
उत्तरः
क्रांति के लिए

प्रश्न 12.
‘शपथ’ शब्द का समानार्थी शब्द कविता से ढूँढें ।
उत्तरः
कसम

प्रश्न 13.
‘हम लड़ेंगे, हमने ली कसम’ – कसम क्या है?
उत्तरः
जुल्म के खिलाफ जीत केलिए लड़ने का कसम हमने लिया है।

प्रश्न 14.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
यह हिंदी की एक विख्यात कविता है। इसमें गरीब लोगों की दीन अवस्था का सुन्दर चित्रण हुआ है। कवि कहते हैं – क्रांति के लिए हमें कदम उठाना चाहिए। दूसरों की भूख मिटाने के लिए हमें कर्मनिरत रहना है। जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए हमें ज़रूर शक्तिशाली बनना है। यह एक सुंदर समकालीन कविता है। समकालीन कविताओं में कवि का दृष्टिकोण अत्यंत सुन्दर मात्रा में झलकती है। कविता की भाषा सरल, सरस और जोशीली है।

सपने का भी हक नहीं Profile

हिंदीतर प्रदेश के हिंदी साहित्यकारों में प्रमुख है डॉ जे बाबू । उनका जन्म केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में 1952 को हुआ। मुक्तधारा, उलझन और उलाहना उनकी कविताओं का संकलन है। बिपाशा अखिल भारतीय कहानी पुरस्कार और हिंदीतर भाषी लेखक पुरस्कार से वे सम्मानित हैं।
सपने का भी हक नहीं Profile 1
– डॉ जे बाबू
सपने का भी हक नहीं Profile 2

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Hindi

हिंदीतर प्रदेशों के लेखकों में डॉ.जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। “सपने का भी हक नहीं’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें साधारण से साधारण एक मज़दूरिन की अवस्था का चित्रण है।

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहकर बडी महत्व की सपना देखनेवाली मज़दूरिन का चित्र अत्यंत मार्मिक है। सपने में भी उसके आगे बैंक की नोटीस दिखाई दे रही है। कवि कह रहे हैं…..

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन अपने बच्चों के सो जाने के बाद नींद में पड़ जाती है और सपने में लीन हो जाती है। सपने में अब वह एक विशाल घर में सो रही है। दो मंज़िलवाली अपने घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक और रसोई के लिए भी अलगअलग कमरे हैं। वह सोच रही है कि पूजा की कमरा कहाँ रखना है?

पूजा के लिए भगवान को बिठाने की कमया ऊपर की मंजिल में रखना वह चाहती है ताकि उसकी सारी समस्याएँ दूर हो सके। नये घर की छत काँक्रीट की है, दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है।

ज़मीन तो चमकती संगमरमर का है और पूरा घर मेज़, कुरसी, टी.वी, होम-थियेटर जैसे सभी आधुनिक सुविधाओं से भरा है। रसोई तो अत्यंत नवीन है। ग्रानाइटर, फ्रिड्ज और मैक्रोवेव सभी से युक्त रसोई अत्यंत शानदार लग रहा है। सपने के दुमज़िले घर में रहनेवाली मज़दूरिन धूप के फैलने तक सो रही है। मगर अचानक सपने में ही एक डरावनी सच्चाई उसके आगे बैंक के नोटीस के रूप

में आ धमती है। इसके साथ साथ असकी सारे सपने छित्र-भित्र हो जाती है और जाग जाती है।

प्रस्तुत कविता में डॉ.जे बाबू ने एक कड़वी सच्चाई को यहाँ प्रस्तुत किया है। कवि कह रहे हैं आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सने का भी हक नहीं है, सपने में भी जीवन की भीषणता और उसके ऊपर लादे कर्ज से वे मुक्त नहीं है। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते।

गरीब लोग बैंक से कर्ज लेते हैं और उसका भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। अंत में बैंक से आनेवाली नोटीस की भीषणता में जीने के लिए वे विवश हो जाते हैं। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam 1

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam 2

सपने का भी हक नहीं Glossary

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